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हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़, रेनुकूट, सोनभद्र, यूपी: समुदाय आधारित जल प्रबंधन

हिंडाल्को के रेनुकूट संयंत्र में एक जल प्रबंधन परियोजना चलाई जा रही है जिसका लक्ष्य इस पहाड़ी क्षेत्र के ३० गांवों को फ़ायदा पहुंचाना है। इस इलाके में करीब 65% आबादी गरीबी रेखा से नीचे गुज़र बसर करती है। परियोजना के तहत बाहर से पानी लाकर 2500 एकड़ से अधिक ज़मीन की सिंचाई की व्यवस्था की गई जिससे करीब 4165 लोगों को फ़ायदा हुआ। इसी तरह बारिश के पानी के संरक्षण के माध्यम से 8600 एकड़ ज़मीन की सिंचाई की व्यवस्था की गई जिससे 6500 किसानों को फ़ायदा पहुंचा। परियोजना के तहत गांव वालों को विभिन्न योजनाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए जागरुक किया गया। पानी के इस्तेमाल पर विभिन्न समितियों और स्वयं सहायता समूहों को गठन किया गया। इन समितियों की भूमिका और कार्य के बारे में समझाने से लेकर तकनीकी सहयोग भी दिया गया। परियोजना क्षेत्र में 36 सिंचाई परियोजनाएं, 27 छोटे चेक बांध, 150 आरडब्ल्यूएच और

रिलायंस एनर्जी, दहानु, महाराष्ट्र; समुदाय आधारित जल संरक्षण प्रबंधन

रिलायंस एनर्जी के कोयला आधारित दहानु ताप विद्युत स्टेशन (डीटीपीएस)से मुंबई में बिजली की आपूर्ति की जाती है। दहानु अरब सागर से लगा हुआ आदिवासी बहुल क्षेत्र है। 185 गांवों वाले इस इलाके की आबादी ३ लाख से अधिक है। इस इलाके में बारिश खूब होती है लेकिन उसे इकट्ठा करने की सुविधाओं की कमी है। समुद्र तटीय इलाका होने के कारण यहां के लोग खारे पानी से जुड़ी हुई समस्याओं से भी जूझते रहते हैं। कंपनी ने रोटरी क्लब, द लायंस क्लब, स्थानीय छात्रों और अपने कर्मचारियों की मदद से पानी इकटठा करने के लिए बांध बनाने, बारिश के पानी के संरक्षण और पेय जल मुहैया कराने जैसे कई कदम उठाए। कंपनी ने बांध बनाते समय भवन निर्माण सामग्री के रूप में बिजलीघर से निकलने वाले नुकसानदायक उत्पाद, फ्लाईऐश का ३०% इस्तेमाल किया। कंपनी के इन प्रयासों से भूमिगत जल का स्तर बढ़ने के साथ-साथ इलाके में हरियाली भी ब

हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़, मूरी , झारखंड: संरक्षण, उत्सर्जन शोधन और पुनर्चक्रण

एल्युमीनिया के उत्पादन में पानी का बहुत अधिक इस्तेमाल होता है। विषैले उत्सर्जन और ग्रीन हाउस गैसों माध्यम से इसका पर्यावरण पर गहरा असर होता है। ऐसे में पानी के इस्तेमाल और अन्य उत्सर्जन में कमी के किसी भी प्रयास को प्रोत्साहित करना चाहिए। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ ने उत्पादन प्रक्रिया और अपनी टाउनशिप मूरी में इस्तेमाल होने वाले पाने के पुनर्चक्रण के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके साथ ही कंपनी ने आस-पास के गांवों में पाइपलाइन के माध्यम से पेय जल और तालाब, नहर, बांध, पोखरों और खुले कुओं से खेती के लिए पर्याप्त पानी सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। कंपनी ने पानी के सही उपयोग के बारे में स्थानीय लोगों को जागरुक बनाने किए शैक्षिक अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं।

जल संरक्षण और अपशिष्ट जल प्रबंधन के कारपोरेटी प्रयास

चूंकि कंपनियां पानी की सबसे बड़ी उपयोगकर्ता और उत्सर्जक हैं। ऐसे में भारत में पानी और सफ़ाई की स्थिति में कंपनियों की निर्णायक भूमिका है। खासतौर इस समय की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास के संदर्भ में इस पक्ष का महत्व और बढ़ गया है। कंपनियों की गतिविधियों का पर्यावरण और संसाधनों पर पड़ रहे असर की आलोचनात्मक परख के साथ-साथ यह भी ज़रूरी है कि पर्यावरण के नज़रिए से कंपनियों के ज़िम्मेदारी भरे कदमों की सराहना भी की जाए। चाहे उनकी सीमा कुछ भी हो। आगे भारत की प्रमुख घरेलू और बहुराष्ट्रीय, सरकारी और निजी कंपनियों के प्रयासों का वर्णन किया गया है।

