बुंदेलखंड में भूगर्भ जलस्तर 3 मीटर तक खिसका

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अमर उजाला/ 19 फरवरी 2010
अतिक्रमण और प्रदूषण का शिकार बांदा शहर का एक तालाबअतिक्रमण और प्रदूषण का शिकार बांदा शहर का एक तालाबपांच स्थानों पर 2 मीटर, 18 स्थलों पर 1 मीटर गहराया, केंद्रीय भूमि जल बोर्ड ने बारिश के बाद की स्थिति बताई, गर्मी में और नीचे जाएगा।

बांदा । ‘मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की’। बुंदेलखंड में भूगर्भ जलस्तर की यही स्थिति है। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड द्वारा बुंदेलखंड में भूगर्भ जलस्तर के उपलब्ध कराए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। तीन जनपदों के कुछ स्थानों पर जलस्तर 3 मीटर से अधिक नीचे खिसक गया है। 18 स्थानों पर एक मीटर से अधिक जलस्तर घटा है। यह स्थिति तीन माह पूर्व की है। भूमि जल बोर्ड ने अगस्त से नवंबर 2009 के आंकड़े बताए हैं।

इंदौर का पानी

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डॉ. स्वाति तिवारी, इंदौर
हमें याद रखना होगा देश में इंदौर में प्रसारित जल सबसे महंगा है। इंदौर वासियों को घरों तक पानी पहुंचाने से सरकार को जितना खर्च करना पड़ता है उतना शायद देश के किसी शहर में नहीं होता। नल न आने पर सड़क पार के बोरिंग से एक बाल्टी पानी लाना आपको महंगा लगता है, तब फिर जलूद (नर्मदा) से इंदौर तक एक बाल्टी पानी लाने में आपके क्या हाल होंगे? कितना छलकेगा पानी? असंभव है ना यह तो फिर जमूद से इंदौर तक की यात्रा करते पानी का मोल पहचानना होगा। डग-डग नीर के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध मालवा आए दिन सूखे की चपेट में होता है। मरुस्थल होते जा रहे इस पठार पर पानी की कमी भयावह संकेत दे रही है। पानी की यह संकट हमें ही झेलना है, इसलिए जरूरी है बूंद-बूंद पानी के महत्व को महसूस किया जाए।

इंदौर मालवा का सबसे बड़ा शहर है। पर इतिहास साक्षी है कि यह कोई बहुत पुराना नगर नहीं है। 1715 के आसपास यह क्षेत्र ओंकारेश्वर से उज्जैन के मध्य यात्रा का एक खुशनुमा पड़ाव हुआ था। आज यह महानगर में तब्दील होता एक शहर है, जो मुम्बई का स्वरूप लेता जा रहा है। जमीन का यह टुकड़ा बाजीराव पेशवा ने मल्हारराव होल्कर को 1733 में पुरस्कार के रूप में दिया था।

एक कप कॉफी को चाहिए 140 लीटर पानी

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पुखराज चौधरी, 29 अगस्त 2009
वर्चुअल वाटरवर्चुअल वाटरक्या आप जानते हैं कि आप जो चाय-कॉफी पीते हैं, कपड़े पहनते हैं या कार चलाते हैं, उसे बनाने या पैदा करने में कितना अदृश्य पानी लगा है? हो सकता है, वह हजारों लीटर के बराबर हो!

वर्चुअल वाटर का मतलब है अदृश्य पानी। लन्दन स्थित किंग्स कॉलेज के प्रोफेसर जॉन एंथोनी एलन ने अदृश्य पानी सिद्धांत की रचना की है। इस सिद्धांत की रचना के लिए प्रोफेसर एलन को 2008 में स्टॉकहोम वाटर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार के लिए स्टॉकहोम स्थित अंतरराष्ट्रीय वाटर इंस्टीट्यूट विजेताओ का चयन करता है।

कैसा जमाना आया, पानी बिक रहा है

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bhartiyapaksha.com
-दिलीप बीदावत

