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कृषि विज्ञान में भी बेहतर करियर

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राष्ट्रीय सहारा, 30 अप्रैल, 2018

वर्तमान दौर में जबकि शिक्षा के क्षेत्र में तरह-तरह की सम्भावनाएँ सजीव हो रही हैं तो कृषि विज्ञान भी करियर के क्षेत्र में मील का पत्थर बन सकता है। सरकार भी इस समय कृषि विज्ञान की तरफ ज्यादा मुखातिब है। इसी के मद्देनजर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. अखौरी वैशम्पायन से हमारे संवाददाता सोहनलाल ने विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत है उसी के अंश


प्रो. अखौरी वैशम्पायनप्रो. अखौरी वैशम्पायनवर्तमान परिवेश में शिक्षा को रोजगार परक बनाने के लिये क्या किया जाना चाहिए?

स्टूडेंट्स रेडी प्रोग्राम के तहत कोर्सेस भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद द्वारा बनाये जाते हैं जिसे बीएचयू विद्वत परिषद द्वारा अनुमोदित कराकर कार्यकारिणी परिषद द्वारा स्वीकृत कराकर लागू किया जाता है। यह पाठ्यक्रम (कृषि) रोजगारपरक दृष्टि से भारत के सभी कृषि विश्वविद्यालयों हेतु चलाये जाते हैं।

इन पाठ्यक्रमों में कृषि के विभिन्न आयामों व प्रायोगिक विधाओं के साथ-साथ रोजगार परक उन सभी विषयों को सम्मिलित किया जाता है जिनमें वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों तथा किसानों के समन्वित विचार-विमर्श से हमारे विद्यार्थियों को प्रायोगिक अनुभवों की शृंखला तैयार करायी जाती है। चाहे वह गेहूँ, जौ, मक्का, दलहन, तिलहन, फल-फूल, सब्जी की उन्नत पैदावार से सम्बन्धित हो या इन पर लगने वाले रोगों व कीटों की रोकथाम से सम्बन्धित हो। चूँकि इन सारी प्रक्रियाओं में हमारे विद्यार्थी विभिन्न समूहों में हमारे वैज्ञानिकों, अध्यापकों व किसानों के साथ रहते हैं। अतः उनकी योग्यता में प्रचुर बढ़त होती रहती है।

यहाँ से उपाधि प्राप्त करने के पश्चात या तो हमारे विद्यार्थी अखिल भारतीय कृषि वैज्ञानिक परीक्षा में उत्तीर्ण होकर वैज्ञानिक के रूप में नियुक्त होते हैं अथवा विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में प्राध्यापक बनते हैं। साथ ही हमारे कई विद्यार्थी संघ लोक सेवा आयोग एवं विभिन्न प्रदेशों के प्रदेश लोक सेवा आयोग के अन्तर्गत कृषि अधिकारी के रूप में चुने जाते हैं। बहुत सारे विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिये शोध परियोजनाओं के साथ विदेश के विश्वविद्यालयों में बुलाये जाते हैं।

विद्यार्थी की मेहनत जरूरी है या संलग्नता?

विद्यार्थी को अखिल भारतीय इंट्रेंस टेस्ट के द्वारा चयनित किया जाता है। इस तरह देश के कोने-कोने से मेधावी विद्यार्थी को ही प्रवेश दिया जाता है। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान की पढ़ाई में यह विशेष ध्यान दिया जाता है कि सिर्फ पाठ्यक्रम ही नहीं पूरी कराई जाय, बल्कि विद्यार्थियों को मेहनत व संलग्नता का पूरा प्रशिक्षण दिया जाय, ताकि उच्च चरित्र के साथ एक निश्चित ध्येय बनाते हुए परिश्रम करें। इस तरह से संलग्नता तथा परिश्रम दोनों ही आवश्यक है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये परीक्षार्थियों को निश्चित सफलता का मार्ग बताएँ।

विद्यार्थियों को विषय का सम्पूर्ण ज्ञान आवश्यक है ही, जो बाजार में बिकने वाली कुंजियों से प्राप्त नहीं हो सकता। इसके लिये कोर्स में निर्धारित पुस्तकों को विद्यार्थी अवश्य पढ़ें तथा पुस्तकालयों व इंटरनेट की सहायता से इसमें प्रतिदिन होने वाली नई सूचनाओं से स्वयं को अपडेट करते रहे। इसके अतिरिक्त सामान्य ज्ञान तथा सामान्य विज्ञान की जानकारी अति आवश्यक है, जिससे प्रतिदिन अंग्रेजी व हिन्दी के अच्छे अखबारों के द्वारा देश-प्रदेश व दुनिया में होने वाले बदलाव का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही रेडियो व टेलीविजन पर विभिन्न विषयों पर होने वाली परिचर्चा के माध्यम से ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

स्मार्ट एजुकेशन का अर्थ आप के नजर में क्या है?

स्मार्ट एजुकेशन मूलतः कम्प्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल आदि पर आधारित होता है, जिसका उपयोग कम समय में ज्ञान की बातों को अधिक परिमाण में एकत्रित करना तथा दूसरों तक पहुँचाना सुलभ होता है, पर इससे परिश्रम के बिना ज्ञान को बढ़ाया नहीं जा सकता। अतः स्मार्ट एजुकेशन को एक पूरक के रूप में अपनाया जा सकता है न कि ज्ञान प्राप्त करने के लिये मूल यंत्र के रूप में।

ऐसे विद्यार्थी जो तमाम प्रयासों के बावजूद फेल हो जाते हैं उनका मार्गदर्शन आप कैसे करेंगे?

ऐसे विद्यार्थी जो तमाम प्रयासों के बावजूद फेल हो जाते हैं, यह इंगित करते हैं कि उसे एक ऐसा पाठ्यक्रम दिया गया है जिसमें उसकी रुचि नहीं रही है ऐसे विद्यार्थी को बड़े प्यार से मनोवैज्ञानिक तरीके से अनुभवी शिक्षकों के द्वारा सही मार्गदर्शन कराना होगा। कई विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर होते हैं लेकिन खेलकूद व लेखन आदि में बेहतर होते हैं। विद्यार्थी के इन गुणों का बखान करते हुए उसे समझाया जा सकता है कि अपने इन गुणों को मूल पाठ्यक्रम में लगाओ तो अपने क्लास में अव्वल आ सकते हो।

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