लेखक की और रचनाएं

SIMILAR TOPIC WISE

पर्यावरण विकास का आधार बने तभी धरती बचेगी


पृथ्वी दिवस, 22 अप्रैल 2017 पर विशेष


गर्म हो रही पृथ्वीगर्म हो रही पृथ्वी आज पृथ्वी दिवस है। आज के दिन का एक विशेष महत्त्व है। यह दिन वास्तव में एक ऐसे महापुरुष की दृढ़ इच्छाशक्ति के लिये जाना जाता है जिन्होंने ठान लिया था कि हमें अपने गृह पृथ्वी के साथ किये जा रहे व्यवहार में बदलाव लाना है। वह थे अमेरिका के पूर्व सीनेटर गेराल्ड नेल्सन। क्योंकि आज के ही दिन 22 अप्रैल 1970 को उन्हीं के प्रयास से लगभग दो करोड़ लोगों के बीच अमेरिका में पृथ्वी को बचाने के लिये पहला पृथ्वी दिवस मनाया गया था।

इसके पीछे उनका विचार था कि पर्यावरण संरक्षण हमारे राजनीतिक एजेंडे में शामिल नहीं है। क्यों न पर्यावरण को हो रहे नुकसान के विरोध के लिये एक व्यापक जमीनी आधार तैयार किया जाये और सभी इसमें भागीदार बनें। आखिरकार आठ साल के प्रयास के बाद 1970 में उन्हें अपने उद्देश्य में कामयाबी हासिल हो पाई। तब से लेकर आज तक दुनिया में 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। 1990 में इस दिवस के आयोजन से दुनिया के 141 देश सीधे तौर पर और जुड़े।

असलियत यह है कि आज तथाकथित विकास के दुष्परिणाम के चलते हुए बदलावों के कारण पृथ्वी पर दिन-ब-दिन बोझ बढ़ता चला जा रहा है। सही मायने में यह तथाकथित विकास वास्तव में विनाश का मार्ग है जिसके पीछे इंसान आज अन्धाधुन्ध भागे चला जा रहा है। इसे जानने-बूझने और सतत प्रयासों से पृथ्वी के इस बोझ को कम करने की बेहद जरूरत है। इसमें जलवायु परिवर्तन ने अहम भूमिका निभाई है जो एक गम्भीर समस्या है। सच तो यह है कि यह समूची दुनिया के लिये भीषण खतरा है। इसलिये इसे केवल रस्म अदायगी के रूप में नहीं देखना चाहिए और न आज के बाद अपने कर्तव्यों की इतिश्री जान घर बैठने का वक्त है।

सही मायने में आज का दिन आत्मचिन्तन का दिन है। इसलिये आज के दिन हम सबका दायित्व बनता है कि पृथ्वी के उपर आये इस भीषण संकट के बारे में सोचें और इससे निजात पाने के उपायों पर अमल करने का संकल्प लें। चूँकि हम पृथ्वी को हर पल भोगते हैं, इसलिये पृथ्वी के प्रति अपने दायित्व का हमेशा ध्यान में रख हर दिन निर्वहन भी करना होगा। यह भी सच है कि यह सब विकास के ढाँचे में बदलाव लाये बिना असम्भव है।

गौरतलब है कि पृथ्वी की चिन्ता आज किसे है। किसी भी राजनीतिक दल से इसकी उम्मीद भी नहीं है। यह मुद्दा उनके राजनीतिक एजेंडे में है ही नहीं। क्योंकि पृथ्वी वोट बैंक नहीं है। जबकि पृथ्वी हमारे अस्तित्व का आधार है, जीवन का केन्द्र है। वह आज जिस स्थिति में पहुँच गई है, उसे वहाँ पहुँचाने के लिये हम ही जिम्मेवार हैं। आज सबसे बड़ी समस्या मानव का बढ़ता उपभोग है और कोई यह नहीं सोचता कि पृथ्वी केवल उपभोग की वस्तु नहीं है। वह तो मानव जीवन के साथ-साथ लाखों-लाख वनस्पतियों-जीव-जन्तुओं की आश्रयस्थली भी है। इसके लिये खासतौर से उच्च वर्ग, मध्य वर्ग, सरकार और संस्थान सभी समान रूप से जिम्मेवार हैं जो संसाधनों का बेदर्दी से इस्तेमाल कर रहे हैं।

जीवाश्म ईंधन का पृथ्वी विशाल भण्डार है लेकिन इसका जिस तेजी से दोहन हो रहा है, उसकी मिसाल मुश्किल है। इसके इस्तेमाल और बेतहाशा खपत ने पर्यावरण के खतरों को निश्चित तौर पर चिन्ता का विषय बना दिया है। जबकि यह नवीकरणीय संसाधन नहीं है और इसके बनने में लाखों-करोड़ों साल लग जाते हैं।

असलियत में इस्तेमाल में आने वाली हर चीज के लिये, भले वह पानी, जमीन, जंगल या नदी, कोयला, बिजली या लोहा आदि कुछ भी हो, पृथ्वी का दोहन करने में हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। असल में प्राकृतिक संसाधनों के अति दोहन से जैवविविधता पर संकट मँडराने लगा है।