भारत पेट्रोलियम, थाणे जिला, महाराष्ट्र: बूंद परियोजना


यमुना सफाई में जुटेगा मोरारका फाउन्डेशन

Source: 
7 Apr 2009, वीरेंद्र वर्मा, नवभारत टाइम्स
नई दिल्ली। घरों से निकलने वाला गंदा पानी अब जल स्त्रोतों के लिए प्रदूषण का कारण नहीं बनेगा, बल्कि इस गंदे पानी को इको फ्रेंडली तरीके से साफ कर पार्कों के फूलों को महकाया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मोरारका फाउंडेशन ने उदयपुर की नगर परिषद के साथ मिलकर प्रतिदिन 50 हजार लीटर गंदे पानी को साफ करने वाला एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया है। फाउंडेशन अब केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नॉलजी के साथ मिलकर दिल्ली सहित देश के 10 शहरों में ऐसे ही सीवेज प्लांट लगाने की योजना पर काम कर रहा है। अगर राजधानी में यह योजना लागू की गई तो मैली यमुना को साफ करने में काफी मदद मिलेगी।

शराब-कारख़ाने में अपशिष्ट न्यूनीकरण

डब्ल्यूएमसी आसवनी(शराब-कारख़ाना) इकाई में अपशिष्ट न्यूनीकरण स्थिति का जायज़ा-



..1.एक परिचय
शराब-कारख़ाने को चीनी उद्योग से संबंधित उद्योग समझा जाता है क्योंकि चीनी उद्योग से कच्चे माल एवं मद्य उत्पाद के शीरे मिल जाते हैं। भारत में बहुतेरे शराब-कारख़ाने शीरे को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
बहुत से कारख़ाने पर्यावरण और कारख़ाने के अपशिष्ट के निपटान के मुद्दे को झेल रहे हैं। बहुतेरे तकनीकी तरीके अपशिष्ट के निस्तारण के लिए आज़माएं गये हैं। लेकिन इन सारी विधियों में कोई भी विधि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा स्थापित मानक के अनुसार असरकारक और किफ़ायती साबित नहीं हुए।

टेक्सटाइल प्रोसेसिंग में स्वच्छ उत्पादन

..परिचय
मेसर्स तिरूपुर अरोरा तिरूपुर स्थित टेक्सटाइल प्रोसेसिंग की निजी कंपनी है। इस इकाई में कॉटन होजरी की प्रोसेसिंग होती है। इस इकाई की प्रोसेसिंग क्षमता प्रतिवर्ष (80 फीसदी प्रिंटिंग यानी छपाई और 20 फीसदी डाई ) 2500 टन की है। इस अध्ययन में इस इकाई की स्वच्छ निर्माण प्रक्रिया को रेखांकित किया गया है।

प्रकिया विवरण

मेसर्स थ्री स्टार पेपर मिल्स में स्वच्छ उत्पादन

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भूमिका

गूदा एवं कागज उद्योग विश्व भर में चक्रण युक्त वस्तुओं से प्रभावित होते हैं। चूंकि मात्रात्मक प्रतिबंध उठा लिए गए हैं इसलिए सस्ते दाम पर बड़ी मात्रा में आयतित गूदा उपलब्ध है। इस उद्योग में मंदी का माहौल है जिससे लाभ पर असर पड़ रहा है।

लघु उद्योगों के लिए स्थिति औऱ भयावह है क्योंकि वे उत्पादन की मात्रा के आधार पर बड़ी कंपनियों से मुकाबला नहीं कर पाते। प्रदूषण पर नियंत्रण के बढ़ते सरकारी दबाव ने इस उद्योग के लिए मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

ऐसी परिस्थितियों में इस इकाई ने राष्ट्रीय स्वच्छ उत्पादन केंद्र (एनसीपीसी) की सहायता से स्वच्छ उत्पादन(सीपी) का तरीका अपनाने का फैसला किया।

जेके पेपर लिमिटेड ( जयकयपुर, उड़ीसा):

मिल में इस्तेमाल हुए पानी का दोबारा इस्तेमाल
प्रमुख कागज़ निर्माता कंपनी ने मिल में उत्पादन प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल हुए पानी को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए कई उपाय किए। इससे न केवल मिल में पानी की खपत कम हुई वरन वहां से पानी के उत्सर्जन में भी कमी आई। संयंत्र में इस तरह के तकनीकी बदलाव किए गए कि इस्तेमाल हुआ पानी दोबारा पाइप के माध्यम से उत्पादन प्रक्रिया में लाया जा सके।