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उत्तराखण्ड के 3100 हेक्टेयर जंगल आग में स्वाहा


.उत्तराखण्ड के जंगलों में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। 1993 के बाद एक बार फिर जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिये सेना का हेलीकाप्टर उतारा गया। जिला प्रशासन ने पहले चरण में उन जगहों को चिन्हीकरण किया है, जहाँ आग आबादी की ओर बढ़ रही है।

पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़ जिलों सहित हरिद्वार और ऋषिकेश के जंगलों में 15 दिनों तक लगातार आग धधकती रही। इस मौसम में अब तक आग की 213 घटनाएँ हो चुकी हैं। राज्य के गढ़वाल और कुमाऊँ कमिश्नरी में 3100 हेक्टेयर जंगल आग लगने से राख हो चुके हैं। यही नहीं राजाजी और कार्बेट पार्क का 145 हेक्टेयर हिस्सा आग ने अपने हवाले कर दिया।

जिस कारण जंगलों के नजदीक गाँव और जंगली जानवरों को एक तरफ अपनी जान बचाने की चिन्ता हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ पेयजल के लिये मोहताज होना पड़ रहा है। हालांकि प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड की इस भीषण आग पर कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई है। एनडीआरएफ और सेना को आग पर काबू पाने के लिये आदेश दिये गए।

उल्लेखनीय हो कि राजधानी देहरादून के मोहब्बेवाला स्थित राजेश टेलर की दुकान में आग लगने से दुकान में रखा सारा सामान खाक हो गया। डोईवाला स्थित लच्छीवाला रेंज के दुधली गाँव के चारों तरफ आग का घेरा बन गया था। ऋषिकेश के पास नीलकंठ के कुनाऊ गाँव और बीन नदी के आसपास के जंगलों में आग ने भयंकर रूप धारण किया है।

नरेंद्र नगर वन प्रभाग की शिवपुरी रेंज के अन्तर्गत आगराखाल के आसपास भी नौदुकाटल कक्ष संख्या पाँच में भी जंगल धधक उठे। इसके इतर पर्वतीय क्षेत्रों की हालात और भी नाजुक बनी हुई है। उत्तरकाशी के माहीडांडा क्षेत्र में जब आग ने विकराल रूप लिया तो वहीं माहीडांडा में आइटीबीपी का भी कार्यालय आग की जद में आ गया था। अल्मोड़ा के धौलादेवी, भिक्यासैंण, द्वाराहाट, ताड़ीखेत सहित दर्जनों गाँवों के जंगल धू-धू कर जल उठे।

ग्रामीणों ने जब वन विभाग और प्रशासन को सूचना दे दी तो आग बुझाने के लिये कोई कर्मचारी गाँवों की तरफ नहीं आ पाया। जबकि कुमाऊँ क्षेत्र में 100 से अधिक क्रू सेन्टर वन विभाग ने बना रखे हैं लेकिन वह क्रू स्टेशन भी कोई काम नहीं कर रहे हैं। करोड़ों की वन सम्पदा जलकर राख हो गई है।

इसी तरह गढ़वाल क्षेत्र के मसूरी वन प्रभाग के सिल्ला, सरोना, नालीकलाँ क्षेत्र के जंगल जल रहे हैं लेकिन वन विभाग के अधिकारी अपनी कुम्भकरणी निद्रा से नहीं जाग पाये। जंगल में आग लगने के कारण क्षेत्र में दम घोटू वातावरण बना हुआ है। हालांकि ग्रामीण पारम्परिक तरीके से आग बुझाने के लिये प्रयास तो कर रहे हैं लेकिन बिना संसाधन के आग बुझाने में सफलता नहीं मिल रही है।

नालीकलाँ गाँव निवासी सुशीला और पीपीसीएल निवासी इतवारी सिंह का कहना है कि वे अपनी मवेशियों के लिये घास पत्ती लेने के लिये भी जंगल नहीं जा पा रहे हैं। कुछ जगह वन विभाग के कर्मचारी आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन बिना किसी संसाधन के आग बुझाने में नाकाम हैं।

