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पणजी, मैसूर से सीखिये कचरा प्रबंधन

Author: 
उमेश कुमार राय

गोवा का पणजी एक पर्यटन स्थल है इसलिये यहाँ हर वर्ष लाखों टूरिस्ट आते हैं। कुछ वर्ष पहले तक यहाँ की सड़कों, बिल्डिंगों के बाहर, पार्कों, समुद्र के किनारों में कचरों का अम्बार लगा रहता था। पणजी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने इसे गम्भीरता से लिया और घरों से कचरा लेने की प्रथा शुरू की। धीरे धीरे कॉरपोरेशन के कर्मचारियों ने घरों से निकलने वाले कचरों को लेने की शर्त रखी कि अगर कचरों को अलग अलग करके दिया जायेगा तभी वे उन्हें उठायेंगे। मसलन प्लास्टिक अलग, खाद्य पदार्थ अलग, औषधीय कचरा अलग। कूड़ा-करकट हर घर से निकलता है। लोग अपने घरों को साफ रखने के लिए इन कचरों को कहीं और फेंक आते हैं लेकिन हम यह सोचने की जहमत नहीं उठाते हैं कि इन कचरों का होता क्या है। असल में हम अपना घर साफ रखने के लिये दूसरी जगहों को गंदा करते हैं कचरा फेंककर।

एक अनुमान के अनुसार सम्प्रति भारत में हर साल 52 मिलियन टन कचरा निकलता है जिन्हें ठिकाने लगाने के लिये हर वर्ष 1240 हेक्टेयर भूमि की जरूरत पड़ती है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुमान के मुताबिक वर्ष 2031 में हर वर्ष 165 मिलियन टन कचरा निकलेगा। इस अनुमान से सहज ही कल्पना की जा सकती है कि 15 साल बाद इन्हें ठिकाने लगाने के लिये कितनी जमीन की जरूरत पड़ेगी। यही हालत रही तो एक दिन ऐसा आयेगा कि भारत को कचरा ठिकाने लगाने के लिये अपनी ही जमीन कम पड़ जायेगी। उस वक्त क्या हाल होग, यह कल्पना करना मुश्किल है। घरों से निकलने वाले ठोस वर्ज्य पदार्थों के साथ बढ़ता ई-कचरा भी नया सिरदर्द है।

फिक्की द्वारा हाल ही में किये गये सर्वेक्षण से पता चला है कि भारत में हर वर्ष लगभग 18.5 लाख मैट्रिक टन इलेक्ट्रानिक कचरा यानी ई-कचरा निकलता है और अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो वर्ष 2018 तक देश में हर वर्ष 30 लाख मेट्रिक टन कचरा निकलने लगेगा।

आश्चर्य की बात ये है कि ई-कचरा का महज 2.5 प्रतिशत हिस्से की ही रिसाइक्लिंग हो पा रही है। ये हालात चिंताजनक हैं। ई-कचरा को लेकर हालांकि अब तक नये प्रयोग सामने नहीं आये हैं।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की और से कचरा प्रबंधन पर आयोजित एक कार्यशाल में सीएसई की डायरेक्टर जनरल सुनीता नारायण ने कहा, ‘हमें कचरा प्रबंधन के लिये अभी से प्रयोग करने होंगे और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना होगा, अन्यथा हालात गंभीर होंगे।’

वैसे इस दिशा में पणजी, मैसूर और अलापुझा में अच्छा काम हो रहा है जिनसे शेष भारत को सीखने की जरूरत है। इन तीन शहरों को सीएसई ने क्लीन सिटी अवार्ड भी दिया गया। सुनीता नारायण की किताब नॉट इन माई बैकयार्ड के लोकार्पण कार्यक्रम में आये केंद्रीय शहरी विकास वेंकैया नायडु ने ये पुरस्कार दिये। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ये शहर (पणजी, मैसूर और अलापुझा) भविष्य में तीर्थस्थल होंगे। उन्होंने कहा, इन शहरों में जिस तरह का काम हो रहा है, उसे प्रचारित करने की आवश्यकता है ताकि दूसरे शहर इसका अनुकरण कर कचरा प्रबंधन पर ध्यान दें।

सुनीता नारायण बताती हैं, ‘केरल में सामुदायिक कम्पोस्ट के जरिये कचरों को पुनःचक्रित किया जा रहा है और साथ ही इससे असंगठित सेक्टर के कामगारों को भी जोड़ा जा रहा है। यही नहीं केरल में स्वच्छता मिशन को भी इससे जोड़ दिया गया है। केरल मॉडल भविष्य में इस दिशा में राह दिखायेगा।

