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अपतट क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 (Offshore Areas Mineral Development and Regulation Act, 2002)

(2003 का अधिनियम संख्यांक 17)


{30 जनवरी, 2003}


भारत के राज्य क्षेत्रीय सागर-खण्ड, महाद्वीपीय मग्नतट भूमि, अनन्य आर्थिक क्षेत्र और अन्य सामुद्रिक क्षेत्र में खनिज स्रोतों के विकास और विनियमन का तथा उससे सम्बन्धित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबन्ध करने के लिये अधिनियम

भारत गणराज्य के तिरपनवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनयिमत हो:-

अध्याय 1


प्रारम्भिक


1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ


(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अपतट क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 है।

(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे।

2. संघ के नियंत्रण की समीचीनता के बारे में घोषणा


यह घोषित किया जाता है कि लोकहित में यह समीचीन है कि संघ को, अपतट क्षेत्रों में खानों के विनियमन और खनिजों के विकास को, इसमें इसके पश्चात दी गई सीमा तक अपने नियंत्रण में ले लेना चाहिए।

3. लागू होना


(1) यह अधिनियम अपतट क्षेत्रों में सभी खनिजों को जिनके अन्तर्गत खनिज तेलों और उससे सम्बन्धित हाइड्रोकार्बनों के सिवाय, परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 (1962 का 33) की धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड (छ) के अधीन अधिसूचना द्वारा विहित कोई खनिज भी है, लागू होगा।

(2) इस अधिनियम में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, इस अधिनियम के उपबन्ध अपतट क्षेत्रों में तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अतिरिक्त होंगे न कि उसके अल्पीकरण में।

4. परिभाषाएँ


इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) “प्रशासनिक प्राधिकारी” से इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित कोई प्राधिकारी अभिप्रेत है;
(ख) “परमाणु खनिज” से ऐसे खनिज अभिप्रेत हैं, जो खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (1957 का 67) की पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट परमाणु खनिजों में सम्मिलित किये गए हैं;
(ग) “तटरक्षक” से तटरक्षक अधिनियम, 1978 (1978 का 30) के अधीन गठित तटरक्षक अभिप्रेत है;
(घ) “खोज अनुज्ञप्ति” से धारा 12 के अधीन अनुदत्त कोई अनुज्ञप्ति अभिप्रेत है;
(ङ) “खोज सम्बन्धी संक्रिया” से ऐसी संक्रिया अभिप्रेत है जो खनिज भण्डारों की खोज करने, उनके स्थान का पता लगाने या उन्हें सिद्ध करने के प्रयोजन के लिये की जाती है;
(च) किसी संक्रिया अधिकार के सम्बन्ध में, “धारक” से ऐसे संक्रिया अधिकार के सम्बन्ध में, यथास्थिति, पट्टेदार, अनुज्ञप्तिधारी या अनुज्ञापत्रधारी अभिप्रेत है;
(छ) “हाइड्रोकार्बन” से कार्बन और हाइड्रोजन से बने रासायनिक सम्मिश्रणों का वृहत्त समूह अभिप्रेत है;
(ज) “भारतीय राष्ट्रिक” से भारत का नागरिक अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत कोई फर्म या अन्य संगम भी है यदि, यथास्थिति, फर्म या संगम के सभी सदस्य भारत के नागरिक हैं;
(झ) “पट्टेदार” से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके नाम में उत्पादन पट्टा अनुदत्त किया जाता है;
(ञ) “अनुज्ञप्तिधारी” से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके नाम में खोज अनुज्ञप्ति अनुदत्त की जाती है;
(ट) “खान” से अपतट क्षेत्र में ऐसा स्थान अभिप्रेत है जिसमें कोई खोज या उत्पादन संक्रियाएँ किसी ढंग या पद्धति द्वारा खनिज या धातु की खोज करने, उसे प्राप्त करने, संसाधित या तैयार करने के प्रयोजनों के लिये प्रयुक्त अपतट क्षेत्र में किसी जलयान, परिनिर्माण, साधित्र, कृत्रिम द्वीप या प्लेटफार्म और परिसरों के साथ की जाती है और इसके अन्तर्गत कोई ऐसा क्षेत्र भी आता है जो किसी खोज अनुज्ञप्ति या उत्पादन पट्टे के अन्तर्गत है, जहाँ खोज या उत्पादन इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन किया गया है या किया जा रहा है या किया जा सकेगा;
(ठ) “खनिज” के अन्तर्गत खनिज तेल और उससे सम्बन्धित हाइड्रोकार्बन स्रोतों के सिवाय सभी खनिज आते हैं;
(ड) “खनिज तेल” के अन्तर्गत प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम भी हैं;
(ढ) “अपतट क्षेत्र” से राज्य क्षेत्रीय सागर-खण्ड, महाद्वीपीय मग्नतट भूमि, अनन्य आर्थिक क्षेत्र और अन्य सामुद्रिक क्षेत्र अधिनियम, 1976 (1976 का 80) के अधीन भारत के राज्य क्षेत्रीय सागर-खण्ड, महाद्वीपीय मग्नतट भूमि, अनन्य आर्थिक क्षेत्र और अन्य सामुद्रिक क्षेत्र अभिप्रेत हैं;
(ण) “संक्रिया सम्बन्धी अधिकार” से आवीक्षण अनुज्ञापत्र या खोज अनुज्ञप्ति या उत्पादन पट्टा के धारक अधिकार अभिप्रेत हैं;
(त) “अनुज्ञापत्रधारी” से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके नाम में आवीक्षण अनुज्ञापत्र अनुदत्त किया गया है;
(थ) “अपतट पर्यावरण के प्रदूषण” से किसी व्यक्ति द्वारा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपतट पर्यावरण में किसी पदार्थ या ऊर्जा का प्रवेश कराना अभिप्रेत है, जिसका परिणाम या सम्भाव्य परिणाम ऐसा हानिकारक प्रभाव होगा जो जीवित स्रोतों और सामुद्रिक जीवन को क्षति कारित करेगा, मानव स्वास्थ्य के लिये परिसंकटमय होगा, सामुद्रिक क्रियाकलापों में, जिसके अन्तर्गत अपतट क्षेत्र में मछली पकड़ना और अन्य विधिसम्मत उपयोग, तथा उपयोग के लिये समुद्री जल की क्वालिटी का ह्यसन और सुख-सुविधाओं की कमी भी हैं, बाधक होगा;
(द) “विहित” से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ध) “उत्पादन संक्रिया” से कोई ऐसी संक्रिया अभिप्रेत है जो अपतट क्षेत्र से कोई खनिज प्राप्त करने के प्रयोजन के लिये की जाती है और उसके अन्तर्गत कोई ऐसी संक्रिया भी है जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उसके लिये आवश्यक है या उससे आनुषंगिक है;
(न) “उत्पादन पट्टा” से धारा 13 के अधीन अनुदत्त कोई पट्टा अभिप्रेत है जो उत्पादन संक्रिया करने के प्रयोजन के लिये अनन्य अधिकार प्रदान करता है;
(प) “आवीक्षण संक्रिया” से खनिज भण्डारों को तलाशने या उनका पता लगाने के प्रयोजन के लिये किया गया प्रारम्भिक भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण अभिप्रेत है;
(फ) “आवीक्षण अनुज्ञापत्र’ से आवीक्षण संक्रियाएँ करने के प्रयोजन के लिये धारा 11 के अधीन अनुदत्त कोई अनुज्ञापत्र अभिप्रेत है;
(ब) “जलयान” के अन्तर्गत कोई पोत, नौका, चलत जलयान या किसी अन्य वर्णन का कोई जलयान भी है।

अध्याय 2


अपतट क्षेत्रों में संक्रिया सम्बन्धी अधिकारों के अर्जन के लिये साधारण उपबन्ध


5. आवीक्षण खोज या उत्पादन का अनुज्ञापत्र, अनुज्ञप्ति या पट्टे के अधीन होना-


(1) कोई व्यक्ति, अपतट क्षेत्रों में इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन अनुदत्त आवीक्षण अनुज्ञापत्र, खोज अनुज्ञप्ति या उत्पादन पट्टे के विहित निबन्धनों और शर्तों के अधीन और उनके अनुसार के सिवाय कोई आवीक्षण संक्रिया, खोज संक्रिया या उत्पादन संक्रिया नहीं करेगा:

परन्तु इस उपधारा की कोई बात भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, परमाणु खनिज खोज और अनुसन्धान निदेशालय, भारतीय नौसेना के नौसेनिक जल सर्वेक्षण कार्यालय के भारत सरकार के मुख्य जल सर्वेक्षक, राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, भारत के समुद्र विकास विभाग के राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त सम्यक रूप से प्राधिकृत किसी अन्य अभिकरण द्वारा की गई किसी आवीक्षण संक्रिया या खोज संक्रिया को लागू नहीं होगी।

(2) अनुज्ञापत्रधारी या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार,-

(क) यथास्थिति, आवीक्षण संक्रिया या खनिज खोज या खनन जैसे गहराई मापन, भू-पटल रचना, खनिज वितरण, असंगति मानचित्रों, खण्डों, सलैखों कोड, अवस्थिति मानचित्रों, रेखांकों, संरचनाओं, समोच्च मानचित्रों, रासायनिक विश्लेषण से सम्बन्धित सभी आँकड़े, चालू ज्वार भाटाओं, लहरों, हवा से सम्बन्धित आँकड़े, अन्य भू-भौतिकीय और भू-तकनीकी आँकड़े और खोज संक्रियाओं या खनन संक्रियाओं के दौरान संगृहीत कोई अन्य आँकड़े महानिदेशक, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, कोलकाता और महानियंत्रक, भारतीय खान ब्यूरो, नागपुर को प्रस्तुत करना;
(ख) यथास्थिति, आवीक्षण संक्रिया या खोज संक्रिया या खनन संक्रिया के दौरान संगृहीत परमाणु खनिजों से सम्बन्धित सभी सूचना, परमाणु ऊर्जा से सम्बन्धित भारत सरकार के सचिव, महानिदेशक, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, कोलकाता और महानियंत्रक, भारतीय खान ब्यूरो, नागपुर को प्रस्तुत करेगा;
(ग) रिपोर्ट की अवधि के दौरान नियोजित व्यक्तियों की संख्या का कथन करते हुए और उसके द्वारा संगृहीत, भू-वैज्ञानिक, भू-भौतिकीय, भू-रासायिनक, भू-पर्यावरणीय या अन्य मूल्यवान आँकड़े प्रकट करते हुए उसके द्वारा किये गए कार्य पर छमाही रिपोर्ट महानिदेशक, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, कोलकाता और महानिदेशक भारतीय खान ब्यूरो, नागपुर को प्रस्तुत करेगा और रिपोर्ट उस अवधि की, जिससे वह सम्बन्धित है, समाप्ति के तीन मास के भीतर प्रस्तुत की जाएगी:

परन्तु परमाणु खनिजों से सम्बन्धित अन्वेषणों की दशा में, ऐसी रिपोर्ट परमाणु ऊर्जा से सम्बन्धित सचिव, भारत सरकार को भी प्रस्तुत की जाएगी;

(घ) उसके द्वारा किये गए कार्य की पूरी रिपोर्ट और अनुज्ञप्ति के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्र में खोज संक्रिया के अनुक्रम में उसके द्वारा संगृहीत खनिज संसाधनों से सुसंगत सभी जानकारी, अनुज्ञप्ति के अवसान या संक्रिया के परित्याग या अनुज्ञप्ति की समाप्ति के तीन मास के भीतर, इसमें जो भी पहले हो, महानिदेशक, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, कोलकाता और महानियंत्रक, भारतीय खान ब्यूरो, नागपुर को प्रस्तुत करेगा तथा उसमें कारण भी देगा और यह उपदर्शित करेगा कि क्या उसके द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट या आँकड़ों को सम्पूर्णतया या उनका कोई भाग गोपनीय रखा जाना चाहिए।

(3) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार-

(क) सागर-दिशा तोप अभ्यास अधिनियम, 1949 (1949 का 8) के अधीन सागर-दिशा तोप अभ्यास को प्राधिकृत कर सकेगी;
(ख) युद्ध जैसी परिस्थितियों के दौरान या अन्यथा लोक सुरक्षा और हित, भारत की सुरक्षा और नागिरक सुरक्षा, नौ-सैनिक संक्रियाओं और अभ्यासों के संचालन, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य सामरिक महत्त्व की बातों को सुनिश्चित करने के लिये विशेष उपायों और उनसे सम्बन्धित विषयों के लिये, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उपाबन्ध कर सकेगी।

(4) कोई भी संक्रिया सम्बन्धी अधिकार, इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार से अन्यथा अनुदत्त या नवीकृत नहीं किया जाएगा और इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपाबन्धों के उल्लंघन में अनुदत्त, नवीकृत या अर्जित कोई अवीक्षण अनुज्ञापत्र, खोज अनुज्ञप्ति या उत्पादन पट्टा, शून्य होगा।

6. संक्रिया सम्बन्धी अधिकार का प्रदान करना


केन्द्रीय सरकार, किसी व्यक्ति को कोई संक्रिया सम्बन्धी अधिकार तब तक प्रदान नहीं करेगी जब तक कि ऐसा व्यक्ति,-

(क) भारत का राष्ट्रिक या कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 3 में यथा परिभाषित कोई कम्पनी नहीं है; और
(ख) ऐसी शर्तों को पूरा नहीं करता है जो विहित की जाएँ:

परन्तु परमाणु खनिजों या विहित पदार्थों के लिये उत्पादन पट्टा भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा से सम्बद्ध विभाग के परामर्श के बिना प्रदान नहीं किया जाएगा।

7. संक्रिया सम्बन्धी अधिकार का पर्यवसान


(1) जहाँ केन्द्रीय सरकार की, प्रशासनिक प्राधिकारी से परामर्श के पश्चात, यह राय है कि अपतट खनिज स्रोतों के विकास और विनियमन के हित में, नैसर्गिक पर्यावरण के परिरक्षण और प्रदूषण के निवारण, लोक स्वास्थ्य या संसूचना के खतरे से बचने के लिये किसी अपतट संरचना की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये या खनिज संसाधनों के संरक्षण के लिये यह समीचीन है, वहाँ केन्द्रीय सरकार, किसी अपतट क्षेत्र या उसके भाग में किसी खनिज के सम्बन्ध में किसी संक्रिया सम्बन्धी अधिकार का समयपूर्व पर्यवसान कर सकेगी।

(2) उपधारा (1) के अधीन संक्रिया सम्बन्धी अधिकार का समयपूर्व पर्यवसान करने के लिये कोई आदेश, संक्रिया सम्बन्धी अधिकार के धारक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के सिवाय नहीं किया जाएगा।

(3) जहाँ किसी संक्रिया सम्बन्धी अधिकार का धारक धारा 14 में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर संक्रिया प्रारम्भ करने में असफल रहता है या दो वर्ष की अवधि के लिये संक्रिया बन्द कर लेता है वहाँ, संक्रिया सम्बन्धी अधिकार, यथास्थिति, पट्टे के निष्पादन की तारीख से या संक्रिया बन्द करने की तारीख से व्यपगत हो जाएगा:

परन्तु प्रशासनिक प्राधिकारी, संक्रिया सम्बन्धी अधिकार के धारक द्वारा किये गए आवेदन पर और यह समाधान हो जाने के पश्चात कि संक्रिया का ऐसे प्रारम्भ न किया जाना या उसका बन्द करना ऐसे कारणों से है जो संक्रिया सम्बन्धी अधिकार के धारक के नियंत्रण से परे है, ऐसे प्रारम्भ न किये जाने या बन्द किये जाने को माफ कर सकेगा।

8. क्षेत्रों का आरक्षण


(1) केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी अपतट क्षेत्र को, जो किसी संक्रिया सम्बन्धी अधिकार के अधीन पहले से धारित नहीं है, केन्द्रीय सरकार के प्रयोजन के लिये आरक्षित कर सकेगी और जहाँ वह ऐसा करने का प्रस्ताव करती है वहाँ वह, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे क्षेत्र की सीमाओं को और उन खनिज या खनिजों को, जिनके सम्बन्ध में ऐसा क्षेत्र आरक्षित किया जाएगा, विनिर्दिष्ट करेगी।

(2) केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उपधारा (1) के अधीन आरक्षित किसी क्षेत्र को, अपतट खनिज के विकास और विनियमन के हित में, अनारक्षित कर सकेगी।

9. क्षेत्र को बन्द करने की शक्ति


(1) केन्द्रीय सरकार, लोकहित में, लिखित आदेश द्वारा और, यथास्थिति, अनुज्ञापत्रधारी, अनुज्ञप्तिधारी या पट्टाधारी को संसूचना देकर किसी ऐसे क्षेत्र को भागतः या सम्पूर्ण रूप में, जो किसी संक्रिया सम्बन्धी अधिकार के अन्तर्गत है नैसिगक पर्यावरण के संरक्षण और प्रदूषण के निवारण के लिये या लोक स्वास्थ्य या संसूचना को खतरे से बचाने के लिये या किसी अपतट संरचना या प्लेटफार्म की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये या अपतट खनिज के संरक्षण के लिये या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये या किसी अन्य सामरिक महत्त्व की बात के विचारण के लिये, बन्द कर सकेगी।

