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आकाशीय आपदा का जमीनी सच

Author: 
अनिल अश्विनी शर्मा, समरजीत साहू
Source: 
डाउन टू अर्थ, जनवरी 2018
प्राकृतिक आपदाओं में बिजली गिरने से हुई मौतें सबसे अधिक हैं, लेकिन गृह मंत्रालय की अधिसूची में यह शामिल नहीं है…

“आकाशीय बिजली को कैसे रोका जा सकता है? यह तो एक शक्तिशाली करंट हैं और फिर इसके गिरने के समय आमजन को खुद को बचाने का रत्ती भर का समय नसीब नहीं होता” उत्तर प्रदेश के उच्च अधिकारी जब इस तरह का अवैज्ञानिक तर्क देते हैं तो हम उन योजनाओं के हाल का अनुमान लगा सकते हैं जिनको पूरा करने की जिम्मेदारी इनके कंधों पर होती है। जब पढ़े-लिखे अधिकारी ही आकाशीय बिजली गिरने को ईश्वरीय आपदा मानते हों तो आम लोगों से क्या उम्मीद की जाये?

पहले तेज चमकती रोशनी और उसके बाद कड़कड़ाती आवाज। आसमान में चमकी यह बिजली धरती पर गिर इंसानों की मौत का कारण भी बनती है। बीते मानसून के दौरान एक हफ्ते में ही आसमानी बिजली गिरने से देश भर में 120 लोग मारे गए और 57 लोग घायल हुए। इनमें सबसे अधिक बिहार में 57, उत्तर प्रदेश में 41, मध्य प्रदेश में 12 और झारखण्ड में 10 लोग मरे। मुसीबत यह है कि आम इंसान के साथ सरकारी अधिकारियों का एक बड़ा तबका अब भी इसे दैवीय आपदा मानता है और इसकी रोकथाम के लिये कुछ भी नहीं करता। आम लोगों के साथ सरकारी अधिकारी भी इसे ईश्वरीय कोप मानते हैं।

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