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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Prime Minister Krishi Sinchayee Yojana (PMKSY))

Source: 
ग्रामीण विकास मंत्रालय, 7 जुलाई, 2015

प्रश्न 1: भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की गई प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना क्या है?


उत्तरः मानसून पर खेती की निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सरकार ने हर खेत को पानी पहुँचाने के लिये प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना स्वीकृत की है। इस योजना में तीन मंत्रालयों, नामतः जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा कृषि मंत्रालय की विभिन्न जल संरक्षण, संचयन एवं भूमिजल संवर्धन तथा जल वितरण सम्बन्धित कार्यों को समेकित किया गया है। इस योजना के लिये अगले पाँच वर्षों के लिये 50000 करोड़ आवंटित किया गया है तथा चालू वित्त वर्ष (2015-16) के लिये इस योजना में 5300 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। राज्यों द्वारा धनराशि के प्रयोग तथा उनकी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वर्षवार उपयोग तथा कुल आवंटित धनराशि भी इस कार्यक्रम के लिये बढ़ाई जा सकती है जिससे कि हर खेत को पानी तथा प्रति बूँद, अधिक फसल उत्पादन के साथ-साथ पूरे देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो जाए।

प्रश्न 2: इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?


उत्तरः विगत कई दशकों के प्रयास के बावजूद कृषि योग्य भूमि का अधिकांश भाग वर्षा आधारित है। वर्षा के अभाव में किसानों को विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को ध्यान में रखकर “प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना” स्वीकृत की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य उपजिला/जिला स्तर तथा राज्य स्तर पर सिंचाई योजना तैयार कर, खेतों तक जल पहुँचाना, कृषि योग्य भूमि का विस्तार करना, सुनिश्चित सिंचाई का प्रबंधन, जलाशय पुनर्भरण, सतत जल संरक्षण प्रणाली प्रचलनों के साथ-साथ भूमि जल सृजन, पानी के बहाव को रोककर उपयोग में लाना तथा जल उपलब्धि के अनुसार फसलों का चयन एवं आधुनिक सिंचाई प्रणाली, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर कार्यक्रम को लागू करना है।

प्रश्न 3: योजना के उद्देश्यों की उपलब्धि के लिये कौन-कौन से कार्यक्रम चलाए जाएंगे तथा इसके लिये धनराशि की क्या व्यवस्था है?


योजना के उद्देश्यों की उपलब्धि के लिये मुख्यतः तीन मंत्रालयों नामतः जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा कृषि मंत्रालय के सहभागिता द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

ग्रामीण विकास मंत्रालय मुख्य रूप से मृदा एवं जल संरक्षण हेतु छोटे तालाब, जल संचयन संरचना के साथ-साथ छोटे बाँधों तथा सम्मोच्च मेढ निर्माण आदि कार्यों का क्रियान्वयन राज्य सरकार के माध्यम से समेकित पनधारा प्रबंधन कार्यक्रम के तहत करेगा। जिसके लिये वर्ष 2015-16 में 1500 करोड़ रुपये आवंटित है।

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय संरक्षित जल को खेत तक पहुँचाने के लिये नाली इत्यादि विकास के साथ-साथ त्वरित सिंचाई लाभ सम्बन्धी कार्यक्रम समयबद्ध तरीके से पूर्ण करेगा। इसके अन्तर्गत निम्न स्तर पर जल निकाय सृजन, नदियों में लिफ्ट सिंचाई योजना, जल वितरण नेटवर्क तथा उपलब्ध जलस्रोतों के मरम्मत, पुनर्भण्डारण तथा सृजन का कार्य मुख्य रूप से किया जाएगा। इन कार्यों के लिये वर्ष 2015-16 के लिये 2000 कररोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है।

कृषि मंत्रालय, कृषि एवं सहकारिता विभाग, वर्षाजल संरक्षण, जल बहाव नियंत्रण कार्य, जल उपलब्धता के अनुसार फसल उत्पादन, कृषि वानिकी, चारागाह विकास के साथ-साथ कृषि जीविकोपार्जन के विभिन्न कार्यक्रमों को भी चलाएगी।

