गंगा पुनर्जीवन के लिये विकास और शोध दृष्टिकोण पर संगोष्ठी


स्थान- राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की
तिथि- 16-17 दिसम्बर 2015

आगामी 16-17 दिसम्बर 2015 को ‘जल संसाधन एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय’ द्वारा ‘नमामि गंगे’ के तहत राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की में दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। जिसका मुद्दा है “गंगा पुनर्जीवन के लिये विकास और शोध दृष्टिकोण”।

भारत सरकार के नमामि गंगे कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की (एनआईएच) में गंगा पुनर्जीवन के लिये विकास और शोध दृष्टिकोण विषय पर गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हितधारकों, शोधकर्ताओं, अकादमिक, प्रबन्धकों, स्वयंसेवी समूहों आदि के साथ गंगा से जुड़े विभिन्न आयामों जैसे सतत विकास, प्रबन्धन और पुनर्जीवन के विषय में बात करना है। इस कार्यक्रम में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये कोई शुल्क नहीं है। यात्रा व्यय प्रतिभागियों को स्वयं वहन करना होगा।

गोष्ठी से सम्बन्धित अधिक जानकारी के लिये संलग्नक देखें। पंजीकरण फार्म और सूचना ब्रोशर संलग्न से डाउनलोड किया जा सकता है। जानकारी www.nih.ernet.in पर भी उपलब्ध है।

अधिक जानकारी के लिए कृपया आयोजकों से graspnih@gmail.com पर ईमेल पर भी सम्पर्क किया जा सकता है।

डॉ. एस.डी. खोबरागड़े,
वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम सचिव

"राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला -2015" का आयोजन

Author: 
हिन्दी इंडिया वाटर पोर्टल
तीन वर्षों से स्पंदन संस्था द्वारा मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से मीडिया चौपाल का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष यह आयोजन ‘जीवाजी विश्वविद्यालय’, ग्वालियर में होना है।

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, भारत सरकार के सहयोग से "राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला -2015" का आयोजन 10-11 अक्टूबर, 2015 को हो रहा है।

वर्ष 2013 में मीडिया चौपाल का मुख्य-विषय "जन-जन के लिए मीडिया" तथा वर्ष 2014 का मुख्य विषय ‘नदी संरक्षण’ था। इस राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला का केन्द्रीय विषय "नदी संरक्षण एवं पुनर्जीवन" है।

वाराणसी में बनेगी गंगा पर निर्णायक रणनीति

Author: 
कुमार कृष्णन
तारीख : 10-11-12 अप्रैल 2015
स्थान : सर्वसेवा संघ, राजघाट,वाराणसी


इस अधिवेशन में गंगा मुक्ति आन्दोलन के साथ-साथ साझा संस्कृति मंच और सर्व सेवा संघ भी है। तीन दिवसीय सम्मेलन में गाँधी शान्ति प्रतिष्ठान की अध्यक्षा राधा भट्ट, स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द, सुप्रसिद्ध पत्रकार भरत झुनझुनवाला, अनिल चमड़िया, बी.डी.त्रिपाठी, प्रो. यू.के. चौधरी, राज्यसभा सदस्य अली अनवर, अनिल साहिनी, अमरनाथ भाई, वृजखंडेलवाल, जया मिश्रा, पर्यावरणविद् सुरेश भाई सहित देश के नदियों और घाटियों के संघर्ष से जुड़े लोग हिस्सा लेंगे। यह जानकारी गंगा मुक्ति आन्दोलन के अनिल प्रकाश ने दी। जमीन, खेती, ​हरियाली, जीव-जन्तुओं और पौधों सबकी हिफाज़त करती है गंगा। हमारे मछुआरे, किसान, सब्जी उत्पादक और गंगा बेसिन के किसानों का जीना मरना गंगा के साथ है। अपनी आजीविका के लिए गंगा पर आश्रित है। इसके पास सदियों से इंसानी तजुर्बा है। आज हिमालय से लेकर गंगा सागर तक पूरी गंगा बेसिन संकटग्रस्त है।

दसियों करोड़ लोगों की जीविका, उनका जीवन तथा जीव-जन्तुओं और वनस्पतियों तक के अस्तित्व पर खतरा मँडराने लगा है। गंगा की समस्या के समाधान की अब तक की कोशिशें ही उसकी बर्बादी और तबाही का सबब बनती जा रही हैं। गंगा के ज्वलन्त सवालों को लेकर 10-11-12 अप्रैल 2015 सर्वसेवा संघ, राजघाट, वाराणसी में गंगा मुक्ति आन्दोलन का वाराणसी सम्मेलन आयोजित किया गया है।

