नोटिस बोर्ड

इंडस बेसिन पर रिपोर्ट कर फेलोशिप पाने का है मौका

Source: 
IWMI

आवेदन की अन्तिम तिथि - 31 मई, 2018
संस्था - इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (IWMI)
इन्फॉर्मिंग चेंज इन द इंडस बेसिन (आईसीआईबी) मीडिया फेलोशिप - राउंड 2
फेलोशिप राशि - $1500
फेलोशिप अवधि - तीन माह

आईडब्ल्यूएमआईआईडब्ल्यूएमआईपर्यावरण और विकास से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहा इंडस बेसिन पर पत्रकारों के लिये पर रिपोर्ट करने का मौका है

पृष्ठभूमि

पानी पूरे विश्व में इन दिनों एक उच्च पॉलिसी एजेंडा है। पानी से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेम्बली ने 2018-2028 के काल को द इंटरनेशनल डिकेड फॉर एक्शन : वाटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट घोषित किया है। इस घोषणा के पीछे का उद्देश्य पानी का एकीकृत प्रबन्धन है जिसे हर स्तर पर सभी के सहयोग और सहभागिता से पूरा किया जा सकता है। इसी तरह जल संसाधन और पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ रहे दबाव को कम करके पानी से जुड़ी जरूरतों और लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है।

जैवविविधता से जुड़े मुद्दों पर लेख लिखें और पाएँ इनाम

Source: 
icimod.org

आईसीमोडआईसीमोडइंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीमोड) (International Center for Integrated Mountain Development - ICIMOD) जैवविविधता से जुड़े मुद्दों के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से हर वर्ष 22 मई को अन्तरराष्ट्रीय जैवविविधता दिवस मनाता है। इस वर्ष का थीम है सेलिब्रेटिंग 25 इयर्स ऑफ एक्शन फॉर बायोडायवर्सिटी (Celebrating 25 Years of Action for Biodiversity)।

इस वर्ष अन्तरराष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के उपलक्ष्य में आईसीमोड छात्रों और युवा शोधकर्ताओं के लिये एक लेखन प्रतियोगिता (writing competition) का आयोजन करने जा रहा है। इस प्रतियोगिता में आईसीमोड के क्षेत्रिय सदस्य देशों (regional member countries)- अफगानिस्तान, बांग्लादेश, चीन, भारत, नेपाल और पाकिस्तान के छात्र और युवा शोधकर्ता ही भाग ले सकते हैं।

सुन्दरबन पर्यावरणीय रिपोर्टिंग के लिये ग्रांट

Source: 
द थर्ड पोल

आवेदन की अन्तिम तिथि - 28 मई 2018
संस्था: The Third Pole

The Third PoleThe Third Poleपर्यावरण से जुड़े मुद्दों के प्रचार-प्रसार और मीडिया रिपोर्टिंग की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘द थर्ड पोल’ पत्रकारों को अनुदान मुहैया करा रहा है। इस अनुदान का फोकस सुन्दरबन पर है। अनुदान पाने की इच्छा रखने वाले पत्रकारों को सुन्दरबन में हो रहे मौसमी और पर्यावरणीय बदलाव से जुड़े मुद्दों पर सारगर्भित स्टोरीज करनी होगी जिसका फोकस वहाँ निवास करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों, महिलाओं और उनकी समस्याओं पर भी होना चाहिए।

अर्बन लेंस फिल्म फेस्टिवल, 2018 - आवेदन आमंत्रण


अर्बन लेंसअर्बन लेंस शहर हमेशा से ही सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक मंथन से गुजरते रहे हैं। इन शहरी अनुभवों को सिनेमा ने न केवल दर्शाया है बल्कि इन्हें समझने के लिये भी हमेशा जगह दी है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट्स (IIHS) द्वारा आयोजित अर्बन लेंस फिल्म फेस्टिवल शहरों से जुड़ी ऐसी विभिन्न कहानियों को सिनेमा के माध्यम से सामने रखने के लिये एक मंच है। इस फिल्म फेस्टिवल का पाँचवाँ संस्करण 20 से 23 सितम्बर, 2018 को बंगलुरु में और 16 से 18 नवम्बर, 2018 को नई दिल्ली में गेटे इंस्टिट्यूट (Goethe Institut) / मैक्समूलर भवन में होगा। साथ में कुछ चुनी हुई फिल्मों की स्क्रीनिंग गोदरेज इण्डिया कल्चर लैब के सहयोग से मुम्बई में की जाएगी।

फेस्टिवल के लिये कोई भी अपनी फिल्म हमें भेज सकता है। यदि आपकी फिल्म शहर की कल्पना या शहरी मुद्दों से सम्बन्धित है तो हमें अवश्य भेजें। फिल्म किसी भी शैली की हो सकती है – एनिमेशन, नॉन-फिक्शन, शॉर्ट फिक्शन/फीचर फिक्शन, एक्सपेरिमेंटल या स्टुडेंट फिल्म।

इस खबर के स्रोत का लिंक: 

  

सेव गंगा, गिरिराज, ट्रुथ एंड नाॅन वायलेंस पर विमर्श


चम्पारण तथा खेड़ा सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के मौके पर बीती जनवरी-फरवरी के दौरान वह महाराष्ट्र में गंगा, गिरिराज, सत्य और अहिंसा यात्रा का आयोजन कर चुकी हैं। पानी हवा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंगा, हिमालय तथा गोदावरी, कृष्णा, कावेरी तथा पश्चिम घाटों के संरक्षण को वे ज़रूरी मानती हैं। वह चेताती हैं कि भारत की महान नदियों को मरते देख यदि हम चुप बैठे, तो प्रकृति माँ हमें माफ़ नहीं करेगी। भावी पीढ़ी हमारी भर्त्सना करेगी, सो अलग। अतः आवश्यक है कि हम स्वयं को आधुनिक धृतराष्ट्र न बनने दें। अवसर : दाण्डी मार्च वर्षगाँठ
तिथि : 12 मार्च, 2018
स्थान : गाँधी दर्शन, राजघाट, नई दिल्ली
समय : सुबह 10.30 बजे से दोपहर बाद 4.30 बजे तक
आयोजक : सेव गंगा मूवमेंट (पुणे), गाँधी दर्शन एवं स्मृति समिति, नई दिल्ली तथा कस्तूरबा गाँधी नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट एवं अन्य।


गाँधी दर्शन के आलोक में जल सत्याग्रह


भारत की आज़ादी के लिए जन-जनार्दन को एकजुट करने और ब्रिटिश सत्ता को जनता की सत्ता की ताक़त बताने के लिए महात्मा गाँधी ने कभी दाण्डी मार्च किया था।

विकास संवाद द्वारा मीडिया फेलोशि‍प- 2018 हेतु आवेदन आमंत्रित

Source: 
विकास संवाद

आवेदन पत्र प्राप्त होने की अंतिम तिथि- 23 मार्च, 2018 है।


विकास संवादविकास संवाद जैसा कि आपको विदित ही है कि विकास संवाद मीडिया एडवोकेसी के लिये काम करने वाली संस्था है तथा पिछले 13 वर्षों से प्रतिवर्ष हमारे द्वारा पत्रकार साथियों को कुछ चुने हुए विषयों पर फेलोशिप प्रदान की जाती रही है।

विकास संवाद द्वारा इस वर्ष भी वंचित समूह और बाल अधिकारों के लिये चौदहवीं मीडि‍या लेखन और शोध फेलोशि‍प की घोषणा कर दी गई है। इस फेलोशिप का मकसद मुद्दों के प्रति समझ बढ़ाना,जमीनी स्थितियों को सीधे देखना, शोध आधारि‍त नजरि‍या व्‍यापक करना और मुख्यधारा के मीडिया में सामाजिक मुद्दों के दायरे को वि‍स्‍तार देना है। यह फेलोशिप फील्ड रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने और पत्रकारीय दृष्टिकोण के साथ सम्बन्धित विषय पर शोध कार्य के लिये मदद करती है।

पर्यावरणीय समस्याओं के निदान का हथियार बनेगा एनवायरनमेंट जस्टिस पैरालीगल्स

4 जनवरी 2018

पर्यावरणीय न्याय


दुनिया का एक बड़ा हिस्सा भले ही वह आज आर्थिक तौर पर कितना ही विकसित क्यों न हो, गम्भीर पर्यावरणीय संकट से ग्रस्त है। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, खनन और औद्योगिक विकास जैसी परियोजनाओं ने समुदायों के पड़ोस में रहने वालों की आर्थिक, सामाजिक और भौतिक सेहत को बिगाड़कर रख दिया है। पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और शासन के लिये बनाए गए मजबूत राष्ट्रीय और क्षेत्रीय कानून व संस्थान कागजों में ही रह गए। सरकारों और निगमों द्वारा कानून का पालन नहीं किये जाने का सामुदायिक आजीविका, स्वास्थ्य, भूमि तक पहुँच और जीवनस्तर पर गहरा प्रभाव पड़ा।

