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इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की धज्जी

वाराणसी। रोज सुबह आठ ट्रैक्टर टालियां मिट्टी लेकर डाफी-लंका मार्ग से पहुंचती हैं शुक्रेश्वर तालाब। शुक्रेश्वर तालाब एक ऐतिहासिक तालाब है, जो कि धीरे –धीरे पट रहा है।

कुडों-तालाबों के संरक्षण को लेकर नगर निगम संजीदगी का शुक्रेश्वर तालाब ताजा नमूना है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों की भी धज्जी उड़ाई जा रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाए। जिसका काम होगा कि जिले की सभी जल निकायों को चिन्हित करे और उसके संरक्षण के लिए योजनाएं बनवाए।

कोसी आपदा: पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण नीति

कोसी नेपाल एवं भारत के बीच बहनेवाली, गंगा की सहायक नदी है, जिसका आवाह (जलग्रहण) क्षेत्र करीब 69300 वर्ग किलोमीटर नेपाल में है। यह कंचनजंगा की पश्चिम की ओर से नेपाल की पहाड़ियों से उतर कर भीमनगर होते हुए बिहार के मैदानी इलाके में प्रवेश करती है। यह एक बारहमासी नदी है प्रत्येक वर्ष कोसी नदी में बह रही गाद के कारण नदी के तट का स्तर बांध के बाहर की जमीन से ऊपर हो गया है।

ब्रह्मपुत्र बोर्ड

ब्रह्मपुत्र बोर्डब्रह्मपुत्र बोर्ड पूर्वोत्तर क्षेत्र में व्यापक बाढ़ और तटकटाव की समस्याओं का निदान खोजने के उद्देश्य से संसद के एक अधिनियम 1980(1980 का 46) के अंतर्गत ब्रह्मपुत्र बोर्ड को एक स्वयंशासित निकाय के रूप में तत्कालीन सिंचाई मंत्रालय के अधीन (अभी जल संसाधन मंत्रालय के नाम से पुनर्निर्मित) गठित किया गया है। बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र एवम् बराकघाटी तथा पूर्वोत्तर के सभी राज्य पूर्णतया या अंशतया शामिल हैं। बोर्ड में कुल 21 सदस्य हैं।

ब्रह्मपुत्र बोर्ड अधिनियम

सूचना का अधिकार अधिनियम

सूचना का अधिकारसूचना का अधिकारयदि कोई आरटीआई आवेदक किसी सरकारी विभाग या मंत्रालय से मांगी गई सूचनाओं से संतुष्ट नहीं है या उसे सूचनाएं नहीं दी गईं हैं तो अब उसे केन्द्रीय सूचना आयोग के दफतरों में भटकने की जरूरत नहीं है। अब वह सीधे सीआईसी में ऑनलाइन द्वितीय अपील या शिकायत कर सकता है। सीआईसी में शिकायत के लिए वेबसाइट http://rti.india.gov.in में दिया गया फार्म भरकर सबमिट पर क्लिक करना होता है। क्लिक करते ही शिकायत या अपील दर्ज हो जाती है।

भारत सरकार ने ई गवरनेंस और शासन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से केन्द्र के सभी मंत्रालयों से संबंधित सूचनाएं अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी थी लेकिन इसके साथ ही अब वेबसाइट के माध्यम से केन्द्रीय सूचना आयोग में शिकायत या द्वितीय अपील भी दर्ज की जा सकती है। इसके अतिरिक्त अपील का स्टेटस भी देखा जा सकता है। सीआईसी में द्वितीय अपील दर्ज कराने के लिए वेबसाइट में प्रोविजनल संख्या पूछी जाती है। सरकार की इस पहल को सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेयता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राष्ट्रीय पर्यावरण नीति 2006