जल प्रयोग क्षमता बढ़ाने के लिये सूक्ष्म सिंचाई योजना (ड्रिप, स्प्रिंकलर, रेनगन आदि) का उपयोग विभिन्न फसलों की सिंचाई के लिये किया जाएगा। इस सभी कार्यक्रमों को चलाने के लिये वर्ष 2015-16 के लिये 1800 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।

प्रश्न 4: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में माननीय संसद सदस्य तथा स्थानीय विधायक की क्या भूमिका होगी?


उत्तरः जिला सिंचाई योजना तैयार करते समय माननीय संसद सदस्य, स्थानीय विधायक के सुझाव लिये जाएंगे और जिला सिंचाई परियोजना में सम्मिलित किया जाएगा। इस जिला स्तरीय परियोजना को अंतिम रूप देते समय स्थानीय संसद सदस्य के उपयोगी सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रश्न 5: वर्तमान वित्तीय वर्ष (2015-16 में) इस योजना के अन्तर्गत कितने क्षेत्र की सिंचाई करने का लक्ष्य रखा गया है तथा विभिन्न परियोजनाओं का क्या लक्ष्य होगा?


उत्तरः आर्थिक मामलों समिति द्वारा वर्तमान वर्ष (2015-16) के लिये कुल 5300 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं। इस धनराशि को ध्यान में रखते हुए लगभग 13.4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसके अन्तर्गत ए.आई.बी.पी. से 1.2 लाख हेक्टेयर, लघु सिंचाई से 0.3 लाख हेक्टेयर, सी.ए.डी से 2.0 लाख हेक्टेयर, भूमिगत योजना से 0.3 लाख हेक्टेयर, तालाबों के पुनरुद्धार कर 0.2 लाख हेक्टेयर, सूक्ष्म सिंचाई योजना से 5.0 लाख हेक्टेयर तथा आई.डब्लू.एम.पी. से 4.4 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया है।

प्रश्न 6: तीन मंत्रालयों को अलग-अलग धन राशि प्रदान की गई है, इस परिस्थिति में राज्य स्तर, जिला स्तर पर समन्वय तथा कार्यक्रम को सुचारू रूप से चलाने की क्या व्यवस्था है?


उत्तरः विभिन्न मंत्रालयों के आवंटित कार्यसूची को ध्यान में रखते हुए, मुख्य रूप से तीन मंत्रालयों, कृषि, जल संसाधन एवं ग्रामीण विकास मंत्रालयों को उनके सुनिश्चित कार्यक्रम के कार्यान्वयन के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग धनराशि उपलब्ध कराई गई है। इन मंत्रालयों के तकनीकी जानकारी एवं कार्यक्रम के अनुसार राज्य सरकारों को यह राशि प्रदान की जाएगी।

योजना को समयबद्ध और सुचारू रूप से सम्पन्न कराने के लिये ब्लॉक/जिला स्तर सिंचाई परियोजना बनाते समय सामाजिक, आर्थिक एवं स्थान विशेष आवश्यकता आधारित कार्यकलापों को प्राथमिकता देते हुए कृषि क्षेत्र के उपलब्ध और संभावित जल संसाधन तथा जल आवश्यकता के आधार को ध्यान में रखना है। जिला स्तरीय सिंचाई परियोजनाओं को समेकित कर राज्य स्तरीय सिंचाई योजनाएं बनाई जाएगी। इस योजना को विस्तृत तथा व्यवहारिक बनाने के लिये जिला अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है जिसमें जिला स्तर के सभी कृषि विकास से सम्बन्धित अधिकारी मेम्बर होंगे और जिला वन अधिकारियों और लीड बैंक अधिकारी भी सदस्य होंगे। इसी तरह राज्य स्तर पर इस योजना के सुचारू रूप से कार्यान्वयन के लिये राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय संस्तुति समिति (एस.एल.एस.सी) गठित की गई है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य कार्य योजना का अनुमोदन, निगरानी एवं समीक्षा तथा अन्य चल रही योजनाओं के साथ अभिसरण को सुनिश्चित करना होगा।