डॉक्टर तलाशेंगे स्केलेटल फ्लोरोसिस के रोगियों का निदान

Author: 
पुष्यमित्र
स्केलेटल फ्लोरोसिस के मरीजों के लिए उम्मीद की नयी रोशनी सामने आयी है। गया में राज्य भर के हड्डी रोग विशेषज्ञ एकजुट होकर इस मसले पर विचार-विमर्श करेंगे। यह कांफ्रेंस बोध गया में 13-15 फरवरी के बीच होगा। यह जानकारी कांफ्रेंस की स्वागत समिति के अध्यक्ष डॉ फरहत हुसैन और आयोजन सचिव डॉ प्रकाश सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि इस कांफ्रेस में नेशनल ऑर्थोपेडिक एसोसियेशन के कम से कम पांच पूर्व सचिव भाग लेंगे।

स्केलेटल फ्लोरोसिस पर बेहतर उपाय की तलाश
उन दोनों ने बताया कि इस कांफ्रेंस में हड्डियों से संबंधित विकार खास तौर पर विकलांगता के उपायों पर विचार किया जायेगा। यह भी जानने की कोशिश की जायेगी कि क्या किसी तरह की सर्जिकल इंटरवेंशन के जरिये कोई समाधान निकाला जा सकता है, साथ ही इस संबंध में किस तरह के मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम चलाये जा सकते हैं इस पर भी विचार किया जायेगा। बिहार के कई गांवों के पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा होने से लोग स्थायी विकलांगता के शिकार हो गये हैं। उम्मीद है कि इस कांफ्रेंस में उनके उपचार का कोई तरीका निकल पाये।

डॉ. हुसैन और डॉ. सिंह कहते हैं कि हालांकि राज्य के फ्लोराइड प्रभावित गांवों में राहत पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है, मगर मेडिकल बिरादरी इस तरह की जिम्मेदारी उठाने में संकोच नहीं करती है। डॉ. द्वय ने माना कि उन इलाकों में या तो पेयजल को फ्लोराइड मुक्त किया गया है या लोग बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं। पेयजल को फ्लोराइड मुक्त करना बहुत महंगा उपाय है, लिहाजा गांव के लोग लाचार होकर पलायन कर जाते हैं।

तीन दिन का होगा सेमिनार

जलगांव में बनेगी जल, जन और अन्न सुरक्षा की रणनीति

तारीख : 19-29 दिसंबर, 2014
स्थान : गांधी तीर्थ, गांधी रिसर्च फाउंडेशन, जैन हिल्स, जलगांव, महाराष्ट्र


जल सुरक्षा के बगैर न जन सुरक्षा की उम्मीद की जा सकती है और न ही अन्न सुरक्षा की; बावजूद इस सत्य के। क्या यह सत्य नहीं है कि पिछले कुछ दशकों से हम भारतीय इस तरह व्यवहार करने लगे हैं कि मानों पानी कभी खत्म न होने वाली संपदा हो? हमने पानी का उपभोग बढ़ा लिया है। पानी को संजोने की जहमत उठाने की बजाय, हमने ऐसी मशीनों का उपयोग उचित मान लिया है, जो कि कम-से-कम समय में अधिक-से-अधिक पानी निकाल सके। सरकारों और वैज्ञानिकों ने भी ऐसे ही विकल्प हमारे सामने रखे।खाद्य सुरक्षा और जल सुरक्षा : ये दोनों ही विषय केन्द्र की वर्तमान एवं पूर्व सरकार के एजेंडे में हिस्सा रहे हैं। संप्रग सरकार ने खाद्य सुरक्षा को लेकर कानूनी पहल के काफी चर्चा में रही। वर्तमान सरकार के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने 22 नवंबर को दिल्ली में जल मंथन के दौरान जल सुरक्षा पर गैर सरकारी संगठनों की राय जानने के लिए विशेष सत्र का आयोजन किया।

जलवायु परिवर्तन की चुनौती एवं गंगा के संदर्भ में इलाहाबाद में सेमिनार

Source: 
ग्लोबल ग्रींस
तारिख : 26 जुलाई 2014
स्थान : उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, इलाहाबाद


जलवायु परिवर्तन की चुनौती एवं समाधान गंगा के विशेष संदर्भ के विषय पर एडवोकेसी वर्कशॉप एवं सेमिनार का आयोजन ऑल इंडिया वूमेंस कॉन्फ्रेंस द्वारा एवं संयोजन ग्लोबल ग्रींस द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम 26 जुलाई 2014 को उ.म.क्षे.सां.के. इलाहाबाद के प्रेक्षागृह में किया जा रहा है।

सेमिनार में शोध छात्रों द्वारा जलवायु परिवर्तन एवं गंगा के संदर्भ में पेपर प्रस्तुत किया जाएगा साथ ही प्रजेंटेशन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विषय विशेषज्ञ के रूप में जलवायु परिवर्तन पर बी.आर. अम्बेडकर वि.वि. लखनऊ के पर्यावरण वैज्ञानिक डाॅ. वेंकटेश दत्ता एवं गंगा पर उत्तरकाशी के पर्यावरणविद सुरेश भाई रहेंगे।

