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लोगों को पत्र लिख करते हैं पौधा रोपने की अपील

Author: 
वंदना वालिया बाली
Source: 
दैनिक जागरण, 07 जनवरी 2017

पर्यावरण प्रहरी के रूप में अनोखी भूमिका निभाने वाले गुरबचन सिंह अगस्त 1994 से जनवरी 1995 तक 25 हजार किलोमीटर का सफर साइकल से तय कर भारत भ्रमण कर चुके हैं। इस दौरान भी उन्होंने लोगों को पर्यावरण का सन्देश दिया। अब भी वे साइकल से ही चलते हैं। उनकी साइकल पर एक तख्ती लगी हुई है, जिस पर हर दिन एक नया सन्देश लिख देते हैं। साइकल जहाँ से भी गुजरती है, लोग इसे पढ़ते जाते हैं। जालंधर/पर्यावरण संरक्षण का यह अनूठा प्रयास पंजाब पुलिस में तैनात एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर पिछले 12 वर्ष से कर रहा है। वह स्थानीय अखबारों में हर दिन छपने वाले शोक अथवा बधाई सन्देशों से पते जुटाते हैं और उसी दिन सभी पतों पर पत्र भेज देते हैं। पत्र में शोक संवेदना अथवा शुभकामना के साथ ही एक अपील भी करते हैं। जिन्होंने परिजन कोे खोया, उनसे परिजन की याद में एक पौधा रोपने का आग्रह करते हैं और जिनका जन्मदिन है, उन्हें हर जन्मदिन पर एक पौधा रोपने के लिये प्रेरित करते हैं। पिछले 12 साल से यह काम वे हर दिन कर रहे हैं।

पत्र अधिक प्रभावी : कपूरथला में पदस्थ एएसआई गुरबचन सिंह व्हाट्सअप के इस युग में भी पत्र-प्रेषण को ही तवज्जो देते हैं। उनका कहना है कि अखबारों से हर दिन अवसर के अनुरूप पते मिल जाते हैं और अवसर के अनुरूप ही लोगों को इस अच्छे काम के लिये प्रेरित करना अधिक प्रभावी होता है। वे बताते हैं कि गत 12 साल में करीब 25000 पत्र लिख चुके हैं। उनका दावा है कि उन्होंने जिन पतों पर पत्र भेजे, उन व्यक्तियों ने पौधे लगाए। साथ ही हर साल करीब 150 पेड़ वे स्वयं भी लगाते हैं। इनका संरक्षण करते हैं। वह बताते हैं कि स्कूल, कॉलेजों के प्रिंसिपल हों या गाँवों के सरपंच सभी को मैं पौधे लगाने के लिये कहता हूँ। समय मिलने पर उनके साथ मिलकर पौधे लगाता भी हूँ।

नाना के पेड़ से मिली प्रेरणा : होशियारपुर के गाँव राजपुर गहोत के मूल निवासी गुरबचन सिंह बताते हैं, ‘मेरे नाना ने मृत्यु से एक साल पले आँगन में एक पौधा रोपा था। उसकी छाँव में जब भी बैठता तो उनकी याद ताजा हो उठती और उनका आशीर्वाद महसूस होता। पूरे परिवार का उस पेड़ से विशेष लगाव है। यहीं से प्रेरणा लेकर मैंने लोगों को भी परिजन की याद में पौधरोपण का सन्देश देने की सोची और इसके लिये अखबारों में छपे शोक सन्देशों से पते लेकर पत्र लिखना शुरू कर दिया। पहला पत्र नवाशहर के एक डॉक्टर को लिखा था, जिन्होंने अपनी बेटी को खोया था। कुछ दिन बाद उनका पत्र मिला कि उन्होंने बेटी की याद में पौधा रोप दिया है।’

गुरबचन कहते हैं, ‘जिन्हें भी मैं पत्र लिखता हूँ उनसे मेरा रिश्ता केवल इंसानियत का है।’

बन गए पर्यावरण प्रहरी


पर्यावरण प्रहरी के रूप में अनोखी भूमिका निभाने वाले गुरबचन सिंह अगस्त 1994 से जनवरी 1995 तक 25 हजार किलोमीटर का सफर साइकल से तय कर भारत भ्रमण कर चुके हैं। इस दौरान भी उन्होंने लोगों को पर्यावरण का सन्देश दिया। अब भी वे साइकल से ही चलते हैं। उनकी साइकल पर एक तख्ती लगी हुई है, जिस पर हर दिन एक नया सन्देश लिख देते हैं। साइकल जहाँ से भी गुजरती है, लोग इसे पढ़ते जाते हैं। उनके इस जज्बे के लिये गत वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर पंजाब के मुख्यमंत्री ने उन्हें 11 हजार रुपए का इनाम व पदक प्रदान कर सम्मानित किया। केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने गुरबचन को नन्हीं छाँव कार्यक्रम से जुड़ने का न्योता दिया।

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