एक मेला परिंदों के नाम


तारीख - 09 जनवरी 2018,
स्थान - शेखा झील, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
आयोजक - हरीतिमा पर्यावरण सुरक्षा समिति, अलीगढ़


सालिम अली की संगत के एक मौके ने अलीगढ़ के रहने वाले सुबोधनंदन शर्मा की जिन्दगी का रास्ता बदल दिया। श्री सुबोधनंदन शर्मा, आज आजाद परिंदों को देख खुश होते हैं; कैद परिंदों को देख उन्हें आजाद कराने की जुगत में लग जाते हैं। बीमार परिंदा, जब तक अच्छा न हो जाये; सुबोध जी को चैन नहीं आता। परिंदों को पीने के लिये साफ पानी मिले। परिदों को खाने के लिये बिना उर्वरक और कीटनाशक वाले अनाज मिले। परिंदों को रहने के लिये सुरक्षित दरख्त... सुरक्षित घोसला मिले। पक्षी बन उड़ती फिरूँ मैं मस्त गगन में,
आज मैं आजाद हूँ दुनिया के चमन में...

आसमान में उड़ते परिंदों को देखकर हसरत जयपुरी ने फिल्म चोरी-चोरी के लिये यह गीत लिखा। लता मंगेशकर की आवाज, शंकर जयकिशन के संगीत तथा अनंत ठाकुर के निर्देशन ने इस गीत को लोगों के दिल में बैठा दिया। परिंदों को देखकर ऐसी अनेक कवि कल्पनाएँ हैं; ''पिय सों कह्ये संदेसड़ा, हे भौंरा, हे काग्..'' - मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा पद्मावत की नायिका नागमती से कहे इन शब्दों से लेकर हसरत जयपुरी के एक और गीत ''पंख होते तो उड़ आती रे, रसिया ओ जालिमा..'' (फिल्म सेहरा) तक। परिंदों को देखकर आसमान में उड़ने के ख्याल ने ही कभी अमेरिका के राइट बन्धुओं से पहले हवाई जहाज का निर्माण कराया।

भूजल पर प्रशिक्षण कार्यक्रम (ACWADAM Groundwater Training Programme)


ACWADAM’s certificate course on - Training and Facilitation in Hydrology to Enhance Civil Society's Capabilities in Watershed and Ground Management

तिथि : 15 जनवरी से 31 जनवरी 2018

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‘एडवांस सेंटर फॉर वाटर रिसोर्सिस डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट (ACWADAM)’ एक नॉन प्रॉफिट संस्था है जो जमीनी अनुप्रयोगों, भूमिगत जल स्रोत प्रबंधनों पर कार्य कर रही है। ACWADAM ने भूजल प्रबंधन में सिविल सोसायटी क्षमताओं, वाटरशेड प्रबंधन को मजबूत करने के प्रयास को महत्त्व दिया है।

ACWADAM, सिविल सोसायटी संगठनों, गैर सरकारी संगठनों व प्रोफेशनल्स के लिये 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 जनवरी से 31 जनवरी 2018 के मध्य पुणे में शुरू कर रहा है जो ‘बुनियादी जल विज्ञान या भूजल विज्ञान प्रबंधन’ पर होगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य क्षेत्र में अकेले-अकेले काम करना व क्षमता निर्माण नहीं है बल्कि ACWADAM के साथ भागीदारी कर अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरुक कर व संगठनों को सुविधा प्रदान कराकर मिलकर काम करना है।

वैकेंसी - कम्युनिकेशन ऑफिसर (Vacancy - Communication Officer)

Source: 
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)

पद - कम्युनिकेशन ऑफिसर
स्थान - बंगलुरु़
संस्थान - अर्घ्यम
आवेदन की अन्तिम तिथि - 10 नवम्बर 2017

संगठन के बारे में


अर्घ्यम एक भारतीय जन कल्याण संगठन है। इसकी स्थापना सन 2001 में रोहिणी नीलेकणी ने निजी दान से की थी। संगठन की शुरुआत ‘सबको साफ पानी हमेशा’ के उद्देश्य के साथ हुई थी।

अर्घ्यम का मुख्य फोकस देश की सबसे बड़ी समस्या सभी को पीने के लिये साफ पानी मुहैया कराने व स्वच्छता पर है। अर्घ्यम ग्रांट व राष्ट्रीय, राज्यीय व स्थानीय सरकारों, सिविल सोसाइटीज और अकादमिक संस्थानों के साथ मिलकर 20 राज्यों में काम कर रहा है और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर इसको पहचान मिल चुकी है। संगठन नए प्रयोगों व मूल्यों के लिये काफी लोकप्रिय है।