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फ्लोरोसिस से पीड़ित कई पीढ़ियाँ

Author: 
संदीप कुमार

फ्लोरोसिस की बीमारी से पीड़ित औरत और बच्चेफ्लोरोसिस की बीमारी से पीड़ित औरत और बच्चेएक ओर जहाँ बिहार में फ्लोराइड प्रभावित चार सौ टोलों में मार्च के अन्त तक फ्लोराइडग्रस्त टोलों में घर-घर पीने का पानी पहुँचाने का काम शुरू हो जाएगा। वही पाइप से पानी का कनेक्शन देने के काम में आधा दर्जन एजेंसियों ने दिलचस्पी दिखाई है। बिहार सरकार की हर घर नल का जल योजना के तहत घरों में पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिये तैयारी चल रही है। इतना ही नहीं इन टोलों में ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर पानी को शुद्ध कर पहुँचाया जाएगा।

इन चार सौ टोलों में पाइप से पहुँचाने पर लगभग दो सौ करोड़ खर्च होंगे। टेंडर में सफल एजेंसी को एक साल में पाइप बिछाकर घर-घर जलापूर्ति का काम पूरा करना है। एजेंसी को डिजाइन के अलावा निर्माण, आपूर्ति व चालू करने के साथ पाँच साल तक उसका रख-रखाव भी करना है।

पीएचईडी ने 11 जिलों के फ्लोराइड टोलों का सर्वे कर दूसरे फेज में चार सौ टोलों को चिन्हित कर रखा है। पहले भी इन टोलों में पाइप बिछाने के काम को 2016 के नवम्बर माह में टेंडर निकाला गया था। लेकिन तकनीकी गड़बड़ी को लेकर दोबारा टेंडर निकाला गया।

दूसरे फेज में फ्लोराइड से प्रभावित 11 जिले में चार सौ टोलों में लघु जलापूर्ति योजना के तहत काम होना है। फ्लोराइड प्रभावित नालंदा में 25, गया में 25, औरंगाबाद में पाँच, रोहतास में 10, कैमूर में 15, नवादा में 20, भागलपुर में 50, बांका में 100, मुंगेर में 25, शेखपुरा में 25 व जमुई में 100 टोलों में पाइप के द्वारा घरों में पानी पहुँचेगा। घरों में शुद्ध पानी पहुँचाने के लिये सौर प्लांट लगेगा।

विश्व बैंक भी करेगा सहयोग


तो दूसरी ओर बिहार के ग्रामीण इलाकों के 133 गाँवों के घरों में पाइप से स्वच्छ पानी पहुँचाने में विश्व बैंक का सहयोग मिलेगा। जलापूर्ति योजना पर होने वाले खर्च में 50 फीसदी राशि विश्व बैंक मदद कर रही है। ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत पहले चरण में दस जिले पटना, नालंदा, नवादा, बेगूसराय, मुंगेर, बांका, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, सारण व बेतिया में ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण होना है। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत केन्द्र व राज्य सरकार सहित विश्व बैंक के सहयोग से ग्रामीण जलापूर्ति व स्वच्छता परियोजना के अन्तर्गत योजना पर काम होना है।

वहीं दूसरी ओर जमुई पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा कुरकुट्टा के ग्रामीणों के लिये अभिशाप साबित हो रही है। तीन पीढ़ियों के लोग फ्लोरोसिस के कारण विकलांगता का दंश झेलने को मजबूर हैं। शायद ही गाँव में कोई ऐसा घर हो जिसमें कोई इस अभिशाप को ना झेल रहा हो। गाँव में 250 लोग रहते हैं। दशरथ साव, उनकी पत्नी सरस्वती देवी, राजकुमार साव, कमली देवी, महादेव साव, नीरो देवी, रंजन कुमार, बबीता कुमारी, धुरो देवी आदि बताती हैं कि इस कारण गाँव में लोगों के चेहरे की बनावट विचित्र दिखती है। लोगों के दाँत पीले पड़ जाते हैं। इस कारण 30 साल की बबीता 10 साल की लगती है। पीएचईडी ने जिले में 1946 चापाकलों के पानी की जाँच कराई थी। उनमें कुरकुट्टा में फ्लोराइड की सर्वाधिक मात्रा पाई गई थी। यहाँ प्रति लीटर पानी में 3.6 मिलीग्राम फ्लोराइड पाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि प्रति लीटर पानी में 1.6 मिलीग्राम से अधिक फ्लोराइड का दुष्प्रभाव स्वास्थ्य पर होता है।

