खेती में बदलाव से सुलझेगा कावेरी विवाद

Author: 
अमृता गुप्ता
Source: 
हिन्दुस्तान टाइम्स, 22 अक्टूबर 2016

कावेरी नदी जल बँटवारे पर विवादकावेरी नदी जल बँटवारे पर विवादपिछले दिनों कावेरी जल विवाद को लेकर हुई हिंसक झड़प से पता चलता है कि पानी कितना जरूरी है। यह झड़प इस ओर भी इशारा करता है कि आने वाले दिनों में पानी को लेकर किस हद तक संघर्ष हो सकता है।

कावेरी मुद्दे को ध्यान में रखते हुए अब यह बहुत जरूरी हो गया है कि पानी की किल्लत की समस्या को गम्भीरता से लिया जाये और इसका माकूल हल तलाशा जाये ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

कावेरी जल विवाद के पीछे मोटे तौर पर इस नदी के पानी पर तमिलनाडु और कर्नाटक का मालिकाना हक वजह है।

दक्षिण गंगा कावेरी

Author: 
डॉ. अनन्तराम मिश्र ‘अनन्त’
Source: 
शिवमपूर्णा, जुलाई 2014

सह्याद्रि की पश्चिमी पर्वत शृंखला में एक ‘ब्रह्मगिरि या ब्रह्मकपाल’ नामक ऊँची पहाड़ी है। ब्रह्मगिरि की परिसर में एक निर्झर ‘पवित्र पुष्करिणी’ कुण्ड के नाम से विख्यात है, जिसके किनारे देवी-मन्दिर में पूजा-अर्चना चलती है और एक छोटा सरोवर है, जिसमें पवित्र पुष्करिणी का पानी झरता रहता है। यात्री इसमें स्नान करते हैं। सरोवर के जल से मेरा जन्म होता है। शिशु रूप में मैं सर्वप्रथम एक लघु प्रणाली बनकर दर्शन देती हूँ।

कावेरी : लहर में जहर

प्रदूषण बोर्ड की रपट को आए 13 साल बीत गए, कावेरी में ना जाने कितना पानी बह गया, उससे ढेर सारे विवाद और हंगामे उपज गए लेकिन उसका प्रदूषण दिन दुगना-रात चौगुना बढ़ता रहा। उस पर राजनीति की बिसात बिछी है। कावेरी गवाह है कि आधुनिक विकास की कितनी बड़ी कीमत नदियां चुका रही हैं। कावेरी में जब तक पानी है, वह जीवनदायिनी है और उस दिन तक उसके पानी को लेकर दो राज्य लड़ते रहेंगे, लेकिन जिस दिन उसमें घुलता जहर खतरे की हद को पार कर जाएगा, उस दिन से यही लोग इस नदी को अपने राज्य की सीमा में घुसने से रोकने का झंडा उठा लेगें।पौराणिक कथाओं में कुर्गी-अन्नपूर्णा, कर्नाटक की भागीरथी और तमिलनाडु में पौन्नई यानी स्वर्ण-सरिता कहलाने वाली कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद से तो सभी परिचित हैं लेकिन इस बात की किसी को परवाह नहीं है कि यदि इसमेें घुलते जहर पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो जल्दी ही हालात काबू से बाहर हो जाएंगे। दक्षिण की जीवन रेखा कही जाने वाली इस नदी में कही कारखानें का रसायनयुक्त पानी मिल रहा है तो कहीं शहरी गंदगी का निस्तार सीधे ही इसमें हो रहा है, कहीं खेतों से बहते जहरीले रसायनयुक्त खाद व कीटनाशक इसमें घुल रहे हैं तो साथ ही नदी हर साल उथली होती जा रही है। बंगलूरू सहित कई विश्वविद्यालयों में हो रहे शोध समय-समय पर चेता रहे हैं कि यदि कावेरी को बचाना है तो उसमें बढ़ रहे प्रदूषण पर नियंत्रण जरूरी है, लेकिन बात कागजी घोड़ों की दौड़ से आगे बढ़ नहीं पा रही है।

कावेरी : लहर में जहर

Author: 
पंकज चतुर्वेदी
Source: 
लोकमत समाचार, 20 अप्रैल 2013
पौराणिक कथाओं में कुर्गी-अन्नपूर्णा, कर्नाटक की भागीरथी और तमिलनाडु में पौन्नई यानी स्वर्ण-सरिता कहलाने वाली कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद से तो सभी परिचित हैं लेकिन इस बात की किसी को परवाह नहीं है कि यदि इसमें घुलते जहर पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो जल्दी ही हालात काबू से बाहर हो जाएंगे। दक्षिण की जीवन रेखा कही जाने वाली इस नदी में कहीं कारखाने का रसायन-युक्त पानी मिल रहा है तो कहीं शहरी गंदगी का निस्तार सीधा इसमें हो रहा है, कहीं खेतों से बहते जहरीले रसायनयुक्त खाद और कीटनाशक इसमें घुल रहे हैं तो साथ ही नदी हर साल उथली होती जा रही है। बैंगलुरू सहति कई विश्वविद्यालयों में हो रहे शोध समय-समय पर चेता रहे हैं कि यदि कावेरी को बचाना है तो उसमें बढ़ रहे प्रदूषण पर नियंत्रण जरूरी है, लेकिन बात कागजी घोड़ों की दौड़ से आगे बढ़ नहीं पा रही है।