कोल्हापुर में होगा चौथा भारत विकास संगम

Author: 
अजित षडंगी
Source: 
भारतीय पक्ष, जुलाई 2014
तारिख : 19-25 जनवरी 2015 तक।
स्थान : श्रीक्षेत्र सिद्धगिरि मठ, कणेरी गांव, कोल्हापुर।


सरकार देश के विकास को लेकर क्या सोचती है, इसका ढिंढोरा तो खूब पीटा जाता है, लेकिन विकास के बारे में समाज की क्या सोच है, इसे जानने के बहुत कम अवसर मिलते हैं। कोल्हापुर का सम्मेलन इस कमी को पूरा करेगा। यहां आपको उस भारत के दर्शन होंगे, जिसके सपने देश की सज्जनशक्ति देखती है। भारत विकास संगम की कोशिश है कि ये सपने कुछ गिने-चुने समाजसेवी ही नहीं, बल्कि देश की जनता भी देखे। और जब कोई सपना देश की जनता देखती है तो वह सपना-सपना नहीं रहता, वह सच्चाई बन जाता है।

उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की यात्रा करता हुआ भारत विकास संगम का राष्ट्रीय सम्मेलन अब महाराष्ट्र के कोल्हापुर में दस्तक देने वाला है। ‘भारतीय संस्कृति उत्सव’ के नाम से आयोजित हो रहे इस बार के सम्मेलन की मेजबानी का जिम्मा श्री क्षेत्र सिद्धगिरि मठ, कणेरी के ऊपर है। 19 जनवरी से 25 जनवरी, 2015 के बीच होने वाले इस सम्मेलन की तैयारियां जोरों पर है।

भारत विकास संगम का चौथा सम्मेलन भारतीय संस्कृति उत्सव के नाम से महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में आयोजित किया जा रहा है। कोल्हापुर को मां लक्ष्मी का धाम माना जाता है। जो लोग तिरुपति में भगवान विष्णु का दर्शन करने जाते हैं, वे यहां मां लक्ष्मी के दर्शन के लिए अवश्य आते हैं।

गंगा संवर्धन हेतु काशी कुंभ का निमंत्रण

Source: 
जल जन जोड़ो अभियान
तारिख : 12-20 जुलाई 2014 तक।
स्थान : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू)


कुम्भ तो बिना बुलाए आयोजित होते थे। इनमें शामिल होने वाले लोग गंगा को और अधिक गंदा करके जाते हैं। कुम्भ का भावार्थ ही बदल दिया है। पहले कुम्भ में राजा, प्रजा, संत ये सब मिलकर देवता और राक्षस के रूप में वैचारिक मंथन करते थे। इस मंथन में समाज की बुराइयों का जहर और समाज की अच्छाइयों के अमृत को अलग-अलग रखने की विधि पर विचार करके निर्णय होता था। निर्णयों को कुम्भ का निर्णय मानकर राजा, प्रजा और संत सब अपने जीवन में पालना करते थे।

आप जानते हैं, गंगा के विषय में सरकार बहुत चिंतित है और गंगा मंथन कर रही है। समाज को भी सरकार के इस मंथन में साथ रहना चाहिए। गंगा की पवित्रता की रक्षा करने का काम गंगा किनारे के घाटों पर रहने वाले पुजारी और संतजन ही करते थे। राजनैतिक उथल-पुथल, गुलामी और समाज के आर्थिक लोभ लालच ने गंगा सेवा का रूप बदल दिया है।

‘गंगा-मंथन’ 7 जुलाई को

Author: 
जनसत्ता ब्यूरो
Source: 
जनसत्ता, 28 जून, 2014

वर्तमान सरकार ने ‘नदी विकास एवं गंगा पुनरुत्थान’ मंत्रालय बनाकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। सरकार जल्दी ही गंगा पर एक समन्वित योजना बनाना चाहती है। बड़ी योजना बनाने से पहले गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय ‘गंगा मंथन’ कार्यक्रम का आयोजन कर रही है।

आयोजन का स्थान विज्ञान भवन, नई दिल्ली होगा। समय सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक।

गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाने की योजना को जनआंदोलन का रूप देने की पहल करते हुए सरकार सात जुलाई को ‘गंगा मंथन’ कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसमें कई पर्यावरणविद, वैज्ञानिक, धर्मगुरु, गंगा इलाके के सांसद एवं जनप्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

केंद्रीय मंत्री उमा भारती का भी कहना है कि गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाने का विषय ऐसा है जो बिना जन आंदोलन के पूरा ही नहीं हो सकता।