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भारतीय शहरों में एकीकृत जल प्रबन्धन (AdoptlUWM)

Source: 
आई.सी.एल.ई.आई

. मूलभूत सेवाओं की व्यवस्था विशेष रूप से, जल आपूर्ति तथा सम्बद्ध सेवाएँ, एक ऐसी चुनौती है जिसका समाधान भारतीय शहर राष्ट्रीय नीतियों और कार्यक्रमों की सहायता से खोजने का प्रयास कर रहे हैं। भारत के महारजिस्ट्रार द्वारा व्यक्त पूर्वानुमान के अन्तर्गत अगले 25 वर्षों में भारत की कुल जनसंख्या वृद्धि में 67% वृद्धि शहरी क्षेत्रों में होने की सम्भावना है। इस कारण यह चुनौती और भी अधिक कठिन हो जाती है। जल की आपूर्ति, सीवेज तथा वर्षाजल ड्रेनेज प्रणालियों के अलग-अलग नियोजन की परम्परागत व्यवस्था अब प्रभावी तथा पर्याप्त नहीं रही। शहरी जल प्रबन्धन के लिये वैकल्पिक कार्यप्रणालियाँ अब आवश्यकता बनती जा रही हैं।

यूरोपीय संघ द्वारा समर्थित परियोजना ‘भारतीय शहरों में एकीकृत शहरी जल प्रबन्धन’ (AdoptIUWM), इस आवश्यकता को सम्बोधित करती है। परियोजना की कार्यप्रणाली एकीकृत शहरी जल प्रबन्धन (आईयूडब्ल्यूएम) के सिद्धान्तों पर आधारित होगी जिन्हें परम्परागत नियोजन प्रक्रिया में जल आपूर्ति तथा सम्बद्ध सेवाओं के स्रोत से पुनः उपयोग तक एकीकृत आयोजन के माध्यम से किया जाएगा। इससे शहर अपनी योजनाओं तथा कार्य प्रणालियों को राष्ट्रीय नीतियों के दिशा-निर्देशों और उद्देश्यों जैसे राष्ट्रीय जलनीति, राष्ट्रीय शहरी स्वच्छता नीति, नेशनल सस्टेनेबल हैबिटाट मिशन, 13वें वित्त आयोग तथा 12वीं पंचवर्षीय योजना के दिशा-निर्देशों और उद्देश्यों से सुमेलित कर सकेंगे।

राजस्थान और महाराष्ट्र भारत के सूखा-प्रवृत्त राज्यों में से हैं तथा इसलिये, ये राज्य इस प्रकार की पहल के लिये उचित विकल्प हैं। सम्बन्धित राज्य सरकारों के साथ चर्चा द्वारा राजस्थान और महाराष्ट्र, प्रत्येक में दो शहरों को चुना गया है : राजस्थान में, जैसलमेर तथा किशनगढ़ और महाराष्ट्र में सोलापुर तथा इचलकरंजी।

परियोजना : एक अवलोकन (ओवरव्यू)


परियोजना में उन्नत आई.यू.डब्ल्यू.एम. प्रक्रिया, ‘स्विच - भविष्य के शहरों के लिये जल प्रबन्धन’ अनुसंधान परियोजना फ्रेमवर्क के भारतीय संस्करण का उपयोग होगा, जिसमें आई.सी.एल.ई.आई. यूरोपीय सचिवालय साझेदार था। स्विच परियोजना के अन्तर्गत दुनिया के बारह देशों में काम किया गया था, जिसमें से चार देश यूरोप में हैं तथा इसमें देखा गया था कि एकीकृत नियोजन प्रक्रिया के कार्यान्वयन से ‘भावी नगर’ में अधिक वहनीय शहरी जल प्रबन्धन को कैसे प्राप्त किया जा सकता है (www.switchurbanwater.eu)। भारतीय शहरों के लिये एक एकीकृत शहरी जल प्रबन्धन टूल किट का विकास किया जाएगा तथा उसे आई.यू.डब्ल्यू.एम. परियोजना शहरों में लागू किया जाएगा और इसके आधार पर इन शहरों में आई.यू.डब्ल्यू.एम. एक्शन प्लान तथा प्रायोगिक परियोजनाओं (पायलट प्रोजेक्ट) का विकास करा जाएगा। परियोजना, स्विच टूलकिट के विकास में शामिल यूरोपीय शहरों के अनुभव पर आधारित होगी; हालाँकि कार्यान्वयन और वरीयता सम्बन्धी मुद्दे सम्भवतः भिन्न हो सकते हैं पर आधारभूत सिद्धान्त समान रहेंगे तथा इस प्रकार यूरोप में मिली सीखों से भारतीय शहर लाभान्वित हो सकेंगे।