ब्रह्मगिरी पहाड़ियों में बसा भारत का स्कॉटलैंड - कुर्ग

Source: 
ये है इंडिया डॉट नेट
ओंकारेश्वर मंदिरओंकारेश्वर मंदिरकुर्ग के बारे में काफी सुना था। गर्मी की छुट्टियों में वक्त मिला तो आनन-फानन में कुर्ग जाने का प्लान बना डाला। मगर रेलवे की टिकट बुक करने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। काफी भाग दौड़ और सिफारिशों के बाद मंगलौर तक की रेलवे टिकट बुक करा पाया। मंगलौर से कुर्ग की दूरी है 135 किलोमीटर। यहां से मडिकेरी तक सीधी बसें मिल जाती हैं। मडिकेरी कुर्ग जिले का हेडक्वार्टर है। मंगलौर से बस में मडिकेरी पहुंचने में साढ़े 4 घंटे लगते हैं, करीब इतना ही वक्त मैसूर से मडिकेरी पहुंचने में लगता है। समुद्र तल से 1525 मीटर की उंचाई पर बसा मडिकेरी कर्नाटक के कोडग
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http://www.yehhaiindia.net

वैगै और कावेरी

Author: 
काका कालेलकर
Source: 
गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा
भारतीय एकता के प्रखर समर्थक हमारे धर्माचार्यों ने और संस्कृत-कवियों ने जिन नदियों को एक श्लोक में बांध दिया और अपने पूजा-जल में जिन नदियों की सन्निधी मांग ली, उनमें कावेरी का नाम हैः

गंगे! च यमुने! चैव, गोदावरी! सरस्वति!
नर्मदे! सिन्धु! कावेरि! जलेSस्मिन् सन्निधिं कुरु।।

पूरी संस्कृति है कावेरी

Source: 
जागरण याहू
कावेरी उद्गमदक्षिण भारत के कर्नाटक में दो पर्वत मालाएं हैं-पश्चिम और पूर्व, जिन्हें पश्चिमी और पूर्वी घाट के नाम से जाना और पुकारा जाता है। पश्चिमी घाट के उत्तारी भाग में एक बहुत ही सुंदर 'कुर्ग' नामक स्थान है। इसी स्थान पर 'सहा' नामक पर्वत है, जिसे 'ब्रह्माकपाल' भी कहते हैं, जिसके कोने में एक छोटा-सा तालाब है। यही तालाब कावेरी नदी का उद्गम स्थल है। यहां देवी कावेरी की मूर्ति है, जहां एक दीपक सदा जलता रहता है और नित्य पूजा भी होती है।
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http://in.jagran.yahoo.com/

भारत का जल संसाधन

संपादक- मिथिलेश वामनकर/ विजय मित्रा
क्या आप सोचते हैं कि जो कुछ वर्तमान में है, ऐसा ही रहेगा या भविष्य कुछ पक्षों में अलग होने जा रहा है? कुछ निश्चितता के साथ यह कहा जा सकता है कि समाज जनांकिकीय परिवर्तन, जनसंख्या का भौगोलिक स्थानांतरण, प्रौद्योगिक उन्नति, पर्यावरणीय निम्नीकरण, और जल अभाव का साक्षी होगा। जल अभाव संभवत: इसकी बढ़ती हुई माँग, अति उपयोग तथा प्रदूषण के कारण घटती आपूर्ति के आधार पर सबसे बड़ी चुनौती है। जल एक चक्रीय संसाधन है

जल नीति राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में बननी चाहिये

अजमेरअजमेरप्रोफेसर रासा सिंह रावत अजमेर के सांसद हैं। कहते हैं कि जब मैं छोटा था तो अजमेर में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनो ही ओर का मानसून आता था। लेकिन वनों के कटने और रेगिस्तान के विस्तार के कारण वनस्पति का अभाव हो गया। परिणामस्वरुप अजमेर भी मारवाड़ व मेवाड़ की तरह अकाल की चपेट में आ गया। वर्षाभाव की वजह से तालाब सूख गये। राजस्थान सरकार ने अब तय किया है कि अजमेर जिले के गाँवों को भी बीसलपुर का पानी दिया जा जाये। 300 किमी दूर से लाया गया पानी अजमेर के सूखे ओठों की प्यास बुझा पाएगा? प्रस्तुत है उनसे बातचीत . . .

अजमेर की जल समस्या के बारे में कुछ बतायें।