(2) कोई क्षेत्र जो उपधारा (1) के अधीन भागतः या सम्पूर्ण रूप से बन्द कर दिया गया है और जो किसी संक्रिया सम्बन्धी अधिकार में सम्मिलित है, ऐसे आदेश की तारीख से, संक्रिया सम्बन्धी अधिकार के प्रयोजनों के लिये अपवर्जित किया गया समझा जाएगा और संक्रिया सम्बन्धी अधिकार का धारक उसमें विनिर्दिष्ट तारीख से ऐसे आदेश के अधीन आने वाले क्षेत्र में कोई संक्रिया नहीं करेगा।

10. अनुज्ञापत्र, अनुज्ञप्ति या पट्टे के अनुदान के लिये क्षेत्रों की उपलब्धता


(1) इस अधिनियम के प्रारम्भ की तारीख से छह मास के भीतर और उसके पश्चात ऐसे समय पर जो प्रशासनिक प्राधिकारी द्वारा इस निमित्त आवश्यक समझा जाये, वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अपतट क्षेत्रों के उन भागों को, जो आवीक्षण अनुज्ञापत्र, खोज अनुज्ञप्ति या उत्पादन पट्टे के अनुदान के लिये उपलब्ध होंगे, घोषित करेगा।

(2) किसी ऐसे क्षेत्र के सम्बन्ध में, जो उपधारा (1) के अधीन जारी अधिसूचना के अन्तर्गत नहीं आता है, आवीक्षण अनुज्ञापत्र, खोज अनुज्ञप्ति या उत्पादन पट्टे के अनुदान के लिये कोई आवेदन समय पूर्व किया गया समझा जाएगा और उसके लिये कोई आवेदन ग्रहण नहीं किया जाएगा।

(3) संक्रियात्मक अधिकार पाँच मिनट देशान्तर रेखांश से पाँच मिनट अक्षांश तक के मानक ब्लाॅकों में अनुदत्त किये जाएँगे और ऐसे अनुदान में एक से अधिक ऐसे मानक ब्लाॅक सम्मिलित हो सकेंगे, जो संलग्न होंगे।

11. आवीक्षण अनुज्ञापत्र का अनुदान


(1) प्रशासनिक प्राधिकारी, संक्रियात्मक अधिकार के अनुदान के लिये धारा 6 के अधीन पात्र किसी व्यक्ति को ऐसा आवीक्षण अनुज्ञापत्र, जो अनन्य नहीं होगा, अनुदत्त कर सकेगा।

(2) उपधारा (1) के अधीन अनुदत्त आवीक्षण अनुज्ञापत्र की अवधि वह होगी जो ऐसे अनुज्ञापत्र में विनिर्दिष्ट की जाये और वह दो वर्ष से अधिक की नहीं होगी।

(3) उपधारा (1) के अधीन अनुदत्त आवीक्षण अनुज्ञापत्र दो वर्ष से अनधिक की अवधि के लिये नवीकृत किया जा सकेगा यदि ऐसे अनुदान की अवधि के दौरान की गई प्रगति के पुनर्विलोकन के पश्चात, प्रशासनिक प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि आवीक्षण संक्रियाओं को पूरा करने के लिये और अवधि आवश्यक है।

(4) एक आवीक्षण अनुज्ञापत्र के अधीन अनुदत्त किया जाने वाला क्षेत्र दो डिग्री अक्षांश से दो डिग्री देशान्तर रेखांश के एक ब्लाॅक से अधिक नहीं होगा।

(5) प्रशासनिक प्राधिकारी, अपतट खनिज विकास के हित में उन्हीं खनिज भण्डारों के लिये उसी क्षेत्र के सम्बन्ध में एक या अधिक व्यक्तियों को आवीक्षण अनुज्ञापत्र अनुदत्त कर सकेगा।

12. खोज अनुज्ञप्ति का अनुदत्त किया जाना


(1) प्रशासनिक प्राधिकारी, किसी ऐसे व्यक्ति को खोज अनुज्ञप्ति अनुदत्त कर सकेगा जो,-

(क) धारा 6 के अधीन संक्रियात्मक अधिकार के अनुदत्त किये जाने के लिये पात्र है;
(ख) प्रशासनिक प्राधिकारी के समाधानप्रद रूप में यह साक्ष्य प्रस्तुत करता है कि ऐसा व्यक्ति ऐसे वैज्ञानिक प्राचलों पर आधारित, जो विहित किये जाएँ, खोज संक्रियाओं को करने के लिये अपेक्षित तकनीकी योग्यता और वित्तीय संसाधन रखता है;
(ग) आवेदित क्षेत्र के लिये ऐसी रीति में तैयार किया गया और ऐसे आँकड़ों से समर्थित जो विहित किये जाएँ, संक्रम कार्यक्रम, खोज अनुज्ञप्ति की अवधि के दौरान किये जाने वाले प्रस्तावित क्रियाकलाप को उपवर्णित करते हुए, जिसके अन्तर्गत आशयित खोज अनुसूची और उपयोग की जाने वाली पद्धतियाँ व्ययों की प्राक्कलित अनुसूची, प्रदूषण का निवारण और पर्यावरण संरक्षण करने के उपाय और ऐसे उपांतरणों के अधीन रहते हुए पर्यावरणीय रक्षोपायों की प्रभाविकता को मानीटर करना, जो प्रशासनिक प्राधिकारी ऐसे संकर्म कार्यक्रम में बनाए, प्रस्तुत करता है;
(घ) प्रशासनिक प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित खोज अनुज्ञप्ति के लिये संकर्म कार्यक्रम से विचलन नहीं करने का वचन देता है; और
(ङ) प्रशासनिक प्राधिकारी के समाधानप्रद रूप में अपनी ऐसी सभी कानूनी बाध्यताओं को पूरा कर देता है जो किसी संक्रिया सम्बन्धी अधिकार के अधीन उसे पहले,-

(i) अनुदत्त; या
(ii) विहित रीति में अन्तरित, हैं।

(2) यदि विश्वास करने का कोई युक्तियुक्त कारण है कि किसी ऐसे व्यक्ति ने, जिसे खोज अनुज्ञप्ति अनुदत्त की गई है, उपधारा (1) के खण्ड (घ) के अधीन दिये गए किसी वचनबन्ध का अतिक्रमण किया है तो प्रशासनिक प्राधिकारी खोज अनुज्ञप्ति को पर्यवसित कर सकेगा।

(3) खोज अनुज्ञप्ति के अनुदान के लिये विहित समय के भीतर प्राप्त ऐसे सभी आवेदनों पर जो उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करते हैं, एक साथ विचार किया जाएगा और खोज अनुज्ञप्ति के अनुदान के लिये चयन करने में प्रशासनिक प्राधिकारी नीचे दी गई प्रक्रिया का अनुसरण करेगा, अर्थात-

(क) जहाँ किसी एक क्षेत्र के सम्बन्ध में केवल एक आवेदन प्राप्त हुआ है, वहाँ प्रशासनिक प्राधिकारी आवेदक को खोज अनुज्ञप्ति अनुदत्त कर सकेगा;
(ख) जहाँ किसी एक ही क्षेत्र या सारभूत रूप से उसी क्षेत्र के सम्बन्ध में दो या दो से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, वहाँ अधिमान का क्रम निम्न प्रकार होगा, आर्थात:-

(I) ऐसे आवेदक को अधिमान दिया जाएगा जो ऐसे उद्योग में उपयोग के लिये खनिज की अपेक्षा करता है जिसका आवेदक पहले से ही स्वामी है या जिसने ऐसे उद्योग को स्थापित करने के लिये पर्याप्त कार्रवाई की है:

परन्तु जहाँ ऐसे प्रवर्ग के एक से अधिक आवेदन हैं वहाँ प्रशासनिक प्राधिकारी निम्नलिखित के तुलनात्मक मूल्यांकन के आधार पर अनुज्ञप्ति अनुदत्त कर सकेगा-

(i) आवेदक द्वारा नियोजित तकनीकी कार्मिकों की प्रकृति, क्वालिटी और अनुभव;
(ii) आवेदक के वित्तीय संसाधन;
(iii) आवेदक द्वारा प्रस्तावित खोज संकर्म की प्रकृति और मात्रा;
(iv) खोज कार्यक्रम के साथ प्रस्तुत आँकड़ों की प्रकृति, क्वालिटी और मात्रा;
(II) ऐसे अन्य आवेदकों के मामले में, जो उपखण्ड (I) के अन्तर्गत नहीं आते हैं, प्रशासनिक प्राधिकारी उपखण्ड (I) के परन्तुक के मद (i) से मद (iv) तक में उल्लिखित विषयों के तुलनात्मक मूल्यांकन के आधार पर अनुज्ञप्ति अनुदत्त कर सकेगा।
(4) वह अवधि जिसके लिये खोज अनुज्ञप्ति अनुदत्त की जा सकेगी, तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी।