पानी कितना अमूल्य धरोहर है, यह बात तो मरू वासियों के जहन में सदियों से बैठी हुई है। लेकिन अपनी प्यास बुझाने के लिये पानी का भारी मूल्य चुकाना पड़ेगा, यह कभी यहां के लोगों ने सोचा नहीं था। पानी की एक-एक बूंद के लिये मोहताज थार के रेगिस्तान में पानी के करोड़ों के कारोबार का कथन अविश्वसनीय लग सकता है, किंतु यह बात सत्य है।

मारवाड़ के जोधपुर, बाड़मेर और पाली जिले में पानी के क्रय-विक्रय का करोड़ों का कारोबार होता है। निजी टयूबवैल तथा ट्रेक्टर-हेंकर मालिक इस व्यवसाय से प्रति वर्ष करोड़ों रुपये कमाते हैं। सूखे जैसी स्थिति में इन पानी व्यवसाइयों की कमाई दोगुनी हो जाती है।

रेगिस्तान का खतरा

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आने वाले समय में पानी की कमी देश में बहुत बड़ी आफत पैदा करने वाली है। अब तक इसे सिर्फ एक शहरी समस्या की तरह देखा जाता रहा है और इसका समाधान नहरों, पाइपलाइनों और वॉटर हार्वेस्टिंग के जरिए खोजने के प्रयास किए जाते रहे हैं। लेकिन इसका असली खतरा शहरों पर नहीं, गांवों पर और खास तौर पर खेती पर मंडरा रहा है।

उत्तराखण्ड में पानी

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bhartiyapaksha.com
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विपिन जोशी
उत्तराखण्ड में पानीउत्तराखण्ड में पानी का भयानक संकट विगत एक दशक से बना हुआ है। बारिश कम हो रही है। नदियों का जल स्तर लगातार घट रहा है। प्राचीन जल स्रोतो की स्थिति बद से बद्तर हो चुकी है। पहाड़ के नौले, धारे लगभग सूख चुके हैं।

एक आकंड़े के अनुसार उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक नगर अल्मोड़ा में सौ से अधिक नौले हैं। आज अल्मोड़ा पानी के लिए कोसी नदी पर पूरी तरह आश्रित है और कोसी नदी का जल स्तर सूख रहा है। उत्तराखण्ड में नदियों की हालत पल-पल

लौटें मिट्टी की ओर

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विलियम बटलर यीट्स
डॉ. वंदना शिवा" हमने जो भी किया, कहा या गाया है वह सब हमें अपनी मिट्टी से मिला है।"

डा. वंदना शिवा, सॉइल नॉट ऑयल और अर्थ डेमोक्रेसी सहित कई पुस्तकों की लेखिका और 1993 के वैकल्पिक नोबेल शांति पुरस्कार की विजेता, हमारे समय की एक प्रमुख पर्यावरणविद् और कार्यकर्ता हैं। वैश्वीकरण के खतरे के खिलाफ भोजन के अधिकार की रक्षा हेतु उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पारिस्थितिकीय के लिए रिसर्च फाउंडेशन नवदान्या की स्थापना की। 46 बीज बैंकों और उत्तर भारत में एक जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए बीज विद्यापीठ के निर्माण के साथ डॉ. शिवा लोगों को प्राकृतिक समाधान उपलब्ध करा रही हैं जो मिट्टी में रहकर सभी को जीवन देती है।

पानी तेरे कितने रंग

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yahoo jagran
पानी रे पानीपानी रे पानीदेश में कम बारिश होना जितनी बड़ी समस्या है उससे कहीं अधिक बड़ी समस्या है ज्यादा बारिश हो जाना। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल जुलाई तक देश के विभिन्न इलाकों में आई बाढ़ में करीब 992 लोगों की मौत हो चुकी है। हजारों बेघर हुए हैं। सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि बर्बाद हुई है।बाढ़ का प्रभाव सबसे ज्यादा बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और असम पर पड़ा है। पश्चिम बंगाल में इस महीने की शुरुआत से अब तक 21 हजार लोग अपना घर छोड़ चुके हैं। यहां के पांच हजार 103 गांव और 10 हजार एकड़ कृषि भूमि इससे बर्बाद हो गई।