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नहीं छोड़ना चाहते थे पानी, कावेरी पंचाट के आदेश के कारण मजबूर - मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या

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राजस्थान पत्रिका, नई दिल्ली, 04 जुलाई 2017

कर्नाटक भी जलाभाव वाले जिलों को पेयजल की आपूर्ति करने के साथ ही बिजली का उत्पादन भी कर सकेगा। कावेरी पानी के बँटवारे के मामले में तमिलनाडु कभी भी सच नहीं बोलता है। मानसून मौसम की शुरुआत के एक माह बीत जाने पर भी राज्य में अपेक्षा के अनुसार बारिश नहीं हुई है। प्रदेश के चंद क्षेत्रों में औसत बारिश दर्ज की गई है जबकि कुछ इलाकों में अभी तक बारिश ही नहीं हुई है। ऐसे में यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून से राज्य में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो कुछ समय प्रतीक्षा करने के बाद कृत्रिम बारिश का विकल्प आजमाया जाएगा। हासन/मण्ड्या/मैसूर। तमिलनाडु के लिये कावेरी नदी का पानी छोड़ने के खिलाफ मण्ड्या और मैसूर जिले में जारी किसानों के आन्दोलन के बीच मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने सोमवार को जल संसाधन विभाग के फैसले का समर्थन किया। इस बीच, जनता दल (ध) ने कावेरी बाँधों से पानी छोड़ना बन्द नहीं किये जाने पर आन्दोलन करने की चेतावनी दी है।

हासन में संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कहा कि अगर हमने कावेरी पंचाट के आदेश के मुताबिक तमिलनाडु को पानी नहीं दिया तो पड़ोसी राज्य फिर से उच्चतम न्यायालय जाएगा। उन्होंने कहा कि हम राज्य के किसानों की उपेक्षा नहीं कर रहे हैं और तमिलनाडु को सिर्फ उपलब्धता होने पर ही पानी दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हम भी पानी नहीं छोड़ना चाहते थे लेकिन पंचाट के आदेश की उपेक्षा नहीं की जा सकती थी। पंचाट के आदेश के कारण हमें पानी छोड़ने के लिये विवश होना पड़ा लेकिन सरकार के किसानों की हितों की रक्षा के लिये प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि हम अपने लिये समस्या पैदा कर दूसरों के लिये पानी नहीं छोड़ रहे हैं… ऐसा नहीं है कि पानी बाँधों में आ रहा है उसे पूरी तरह छोड़ा जा रहा है...उसमें से कुछ मात्रा में पानी तमिलनाडु को दिया जा रहा है। पिछली बार जब अदालत ने आदेश दिया था तब हमारे पास पानी नहीं था और हम तमिलनाडु को पानी नहीं दे पाये थे।

सिद्धरामय्या ने तमिलनाडु के राजनीतिक दलों के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि कावेरी नदी पर मेकेदाटू बाँध परियोजना को लागू करने के लिये कर्नाटक ने केन्द्र को गलत जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में कावेरी पंचाट के किसी भी निर्देश का उल्लंघन नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री ने सवालिया लहजे में कहा कि तमिलनाडु कब सच्चाई को समझेगा? मेकेदाटू के पास हम जो सन्तुलन बाँध बनाना चाहते हैं उससे तमिलनाडु के हितों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस बाँध को बनाने का उद्देश्य ही पंचाट के आदेश मुताबिक पानी छोड़ना है।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार हमेशा बिना परियोजना का पूरा अध्ययन किये ही आपत्ति करती है। इससे परियोजना से कर्नाटक के बजाय तमिलनाडु को ही ज्यादा फायदा होगा। साथ ही कर्नाटक भी जलाभाव वाले जिलों को पेयजल की आपूर्ति करने के साथ ही बिजली का उत्पादन भी कर सकेगा। बाद में कांग्रेस के सम्भाग स्तरीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कावेरी पानी के बँटवारे के मामले में तमिलनाडु कभी भी सच नहीं बोलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून मौसम की शुरुआत के एक माह बीत जाने पर भी राज्य में अपेक्षा के अनुसार बारिश नहीं हुई है। प्रदेश के चंद क्षेत्रों में औसत बारिश दर्ज की गई है जबकि कुछ इलाकों में अभी तक बारिश ही नहीं हुई है। ऐसे में यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून से राज्य में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो कुछ समय प्रतीक्षा करने के बाद कृत्रिम बारिश का विकल्प आजमाया जाएगा।