(5) उपधारा (1) के अधीन अनुदत्त खोज अनुज्ञप्ति दो वर्ष से अनधिक अवधि के लिये नवीकृत की जा सकेगी यदि पुनर्विलोकन के पश्चात, प्रशासनिक प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि अनुज्ञप्तिधारी, प्रशासनिक प्राधिकारी द्वारा ऐसी अनुज्ञप्ति के सम्बन्ध में अनुमोदित संकर्म कार्यक्रम के अनुसार खोज संक्रिया कर रहा है और अनुज्ञप्ति के नवीकरण के लिये और लम्बी अवधि अनुज्ञप्तिधारी को खोज को पूरा करने में समर्थ बनाने के लिये आवश्यक समझी जाती है।

(6) खोज अनुज्ञप्ति के अधीन अनुदत्त किया जाने वाला क्षेत्र तीस मिनट अक्षान्तर से तीस मिनट देशान्तर रेखांश के एक ब्लाॅक से अधिक नहीं होगा:

परन्तु यदि प्रशासनिक प्राधिकारी की यह राय है कि किसी खनिज के विकास के हित में ऐसा करना आवश्यक है तो वह लेखबद्ध किये गए कारणों से, किसी व्यक्ति को इस उपधारा में विनिर्दिष्ट क्षेत्र से अधिक क्षेत्र अर्जित करने की अनुज्ञा दे सकेगा।

13. उत्पादन पट्टे का अनुदान


(1) प्रशासनिक प्राधिकारी ऐसे किसी व्यक्ति को उत्पादन पट्टा अनुदत्त करेगा जो,-

(क) धारा 6 के अधीन संक्रियात्मक अधिकार के अनुदान के लिये पात्र है;
(ख) प्रशासनिक प्राधिकारी के समाधानप्रद रूप में ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत करता है कि ऐसा व्यक्ति, ऐसे वैज्ञानिक प्राचलों पर आधारित, जो विहित किये जाएँ, उत्पादन संक्रियाओं को करने के लिये अपेक्षित तकनीकी योग्यता और वित्तीय संसाधन रखता है;
(ग) आवेदित क्षेत्र में खनिज भण्डार के व्यवस्थित विकास के लिये एक ऐसा संक्रम कार्यक्रम प्रस्तुत करता है जो ऐसी रीति में तैयार और ऐसे आँकड़ों से समर्थित हो जो विहित किये जाएँ और खोज संक्रियाओं के माध्यम से प्राप्त किये जाएँ, जिसमें पट्टे की अवधि के दौरान चलाए जाने वाले प्रस्तावित क्रियाकलाप, जिनके अन्तर्गत क्षेत्र के संसाधन निर्धारण, वाणिज्यिक उत्पादन की आशयित समस सूची, वाणिज्यिक उत्पादन और प्रसंस्करण के लिये उपयोग की जाने वाली पद्धतियाँ और प्रौद्योगिकियाँ पर्यावरण की संरक्षा तथा पर्यावरणीय रक्षोपायों की प्रभाविकता को मानीटर करने के लिये जाने वाले उपाय भी हैं, उपवर्णित हों;
(घ) प्रशासनिक अधिकारी द्वारा अनुमोदित उत्पादन पट्टे के लिये संकर्म कार्यक्रम से विचलन न करने का वचन देता है;
(ङ) प्रशासनिक प्राधिकारी के समाधानप्रद रूप में अपनी ऐसी सभी कानूनी बाध्यताओं को पूरा कर देता है जो किसी संक्रिया सम्बन्धी अधिकार के अधीन उसे पहले-
(I) अनुदत्त; या
(II) विहित रीति में अन्तरित हैं;

परन्तु अनुज्ञप्तिधारी का उसकी खोज अनुज्ञप्ति के अन्तर्गत आने वाले अपतट क्षेत्र के किसी भाग पर उत्पादन पट्टे का अनन्य अधिकार, जिसकी वह वांछा करे इस शर्त के अधीन रहते हुए होगा कि प्रशासनिक प्राधिकारी का यह समाधान हो गया है कि,-

(i) अनुज्ञप्तिधारी ने ऐसे अपतट क्षेत्र में खनिज साधनों को प्रमाणित करने के लिये खोज संक्रियाएँ की हैं;

(ii) अनुज्ञप्तिधारी ने खोज अनुज्ञप्ति के किसी निबन्धन और शर्त का भंग नहीं किया है; और
(iii) अनुज्ञप्तिधारी इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन अपात्र नहीं हो गया है।

(2) प्रशासनिक प्राधिकारी यदि उसके पास यह विश्वास करने का कोई युक्तियुक्त कारण है कि किसी व्यक्ति ने, जिसे उत्पादन पट्टा अनुदत्त किया गया है, उपधारा (1) के खण्ड (घ) के अधीन दिये गए किसी वचनबन्ध का अतिक्रमण किया है, उत्पादन पट्टे को पर्यवसित कर सकेगा।

(3) वह अवधि जिसके लिये उत्पादन पट्टा अनुदत्त किया जा सकेगा, तीस वर्ष से अधिक नहीं होगी।

(4) उपधारा (1) के अधीन अनुदत्त उत्पादन पट्टा बीस वर्ष से अनधिक की अवधि के लिये नवीकृत किया जा सकेगा, यदि पुनर्विलोकन के पश्चात, प्रशासनिक प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि पट्टाधारी ऐसे पट्टे के सम्बन्ध में प्रशासनिक प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित संकर्म कार्यक्रम के अनुसार उत्पादन संक्रियाएँ करता रहा है।

(5) उत्पादन पट्टे के अधीन क्षेत्र पन्द्रह मिनट अक्षान्तर से पन्द्रह मिनट देशान्तर रेखांश के एक ब्लाॅक से अधिक नहीं होगा:

परन्तु यदि प्रशासनिक प्राधिकारी की यह राय है कि किसी खनिज के विकास के हित में ऐसा करना आवश्यक है तो वह लेखबद्ध किये जाने वाले कारणों से किसी व्यक्ति को इस उपधारा में विनिर्दिष्ट क्षेत्र से अधिक क्षेत्र अर्जित करने की अनुज्ञा दे सकेगा।

14. संक्रिया सम्बन्धी अधिकारों के प्रारम्भ की अवधि


संक्रिया सम्बन्धी अधिकार का धारक, संक्रिया सम्बन्धी अधिकार के अनुदान के पश्चात नीचे विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर संक्रिया प्रारम्भ करेगा और तत्पश्चात ऐसी संक्रिया को उचित, कौशलपूर्ण रीति में और कुशलता से निम्न रूप में करेगा, अर्थात-

(क) आवीक्षण अनुज्ञापत्र छह मास;
(ख) खोज अनुज्ञप्ति- एक वर्ष;
(ग) उत्पादन पट्टा- दो वर्ष।

15. संक्रिया सम्बन्धी अधिकारों के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रों में सर्वेक्षण, अनुसन्धान और वैज्ञानिक अन्वेषण प्राधिकृत करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति


केन्द्रीय सरकार द्वारा, इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचना द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति या अभिकरण, अपतट क्षेत्रों में जिसके अन्तर्गत संक्रिया सम्बन्धी अधिकारों के अन्तर्गत आने वाला कोई क्षेत्र भी है सर्वेक्षण, अनुसन्धान, गोताखोरी की संक्रियाएँ और वैज्ञानिक अनुसन्धान कर सकेगा और, यथास्थिति, अनुज्ञापत्रधारी, अनुज्ञप्तिधारी या पट्टाधारी, ऐसे व्यक्ति या अभिकरण को अपने-अपने क्षेत्रों में उक्त अन्वेषण करने के लिये अनुज्ञात करेगा और ऐसी सहायता देगा जो अन्वेषण करने के लिये आवश्यक हों।

16. स्वामिस्व


(1) पट्टेदार, उत्पादन पट्टे के अन्तर्गत अपने वाले क्षेत्र से उसके द्वारा हटाए गए या उपभोग किये गए किसी खनिज की बाबत केन्द्रीय सरकार को, उस खनिज के सम्बन्ध में पहली अनुसूची में तत्समय विनिर्दिष्ट दर पर स्वामिस्व का सन्दाय करेगा।

(2) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी खनिज के सम्बन्ध में ऐसी तारीख से जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाये, उस दर को, जिस पर स्वामिस्व सन्देय होगा, बढ़ाने या घटाने के लिये पहली अनुसूची का संशोधन कर सकेगी:

परन्तु केन्द्रीय सरकार किसी खनिज के सम्बन्ध में स्वामिस्व की दर, तीन वर्ष की किसी अवधि के दौरान एक से अधिक बार नहीं बढ़ाएगी।

17. नियत किराया


(1) पट्टेदार, उत्पादन पट्टे के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्र की बाबत प्रतिवर्ष दूसरी अनुसूची में तत्समय विनिर्दिष्ट दर पर नियत किराए का केन्द्रीय सरकार को सन्दाय करेगा:

परन्तु जहाँ पट्टेदार, धारा 16 के अधीन ऐसे पट्टे के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्र से उसके द्वारा हटाए गए या उपभोग किये गए किसी खनिज के लिये स्वामिस्व के सन्दाय के लिये दायी हो जाता है वहाँ वह उस क्षेत्र की बाबत स्वामिस्व या नियत किराए का, इनमें से जो भी अधिक हो, सन्दाय करने का दायी होगा।

(2) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उत्पादन पट्टे के अन्तर्गत आने वाले किसी क्षेत्र के सम्बन्ध में उस दर को, जिस पर नियत किराया सन्देय होगा, बढ़ाने या घटाने के लिये दूसरी अनुसूची का संशोधन कर सकेगी और ऐसी वृद्धि या कटौती उस तारीख से प्रभावी होगी जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाये:

परन्तु केन्द्रीय सरकार, नियत किराए की दर, तीन वर्ष की किसी अवधि के दौरान एक से अधिक बार नहीं बढ़ाएगी।

18. अन्तरराष्ट्रीय समुद्र-तल प्राधिकरण के प्रति अभिदाय


प्रत्येक ऐसा पट्टेदार, जिसकी उत्पादन संक्रिया का विस्तार उस आधार रेखा से जिससे राज्य क्षेत्रीय समुद्र की चैड़ाई मापी जाती है, दो सौ समुद्री मील से परे होता है केन्द्रीय सरकार को इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित अन्य सन्दायों के अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र समुद्र विधि अभिसमय, 1982 के अनुच्छेद 82 के अधीन केन्द्रीय सरकार की बाध्यता को पूर्ण करने के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण को सन्दत्त की जाने वाली रकम का, अग्रिम सन्दाय करेगा।

19. व्यक्तियों और सम्पत्ति की सुरक्षा


(1) धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन आवीक्षण संक्रिया या खोज संक्रिया या उत्पादन संक्रिया करने वाला अनुज्ञापत्रधारी, अनुज्ञप्तिधारी, पट्टेदार या कोई अन्य व्यक्ति अथवा उक्त धारा की उपधारा (1) के परन्तुक के अधीन आवीक्षण संक्रिया या खोज संक्रिया करने वाला कोई अभिकरण यह सुनिश्चित करने के लिये उत्तरदायी होगा कि सम्बन्धित संक्रिया, उसमें लगे व्यक्तियों की, जिनमें गोताखोर सम्मिलित हैं, सुरक्षा और स्वास्थ्य और सम्पत्ति की रक्षा और सुरक्षा का सम्यक ध्यान रखते हुए की जा रही है।

(2) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे अपतट क्रियाकलापों के सम्बन्ध में, जो आवश्यक हों, सुरक्षा जोनों की घोषणा कर सकेगी और व्यक्तियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को तथा इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत संक्रियाओं में प्रयुक्त सम्पत्ति की सुरक्षा को विनियमित करने, उनके कार्यान्वयन और उनसे संसक्त विषयों के लिये सन्नियम विहित कर सकेगी।

(3) धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन आवीक्षण संक्रिया या खोज संक्रिया या उत्पादन संक्रिया में लगे हुए किसी अनुज्ञापत्रधारी, अनुज्ञप्तिधारी, पट्टाधारी या किसी अन्य व्यक्ति या उक्त धारा की उपधारा (1) के परन्तुक के अधीन आवीक्षण संक्रिया या खोज संक्रिया में लगे किसी अन्य अभिकरण द्वारा उपधारा (1) के उपबन्धों या उपधारा (2) के अधीन विहित सन्नियमों के उल्लंघन की दशा में, तब तक ऐसे उल्लंघन के लिये भी उत्तरदायी समझा जाएगा जब तक कि वह यह प्रमाणित न कर दे कि उसने ऐसे उल्लंघन को निवारित करने के लिये उन उपबन्धों को प्रवर्तित करने के लिये अपने साधनों के भीतर सभी युक्तियुक्त पूर्वावधानियाँ बरती थीं।

20. प्रदूषण का निवारण और नियंत्रण तथा समुद्री पर्यावरण का संरक्षण


(1) संक्रियात्मक अधिकारों का प्रत्येक धारक, इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों तथा किसी अन्य विधि और तद्धीन बनाए गए नियमों, जो तत्समय प्रदूषण के निवारण और नियंत्रण तथा समुद्री पर्यावरण के संरक्षण के लिये प्रवृत्त हो, के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत संक्रियाएँ करेगा।

(2) संक्रियात्मक अधिकार का प्रत्येक धारक, अपतट क्षेत्रों में उसके संक्रियात्मक अधिकार से सम्बन्धित क्रियाकलाप के परिणामस्वरूप समुद्री पर्यावरण के किसी नुकसान या किसी प्रदूषण के लिये दायी होगा और ऐसे प्रतिकर का जो, यथास्थिति, प्रदूषण या नुकसान की मात्रा को दृष्टि में रखते हुए प्रशासनिक प्राधिकारी द्वारा अवधारित किया जाये, सन्दाय करेगा।

(3) केन्द्रीय सरकार, अपतट क्षेत्रों में क्रियाकलाप के कारण हुए प्रदूषण के निवारण और नियंत्रण तथा समुद्री पर्यावरण के संरक्षण के लिये किये जाने वाले उपाय विहित कर सकेगी।

21. केन्द्रीय सरकार और प्रशासनिक प्राधिकारी की निदेश देने की शक्ति


(1) अनुज्ञापत्रधारी, अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार उन निदेशों का पालन करेगा जो केन्द्रीय सरकार या प्रशासनिक प्राधिकारी अपतट खनिजों के संरक्षण और व्यवस्थित विकास, प्रदूषण के निवारण, समुद्री पर्यावरण संरक्षण, तटीय भूक्षरण के निवारण या जीवन और सम्पत्ति को, जिसमें समुद्री जीवन भी सम्मिलित है, खतरे के निवारण के लिये, समय-समय पर, जारी करे।

(2) अनुज्ञापत्रधारी, अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार सक्षम प्राधिकारी या तटरक्षक द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और राष्ट्रीय अखण्डता के सम्बन्ध में समय-समय पर जारी किये जाने वाले निदेशों का पालन करेगा।

स्पष्टीकरण


“सक्षम प्राधिकारी” से उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिये केन्द्रीय सरकार के भारत की रक्षा से सम्बन्धित मंत्रालय द्वारा नियुक्त सक्षम प्राधिकारी अभिप्रेत है।

अध्याय 3


प्रवेश, निरीक्षण, तलाशी और अभिग्रहण की शक्ति


22. प्रवेश, निरीक्षण, तलाशी और अभिग्रहण की शक्ति


(1) किसी खान या परित्यक्त खान के वास्तविक या भावी कार्यकरण की स्थिति को अभिनिश्चित करने के प्रयोजनार्थ या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों से सम्बन्धित किसी अन्य प्रयोजन के लिये केन्द्रीय सरकार द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी,-

(क) सभी युक्तियुक्त समयों पर किसी खान में प्रवेश कर सकेगा और उसका निरीक्षण कर सकेगा;
(ख) किसी खान से प्राप्त किये गए खनिजों के स्टाक की तुलाई करवा सकेगा, उसका नमूना या माप ले सकेगा;
(ग) ऐसी किसी खान का सर्वेक्षण कर सकेगा और नमूना तथा माप ले सकेगा;
(घ) ऐसे किसी व्यक्ति के जिसके नियंत्रण में कोई खान हो या जो उससे सम्बन्धित हो, कब्जे या शक्ति के किसी दस्तावेज, बही, रजिस्टर या अभिलेख की परीक्षा कर सकेगा और उस पर पहचान चिन्ह लगा सकेगा तथा ऐसे दस्तावेज, बही, रजिस्टर या अभिलेख से उद्धरण ले सकेगा या उसकी प्रतियाँ बना सकेगा;
(ङ) खण्ड (घ) में निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा ऐसे किसी दस्तावेज, बही, रजिस्टर और अभिलेख को पेश किये जाने का आदेश दे सकेगा; और
(च) ऐसे किसी व्यक्ति की, जिसके नियंत्रण में कोई खान है या जिससे वह सम्बन्धित है, परीक्षा कर सकेगा।
(2) कोई प्राधिकृत अधिकारी, यह अभिनिश्चित करने के प्रयोजन के लिये कि इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम की अपेक्षाओं का पालन किया गया है या नहीं, वारंट के साथ या जहाँ सुविधापूर्वक वारंट अभिप्राप्त करना सम्भव न हो, वहाँ वारंट के बिना,-