पीएचईडी का प्रयास अधूरा


ग्रामीणों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिये कुरकुट्टा में जल शुद्धिकरण संयंत्र स्थापित किया गया है। विडम्बना यह है कि फ्लोरोसिस से सर्वाधिक प्रभावित परिवारों तक ही यह पानी नहीं पहुँचा। दशरथ साव, कपिलदेव साव, महादेव साव, राजकुमार साव समेत कई लोगों का परिवार साफ पानी से वंचित है। मनोज कुमार राय, सोनो (जमुई) पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा कुरकुट्टा के ग्रामीणों के लिये अभिशाप साबित हो रही है।

फ्लोरोसिस से पीड़ित लोग


गीता देवी पिछले 15 वर्षों से फर्श पर पड़ी हैं। फ्लोरोसिस के कारण उनकी कमर व उनके घुटने काम नहीं कर रहे हैं। गरीबी की मार अलग है। इनके पास ना तो राशन कार्ड है और ना ही इन्हें विधवा पेंशन मिलती है। सरकार को चाहिए कि शीघ्र इस समस्या से लोगों को निजात दिलाएँ। ताकि उन्हें इलाज में कम-से-कम रुपया खर्च करने पड़ें।

सोनिया देवी पिछले आठ साल से खाट पर पड़ी हैं। उनकी कमर से नीचे के अंग काम नहीं करते हैं। बेटा पवन भी विकलांग है। ऐसी स्थिति में इस परिवार की पीड़ा को बखूबी समझा जा सकता है। आवास व पेंशन योजना का भी इस परिवार को लाभ नहीं मिला। विभाग के अधिकारी आते हैं आश्वासन देकर चले जाते हैं।

कभी दुबली रहीं सरस्वती देवी बताती हैं कि यहाँ के पानी ने उनके जीवन को नर्क बना दिया है। वजन बढ़ गया है। कमर से नीचे के अंग काम नहीं करते। पहले वे बीड़ी बनाकर जीवनयापन करती थीं, लेकिन अब यह काम भी सम्भव नहीं है।

लोक स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक अभियन्ता बिन्दुभूषण का कहना है कि जिले में फ्लोराइड से सर्वाधिक प्रभावित गाँव कुरकुट्टा ही है। जिन घरों तक पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, वहाँ जल्द ही यह सुविधा बहाल की जाएगी। प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है। तो दूसरी तरफ जमुई से सटे बिहार के नक्सल प्रभावित जिला मुंगेर के हवेली खड़गपुर स्थित खैरा गाँव में यह मौत का सामान है।

गाँव के भूजल में स्वीकृत मात्रा से काफी अधिक फ्लोराइड है। जल में एक पीपीएम तक फ्लोराइड रहे तो उसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ता, लेकिन यहाँ पानी में इसकी मात्रा 3.5 से लेकर 4.5 पीपीएम तक है। जल में इसकी अधिकता फ्लोरोसिस नामक बीमारी का कारण बन गई है। हालत यह है कि प्रदूषित जल के सेवन के कारण गाँव के लोगों की कम उम्र में ही कमर झुक जाती है। हड्डियाँ कमजोर होती जाती हैं। जवानी में ही सारे दाँत टूट जाते हैं। दाँत पीले पड़ जाते हैं। इन्तजार करना होगा कि इन गाँव के लोगों को आखिर फ्लोराइड से मुक्त पानी कब उपलब्ध होगा। योजना कब पूरी होगी?

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