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आमंत्रण- विकास संवाद सातवाँ मीडिया सम्मेलन, 29,30 जून एवं 1 जुलाई 2013, केसला

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विकास संवाद
विकास और जनसरोकार के मुद्दों पर बातचीत का सिलसिला साल-दर-साल आगे बढ़ता ही जा रहा है| हालाँकि इस बार हम अपने तय समय से थोडा देर से करने जा रहे हैं, लेकिन कई बार मार्च में संसद और राज्य विधानसभाओं के सत्र और बजट की आपाधापी में फंसने के कारण बहुत सारे साथी आ नहीं पाते थे| तो इस बार सोचा थोडा लेट चलें, लेकिन सब मिल सकें|

आप सब जानते ही हैं कि यह सफ़र सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी से शुरू हुआ| बांधवगढ़, चित्रकूट,महेश्वर, छतरपुर, फिर पचमढ़ी के बाद इस बार हम केसला में यह आयोजन करने जा रहे हैं| इस बार कई दौर की बैठकों के बाद केसला संवाद के लिए जो विषय चुना गया है, वह है|

28 को लखनऊ में बनेगी 20 नदियों की प्रदूषण मुक्ति कार्ययोजना

तिथि : 28 अप्रैल 2013
स्थान : जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय युवा केन्द्र (लखनऊ)


नदियों को लेकर चिंतित कई शख़्शियतें समग्र चिंतन के लिए आगामी 28 अप्रैल को लखनऊ में एकजुट होंगी। इनमें सर्वश्री न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय, गंगा एक्शन परिवार के स्वामी चिदानंद ‘मुनीजी’, राज्यसभा सदस्य अनिल माधव दवे, प्रसिद्ध स्तंभकार भरत झुनझुनवाला, भारत सरकार के पूर्वजल संसाधन सचिव माधव चितले, गंगा प्रदूषण मुक्ति को लेकर सक्रिय वर्तमान भाजपा उपाध्यक्ष उमा भारती, यमुना रक्षक दल के अध्यक्ष महंत जयकृष्ण दास और लखनऊ के महापौर डॉ. दिनेश शर्मा प्रमुख हैं। नदी पर समग्र चिंतन का यह राष्ट्रीय अवसर जुटाने की पहल ‘लोक भारती’ नामक संगठन ने की है।

गंगा-अविरलता चिंतन यात्रा

Source: 
गंगा आह्वान
यात्रा :- 05-08 अप्रैल 2013
स्थान :- हरिद्वार से बद्रीनाथ (उत्तराखंड)
(यात्रा में शामिल होने के लिए आयोजकों से सहमति ले लें।)


सदैव ही माँ गंगा एक नदी से कहीं बढ़कर इस भारतवर्ष की पहचान, इसकी संस्कृति एवं सभ्यता का प्रवाह रही है। इसी राष्ट्रीय नदी गंगा की अविरलता, आज गंगा भक्तों व प्रेमियों में प्राथमिक रूप से चिंता व संघर्ष का विषय बनी हुई है। इस हेतु चिंता एवं विरोध के विभिन्न स्वरों से अवगत राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण एवं इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री इस विषय की गंभीरता को स्वीकारने के बाद भी अब तक व्यवहारिक धरातल पर संवेदनहीन व उपेक्षित रवैया अपनाकर अपने आश्वासनों का सरेआम उल्लंघन कर रहे हैं। परिणामस्वरूप आने वाली 13 मई 2013 को श्रीनगर क्षेत्र की स्थानीय संस्कृति एवं आस्था का प्रतीक माँ धारी देवी सिद्ध पीठ को अलकनंदा पर बनाए जा रहे श्रीनगर बाँध परियोजना की बलि चढाए जाने की तैयारी हो चुकी है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में गंगा की अविरलता हेतु सरकारों, प्राधिकरण व संसद में रख चुके अपने वैचारिक एवं सैद्धांतिक स्वर को व्यावहारिक भूमि पर भी तेजी से उठाने हेतु आवश्यकता आन पड़ी है।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों की चली तो गर्मी में सूख जाएगी गंगा

Author: 
अंबरीश कुमार
Source: 
जनसत्ता, 13 फरवरी 2013

कुंभ की जल संसद में उठेगा गंगा और यमुना के पानी के संकट का सवाल


खेतों के बीचों-बीच पेप्सी व कोक जैसी निजी बाटलिंग कंपनियां व अन्य कारपोरेट बड़े-बड़े ट्यूबवेलों से पानी खींच कर खेती सुखा देते हैं और गरीब लोग सूखे का शिकार हो जाते हैं। उसके खिलाफ जनमत बनाने के लिए ही 13 फरवरी को कुंभ मेला मैदान में अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा ने जल संसद का आयोजन किया है। जल संसद नदियों का पानी सिंचाई से छीन कर मुनाफा कमाने वाली विदेशी व दूसरी बड़ी कंपनियों को दिए जाने का विरोध करेगी। लखनऊ, 12 फरवरी। कुंभ में बुधवार को जल संसद बुलाई गई है, जो गंगा-यमुना और संगम में साफ पानी की मांग के साथ नदियों के पानी के बेजा इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग करने जा रही है। अखिल भारतीय किसान मज़दूर संगठन की तरफ से बुलाई गई जल संसद में बड़ी कंपनियों के जरिए जल स्रोतों के दुरुपयोग और इसकी छूट दिए जाने का भी विरोध होगा।

निमंत्रणः स्वच्छ यमुना के लिये चिंतन और मनन

Source: 
www.yamunanetwork.com
यमुना नदी के मुद्दों और दशा पर चिंतन और मनन करने के लिये, यमुना नेटवर्क के सौजन्य से आप सभी 12 फरवरी, 2013 को कुंभ मेला, इलाहाबाद में सादर आमंत्रित हैं।

मुद्दे पर आपके विचार हमारे लिये अति महत्वपूर्ण है अतः आपसे अनुरोध है कि कॉन्फ्रेंस में शिरकत करके हमारा उत्साह और मान बढ़ाएं। कार्यक्रम के शुरुआत में यमुना पर जानकारी से भरपूर 5 मिनट की डॉक्यूमेंट्री प्रस्तुत की जाएगी, यह फिल्म अभी बनाई जा रही है इसमें यमुना नदी से संबंधित भारत और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किये ज रहे शैक्षणिक प्रयासों को दर्शाने का प्रयास किया गया है।

आपके द्वारा दिये गए समय और सहयोग के लिये हम आपका आभार प्रकट करते हैं। यमुना पर यह ट्रेलर बनाने में हमारी सहायता और सहयोग करने के लिये आपका धन्यवाद अदा करते हैं।

यमुना नेटवर्क यमुना पर काम करने वाले और एक समान सोच रखने वाले ऐसे लोगों और संस्थाओं का एक गैर लाभकारी गठबंधन है, जिनका मकसद यमुना के पानी में औद्योगिक और घरेलू कचरे को जाने से रोकने के साथ-साथ, नदी को आने वाली पीढ़ियों के लिये बचाए रखना भी है।

कुंभ मेले का नक्शा देखने के लिए अटैचमेंट डाउनलोड करें।

हिंदी का दूसरा महाकुंभ वर्धा में 01 फरवरी से

Author: 
अमित विश्‍वास

पांच दिवसीय समारोह में देशभर से तकरीबन 200 हिंदी के नामचीन विद्वान करेंगे विमर्श


वर्धा, 30 जनवरी 2013: वर्धा स्थित महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय 1 से 5 फरवरी, 2013 के दौरान ‘हिंदी का दूसरा समय’ कार्यक्रम का भव्‍य आयोजन कर रहा है, जिसमें तकरीबन 200 से अधिक हिंदी के साहित्‍यकार, पत्रकार, रंगकर्मी व सामाजिक कार्यकर्ता विवि‍ध विषयों पर विमर्श करेंगे।

समारोह का उद्घाटन 1 फरवरी को प्रात: 10 बजे अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के प्रांगण में बने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी सभागार में प्रो. नामवर सिंह करेंगे। विशिष्‍ट अतिथि के रूप में प्रो.निर्मला जैन की उपस्थिति में समारोह की अध्‍यक्षता कुलपति विभूति नारायण राय करेंगे।

भारतीय जल संकट : विकास, विवाद और संवाद

Author: 
संध्या गुप्ता
Source: 
संभावना इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी एंड पॉलिटिक्स
स्थान : संभावना इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी एंड पॉलिटिक्स,
गांव : कंडबारी, पालमपुर, हिमाचल, 176061
तिथि : 26 फरवरी-01 मार्च 2013


भारत में आर्थिक सुधारों के लहर के दूसरे दशक में प्राकृतिक संसाधनों के निजीकरण और कारपोरेटीकरण का दौर तेज हुआ है। इसके साथ-साथ जहां एक ओर विवाद बढ़े हैं तो दूसरी ओर इन संसाधनों पर बड़ी संख्या में लोगों का हक छीना गया है। हालांकि वृद्धि केंद्रित विकास के लिए संसाधनों पर होने वाली बहस के केंद्र में ज़मीन तो हमेशा ही मुद्दा रही, पर मुख्य धारा की मीडिया में पानी के मुद्दे को ज्यादा अहमियत नहीं मिली है।

आर्थिक वृद्धि के इस दौर में न केवल मानवीय पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए पानी की कमी को महसूस किया जा रहा है। बल्कि

गंगा संसद का आयोजन

Source: 
तरुण भारत संघ
तरुण भारत संघ, जल बिरादरी सहित कई संगठन गंगा संसद का आयोजन कर रहे हैं। यह आयोजन इस बार के इलाहाबाद महाकुंभ के दौरान 21-23 जनवरी के बीच होगा।

स्थान : इलाहाबाद
तिथि : 21-23 जनवरी 2013

आप जानते हैं, नदियों की पवित्रता और समाज की संस्कृति के संरक्षण व प्रबंधन और पुनर्जीवन हेतु राज, समाज और संत मिलकर कुंभ आयोजित करते थे। कुंभ सिर्फ स्नान और उत्सव नहीं था बल्कि गहन विचारों का गहरा मंथन और चिंतन था। समुद्र मंथन जैसा गहन विचारों का निचोड़ निकालकर समाज को सदैव सुधार के रास्ते पर आगे बढ़ाने की कोशिश होती थी। कुंभ की कोशिश कुरीति और सुरीति को पहचानने तथा गंदगी और सफाई को अलग-अलग रखने को ही समुद्र के खारे जल में से अमृत का कलश निकालना हमारे विचार मंथन का सार है। इसी का अब रूप विकृत होता जा रहा है।

सर्व सेवा संघ का जल-जंगल-जमीन स्वराज अभियान शुरू

Source: 
सर्वोदय प्रेस सर्विस, दिसम्बर 2012

राजघाट पर 48 घंटे का उपवास होगा


स्थान : राजघाट, नई दिल्ली
तिथि : 09-11 दिसम्बर 2012


सेवाग्राम। सर्व सेवा संघ ने जल, जंगल, जमीन पर सरकार एवं कंपनियों के बढ़ते प्रभुत्व, इसके अंधाधुंध दोहन तथा जनता के विस्थापन के विरूद्व एवं जनता को उसकी भी जिम्मेदारियों के प्रति सजग करने के लिए स्वराज अभियान शुरू किया है।

अभियान के प्रथम चरण में 20 नवम्बर को देहरादून में एक सम्मेलन हुआ एवं 21 नवम्बर को डा. रामजीसिंह एवं दयासिंह के आशीर्वचनों के साथ यात्रा की शुरूआत हुई। सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष सुश्री राधाबहन भट्ट, उ.प्र. सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष श्री मधुसूदन एवं उत्तराखंड सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष श्री सुरेश भाई इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्री अशोक भारत यात्रा का संयोजन तथा श्री अमरनाथभाई मार्गदर्शन कर रहे हैं।