समग्र उद्देश्य


भारतीय स्थानीय सरकारों द्वारा अपनी नियोजन और कार्यान्वयन प्रक्रियाओं में एकीकृत शहरी जल प्रबन्धन (आई.यू.डब्ल्यू.एम) सिद्धान्तों और कार्यप्रणालियों को अपनाने के माध्यम से जल प्रबन्धन के क्षेत्र से सम्बन्धित सुधारों को लागू करने के लिये उनकी क्षमता में वृद्धि करना।

विशिष्ट उद्देश्य


1. भारतीय स्थानीय सरकारों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये मौजूदा आई.यू.डब्ल्यू.एम. फ्रेमवर्क को अनुकूलित करना।
2. चार शहरों, राजस्थान में दो और महाराष्ट्र में दो शहरों के माध्यम से भारतीय आई.यू.डब्ल्यू.एम. फ्रेमवर्क को परखना
3. प्रत्येक परियोजना शहर में आई.यू.डब्ल्यू.एम. नियोजन प्रक्रिया के माध्यम से अभिचिन्हित दो प्रायोगिक परियोजनाओं का कार्यान्वयन करना
4. शहरी विकास मंत्रालय (एम.ओ.यू.डी.) भारत सरकार की सम्बन्धित स्कीमों/कार्यक्रमों में नियोजन टूल के रूप में भारतीय आई.यू.डब्ल्यू.एम. टूलकिट के एकीकरण का समर्थन करना।

मुख्य परिणाम


1. भारतीय शहरों के लिये एक जाँची परखी तथा दोहराई जा सकने वाली आई.यू.डब्ल्यू.एम. टूलकिट जो शहर स्तर पर वहनीय अन्तर क्षेत्रीय जल प्रबन्धन को बढ़ावा देती है और जल आपूर्ति और सम्बद्ध सेवा क्षेत्रों में सेवा स्तर बैंचमार्कों को प्राप्त करने में सहायता करती है।

2. परियोजना शहरों में आई.यू.डब्ल्यू.एम. आधारित कार्य योजनाओं को तैयार करना तथा सेवा प्रदायगी में सुधार करने के लिये वैकल्पिक तथा निम्न लागत टेक्नोलॉजी विकल्पों का प्रदर्शन, विशेष रूप से शहरी निर्धनों के लिये।

3. 4 परियोजना शहरों सहित लगभग 20 भारतीय शहरों में आई.यू.डब्ल्यू.एम. सिद्धान्तों तथा कार्यप्रणालियों के उपयोग की दिशा में स्थानीय सरकारी (कार्मिकों का क्षमता सृजन)।

4. सम्भावित रूप से जे.एन.एन.यू.आर.एम. (जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन) चरण-II के नियोजन ढाँचे के माध्यम से शहरी विकास मंत्रालय द्वारा आई.यू.डल्ब्यू.एम. टूलकिट को अपनाए जाने को सुगम बनाना।

परियोजना साझेदार


आई.सी.एल.ई.आई. - लोकल गवर्नमेन्ट्स फॉर सस्टेनेबिलिटी
आई.सी.एल.ई.आई. - लोकल गर्वनमेन्ट्स फॉर सस्टेनेबिलिटी, एक सदस्य संगठन है जो स्थानीय सरकारों के एक विश्वव्यापी नेटवर्क को बनाने और समर्थन प्रदान करने की ओर समर्पित है जिससे यह सरकारें स्थानीय कार्रवाइयों के माध्यम से पर्यावरणीय स्थितियों पर विशेष फोकस के साथ वैश्विक सस्टेनेबिलिटी में मूर्त सुधारों को प्राप्त कर सकें।