गोवा का पणजी एक पर्यटन स्थल है इसलिये यहाँ हर वर्ष लाखों टूरिस्ट आते हैं। कुछ वर्ष पहले तक यहाँ की सड़कों, बिल्डिंगों के बाहर, पार्कों, समुद्र के किनारों में कचरों का अम्बार लगा रहता था। पणजी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने इसे गम्भीरता से लिया और घरों से कचरा लेने की प्रथा शुरू की। धीरे धीरे कॉरपोरेशन के कर्मचारियों ने घरों से निकलने वाले कचरों को लेने की शर्त रखी कि अगर कचरों को अलग अलग करके दिया जायेगा तभी वे उन्हें उठायेंगे। मसलन प्लास्टिक अलग, खाद्य पदार्थ अलग, औषधीय कचरा अलग। पणजी म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के पूर्व मेयर संजीत रोडरिगस कहते हैं, ‘यह काम आसान नहीं था। काफी दिनों तक इस तरह प्रयोग करना पड़ा। हमनें फास्ट फूड के स्टाल चलाने वालों से कहा कि वे शैशे में चटनी देना बंद करें। होटलों से कहा कि वे ऐसी चीजें देने से परहेज करें जिनसे कचरा फैलता हो।’ वे आगे बताते हैं, ‘विभिन्न कॉलोनियों में 70 कम्पोस्टिंग यूनिट स्थापित की गयी जहाँ उन कचरों की रिसाइक्लिंग की जाती है जो इस लायक हों और नॉन-रिसाइकेबल कचरों को सीमेंट फैक्ट्री में भेज दिया जाता है।’

अलापुझा की हालत भी पणजी से कम नहीं थी। यहां भी जहाँ तहाँ कचरों का अम्बार लगा रहता था लेकिन नई सोच और इच्छाशक्ति के बल पर यहाँ भी सफलता मिली। अलापुझा नगरपालिका के चेयरमैन थॉमस जोसेफ बताते हैं, ‘पालिका क्षेत्र में आने वाले सभी मकानों में बायोगैस प्लांट स्थापित करने को अनिवार्य किया गया ताकि रिसाइकेबल कचरों से ऊर्जा उत्पादन किया जा सके और जिन मकानों के लिए ऐसा करना मुश्किल था उन्हें पाइप कम्पोस्टिंग की व्यवस्था करने को कहा गया और इस तरह कचरे का प्रबंधन किया जा रहा है।’

मैसूर में भी इसी तरह कचरों का प्रबंधन किया जा रहा है जो आने वाले वक्त की जरूरत है लेकिन दिक्कत यह है कि ऐसे उदाहरण इक्का-दुक्का ही हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विज्ञानी विनोद बाबू ने कहा, रोज जितना कचरा निकलता है उसके 20 प्रतिशत हिस्से की ही रिसाइक्लिंग हो पाती है। बाकी कचरों को डम्पिंग ग्राउंड में फेंका जाता है। वे कहते हैं, हमें कचरों की रिसाइक्लिंग करनी होगी ताकि डम्पिंग ग्राउंड पर निर्भरता खत्म हो।

Gogrfi

Good

Drain of Water.

Dear sir,
Myself ahmad husain from Bishunpur Sohans darmiyani Distt.Siddharth nagar.272208.
I have the problem of water Drainage in my village.i asked to Gram pardhan to make water drainage but he didnt do it.he is not caring about the village he is looking after himself only.therefore i Deeply with heart Request to you to take action about the above written matter and solve the problem of Village.kindly look into the matter please!!!!!!
Thanking you
Ahmad husain
9648826320

No saochalye

Saochalye ke liye avedan

Very Serious Industrial Pollution in my area

 Hello, I am writing this complaint with the strong belief that a very tough and strict action will be taken against the one of the most polluting industry of my localty which is UPSIDC Industrial Area Malwan Fatehpur of U.P. (60 Km from Kanpur towards Allahabad & 15 Km from Fatehpur Distt. Headquarter towards Kanpur). Here a company called as Shri Laxmi Cotsyn Ltd. which is basically in textile business and in operation from years, but the way it is damaging the environment by all aspects like Water, Soil and Air Pollution is a very very serious issue, flowing gallons of Polluted water in open lands creating enormous soil pollution, till almost 5 km area, They are using heavy boilers for that they have installed huge chimneys they are throwing black smoke all the time, where the carbon particles can easily be seen flowing in the entire area, even people cannot put their laundries into the open sunshine because they will have black carbon particles on it. They are also throwing highly toxic chemicals used for the dying of textile through their waste water which is making the ground water undrinkable and deadly, People of nearby area are bound to buy the R.O water containers daily because the water of their pumps has become toxic, Moreover the solid and the semi solid waste of the factory is being thrown openly in to the road sides and vacant fields near roads which is creating not only an unbearable odor even it has become very difficult to drive on roadsBecause the road is full with waste, and the sewage lines (Nala) have been choked years ago. This is all happening but the local pollution control authorities are the only mute spectators, or they are also having their share. On this forum I request to take a note and enquiry of this highly serious matter and take strong and strict action against this industry and save our lives. Thank You   