नालीकलाँ गाँव में वन विभाग के कर्मचारी चीड़ और बांज की झाड़ियों से आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन कोई सफलता नहीं मिल रही है। जंगली जानवरों को भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इस भीषण अग्नीकाण्ड के कारण उत्तराखण्ड में अत्यधिक गर्मी का एहसास हो रहा है। इतना ही नहीं इन इलाकों में लगी आग से आसमान में फैली धुन्ध इस बात का अन्दाजा लगाया जा सकता है।

रुद्रप्रयाग जनपद मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निकट आग पर काबू पा लिया गया। लेकिन जिले में धनपुर और खांकरा रेंज के जंगल अभी भी जल रहे हैं। पौड़ी में खीर्सू मोटर मार्ग और पोखरी मोटर मार्ग सहित कई जगहों पर जंगल सुलग रहे हैं। पौड़ी में आग पर काबू पाने के लिये एनडीआरएफ की टीम मौके पर तैनात हो गई है।

आग पर काबू


नैनीताल के घोडाखाल से मिग-17 से आस-पास के जंगलों में लगी आग को बुझाने की कोशिश की है, इस हेतु भीमताल झील से पानी लेकर विडला के जंगलों में पानी की बौछार की गई है। जिसके बाद आल्मा की पहाड़ियों पंगूट और किलबरी के जंगलों में आग पर काबू पाया गया।

उड़ान भरने से पहले सभी पायलटों ने मैप के जरिए आग से धधक रहे जंगलों को चिन्हित किया, फिर ऑपरेशन शुरू किया। खास बात यह है कि पहली बार रसीया से लाया गया पाकेट लगाया गया है जो एक बार में 5 हजार लीटर पानी को निकालने की क्षमता रखता है। उधर सेना को भी आग बुझाने के लिये लगाया गया है। इसके लिये एक हेलीकाप्टर कुमाऊँ और दूसरा गढ़वाल क्षेत्र को दिया गया है।

हाल-ए-मैदान


अल्मोड़ा निवासी शंकर दत्त पाण्डे का कहना हैं कि वन विभाग प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का वृक्षारोपण करता है जब जंगलों को बचा नहीं सकते हैं तो पेड़ों को रोपने का क्या मतलब? उन्होंने कई मर्तबा वन विभाग के अधिकारियों को जंगल मे आग की सूचना दे दी मगर आग बुझाने के लिये कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुँचा। वहीं डीएफओ आर सी शर्मा का कहना है कि बारिश कम होने के कारण जंगलों में आग अधिक लग रही हैं इसके कई क्षेत्रों में क्रू स्टेशनों की स्थापना की है। मास्टर कंट्रोल रुम भी बना रखे हैं जहाँ से भी सूचनाएँ आ रही हैं वहाँ कर्मचारी जाकर आग बुझा रहे हैं। राज्य स्तर पर जिन जिलों के जंगलों में सबसे ज्यादा आग लगी हैं वहाँ एनडीआरएफ की टीमें पहुँच चुकी हैं।

अल्मोड़ा, पौड़ी और गौचर में इसकी एक-एक यूनिट तैनात की गई है। प्रत्येक यूनिट में 45 सदस्य शामिल हैं। पुलिस महानिरीक्षक (गढ़वाल) संजय गुंज्याल को इसका नोडल अफसर बनाया गया है, वे एनडीआरएफ, डीएम व सीसीएफ से समन्वय का काम करेंगे। वहीं एसडीआरएफ की एक टीम नैनीताल में लगाई गई है। जबकि राज्य में प्रतिदिन 250 से 300 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ रहा हैं।

दो सप्ताह बाद हुआ केन्द्र सचेत


केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ने उत्तराखण्ड के जंगलों में लगी आग पर गम्भीर रुख अपनाते हुए अग्निशमन प्रयासों के लिये पाँच करोड़ रुपए आवंटित किये हैं, जबकि आग से निपटने के प्रयासों के तहत छह हजार श्रमिकों को तैनात किया गया है। श्री जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस अग्निकाण्ड को बेहद गम्भीरता से लेते हुए एक बैठक बुलाई। गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा राहत बल और वायुसेना अग्निशमन प्रयासों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

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