आई.सी.एल.ई.आई. साउथ एशिया (दिल्ली, भारत)
आई.सी.एल.ई.आई. साउथ एशिया, आई.सी.एल.ई.आई. का साउथ एशिया क्षेत्रीय चैप्टर है तथा इस क्षेत्र के शहरों को नवीकरणीय ऊर्जा, जल, जलवायु परिवर्तन, परिवहन के क्षेत्र में वहनीय विकास कार्य करने में सहायता करता है। दक्षिण एशिया में 50 स्थानीय सरकारों की सदस्यता के साथ जिनमें से 40 से अधिक सदस्य शहर भारत से हैं, आई.सी.एल.ई.आई. साउथ एशिया ने सरकार के सभी स्तरों पर वहनीय प्रतिबद्धता तथा वांछित भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिये राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय विभागों का एक मजबूत नेटवर्क विकसित किया है।

आई.सी.एल.ई.आई. यूरोपीय सचिवालय (फ्रीबर्ग, जर्मनी)
यूरोपीय क्षेत्र में आई.सी.एल.ई.आई. यूरोपीय सचिवालय, आई.सी.एल.ई.आई. दक्षिण एशिया का प्रतिरूप है। लगभग 200 यूरोपीय शहरों, नगरों, क्षेत्रों तथा उनकी एसोसिएशनों पर आधारित; यह यूरोपीय संघ सरकारों को अधिक वहनीय विकास प्राप्त करने में सहायता प्रदान करता है। आई.सी.एल.ई.आई. यूरोपीय सचिवालय आई.यू.डब्ल्यू.एम. अनुभव को शामिल करके, आई.यू.डब्ल्यू.एम. परियोजना को और समृद्ध करा जाएगा।

एसोसिएशन ऑफ फ्लेमिश सिटीज एंड म्यूनिसिपालिटीज, बेल्जियम (वी.वी.एस.जी.)
वी.वी.एस.जी., फ्लेन्डर्स में स्थानीय सरकारों का प्रतिनिधि है तथा इसके तकनीकी विशेषज्ञों तथा स्थानीय सरकारों के राजनीतिज्ञों के अनेक नेटवर्क हैं जो नियोजित तथा अपेक्षित नीति पर विचार विमर्श करते हैं और उस पर चर्चा करते हैं। वी.वी.एस.जी., आई.यू.डब्ल्यू.एम. परियोजना में साझेदार के रूप में स्थानीय प्राधिकरण परिप्रेक्ष्य से फ्रेमवर्क को परिभाषित करने की दिशा में योगदान प्रदान करेगा, जो कि इसी प्रकार के नीतिगत कदमों तथा परियोजनाओं के माध्यम से नगरपालिकाओं की सहायता करने की उनकी विशेषज्ञता पर आधारित होगा।

 

आई.यू.डब्ल्यू.एम. क्या है?


आई.यू.डब्ल्यू.एम. में “शहरी जलचक्र के सभी पहलुओं को… एक प्रणाली के रूप में माना जाता है” और शामिल करना निहित है “सभी सम्बन्धित संस्थानों को… ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस प्रकार के एकीकरण को प्राप्त किया जा सके इनोवेटिव तथा लोचपूर्ण (फ्लेक्सिबल) टेक्नोलॉजियों को वरीयता दी जाती है, जिन्हें जलचक्र के समग्र मूल्यांकन तथा समग्र रूप से प्रणाली की दीर्घकालिक वहनीयता के आधार पर चुना जाता है।”


फिलिप, आर, आदि (2011)

स्विच ट्रेनिंग किट, मॉड्यूल 1,

आई.सी.एल.ई.आई. यूरोपीय सचिवालय द्वारा प्रकाशित

परियोजना अवधि : 42 महीने (3.5 वर्ष) 1 फरवरी, 2013 से 31 जुलाई, 2016

परियोजना शहर : राजस्थान में जैसलमेर तथा किशनगढ़; महाराष्ट्र में सोलापुर तथा इचलकरंजी

वित्तपोषक एजेन्सी : यूरोपीय संघ (भारत के लिये प्रतिनिधि मंडल)

 

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