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हमें कैसी हवा चाहिए

Author: 
सुरेश जैन
Source: 
अमर उजाला, 09 मई, 2018

वायु प्रदूषणवायु प्रदूषण (फोटो साभार - हिन्दुस्तान टाइम्स)विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया भर के शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति पर नये आँकड़े जारी किये हैं। इनसे घरों और आसपास के परिवेश में वायु प्रदूषण की स्थिति का पता चलता है, जोकि अनेक बीमारियों की जड़ भी हैं।

हाँ, ये आँकड़े डरावनी तस्वीर पेश करते हैं, जब पता चलता है कि खासतौर से विकासशील देशों में हर दस में से नौ व्यक्ति प्रदूषित हवा में साँस लेने को मजबूर हैं। इसमें बताया गया है कि हर साल 70 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण होती है।

इन आँकड़ों के आधार पर अनेक लोगों का कहना है कि विभिन्न शहरों का प्रदर्शन भिन्न तरह का है। हालांकि विमर्श का मुद्दा यह है कि घरों में और आस-पास के परिवेश में वायु प्रदूषण जिस स्तर पर पहुँच चुका है, उससे स्वास्थ्य के लिये गम्भीर संकट पैदा हो गया है और यही सही समय है जब सारी सरकारी एजेंसियों, एनजीओ, नागरिक समाज और सामान्य तौर पर सारे नागरिकों को इस मुद्दे को गम्भीरता से लेना चाहिए और इस चुनौती से निपटने के लिये अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ निभानी चाहिए।

डब्ल्यूएचओ ने खास तौर से जिक्र किया है कि पार्टिकुलेट मैटर से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिये विभिन्न देशों ने कदम उठाये हैं।

उदाहरण के लिये भारत की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने देशभर में गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाली 3.7 करोड़ महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराये हैं, ताकि उन्हें घर की जरूरत के लिये साफ ईंधन मिल सके। इस तरह के कदमों और योजनाओं से निर्विवाद रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब लोगों को साफ ईंधन मिल सकेगा, क्योंकि इन्हीं लोगों के वायु प्रदूषण से प्रभावित होने का खतरा सर्वाधिक होता है।

अब यह महत्त्वपूर्ण हो गया है कि व्यापक लक्ष्य के लिये बहु-विषयक तरीके पर विचार किया जाये, ताकि पर्यावरण तथा मनुष्यों की सेहत बेहतर हो सके। अब भारत को इसे चुनौती के बजाय एक अवसर की तरह लेना चाहिये और सभी केन्द्रीय तथा राज्य एजेंसियों को एकजुट होकर एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुये स्वच्छ हवा के व्यापक लक्ष्य के लिये काम करना चाहिये।

हाल ही में पर्यावरण, वन और मौसम परिवर्तन मंत्रालय ने नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम का मसौदा वितरित किया है, जिसमें पूरे देश में वायु प्रदूषण से निपटने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार की ओर से यह महत्त्वपूर्ण कदम है, जिसके जरिये हम दिखा सकते हैं कि हम वायु प्रदूषण की मौजूदा स्थिति और उसके प्रभावों को लेकर कितने गम्भीर हैं।

एनसीएपी के मसौदे में शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में नये निगरानी केन्द्रों की स्थापना, क्षमता निर्माण और ढाँचा, उत्सर्जन सूची और जागरुकता तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों आदि पर जोर दिया गया है।

हालांकि इसके लिये कोई स्पष्ट रोड मैप नहीं है, कि किस प्रदूषक का प्रदूषण स्तर कितना है और यह वायु प्रदूषण को कब और कैसे नियंत्रित कर सकता है। एनसीएपी को परिवेश और घरों दोनों जगहों पर लक्षित क्षेत्रों और एकीकृत दृष्टिकोण के साथ वायु प्रदूषण का स्तर कम करने के लिये निष्पक्ष तथा हासिल की जा सकने वाली समय सीमा पर विचार करना चाहिये।

सरकार को इस मुहिम में शहरी स्थानीय निकायों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, परिवहन विभाग, पर्यावरण एजेंसियाँ, एनजीओ और नागरिक समाज आदि को शामिल करना चाहिये।

एनसीएपी के उद्देश्यों पर अमल करने के लिये और इसके लक्ष्यों को हासिल करने के लिये राज्य स्तर पर पर्याप्त ढाँचे, मानव संसाधन और वित्तीय मदद की जरूरत होगी। राज्य स्तर पर क्षमता के विकास के लिये उद्योगों और शैक्षणिक समुदाय की मदद ली जा सकती है। सरकार को स्वच्छ हवा के उद्देश्य को हासिल करने के लिये सकारात्मक रुख दिखाते हुये हर स्तर पर हर तरह के उदार और कठोर कदम उठाने चाहिए।

वास्तव में अब वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने की अत्यन्त आवश्यतकता है, ताकि देश को हो रहे नुकसान को कम किया जा सके। इसके साथ ही, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसी एजेंसियों का अनुभव है कि वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने में विभिन्न हितग्राहियों और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी बड़ा मुद्दा है, जिसे शीर्ष से नीचे की ओर बढ़ते हुये सुलझाया जा सकता है।

पर्यावरण और वन मंत्रालय को विभिन्न राज्यों में समयबद्ध तरीके से विभिन्न तरह के उपायों पर अमल सुनिश्चित करके व्यवस्था को और जवाबदेह बनाना चाहिए। वायु प्रदूषण का प्रभाव एक राज्य तक सीमित नहीं होता, बल्कि पड़ोसी राज्य भी इससे प्रभावित होते हैं, इसलिये इसका मुकाबला स्थानीय और क्षेत्रीय दोनों स्तर पर करने की जरूरत है। कारपोरेट सामाजिक और पर्यावरणीय दायित्व के तहत उद्योगों को जोड़कर भी सम्बन्धित परिवेश में स्वच्छ हवा के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। सरकार को चाहिये कि वह ‘स्वच्छ हवा’ के पहलू को भी स्वच्छ भारत अभियान से जोड़े।

2022 तक नवीकरण ऊर्जा के जरिये 175 गीगावॉट उत्पादन, अॉटो ईंधन विजन और नीति-2025 तथा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसे उपायों और योजनाओं से आने वाले वर्षों में वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।

वायु प्रदूषण के सम्पूर्ण प्रभाव को कम करने के लिये शहरी आधारभूत संरचना में टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली, हरित भवन, आधुनिक प्रौद्योगिकी से तैयार किये गये कूड़ा भण्डार क्षेत्र (जोकि मीथेन और गन्दे पानी को एकत्र कर सकें) आदि की उच्च प्राथमिकता के साथ जरूरत है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को तापीय बिजली संयत्र, ईंट भट्ठों, ढलाई घर, भवन निर्माण और खुले में बायोमास जलाने वालों को नियंत्रित करने के लिये कड़े उपाय करने चाहिये। समय आ गया है, जब देश का हर नागरिक पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक हो और उसे यह जानना चाहिये कि उसका छोटा योगदान भी एक बड़ा बदलाव ला सकता है, ताकि हर कोई साफ हवा में साँस ले सके।

(लेखक टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज में प्रोफेसर हैं)

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