इस योजना में संसाधन के आवंटन, मंत्रालीय समन्वयन, मॉनीटरिंग, प्रशासनिक मुद्दों के समाधान हेतु नीति आयोग के उपाध्यक्ष के अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का गठन किया गया है।

उपरोक्त के अलावा कार्यक्रम को सुचारू रूप से चलाने, दिशा निर्देश जारी करने तथा मूल्यांकन आदि के लिये राष्ट्रीय स्तर पर माननीय प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता में सम्बन्धित मंत्रालयों के मंत्री को सम्मिलित करते हुए अन्तरमंत्रालीय राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का गठन भी किया गया है।

योजना की मार्गदर्शिका माननीय कृषि मंत्री विभिन्न विभागों/मंत्रालयों से गहन विचार-विमर्श के बाद जारी किया जाएगा जिससे कि राज्यों द्वारा इस योजना का प्रभावी तरह से कार्यान्वयन हो सके।

Ques 1: What is Prime Minister Krishi Sinchayee Yojana (PMKSY) approved by NDA Government?


Ans: Cabinet Committee on Economic Affairs chaired by Hon’ble Prime Minister Sh. Narendra Modi has given approval of Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana (PMKSY) to overcome the dependency of agriculture farming on rainfall/monsoons. PMKSY aims at amalgamation of ongoing schemes viz. Accelerated Irrigation Benefit Programme (AIBP) of Ministry of Water Resources, River Development & Ganga Rejuvenation (MoWR,RD&GR), Integrated Watershed Management Programme (IWMP) of Department of Land Resources (DoLR), Ministry of Rural Development (MoRD) and On Farm Water Management (OFWM) component of National Mission on Sustainable Agriculture (NMSA) of Department of Agriculture and Cooperation (DAC). Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana (PMKSY) is approved for implementation across the country with an outlay of Rs. 50,000 crore in five years with an outlay of Rs.5300 crore for 2015-16. The central assistance will be based on utilisation by the State Government in different years in coming five year. If required, total allocation for this scheme will be enhanced to meet the requirement of the State Governments, so that objective of providing Har Khet Ko Pani and More Crop Per Drop could be achieved.

Ques 2: What are the major objective of PMKSY?


Ans: Despite several efforts in past decades, large agriculture area is still dependent on the monsoons and on the event of failure of monsoons, farmers had been facing hardship for survival of their crops. In view to resolve these problems and also to provide Har Khet ko pani “Prime Minister Krishi Sinchayee Yojana” (PMKSY) has been approved for implementation across the country. The major objective of PMKSY is to achieve convergence of investments in irrigation at the field level, expand cultivable area under assured irrigation, improve on-farm water use efficiency to reduce wastage of water, enhance the adoption of precision-irrigation and other water saving technologies (More crop per drop), enhance recharge of aquifers and introduce sustainable water conservation practices by exploring the feasibility of reusing treated municipal waste water for peri-urban agriculture and attract greater private investment in precision irrigation system. The scheme also aims at bringing the Ministries/Departments/Agencies/Research & Financial Institutions concerned, engaged in creation/use/recycling/potential recycling of water brought under a common platform so that a comprehensive and holistic view of entire “water cycle” is taken into account & proper water budgeting is done for all sectors viz. household, agriculture & industries.

Ques 3: What are the programmes and amount allocated under this programme for achieving the objectives?


Ans: Under PMKSY, Accelerated Irrigation Benefit Programme (AIBP) of Ministry of Water Resources, River Development & Ganga Rejuvenation (MoWR,RD&GR), Integrated Watershed Management Programme (IWMP) of Department of Land Resources (DoLR), Ministry of Rural Development (MoRD) and On Farm Water Management (OFWM) component of National Mission on Sustainable Agriculture (NMSA) of Department of Agriculture and Cooperation (DAC) for achieving the objectives, various ongoing programmes of three ministries are amalgamated.