Very Serious Industrial Pollution in my area

 Hello, I am writing this complaint with the strong belief that a very tough and strict action will be taken against the one of the most polluting industry of my localty which is UPSIDC Industrial Area Malwan Fatehpur of U.P. (60 Km from Kanpur towards Allahabad & 15 Km from Fatehpur Distt. Headquarter towards Kanpur). Here a company called as Shri Laxmi Cotsyn Ltd. which is basically in textile business and in operation from years, but the way it is damaging the environment by all aspects like Water, Soil and Air Pollution is a very very serious issue, flowing gallons of Polluted water in open lands creating enormous soil pollution, till almost 5 km area, They are using heavy boilers for that they have installed huge chimneys they are throwing black smoke all the time, where the carbon particles can easily be seen flowing in the entire area, even people cannot put their laundries into the open sunshine because they will have black carbon particles on it. They are also throwing highly toxic chemicals used for the dying of textile through their waste water which is making the ground water undrinkable and deadly, People of nearby area are bound to buy the R.O water containers daily because the water of their pumps has become toxic, Moreover the solid and the semi solid waste of the factory is being thrown openly in to the road sides and vacant fields near roads which is creating not only an unbearable odor even it has become very difficult to drive on roadsBecause the road is full with waste, and the sewage lines (Nala) have been choked years ago. This is all happening but the local pollution control authorities are the only mute spectators, or they are also having their share. On this forum I request to take a note and enquiry of this highly serious matter and take strong and strict action against this industry and save our lives. Thank You   

आठ महीनो तक पंजाब नैशनल बैक की शाखा मे काम किया और ना बेतन मिला

आदर निए सर,
में मों जमील कमर पिता मो कमरूल होदा गा्म नारायणपुर पोस्ट सकरी थाना जिला दरभंगा का स्थायी निबासी है,
और मेने पंजाब नैशनल बैंक की शाखा सकरी जिसका सोल आई डी 788900 है,मेने ईस शाखा पुरे आठ महीऩो तक काम किया ,मुझे शाखा मनेजर मनोज जयसबाल सर ने रखा था ,और कहाँ था कि तुम्हे 162 रूपया रोज शाखा से भुकतान किया जाऐ लेकिन अभी तक नही मिला है.
मों जमील कमर
नारायणपुर सकरी मनीगाछी जिला दरभंगा
7493938687
jamilqamar7@gmail.com पंजाब नैशनल बैंक
शाखा सकरी मधुबनी

Sanitation poem

जहाँ  कभी  लुटेरे  का बसेरा हुआ करता था /आज वहाँ शौचालय से सवेरा हुआ करता है / जहाँ मदिरा की महफिल सजती थी /वहाँ शौचालय गान चहचहाती  है  / हर कोई अचंभित है  पिपरासी की नई पहचान देखकरस्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)  अन्तर्गत बिहार का पहला खुले में शौच मुक्त  ब्लॉक जानकार यह ५२ दिनों के सतत प्रयास का अंजाम  है , बाकी सब इतिहास हैसमुदाय ने आगे बढ़कर अगुआई की, शौचालय का निर्माण कीसुबह शाम निगरानी की , खुले में शौच को रोकने की तैयारी कीसमुदाय ने निश्चय कर डाला, खुद को मर्यादित  बना डालाअपनी छमता अनुरूप  शौचालय  निर्माण में जुट गईइसके अभाव में बहु बिटिया की इज्जत न कोई लूट लेकिसी ने सामग्री, तो किसी ने नगद उधार ली , किसी ने तो गहने गिरवी डाल दीकिसी समाज सेवी ने स्वच्छता मार्ट की स्थापना कर , नई जान डाल दी    हर सक्श अपना भविष्य सवारने  में लग गयाजो खुले में जाते थे , उनको समझाने में लग गया लोगो ने एक दूसरे  की अनु श्रवण  की ,शौच युक्त से शौच मुक्त की सफर तय की आज ये ब्लॉक आदर्श हो गया है यहाँ के समुदाय का पहचान हो गया हैयहाँ हर सक्श  बेबाकी में जी रहा हैबीमारी , शर्मिदगी  , गरीबी को छोड़स्वच्छता की सवारी में घूम रहा है अरविन्द कुमार प्रोग्राम अफसर - GSF

enviromentail complaints

Sir,where to loged enviromental complaints ofair pollutionsound pollutionvasant patilflat no.7patil gardenindiranagarNashik

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