11 से होगी अन्तिम सुनवाई


पंचाट के 2007 के अन्तिम फैसले पर कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु का ओर से दायर याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय में 11 जुलाई से सुनवाई होगी । यह सुनवाई 15 दिनों तक लगातार चलेगी।

विरोध : चौथे दिन भी जारी रहा किसानों का आन्दोलन


पानी छोड़ने के खिलाफ सोमवार को चौथे दिन भी मैसूर और मण्ड्या में किसानों और कन्नड़ संगठनों का आन्दोलन जारी रहा। कन्नड़ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने तमिलनाडु के लिये पानी छोड़ने के खिलाफ मण्ड्या में संजय चौराहे पर प्रदर्शन किया तो राज्य किसान संघ के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना दिया। किसान संघ के नेताओं ने इसके साथ ही पूर्ण कृषि ऋण माफी और गन्ने के लिये 3500 रुपए प्रति क्विंटल का सरकारी समर्थन तय किये जाने की माँग की। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि संजय चौराहे पर कन्नड़ संगठनों के सांकेतिक प्रदर्शन के कारण बंगलूरु-मैसूर उच्च पथ पर यातायात अवरुद्ध नहीं हुआ। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि प्रदर्शन कुछ मिनट तक ही चला। पांडवपुर में किसान संघ और कन्नड़ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कुछ देर तक प्रदर्शन किया और श्रीरंगपट्टणा-बीदर उच्च पथ को कुछ देर के लिये जाम कर दिया जिसके कारण यातायात प्रभावित हुआ और दोनों तरफ वाहनों की लम्बी कतारें लग गई। श्रीरंगपट्टणा में भी किसानों ने बंगलूरु-मैसूर उच्च पथ को कुछ देर तक जाम कर प्रदर्शन किया जिसके कारण गुम्बज रोज पर वाहनों की कतार लग गई।

राज्य रैयत संघ के अध्यक्ष व विधायक के.एल. पुट्टणय्या के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पूर्ण कृषि ऋण माफी को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना दिया। इससे पहले बंगलूरु-मैैसूर उच्च पथ पर विश्वेश्वरय्या प्रतिमा के पास से जिलाधिकारी कार्यालय तक रैली निकाली।

किसान ने सरकार से राष्ट्रीयकृत बैंकों का कृषि ऋण भी माफ करने की माँग की। राज्य सरकार पहले ही 50 हजार रुपए तक का कृषि ऋण माफ करने की घोषणा कर चुकी है। जय कर्नाटक संगठन के कार्यकर्ताओं ने भी तमिलनाडु को पानी छोड़ने के खिलाफ बंगलूरु-मैसूर उच्च पथ पर कुछ देर तक रास्ता रोको प्रदर्शन किया।

हालांकि, बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया और उच्च पथ पर यातायात बहाल कराया। मैसूर शहर के नजराबाद स्थित तालुक कार्यालय के सामने भी गन्ना उत्पादक किसान संघ के सदस्यों ने ऋण माफी और गन्ना का राज्य समर्थन मूल्य घोषित किये जाने की माँग को लेकर धरना दिया। रैयत संघ के कार्यकर्ता ने ऋण माफी और तमिलनाडु के लिये पानी छोड़ना बन्द करने की माँग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से किसानों की मदद के लिये कावेरी के नहरों में पानी छोड़ने की माँग की। संघ के कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार से स्वामीनाथ समिति की रिपोर्ट लागू करने की माँग की। किसानों ने कहा कि अगर उनकी माँगे जल्द पूरी नहीं हुईं तो वे 10 जुलाई को बंगलूरु में प्रदर्शन करेंगे। पुलिस ने विरोध प्रदर्शन को देखते कृष्णराज सागर (केआरएस) के पास सुरक्षा के पुख्ता इन्तजाम किये हैं।

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