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આપણું વિશ્વ અને પાણી

Author: 
વિનીત કુંભારાણા

વિશ્વમાં પાણીની સમસ્યા અંગે આપણે વારંવાર સાંભળતા હોઇએ છીએ. ભવિષ્યમાં વિશ્વ પાણીની અછતથી પીડાતું હશે એવું આપણે સમાચારપત્રોમાં વાંચીએ છીએ પણ આવા સમાચારોની ગંભીરતાને આપણે સમજતાં નથી. આ વાત જયારે યુનાઇટેડ નેશન્સ(યુ. એન.) કહી ત્યારે વાતને ગંભીરતાથી લેવાનું વિશ્વના દેશોએ શરૂ કર્યુ છે. યુનાઇટેડ નેશન્સ-સંયુકત રાષ્ટ્ર સંઘે વિશ્વને ચેતવણી આપતાં જણાવ્યું છે કે, પ્રવર્તમાન સંજોગોમાં વિશ્વના અમુક પ્રદેશો પાણીની તિવ્ર અછતથી પીડાઇ રહ્યા છે. આગામી સમયમાં આ સ્થિતિને વકરતી અટકાવવા માટે પાણીનો બચાવ કરવામાં નહી આવે તો વિશ્વ માટે એક મોટી મુશ્કેલી ઊભી થઇ શકે તેમ છે. વિશ્વની પાણીની પરિસ્થિતિ અંગેનો અભ્યાસ કરીને સંયુકત રાષ્ટ્ર સંઘે અહેવાલમાં નોંધ કરી છે કે, વિશ્વમાં દિવસેને દિવસે ખોરાકની માંગ અને જળની અછત આવી રીતે જ વધતી જશે તો આવનારા વર્ષોમાં વિશ્વના અમુક દેશો ખોરાક અને પાણી માટે રીતસરના વલખા મારતાં હશે. સમગ્ર વિશ્વમાં ૨૨, માર્ચને વિશ્વ જળ દિવસ તરીકે મનાવવામાં આવે છે. આ દિવસ ઉજવવા પાછળનો હેતુ લોકોને પાણી બચાવવા પ્રેરણા આપવાનો, પાણીનું મહત્ત્વ સમજવાનો તેમજ પાણીને વેડફાતું અટકાવીને તેનું યોગ્ય વ્યવસ્થાપન કરવાનો છે. ઇ.સ. ૧૯૯૩ના વર્ષની સંયુકત રાષ્ટ્ર સંઘની સામાન્ય સભાએ ૨૨, માર્ચને વિશ્વ જળ દિવસ તરીકે ઘોષિત કરેલો છે. દર વર્ષે પાણીને અનુલક્ષીને એક થીમ નક્કી કરવામાં આવે છે.

વર્ષ ૧૯૯૬માં પાણીની અછત ધરાવતાં શહેરોને ધ્યાને રાખીને થીમ બનાવવામાં આવી હતી. ૧૪ વર્ષ બાદ ફરી એ જ થીમ વર્ષ ૨૦૧૧ના વર્ષે રાખવી પડી છે જે દર્શાવે છે કે દોઢ દાયકા બાદ પણ શહેરોમાં પાણીની ચિંતા ઓછી થઇ શકી નથી. શહેરો માટે સંતોષકારક પાણી મેળવવું તે એક મોટો પડકાર છે. વર્ષ ૨૦૦૩માં પણ 'ભવિષ્ય માટેનું પાણી" એવી થીમ આયોજિત કરવામાં આવી હતી, પણ એ બાબતે પણ એવું કહી શકાય કે, હાલ તો આપણે આપણા વર્તમાનમાં પણ પૂરતું પાણી મેળવી કે બચાવી શકતા નથી તો ભવિષ્યનું ભાથું શુ ???