(क) किसी खान की तलाशी ले सकेगा;
(ख) ऐसे किसी जलयान को, जो इस अधिनियम के अधीन विनियमित किसी क्रियाकलाप में लगा है या जिसके लगे होने की सम्भावना है, रोक सकेगा या उस पर चढ़ सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा; और
(ग) ऐसे व्यक्ति से, जिसके पास तत्समय खान या ऐसे जलयान की कमान है या प्रभार है, उस जलयान या खान से सम्बन्धित किसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र, लॉग बुक या अन्य दस्तावेज को पेश करने की अपेक्षा कर सकेगा और उपधारा (1) की अपेक्षाओं को अभिनिश्चित करने के लिये, यथास्थिति, ऐसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र, लॉग बुक या अन्य दस्तावेज की, परीक्षा कर सकेगा या उसकी प्रतियाँ ले सकेगा।

(3) जहाँ प्राधिकृत अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि किसी जलयान या खान का इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के किसी उपबन्ध का उल्लंघन करने के लिये, यथास्थिति, उपयोग किया गया है या किया जा रहा है या किया जाने वाला है तो वह वारंट के साथ या जहाँ सुविधापूर्वक वारंट अभिप्राप्त करना सम्भव न वहाँ वारंट के बिना-

(क) ऐसे जलयान या खान का, जिसके अन्तर्गत ऐसे जलयान के फलक पर पाया गया या ऐसे जलयान से सम्बन्धित कोई गियर, उपस्कर, सामग्री या स्थोरा भी है, अभिग्रहण कर सकेगा या उसे निरुद्ध कर सकेगा तथा जलयान के फलक पर पाये गए किसी खनिज का अभिग्रहण कर सकेगा;
(ख) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के किसी उपबन्ध के उल्लंघन से सम्बन्धित किसी साक्ष्य का अभिग्रहण कर सकेगा;

(ग) ऐसे व्यक्ति से, जिसके पास तत्समय इस प्रकार अभिगृहीत या निरुद्ध किये गए जलयान, या खान के प्लेटफार्म या परिनिर्माण की कमान है या प्रभार है, ऐसे जलयान, प्लेटफार्म या परिनिर्माण को किसी विनिर्दिष्ट पत्तन पर लाये जाने की अपेक्षा कर सकेगा;
(घ) ऐसे किसी व्यक्ति को, जिसके बारे में ऐसे अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसने ऐसा अतिक्रमण किया है, गिरफ्तार कर सकेगा:

परन्तु प्राधिकृत अधिकारी, ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने के पश्चात और उसे सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश करने से पूर्व, प्रशासनिक प्राधिकारी को गिरफ्तारी और इस प्रकार गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को संसूचित किये गए गिरफ्तारी के आधारों के सम्बन्ध में सूचित करेगा।

(4) प्राधिकृत अधिकारी, उपधारा (3) के अधीन कोई कार्रवाई करते समय उतने बल का प्रयोग कर सकेगा जो युक्तियुक्त रूप से आवश्यक हो।

(5) जहाँ उपधारा (3) के अधीन किसी जलयान या अन्य वस्तुओं का अभिग्रहण किया जाता है या उन्हें निरुद्ध किया जाता है वहाँ,-

(क) इस प्रकार अभिग्रहण किये गए या निरुद्ध किये गए जलयान या अन्य वस्तुओं को, यथासम्भव शीघ्र, उस न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा जो इस अधिनियम के अधीन अपराध का विचारण करने के लिये सक्षम है और न्यायालय, ऐसे जलयान या वस्तुओं के, इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन, यथास्थिति, ऐसे जलयान या वस्तुओं से सम्बन्धित किसी अपराध के अभियोजन के लिये किन्हीं कार्यवाहियों के पूर्ण होने तक केन्द्रीय सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी के पास प्रतिधारण या अभिरक्षा के लिये ऐसा आदेश करेगा जो वह ठीक समझे:

परन्तु न्यायालय, स्वामी या उस व्यक्ति द्वारा जिसके समादेशन या प्रभार में तत्समय जलयान या खान है, किये गए आवेदन पर, इस प्रकार अभिगृहीत या निरुद्ध किये गए जलयान या अन्य वस्तुओं की निर्मुक्ति का आदेश, स्वामी या उस व्यक्ति को, जिसकी कमान या प्रभार में वह जलयान या खान तत्समय है, इस प्रकार अभिगृहीत या निरुद्ध किये गए जलयान या वस्तुओं के मूल्य के पचास प्रतिशत से अन्यून रकम की नकद या बैंक प्रत्याभूति देने पर दे सकेगा;
(ख) प्रशासनिक प्राधिकारी को, ऐसे अभिग्रहण और उसके ब्यौरों की सूचना प्राधिकृत अधिकारी द्वारा की जाएगी।

(6) जहाँ इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के किये जाने के अनुसरण में, अपतट क्षेत्र की सीमाओं से परे किसी जलयान का पीछा किया जाता है, वहाँ इस धारा द्वारा किसी प्राधिकृत अधिकारी को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग उन परिस्थितियों में और उस सीमा तक ऐसी सीमाओं से परे जो अन्तरराष्ट्रीय विधि और राज्य प्रथा द्वारा मान्यता प्राप्त है किया जा सकेगा।

(7) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिसे इस धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों के आधार पर कोई आदेश या वारंट जारी किया या दिया जाता है, ऐसे आदेश या वारंट का पालन करने के लिये वैध रूप से आबद्ध होगा।

स्पष्टीकरण


इस धारा के प्रयोजन के लिये,-
(i) “प्राधिकृत अधिकारी” से केन्द्रीय सरकार का ऐसा अधिकारी अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में उस रूप में अधिसूचित किया गया हो;
(ii) “वारंट” से, यथास्थिति, ऐसे न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट द्वारा, जिसकी अधिकारिता में वह स्थान अवस्थित है, जहाँ वारंट निष्पादित किया जाता है, जारी किया गया वारंट अभिप्रेत है।

अध्याय 4


अपराध


23. अपराध


(1) (क) जो कोई इस अधिनियम के अधीन अनुदत्त, यथास्थिति, किसी अनुज्ञापत्र, अनुज्ञप्ति या पट्टे के बिना अपतट क्षेत्र में कोई आवीक्षण संक्रिया, खोज संक्रिया या उत्पादन संक्रिया, करेगा, वह कारावास से जिसकी अवधि पाँच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो पचास हजार रुपए तक हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
(ख) ऐसा अनुज्ञापत्रधारी, अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार जो धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन कोई आँकड़े, सूचना या दस्तावेज उसमें उपबन्धित रीति से नहीं देगा वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो पच्चीस हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

(ग) धारा 5 के अतिक्रमण में प्रयुक्त या नियोजित किसी जलयान का, उसके गियर, नावों, भण्डार और स्थोरा के साथ, उक्त धारा के अतिक्रमण में प्राप्त किये गए या संसाधित किन्हीं खनिजों सहित यदि कोई हों, अधिहरण कर लिया जाएगा।

(घ) जो कोई इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अतिक्रमण में प्राप्त किये गए, संसाधित या प्रतिधारित किन्हीं खनिजों का लदान, परिवहन उनके विक्रय की प्रस्थापना, उनका विक्रय, क्रय, आयात, निर्यात करेगा या उन्हें अभिरक्षा, नियंत्रण या कब्जे में रखेगा, वह कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो पचास लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(2) जो कोई-

(क) धारा 22 में निर्दिष्ट किसी प्राधिकृत अधिकारी को इस अधिनियम के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने में साशय बाधा पहुँचाएगा; या
(ख) धारा 22 में निर्दिष्ट प्राधिकृत अधिकारी या उसके सहायकों को जलयान पर चढ़ने या खान में प्रवेश करने के लिये युक्तियुक्त सुविधाएँ प्रदान करने में या ऐसे अधिकारी या सहायकों को जलयान या खान में प्रवेश करते समय या जब वे ऐसे जलयान या खान में उपस्थित हों, पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने में असफल रहेगा; या
(ग) जलयान या खान को रोकने में या, यथास्थिति, ऐसे जलयान के फलक पर अथवा खान में, जब धारा 22 में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा प्रदत्त ऐसे करने की अपेक्षा की जाये तो, अनुज्ञप्ति या अनुज्ञापत्र, लॉगबुक या अन्य दस्तावेज करने में असफल रहेगा;
घ) इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति की विधिपूर्ण गिरफ्तारी में किसी प्रकार से हस्तक्षेप, विलम्ब करेगा या उसे निवारित करेगा, वह कारावास से जिसकी अवधि पाँच वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो पचास हजार रुपए तक का हो सकता है या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(3) जो कोई उपधारा (1) और उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट उपबन्धों से भिन्न इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के किसी अन्य उपबन्ध का उल्लंघन करेगा, वह कारावास से जिसकी अवधि पाँच वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो एक करोड़ रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डित किया जाएगा और चालू रहने वाले उल्लंघन की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिये जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन जारी रहता है पाँच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