MoRD is to mainly undertake rain water conservation, farm pond, water harvesting structure, small check dams and contour bunding etc. under Integrated Watershed Management Programme (IWMP). During 2015-16, an amount of Rs. 1500 crore has been allocated to DoLR, MoRD.

MoWR, RD &GR , is to undertake various measures for completion of ongoing projects of Accelerated Irrigation Benefit Programme (AIBP), besides construction of diversion canals, field channels, water diversion/lift irrigation, including development of water distribution systems at an allocation of Rs. 2000 crore during 2015-16.

Ministry of Agriculture, Department of Agriculture and Cooperation is to undertake activities like rainwater conservation, runoff control structures, water harvesting structures etc. including measures to augment ground water. Besides, DAC is promoting, crop diversification and ensures crop water budgeting for more crop per drop. Crop development, farm forestry, pasture development and other livelihood support interventions will be undertaken for increasing farmers’ income. For improving water use efficiency and to assure irrigation to agricultural farm (Her Khet Ko Pani) larger area under micro irrigation systems(drip, sprinkler and raingun etc.) is to be promoted. During 2015-16 an amount of Rs. 1800 crore has been allocated for this purpose.

Ques 4: What will be role of Member of Parliament (MP)/Member of Legislative Assembly (MLA) in planning and implementation of PMKSY?


Ans: While formulating District Irrigation Plans (DIPs), suggestions of Hon’ble Member of Parliament, Member of Legislative Assembly are to be duly considered and included in DIPs. Highest priority will be given on the valuable suggestions/recommendations of Member of Parliament of that particular district.

Ques 5: What is targeted area for current year (2015-16) under PMKSY and what is break up?


Ans: As per approval of CCEA an amount of Rs. 5300 crore has been allocated for 2015-16. Under this allocated amount, it has been envisaged to provide irrigation water to about 13.4 lakh hectare area which includes 1.2 lakh hectare under AIBP, 0.3 lakh hectare area through surface minor irrigation, 2 lakh hectare area under Command Area Development Water Management, 0.3 lakh hectare through Ground water, 0.2 lakh hectare through Repair Renovation Restoration (RRR) of water bodies, 5 lakh hectare area under Micro Irrigation and 4.4 lakh hectare area under Integrated Watershed Management Programme.

Ques 6: Funds are being provided to three ministries and what will be the system for integration and effective implementation of the programme?


Ans: PMKSY is to be implemented on projectised mode of implementation. Programme architecture is to adopt a ‘decentralized State level planning and projectised execution’ structure that empowers States to draw up their own irrigation development plans based on District Irrigation Plan(DIP). A committee under the chairmanship of District Magistrate with members from Departments concerned, including district Forest officer, Lead Bank Officer etc. at district level is empowered to finalise the DIP. Similarly, State Irrigation Plan(SIP) will be amalgamation of DIPs for operative convergence platform for all water sector activities including drinking water & sanitation, application of science & technology etc. through comprehensive SIP.

State Level Sanctioning Committee (SLSC) chaired by the Chief Secretary of the respective States are authorized to sanction projects, oversee its implementation and monitoring.

National Executive Committee (NEC) is constituted under the Chairmanship of Vice Chairman, NITI Aayog to oversee programme implementation, allocation of resources, inter-ministerial coordination, monitoring & performance assessment, addressing administrative issues.

At National level, programme is to be supervised and monitored by an Inter-Ministerial National Steering Committee (NSC) under the Chairmanship of Hon’ble Prime Minister with Union Ministers concerned Ministries as a members.

Guidelines of the PMKSY for effective implementation and monitoring etc. is formulated with active consultation of concerned Department/Ministries will be issued over the approval of Hon’ble Union Minister of Agriculture.


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