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उज्जैन में पानी पर पहरा

दिसंबर / प्रदेश में कम बारिश होने की वजह से करीब 35 जिले पानी के संकट से जूझ रहे हैं। एक-एक कर जल स्रोत सूख रहे हैं और पेयजल आपूर्ति करने वाले जल संग्रहण स्थलों में पानी निरंतर कम होता जा रहा है। इसका नतीजा है कि इन जिलों के अधिकांश हिस्सों में दो से तीन दिन में एक बार जलापूर्ति की जा रही है। ठंड के मौसम में भी यहां के जल के स्रोत सूखते जा रहे हैं। एक तरफ जहां इंदौर में फरवरी तक पानी का आपातकाल लगाने की तैयारी है, वहीं उज्‍जैन में अब हालत यह है कि जल स्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए पुलिसबल तैनात किया गया है।

मुद्दा : बढ़ती आबादी और पेयजल संकट

..प्रवीण प्रभाकर/ राष्ट्रीय सहारा

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट ने भारत जैसे विकासशील राष्ट्र में पेयजल की स्थिति की कलई खोल दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्रत्येक साल करीब सात लाख 83 हजार लोगों की मौत दूषित पानी और खराब साफ-सफाई की वजह से होती है। इसमें से लगभग साढे़ तीन लाख लोग हैजा, टाइफाइड और आंत्रशोथ जैसी बीमारियों से मौत की भेंट चढ़ जाते हैं। ये बीमारियां दूषित पानी और भोजन, मानव अपशष्टिटों से फैलती हैं। साथ ही हर साल 15000 से ज्यादा लोग मलेरिया, डेंगू और जापानी बुखार की चपेट में आकर दम तोड़ देते हैं। इन बीमारियों के वाहक दूषित पानी, जल जमाव यानी कि पानी के खराब प्रबंधन से फैलते हैं।

बेकाबू होता जल संकट

संजय गुप्तसंजय गुप्तबात चाहे देश की राजधानी दिल्ली की हो अथवा सुदूर इलाकों के गांवों की-हर जगह पेयजल की किल्लत पिछले वर्षो के मुकाबले अधिक नजर आ रही है। यह घोर निराशाजनक है कि आजादी के साठ वर्षो के बाद भी देश की एक तिहाई जनता को पीने के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है। इसी तरह करीब 70 प्रतिशत आबादी सामान्य जन सुविधाओं से भी वंचित है। शायद यही कारण है कि प्रतिवर्ष जल जनित बीमारियों के चलते 15 लाख बच्चे काल के गाल में समा जाते है और काम के अनगिनत घंटों का नुकसान होता है। समस्या यह है कि केंद्र एवं राज्य सरकारे पेयजल संकट को दूर करने के लिए गंभीर नहीं, जबकि वे इससे परिचित है कि आने वाले समय में पानी के लिए युद्ध छिड़ सकते है।