24. कम्पिनयों द्वारा अपराध


(1) जहाँ इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है वहाँ ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो, उस अपराध के किये जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिये उस कम्पनी का प्रत्यक्षतः भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएँगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्रवाई किये जाने और दण्डित किये जाने के भागी होंगे:

परन्तु इस उपधारा की कोई बात ऐसे किसी व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबन्धित दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किये जाने का निवारण के लिये सब सम्यक तत्परता बरती थी।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहाँ इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि अपराध, कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है वहाँ ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्रवाई किये जाने और दण्डित किये जाने का भागी होगा।

स्पष्टीकरण


इस धारा के प्रयोजन के लिये,-

(क) “कम्पनी” से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; और
(ख) फर्म के सम्बन्ध में, “निदेशक” से उस फर्म का कोई भागीदार अभिप्रेत है।

25. विचारण का स्थान


तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन विस्तारित किन्हीं अन्य अधिनियमितियों के अधीन कोई अपराध करने वाले व्यक्ति का ऐसे अपराध के लिये विचारण ऐसे स्थान पर किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त निदेशित करे।

26. अभियोजन के लिये केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी


इस अधिनयम के अधीन किये गए किसी अपराध की बाबत कोई अभियोजन केन्द्रीय सरकार या ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी की, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त लिखित रूप में आदेश द्वारा प्राधिकृत किया जाये, पूर्व मंजूरी के सिवाय संस्थित नहीं किया जाएगा।

27. सेशन न्यायालय द्वारा विचारण किये जाने योग्य अपराध


दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन सभी अपराधों का विचारण सेशन न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

अध्याय 5


सिविल दायित्व और न्यायनिर्णयन


28. सिविल दायित्व और न्यायनिर्णयन


(1) कोई व्यक्ति जिसको इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञापत्र, अनुज्ञप्ति या पट्टा अनुदत्त किया जाता है-

(क) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा अधिरोपित साधारण निबन्धनों और शर्तों का उल्लंघन करेगा तो वह केन्द्रीय सरकार को ऐसी रकम का जो पाँच लाख रुपए से कम नहीं होगी और जो एक करोड़ रुपए तक की हो सकेगी, सन्दाय करने का दायी होगा;
(ख) ऐसे विशिष्ट निबन्धनों और शर्तों का जो, यथास्थिति, ऐसे अनुज्ञापत्रधारी, अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार को ही लागू होती हैं, उल्लंघन करेगा तो वह खण्ड (क) के अधीन दायित्व के अलावा, केन्द्रीय सरकार को ऐसी अतिरिक्त रकम का भी सन्दाय करने का दायी होगा जो एक लाख रुपए से कम की नहीं होगी और जो दस लाख रुपए तक की हो सकेगी।

(2) केन्द्रीय सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिये अभिहित प्राधिकृत अधिकारी के सिवाय, किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी को, उपधारा (1) के खण्ड (क) और खण्ड (ख) से सम्बन्धित मामलों को सुनने और उनका विनिश्चय करने की अधिकारिता नहीं होगी।

(3) केन्द्रीय सरकार का कोई अधिकारी, जिसे उपधारा (2) के अधीन अभिहित प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन फाइल करने के लिये उस सरकार द्वारा प्राधिकृत किया गया है, यथास्थिति, अनुज्ञप्तिधारी, पट्टेदार या अनुज्ञापत्रधारी के विरुद्ध ऐसी रीति में, जो विहित की जाये, उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन उसके द्वारा किये गए सिविल दोष को उपदर्शित करते हुए, आवेदन फाइल करेगा।

(4) जब उपधारा (3) के अधीन कोई आवेदन, उपधारा (2) के अधीन अभिहित किसी प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष फाइल किया जाता है तब वह ऐसे आवेदन की प्रति के साथ सूचना उस व्यक्ति पर, जिसके विरुद्ध आवेदन किया जाता है, विहित रीति में आवेदन का उत्तर फाइल करने का अवसर देने के लिये, तामील करेगा और प्राधिकृत अधिकारी, आवेदन के समर्थन में या विरोध में प्रस्तुत किये गए साक्ष्य पर विचार करने और सुनवाई का अवसर देने के पश्चात मामले का निपटारा करेगा।

(5) उपधारा (2) के अधीन अभिगृहित प्राधिकृत अधिकारी को, इस धारा के प्रयोजनों के लिये, निम्नलिखित विषयों की बाबत ऐसी सभी शक्तियाँ प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय में किसी वाद का विचारण करते समय निहित होती हैं, अर्थात:

(क) किसी व्यक्ति को समन करना और उसे हाजिर कराना और शपथ पर उसकी परीक्षा करना;
(ख) दस्तावेजों के प्रकटीकरण और उन्हें पेश कराने की अपेक्षा करना;
(ग) शपथपत्र पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिये कमीशन निकालना;
(ङ) अपने विनिश्चयों का पुनर्विलोकन करना; और
(च) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाये।

अध्याय 6


प्रकीर्ण


29. अपतट क्षेत्रों पर अधिनियमितियों का विस्तार


केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,-

(क) भारत में तत्समय प्रवृत्त किसी अधिनियमिति या उसके किसी भाग को ऐसे निर्बन्धनों और उपान्तरों सहित, जिन्हें वह ठीक समझे, अपतट क्षेत्र या उसके किसी भाग तक विस्तारित कर सकेगी; और
(ख) ऐसे उपबन्ध कर सकेगी जिन्हें वह ऐसी अधिनियमिति के प्रवर्तन को सुकर बनाने के लिये आवश्यक समझे, और इस प्रकार विस्तारित किसी अधिनियमिति का ऐसा प्रभाव होगा मानो, यथास्थिति, अपतट क्षेत्र या उसका भाग, भारत के राज्य क्षेत्र का भाग हो।

30. अपराधों का शमन


(1) इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का शमन, अभियोजन के संस्थित किये जाने के पूर्व या पश्चात, प्रशासनिक अधिकारी द्वारा या उस अपराध के सम्बन्ध में केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा, उस सरकार के खाते में ऐसी धनराशि जिसे, यथास्थिति, वह प्रशासनिक प्राधिकारी, या अधिकारी विनिर्दिष्ट करे, सन्दत्त कर दिये जाने पर किया जा सकेगा:

परन्तु ऐसी राशि किसी भी दशा में उस जुर्माने की अधिकतम रकम से अधिक नहीं होगी जो इस प्रकार शमन किये गए अपराध के लिये इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित की जा सकेगी।

(2) जहाँ उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध का शमन किया जाता है वहाँ इस प्रकार शमन किये गए अपराध की बाबत अपराधकर्ता के विरुद्ध, यथास्थिति, कोई कार्यवाही या आगे कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी और यदि अपराधकर्ता अभिरक्षा में है तो उसे तुरन्त उन्मोचित कर दिया जाएगा।

31. कतिपय राशियों की भू-राजस्व के रूप में वसूली


इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन या किसी आवीक्षण अनुज्ञापत्र, खोज अनुज्ञप्ति या उत्पादन पट्टे के निबन्धनों और शर्तों के अधीन केन्द्रीय सरकार को शोध्य कोई अनुज्ञप्ति फीस, स्वामित्व, नियत किराया, या अन्य राशि, प्रशासनिक प्राधिकारी द्वारा जारी किये गए प्रमाणपत्र पर, उसी रीति से वसूल की जा सकेगी मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो और प्रत्येक ऐसी राशि और उस पर शोध्य ब्याज, यथास्थिति, अनुज्ञापत्रधारी, अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार की आस्तियों पर प्रथम भार होगी।

32. शक्तियों का प्रत्यायोजन


केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, वह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य कोई शक्ति, ऐसे विषय के सम्बन्ध में और ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, के अधीन रहते हुए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएँ, उस सरकार के अधीनस्थ ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा, जिसे इस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाये, प्रयोग की जा सकेगी।

33. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिये संरक्षण


इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिये आशयित किसी बात के लिये कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी।

34. अपीलें


(1) उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन प्रशासनिक अधिकारी या किसी अधिकारी द्वारा किये गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे आदेश के विरुद्ध केन्द्रीय सरकार को अपील कर सकेगा।