साइप्रस करेगा पानी का आयात

Source: 
tarachand-ola blogspot
कभी सुना है कोई देश पानी का आयात कर रहा है? जी हाँ पानी का आयात. साइप्रस आजकल पानी का आयात कर रहा है। अगर आप नहीं जानते हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दूँ की साइप्रस भूमध्य सागर में स्थित एक छोटा सा द्वीप देश है। साइप्रस पूर्वी भूमध्य सागर में तीसरा सबसे बड़ा द्वीप है। यंहा पानी का मुख्य स्रोत वर्षा और हिमपात है। सभी भूमध्य सागर तटीय देशों की तरह यहां पर बारीश सर्दियों में होती है। पिछले ३-४ सालों में साइप्रस में बारीश काफी कम हुई है और परिणाम स्वरूप यहाँ के जलस्रोत सूख गए हैं। यह ख़बर लिखे जाने के समय साइप्रस के जलाशयों में पानी की मात्रा उसकी कुल भण्डार क्षमता की ९ प्रतिशत ही रह गई है।

जलचक्र (The Water Cycle)

धरती पर कितना पानी उपलब्ध है?

o एक जानकारी के अनुसार धरती पर 2,94,000,000 क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध है, जिसमें से सिर्फ़ 3% पानी ही शुद्ध और पीने लायक है।
o पृथ्वी पर पानी अधिकतर तरल अवस्था में उपलब्ध होता है, क्योंकि हमारी धरती (सौर व्यवस्था) “सोलर सिस्टम” की सीध में स्थित है, अतः यहाँ तापमान न तो इतना अधिक होता है कि पानी उबलने लगे न ही तापमान इतना कम होता है कि वह बर्फ़ में बदल जाये।
o जब पानी जमता है तब वह विस्तारित होता है यानी फैलता है, जबकि ठोस बर्फ़ तरल पानी में तैरती है।

मुक्त पानी की गतिविधि

• वातावरण में भाप के रूप में
• बारिश, ओस, बर्फ़ आदि के रूप में धरती पर वापस आता है
• धरती पर बहते हुए अन्त में पुनः समुद्र में मिलता है
• कभीकभार यह पानी बहते हुए मृत सागर अथवा ग्रेट साल्ट लेक जैसी एक “बेसिन” में एकत्रित हो जाता है।
• जबकि “ड्रेनेज बेसिन” उस क्षेत्र को कहा जाता है जहाँ बारिश के पानी को नहरों, झीलों, नदियों व बाँधों आदि के रूप में सहेजा जाता है।

जल-चक्र

• पानी का वातावरण में वाष्पीकरण होता है।
• पुनः यही पानी धरती पर वर्षाजल के रूप में गिरता है।
• बहते हुए यह पानी समुद्र में जा मिलता है।

पानी के विभिन्न उपयोग

• नहाने के लिये
• कपड़े धोने के लिये
• खाना बनाने, पीने के लिये
• साफ़-सफ़ाई करने के लिये
• तैरने व अन्य आनन्द लेने के लिये

मुक्त पानी कहां मिलता है

• अधिकतर पानी ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में वाष्पीकरण के जरिये वातावरण में पहुँचता है।
• शुद्ध पानी के अधिकतर स्रोत पृथ्वी के उत्तरी गरम इलाके में मौजूद हैं।
• इस धरती के शुद्ध जल में से 20% मुक्त जल कनाडा में है,
• 20% जल रूस की बैकाल झील में है,
• बाकी का शुद्ध जल विभिन्न नदियों, झीलों, तालाबों, आदि में उपलब्ध है।
• भूमध्यरेखा के 20 डिग्री उत्तर और दक्षिण में ऊष्णकटिबंधीय वर्षा वन (रेन फ़ॉरेस्ट) फ़लते-फ़ूलते हैं।

भारत का जल संसाधन

संपादक- मिथिलेश वामनकर/ विजय मित्रा
क्या आप सोचते हैं कि जो कुछ वर्तमान में है, ऐसा ही रहेगा या भविष्य कुछ पक्षों में अलग होने जा रहा है? कुछ निश्चितता के साथ यह कहा जा सकता है कि समाज जनांकिकीय परिवर्तन, जनसंख्या का भौगोलिक स्थानांतरण, प्रौद्योगिक उन्नति, पर्यावरणीय निम्नीकरण, और जल अभाव का साक्षी होगा। जल अभाव संभवत: इसकी बढ़ती हुई माँग, अति उपयोग तथा प्रदूषण के कारण घटती आपूर्ति के आधार पर सबसे बड़ी चुनौती है। जल एक चक्रीय संसाधन है

हवा-पानी की आजादी

हवा-पानी की आजादीहवा-पानी की आजादीआजादी की 62वीं वर्षगांठ, हर्षोल्लास के माहौल में भी मन पूरी तरह खुशी का आनन्द क्यों महसूस नहीं कर रहा है, एक खिन्नता है, लगता है जैसे कुछ अधूरा है। कहने को हम आजाद हो गए हैं, जरा खुद से पूछिए क्या आपका मन इस बात की गवाही देता है नहीं, क्यों? आजाद देश उसे कहते हैं जहां आप खुली साफ हवा में अपनी मर्जी से सांस ले सकते हैं, कुदरत के दिए हुए हर तोहफे का अपनी हद में रहकर इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन यहां तो कहानी ही उलट है। आम आदमी के लिए न पीने का पानी है न खुली साफ हवा, फिर भी हम आजाद हैं?

आज हर ओर पानी का संकट गहराया है, कहीं बाढ़ की समस्या है तो कहीं सुखाड़ की, कहीं पानी में आर्सेनिक है तो कहीं पानी खारा हो रहा है, बड़े-बांध बन रहे हैं तो कहीं नदियां मर रही हैं। ऐसे माहौल में आजादी का जश्न कोई मायने नहीं रखता। जल ही जीवन है, पूरा पारिस्थिकी तंत्र इसी पर टिका है। जल संसाधनों की कमी को लेकर न केवल आम आदमी बल्कि राज्यों और देशों में भी तनाव बढ़ रहा है। पानी की कमी से विश्व की कुल जनसंख्या की एक-तिहाई प्रभावित है। पृथ्वी के सभी जीवों में पानी अनिवार्य रूप से विद्यमान है। आदमी में 60 फीसदी, मछली में लगभग 80 फीसदी, पौधों में 80-90 फीसदी पानी ही है। जीवित सेल्स में रासायनिक प्रतिक्रियाओं के लिए पानी ही जरूरी तत्व हैं।

जल संसाधन परिचय

विश्व जलविश्व जलसामान्य तथ्य: पृथ्वी के लगभग तीन चौथाई हिस्से पर विश्र्व के महासागरों का अधिकार है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार पृथ्वी पर जल की कुल मात्रा लगミग 1400 मिलियन घन किलोमीटर है जो कि पृथ्वी पर 3000 मीटर गहरी परत बिछा देने के लिए काफी है। तथापि जल की इस विशाल मात्रा में स्वच्छ जल का अनुपात बहुत कम है। पृथ्वी पर उपलब्ध समग्र जल में से लगभग 2.7 प्रतिशत जल स्वच्छ है जिसमें से लगभग 75.2 प्रतिशत जल ध्रुवीय क्षेत्रों में जमा रहता है और 22.6 प्रतिशत भूजल के रूप में विद्यमान है। शेष जल झीलों, नदियों, वायुमण्डल, नमी, मृदा और वनस्पति में मौजूद है। जल की जो मात्रा उपभोग और अन्य प्रयोगों के लिए वस्तुतः उपलब्ध है, वह नदियों, झीलों और भूजल में उपलब्ध म

जल प्रबन्धन : चुनौतियाँ और समाधान

Author: 
उमेश चन्द्र अग्रवाल
Source: 
योजना, जून 2006
देश में बढ़ती जनसंख्या, बड़े पैमाने पर शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण आजादी के समय जहाँ देश में प्रति व्यक्तिय 5,277 घनमीटर पानी उपलब्ध था वह अब घटकर मात्र 1,869 घनमीटर से भी कम रह गया है। तालाबों और जलाशयों में पानी की निरन्तर हो रही कमी को देखते हुए आने वाले समय में स्थिति और भी गम्भीर हो सकती है। हमारे यहाँ विशेष रूप से पिछले चार दशकों में देश में भूमिगत जल के दोहन पर बहुत जोर दिया गया है। जमीन के अन्दर वाले पानी के अत्यधिक दोहन ने ही वास्तविक रूप में जल संकट को जन्म दिया है। तर्कसंगत तो यही है कि जमीन से उतना ही पानी निकाला जाना चाहिए जिसकी पूर्ति वर्षा के जल से हो सके। उससे अधिक पानी निकालने का अर्थ है कि भावी पीढ़ियों को पानी के अकाल की तरफ ले जाना। भूजल की वर्षा के पानी से प्रतिपूर्ति के मार्ग में आज हमने कई कृत्रिम अवरोध पैदा कर दिए हैं। अधिकांश क्षेत्रों में वनों और वनस्पतियों का विनाश इसका एक प्रमुख कारण है। वर्तमान में वन क्षेत्र सिकुड़ जाने से जमीन के नीचे वर्षा जल के रिसाव में कमी आई है और कई क्षेत्रों में बाढ़ की विभीषिका उत्पन्न हुई है। हमारी जल प्रणाली को असन्तुलित बनाने में नलकूपों द्वारा जल के अन्धाधुन्ध दोहन की प्रमुख भूमिका रही है। भूजल विशेषज्ञों का अनुमान है कि देश में करीब 43.2 करोड़ घनमीटर का ऐसा भूजल भण्डार है जिसकी प्रतिपूर्ति वर्षा जल से करना आसानी से सम्भव हो जाता है। इसके अलावा भी 19 करोड़ घनमीटर पानी को विशेष प्रयासों द्वारा भूजल भण्डार से जोड़ा जा सकता है। ऐसा भी अनुमान लगाया गया है कि इसके अतिरिक्त भी जमीन के नीचे करीब 108 करोड़ घनमीटर जल का भण्डार है। इस प्रकार कुल मिलाकर भारत में 170 करोड़ घनमीटर भूजल के विशाल

भारत में पानी

भारत में पानीपानीप्रेमचन्द्र श्रीवास्तव / पर्यावरण संदेश


सामान्य तौर पर देखने से ऐसा लगता है कि भारत में पानी की कमी नहीं है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन 140 लीटर जल उपलब्ध है। किन्तु यह तथ्य वास्तविकता से बहुत दूर है। संयुक्त राष्ट्र विकास संघ (यूएनडीओ) की मानव विकास रिपोर्ट कुछ दूसरे ही तथ्यों को उद्घाटित करती है। रिपोर्ट जहां एक ओर चौंकाने वाली है, वहीं दूसरी ओर घोर निराशा जगाती है।



इस रिपोर्ट के अनुसार भारतीय आंकड़ा भ्रामक हैं वास्तव में जल वितरण में क्षेत्रों के बीच, विभिन्न समूहों के बीच, निर्धन और धनवान के बीच, गांवों और नगरों के लोगों के बीच काफी विषमता है।

बेसिन-वार जल उपलब्धता

जल संसाधन

जल संसाधन
भारत अनेक नदियों और पहाड़ों का देश है। लग भग 329 मिलियन हैक्टेयर के इसके भौगोलिक क्षेत्र में अनेक छोटी-बड़ी नदियां प्रवाहित हो रही हैं जिसमें से कुछ नदियां विश्र्व की सर्वाधिक विशाल नदियों के रूप में गिनी जाती हैं। भारत की सांस्कृतिक उन्नति, धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन में नदियों और पहाड़ों का बहुत अधिक महत्व है।


भारत एक संघीय तंत्र सहित राज्यों का एक संघ है। राजनीतिक दृष्टि से देश 28 राज्यों और 7 संघशासित क्षेत्रों में बंटा हुआ है। भारत की जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग अर्थात 1,027,015,247 (2001 की जनगणना) आबादी ग्रामीण और कृषि-आधारित है और उसकी खुशहाली का स्रोत देश की नदियां हैं।