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नदी मुख अथवा लघु खाडि़यों की खोज

नदीमुख वे स्‍थान होते हैं जहां ताजे पानी की नदियां और धाराएं समुद्र के पानी से मिलती हुई महासागरों में गिरती हैं। विभिन्‍न प्रकार के पक्षी, मछली तथा अन्‍य वन्‍य जातियां इन नदी मुखों को अपना आवास बनाती हैं। इन नदी मुखों तथा इसके आसपास की भूमि पर जनता निवास करती है, मछलियां पकड़ती हैं, तैरती है और प्रकृति का आनंद उठाती है।

मौसम औऱ घरेलू जल खपत

परिकल्पना:
किसी घर में पानी की खपत उस खास महीने के तापमान के अनुपात में होती है।

कारण:
मानव की प्राकृतिक संसाधनों की खपत कई चीजों पर निर्भर करती है जिनमें मौसम भी एक है। इन विभिन्न प्रभावों की जानकारी जुटाना उपयोगी है।

जल संसाधन स्रोत की दूरी और जलापूर्ति प्रणाली का आकार

परिकल्पना:
किसी गांव/शहर/महानगर की आबादी जितनी अधिक होती है, पेयजल स्रोत से उसकी दूरी उतनी ही अधिक होती है।

कारण:
बड़े शहरों और महानगरों में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर निवेश अधिक होता है। ऐसे में उम्मीद की जाती है वहां पेय जल शोधन और आपूर्ति व्यवस्था अधिक निवेश हुआ होगा। इसके अलावा पेय जल की उनकी भारी जरूरत को बड़े जल स्रोत से पूरा किया जाता है।

लैंगिक स्थिति और पेय जल की चिंताएं

परिकल्पना:
महिलाएं पानी की कमी को पुरुषों से कहीं अधिक गंभीर पर्यावरणीय समस्या के रूप में देखती हैं।

कारण:
तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की कई तरह की बहुस्तरीय पर्यावरणीय चिंताएं होती हैं। ये चिंताएं उनसे और उनके संबंधियों के जीवन पर पड़ने वाले असर से संबंधित है। यह मान कर चला जाता है कि परिवार में पीने के पानी की जिम्मेदारी महिलाओं की है। परिवार के स्वास्थ्य की अधिक जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर होती है। ऐसे में उम्मीद की जाती है कि महिलाओं में पानी के कमी के प्रति चिंता कहीं अधिक होती है।

जल का शोधन और घर का बजट

परिकल्पना:
पेय जल के शोधन में तकनीक का बेहतर होने से पीने के पानी पर एक घर का प्रतिव्यक्ति खर्च बढ़ जाता है।

कारण:
लोगों का अपने पर्यावरण की रक्षा के प्रति जागरुक होकर उसके लिए कार्य करने का संबंध उनकी आर्थिक स्थिति से है। ऐसे में इसकी लागत के बारे में आंकड़े जुटाना उपयोगी होगा।

जल शोधन और जलापूर्ति प्रणाली का आकार

परिकल्पना:
किसी गांव/शहर/महानगर की जनसंख्या जितनी होती है, वहां की पेय जलापूर्ति प्रणाली में तकनीक का इस्तेमाल उतना ही अधिक होता है।

कारण:
बड़े शहरों और महानगरों में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर निवेश अधिक होता है। ऐसे में उम्मीद की जाती है वहां पेय जल शोधन और आपूर्ति व्यवस्था में कहीं बेहतर तकनीक का इस्तेमाल होगा।

जल शोधन और आर्थिक स्थिति

परिकल्पना:
पेयजल के शोधन में बेहतर तकनीक का संबंध घरों में हर सदस्य को उपलब्ध स्थान से संबंध होता है।

कारण:
यह जांचना महत्वपूर्ण है कि क्या गरीबों को पीने का साफ़ पानी नहीं मिल पा रहा है। किसी परिवार की आर्थिक स्थिति मापने के लिए घर में प्रति सदस्य उपलब्ध स्थान अच्छा मापदंड हो सकता है। ऐसे में इन दोनों कारकों की तुलना की जा सकती है।

जल शोधन और स्वास्थ्य

परिकल्पना:
पाइप से घरों में आने वाले पीने के पानी में शोधन के स्तर पर तकनीक का इस्तेमाल के स्तर से परिवार में पेट की बीमारियां होने का खतरा बढ़ता है।

कारण:
तकनीक के इस्तेमाल के आधार पर पानी के विभिन्न स्रोतों का इस प्रकार क्रम बनाया जा सकता है। यह क्रम है तालाब, झील, झरना, नदी, खुला कुआं, बोर कुआं, पाइप जलापूर्ति, एक्वागार्ड और बिसलेरी जैसा बोतलबंद पानी। तकनीक का इस्तेमाल स्वास्थ्य पर बुरा असर डालने वाले अति सूक्ष्म पदार्थों की मात्रा को बेहद कम करना है। यह देखना महत्वूर्ण है कि वास्तव में यह उद्देश्य पूरा हो भी पाता है या नहीं।

कार्यप्रणाली:

जल शोधन और पानी की गुणवत्ता

परिकल्पना:
शोधन में उच्च प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से पानी में अति सूक्षम कणों की मात्रा घटती है।
कारण:
तकनीक के इस्तेमाल के आधार पर पानी के विभिन्न स्रोतों का इस प्रकार क्रम बनाया जा सकता है। यह क्रम है तालाब, झील, झरना, नदी, खुला कुआं, बोर कुआं, पाइप जलापूर्ति, एक्वागार्ड और बिसलेरी जैसा बोतलबंद पानी। तकनीक का इस्तेमाल स्वास्थ्य पर बुरा असर डालने वाले कोलीफार्म जैसे अति सूक्ष्म पदार्थों की मात्रा को बेहद कम करना है। यह देखना महत्वूर्ण है कि वास्तव में यह उद्देश्य पूरा हो भी पाता है या नहीं।
कार्यप्रणाली: