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बीजापुर का वैभव

Source: 
डाउन टू अर्थ, जनवरी 2018
उत्तरी कर्नाटक का बीजापुर शहर पहले विजयापुर के नाम से जाना जाता था। यादव वंश के राज में यह करीब 100 वर्षों तक एक महत्त्वपूर्ण शहर रहा लेकिन सन 1294 में इसे बहमनी सुल्तान की प्रांतीय राजधानी बना दिया गया। सन 1489 में जब आदिल शाही वंश के पहले शासक यूसुफ अली आदिल शाह ने गद्दी सम्भाली और बीजापुर को राजधानी बनाया तो फिर इसका महत्त्व बढ़ गया। सन 1686 में मुगल बादशाह औरंगजेब से हारने के बाद आदिल शाही वंश ने इस्लामी इमारतों के रूप में समृद्ध विरासत छोड़ी। इसके साथ ही उसने शहर में जल आपूर्ति की कुछ काबिलेगौर व्यवस्था भी छोड़ी थी।

शहर में आंशिक सिंचाई तुंगभद्रा के अनिकटों बाँधों के द्वारा होती थी। 1881-82 में यहाँ कुओं और सोतों के अलावा सिंचाई की 32 व्यवस्थाएँ थीं। यद्यपि बीजापुर में चश्मे बहुत थे, मगर शहर को उन्हीं के भरोसे नहीं रखा जा सकता था। अली आदिल शाह (सन 1557-1580) प्रथम शासक था जिसने शहर की जल आपूर्ति पर ध्यान दिया। उसने शाहापुर में बड़ा चाँद कुआँ बनवाया और उससे शहर भर में पानी पहुँचाने के लिये नहरें बनवाईं। बीजापुर से 5 किमी. दूर तोरवी में भूमिगत नहर आदिल शाह ने ही बनवाई थी।

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