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सूखे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी-योगेंद्र


स्वराज अभियान के मुखिया और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा है कि सूखे को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है।

सूखे से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स बनाने कहा था लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान जारी किया जाए लेकिन इस दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई तक केंद्र सरकार को यह बताने को कहा है कि सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की।योगेंद्र यादव ने पिछले दिनों देश के विभिन्न राज्यों में सूखे के हालात को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका की रोशनी में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि इस पर केंद्र सरकार आवश्यक कदम उठाये। योगेंद्र यादव ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद केंद्र सरकार ने जरूरी कदम नहीं उठाये और यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि सूखे के कारण मवेशियों की अकाल मौत हो रही है लेकिन सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा, किसानों को डिफाल्टर बना दिया गया है। उन्हें कर्ज नहीं दिया जा रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. सुनीलम ने कहा, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में किसानों को 6 फसलों का मुआवजा मिलना चाहिए लेकिन किसी भी किसान को 6 फसलों का मुआवजा नहीं मिला है बल्कि उन्हें अधिकतम 1 से 2 फसलों का ही मुआवजा दिया गया है। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसानों को नये सिरे से कर्ज दिये जाएँ लेकिन कर्ज नहीं दिये जा रहे हैं। यह सरासर सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना है।

योगेंद्र यादव ने एक दस्तावेज भी दिया जिसमें उन्होंने बताने की कोशिश की है कि सुप्रीम कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा व अन्य मामलों को लेकर जो आदेश दिया था उसपर कितना अमल हुआ है। इस दस्तावेज को तैयार करने में स्वराज अभियान के साथ एकता परिषद, जल बिरादरी, नेशनल अलायंस आफ पीपल्स मूवमेंट, सूचना एवं रोजगार अभियान, राइट टू फुड कैम्पेन, पीपल्स एक्शन फॉर इम्प्लॉयमेंट गारंटी भी शामिल रहा है। योगेंद्र यादव ने कहा कि दस्तावेज तैयार करने के लिए इन संगठनों ने 13 सूखा प्रभावित राज्यों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। दस्तावेज के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने राशन व्यवस्था को वैश्विकरण करने को कहा था और राशन की सुविधा उन लोगों को भी देने की बात कही थी जिनके पास राशन कार्ड नहीं है लेकिन इसको लेकर अभी तक कोई सरकारी आदेश जारी नहीं किया है।

दस्तावेज की मानें तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रभावित लोगों को राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त 2 किलोग्राम दाल और 1 लीटर तेल मुहैया करने पर विचार करने को कहा था कि लेकिन राज्य सरकारों की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि एक महीने के भीतर खाद्य आयुक्त और जिला शिकायत निवारण अफसर नियुकत करने को कहा था लेकिन दस्तावेज के मुताबिक ओडिशा को छोड़कर किसी भी राज्य ने इसे गम्भीरता से नहीं लिया और मौजूदा खाद्य आयुक्त को ही अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया।

दस्तावेज में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने गर्मी की छुट्टियों के दौरान भी पूरे सप्ताह मिड डे मिल उपलब्ध करवाने को कहा था लेकिन अधिकांश राज्यों में इस आदेश को तब लागू किया गया जब गर्मी की छुट्टियाँ खत्म होने वाली है। दस्तावेज में कहा गया है कि हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड और बिहार में गर्मी की छुट्टियों में मिड डे मिल नहीं दिया गया जबकि अन्य राज्यों में बहुत देर से यह शुरू हुआ। इन सबके अलावा और भी कई मामलों को लेकर राज्य व केंद्र सरकार पर लापरवाही के आरोप योगेंद्र यादव ने लगाये हैं।

योगेंद्र यादव ने दस्तावेज के हवाले से कहा है कि सूखे से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स बनाने कहा था लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान जारी किया जाए लेकिन इस दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई तक केंद्र सरकार को यह बताने को कहा है कि सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की। योगेंद्र यादव ने कहा कि वे भी इस संबंध में अपनी रिपोर्ट जमा करेंगे।

मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।

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