(2) ऐसी प्रत्येक अपील, उस तारीख से, जिसको आक्षेपित आदेश किया गया था, विहित अवधि के भीतर की जाएगी:

परन्तु केन्द्रीय सरकार का यदि यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी ऐसी विहित अवधि के भीतर अपील करने से पर्याप्त हेतुक वश निवारित हुआ था तो वह अपीलार्थी को उतनी और अवधि के भीतर, जो विहित की जाये, अपील करने के लिये अनुज्ञा दे सकेगी।

(3) केन्द्रीय सरकार, ऐसी अपील प्राप्त होने पर, अपील के पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने और ऐसी जाँच करने के पश्चात जो वह उचित समझे, जिस आदेश के विरुद्ध अपील की गई है, उसकी पुष्टि करते हुए, उपान्तरित करते हुए या उलटते हुए ऐसा आदेश कर सकेगी जो वह ठीक समझे, या उस मामले को ऐसे निदेश सहित, जो वह उचित समझे, अतिरिक्त साक्ष्य, यदि आवश्यक हो, लेकर नया आदेश करने के लिये वापस भेज सकेगी।

35. नियम बनाने की शक्ति


(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी।

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिये उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात-

(क) धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन किसी आवीक्षण अनुज्ञापत्र, खोज अनुज्ञप्ति या उत्पादन पट्टे के निबन्धन और शर्तें;
(ख) धारा 6 के खण्ड (ख) के अधीन संक्रिया अधिकार देने के लिये शर्तें;
(ग) धारा 6 के परन्तुक के अधीन विहित किये जाने वाले पदार्थ;
(घ) धारा 12 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन वैज्ञानिक प्राचलों के आधार पर खोज संक्रियाएँ आरम्भ करने के लिये अपेक्षित तकनीकी योग्यता और वित्तीय संसाधन;
(ङ) वह रीति, जिसमें धारा 12 की उपधारा (1) के खण्ड (ग) के अधीन कोई संकर्म कार्यक्रम तैयार किया जाएगा और वे आँकड़े, जिनके द्वारा संकर्म के कार्यक्रम को समर्थन दिया जाएगा;
(च) धारा 12 की उपधारा (1) के खण्ड (ड) के उपखण्ड (ii) में निर्दिष्ट, अन्तरण की रीति;
(छ) वह समय जिसके भीतर धारा 12 की उपधारा (3) के अधीन आवेदन प्राप्त किये जाने हैं;
(ज) धारा 13 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन वैज्ञानिक प्राचलों के आधार पर उत्पादन कार्य आरम्भ करने के लिये अपेक्षित तकनीकी योग्यता और वित्तीय साधन;
(झ) वह रीति, जिसमें धारा 13 की उपधारा (1) के खण्ड (ग) के अधीन कोई संक्रम कार्यक्रम तैयार किया जाएगा और वे आँकड़े जिनसे संक्रम कार्यक्रम को समर्थन दिया जाएगा;
(ञ) धारा 13 की उपधारा (1) के खण्ड (ङ) के उपखण्ड (ii) में निर्दिष्ट अन्तरण की रीति;
(ट) धारा 19 की उपधारा (2) के अधीन इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत संक्रियाओं में नियोजित व्यक्तियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य तथा सम्पत्ति की सुरक्षा, विनियमित करने के लिये सन्नियम, उनका क्रियान्वयन और उससे संसक्त विषय;
(ठ) धारा 20 की उपधारा (3) के अधीन अपतट क्षेत्रों में कार्यकलापों के कारण प्रदूषण के निवारण और नियंत्रण और सामुद्रिक पर्यावरण की संरक्षा के लिये किये जाने वाले उपाय;
(ड) धारा 28 की उपधारा (3) के अधीन आवेदन फाइल करने की रीति;
(ढ) धारा 28 की उपधारा (4) के अधीन उत्तर फाइल करने की रीति;
(ण) धारा 28 की उपधारा (5) के खण्ड (च) के अधीन कोई अन्य विषय;
(त) वह अवधि जिसके भीतर धारा 34 की उपधारा (2) के अधीन अपील फाइल की जाएगी और वह अतिरिक्त अवधि जो उक्त धारा की उपधारा (2) के परन्तुक के अधीन अनुज्ञात की सकेगी;
(थ) कोई अन्य विषय जो अधिनियम के अधीन विहित किया जाना है या विहित किया जाये।

(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह ऐसी कुल तीस दिन की अवधि के लिये सत्र में हो, जो एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्र में पूरी हो सकती है, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्र के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिये सहमत हो जाएँ या दोनों सदन इस बात से सहमत हो जाएँ कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो ऐसा नियम, यथास्थिति, तत्पश्चात केवल ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, तथापि उस नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

36. विनिर्दिष्ट मामलों में शिथलीकरण


इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम में अन्तर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, यदि उसकी यह राय है कि अपतट खनिज विकास के हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो वह आदेश द्वारा और लेखबद्ध किये जाने वाले कारणों से किसी विनिर्दिष्ट मामले में, ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर जो वह ऐसे आदेश में इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, किसी व्यक्ति को किसी संक्रियात्मक अधिकार की मंजूरी, नवीकरण या अन्तरण को प्राधिकृत कर सकेगी।

37. व्यक्तियों का लोक सेवक होना


प्रशासनिक प्राधिकारी या कोई अन्य अधिकारी, इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों के अनुसरण में कार्य करते समय या कार्य करना तात्पर्यित होते समय, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझा जाएगा।

38. कठिनाइयों को दूर करना


(1) यदि इस अधिनियम के या धारा 29 के अधीन विस्तारित किसी अधिनियमिति के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबन्ध कर सकेगी जो, यथास्थिति, इस अधिनियम या ऐसी अधिनियमिति के उपबन्धों से असंगत न हों, जो उसे कठिनाई को दूर करने के लिये आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों:

परन्तु इस धारा के अधीन, कोई आदेश,-

(क) इस अधिनियम के किसी उपबन्ध को प्रभावी करने में उत्पन्न किसी कठिनाई की दशा में, ऐसे उपबन्ध के प्रारम्भ से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात नहीं किया जाएगा;
(ख) धारा 29 के अधीन विस्तारित किसी अधिनियमिति के उपबन्धों को प्रभावी करने में उत्पन्न किसी कठिनाई की दशा में, ऐसी अधिनियमिति के विस्तार से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात, नहीं किया जाएगा।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसके किये जाने के पश्चात यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।

पहली अनुसूची


{नियम 16 (1) देखिए}


स्वामिस्व की दरें


 

1

ब्राउन इल्मेनाइट (ल्यूकोसिन) , इल्मेनाइट, रूटाइल और जरकान

मूल्यानुसार आधार पर विक्रय कीमत का दो प्रतिशत।

2

डोलोमाइट

चालीस रुपए प्रति टन।

3

गार्नेट

मूल्यानुसार आधार पर विक्रय कीमत का तीन प्रतिशत।

4.

स्वर्ण

उत्पादित अयस्क में अन्तिवष्ट स्वर्ण धातु पर प्रभार्य लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन कीमत (जिसे सामान्य रूप से ‘लंदन कीमत’ कहा जाता है) का डेढ़ प्रतिशत।

5.

चूना पत्थर और चूना पंक

चालीस रुपए प्रति टन।

6.

मैंगनीज अयस्क

मूल्यानुसार आधार पर विक्रय कीमत का तीन प्रतिशत।

7.

मोनेजाइट

125 रुपए प्रतिटन।

8.

सिलीमेनाइट

मूल्यानुसार आधार पर विक्रय कीमत का ढाई प्रतिशत।

9.

चाँदी

उत्पादित अयस्क में अन्तिवष्ट चाँदी धातु पर प्रभार्य लंदन मेटल एक्सचेंज।

10.

सभी अन्य खनिज जो इसमें इसके पूर्व विनिर्दिष्ट नहीं किये गए हैं

मूल्यानुसार आधार पर विक्रय कीमत का दस प्रतिशत।

 

दूसरी अनुसूची


{नियम 17(1) देखिए}


नियत किराए की दरें


प्रति मानक ब्लाॅक प्रतिवर्ष नियत किराए की दरें, रुपयों में


 

आकार

पट्टे का पहला वर्ष

पट्टे के दूसरे वर्ष से पाँचवें वर्ष तक

पट्टे के छठवें वर्ष से दसवें वर्ष तक

पट्टे के ग्यारहवें वर्ष से आगे तक

5 मिनट देशान्तर से 5 मिनट अक्षान्तर का मानक ब्लाॅक

कुछ नहीं

50,000 रु.

1,00,000 रु०

2,00,000 रु.

 


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