प्रदूषण की अधिकता के कारण देश की अधिकांश नदियाँ अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। उनके आस-पास स्वस्थ जीवन की कल्पना बेमानी है। कोयलाजनित बिजली से न केवल प्रदूषण यानी पारे का ही उर्त्सजन नहीं होता, बल्कि हरे-भरे समृद्ध वनों का भी विनाश होता है। फिर ऊर्जा के दूसरे स्रोत और सिंचाई के सबसे बड़े साधन बाँध समूचे नदी बेसिन को ही खत्म करने पर तुले हैं। रियल एस्टेट का बढ़ता कारोबार इसका जीता-जागता सबूत है कि वह किस बेदर्दी से अपने संसाधनों का बेतहाशा इस्तेमाल कर रहा है।

आईपीसीसी के अध्ययन खुलासा करते हैं कि बीती सदी के दौरान पृथ्वी का औसत तापमान 1.4 फारेनहाइट बढ़ चुका है। अगले सौ सालों के दौरान इसके बढ़कर 2 से 11.5 फारेनहाइट होने का अनुमान है। इस तरह धीरे-धीरे पृथ्वी गर्म हो रही है। पृथ्वी के औसत तापमान में हो रही यह बढ़ोत्तरी जलवायु और मौसम प्रणाली में व्यापक स्तर पर विनाशकारी बदलाव ला सकती है। इसके चलते जलवायु और मौसम में बदलाव के सबूत मिलने शुरू हो ही चुके हैं।

वर्षा प्रणाली में बदलाव के कारण गम्भीर सूखे, बाढ़, तेज बारिश और अक्सर लू का प्रकोप दिखाई देने लगा है। महासागरों के गर्म होने की रफ्तार में इजाफा हो रहा है। वे अम्लीय होते जा रहे हैं। समुद्रतल के दिनों-दिन बढ़ते स्तर से हमारे 7517 किलोमीटर लम्बे तटीय सीमावर्ती इलाकों को भीषण खतरा है। हिमाच्छादित ग्लेशियर और चोटियाँ तेजी से पिघलने लगे हैं।

एक शोध के जरिए भूविज्ञानियों ने खुलासा किया है कि पृथ्वी में से लगातार 44 हजार बिलियन वॉट ऊष्मा बाहर आ रही है। पृथ्वी से निकलने वाली कुल गर्मी के आधे हिस्से का लगभग 97 फीसदी रेडियोएक्टिव तत्वों से निकल रहा है। एंटी न्यूट्रिनों न केवल यूरेनियम, थोरियम और पोटेशियम के क्षय से पैदा हो रहे हैं बल्कि परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों से भी ये निकल रहे हैं। यह भयावह खतरे का संकेत है।

वैज्ञानिकों के अनुसार जनसंख्या वृद्धि से धरती के विनाश का खतरा मँडरा रहा है। इससे वे सभी प्रजातियाँ खत्म हो जाएँगी जिन पर हमारा जीवन निर्भर है। कुछ वर्णसंकर प्रजातियाँ उत्पन्न होंगी, फसलें बहुत ज्यादा प्रभावित होेंगी और वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति पैदा हो जाएगी। नतीजन कुछ ऐसे अप्रत्याशित बदलाव होंगे जो पिछले 12000 वर्षों से नहीं हुए हैं। जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिकी में आये बदलावों से इस बात की प्रबल सम्भावना है कि इस सदी के अन्त तक धरती का बहुत हद तक स्वरूप बदल जाएगा। इस विनाश के लिये जल, जंगल और कृषि भूमि का अति दोहन जिम्मेवार है।

जाहिर है इन पर अंकुश लगाए बिना जलवायु परिवर्तन के खिलाफ हमारा संघर्ष अधूरा रह जाएगा। इस सच की स्वीकारोक्ति कि हम सब पृथ्वी के अपराधी हैं, इस दिशा में पहला कदम होगा। इसके लिये सबसे पहले हमें अपनी जीवनशैली पर पुनर्विचार करना होगा। अपने उपभोग के स्तर को कम करना होगा। स्वस्थ जीवन के लिये प्रकृति के करीब जाकर सीखना होगा।

यह जानना होगा कि यह दुर्दशा प्रकृति और मानव के विलगाव की ही परिणति है। सरकारों के लिये यह जरूरी है कि वे विकास को मात्र आर्थिक लाभ की दृष्टि से न देखें बल्कि, पर्यावरण को भी विकास का आधार बनाएँ। पृथ्वी दिवस के अवसर पर हम पृथ्वी के प्रहरी बनकर उसे बचाने और आवश्यकतानुरूप उपभोग का संकल्प लें और इस हेतु दूसरों को भी प्रेरित करें। तभी हम धरती को लम्बी आयु प्रदान करने में समर्थ हो सकते हैं।

Post new comment

The content of this field is kept private and will not be shown publicly.
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.
  • Allowed HTML tags: <a> <em> <strong> <cite> <code> <ul> <ol> <li> <dl> <dt> <dd>
  • Lines and paragraphs break automatically.

More information about formatting options

CAPTCHA
यह सवाल इस परीक्षण के लिए है कि क्या आप एक इंसान हैं या मशीनी स्वचालित स्पैम प्रस्तुतियाँ डालने वाली चीज
इस सरल गणितीय समस्या का समाधान करें. जैसे- उदाहरण 1+ 3= 4 और अपना पोस्ट करें
4 + 0 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.