Author: 
इंडिया डेवलपमेंट गेटवे
Source: 
इंडिया डेवलपमेंट गेटवे
• राष्ट्रीय पर्यावरण नीति वर्त्तमान नीतियों (उदाहरण के लिए राष्ट्रीय वन नीति, 1988; राष्ट्रीय संरक्षण रणनीति तथा पर्यावरण एवं विकास पर नीतिगत वक्तव्य, 1992; तथा प्रदूषण निवारण पर नीतिगत वक्तव्य, 1992; राष्ट्रीय कृषि नीति, 2000; राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000; राष्ट्रीय जल नीति, 2002 इत्यादि) का एकीकरण करती है।
• नियामकीय सुधार, पर्यावरणीय संरक्षण कार्यक्रम एवं परियोजना, केंद्र, राज्य व स्थानीय सरकार द्वारा कानूनों के पुनरावलोकन एवं उसके कार्यान्वयन में, इसकी भूमिका मार्गदर्शन देने की होगी।
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वनाधिकार

Author: 
आईएम4 चैंज
Source: 
आईएम4 चैंज
• साल २००६ के १३ दिसंबर को लोकसभा ने ध्वनि मत से अनुसूचित जाति एवम् अन्य परंपरागत वनवासी(वनाधिकार की मान्यता) विधेयक(२००५) को पारित किया। इसका उद्देश्य वनसंपदा और वनभूमि पर अनुसूचित जाति तथा अन्य परंपरागत वनवासियों को अधिकार देना है।

• यह विधेयक साल २००५ में भी संसद में पेश किया गया था, फिर इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए जिसमें अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ अन्य पंरपरागत वनवासी समुदायों को भी इस अधिकार विधेयक के दायरे में लाना शामिल है।

मूल विधेयक में कट-ऑफ डेट (वह तारीख जिसे कानून लागू करने पर गणना के लिए आधार माना जाएगा) ३१ दिसंबर, १९८० तय की गई थी जिसे बदलकर संशोधित विधेयक में १३ दिसंबर, २००५ कर दिया गया।

पर्यावरण से संबंधित फैसलों में हितों का टकराव

Author: 
कांची कोहली
Source: 
चौथी दुनिया
भारत का समाजवादी लोकतंत्र प्रतिनिधित्व की राजनीति में अच्छी तरह रचा-बसा है। यहां विशेषज्ञों की सभा और समिति के बारे में आमतौर पर यह माना जाता है कि वे स्थितियों को बेहतर ढंग से समझते हैं। बनिस्बत उनके, जो ऐतिहासिक तौर पर सत्ता प्रतिष्ठान में निर्णायक भूमिका रखते हैं। यह सब एक प्रक्रिया के तहत होता है। इसमें प्राथमिकताएं सुनिश्चित होती हैं, योजनाओं का मूल्यांकन किया जाता है और विकास के रास्ते तैयार किए जाते हैं।

भूगर्भ जल के संरक्षण, सुरक्षा एवं विकास हेतु प्रस्तावित विधेयक पर 45 दिनों में लोगों से सुझाव एवं प्रतिक्रिया की अपील

Author: 
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
Source: 
यूपीन्यूजलाइव.कॉम, 20 May 2010
लखनऊ। मुख्य सचिव श्री अतुल कुमार गुप्ता ने आज मीडिया सेन्टर में पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि भूजल संसाधनों के संरक्षण, सुरक्षा, प्रबन्ध, नियोजन एवं विनियमन हेतु राज्य सरकार द्वारा लोकहित में एक अधिनियम बनाने का निश्चय किया गया है। उक्त के सम्बन्ध में व्यापक विचार-विमर्श के उपरान्त राज्य सरकार द्वारा तैयार किये गये प्रस्तावित अधिनियम को जनमानस के सुझाव एवं प्रतिक्रिया प्राप्त करने हेतु आज यहां भूगर्भ जल विभाग, उ0प्र0 की वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है। ड्राट भूजल अधिनियम के प्राविधानों पर जनमानस की प्रतिक्रिया एवं सुझाव 45 दिवस के अन्तर्गत अर्थात विलम्बतम 05 जुलाई 2010 तक आमन्त्रित है। सुझाव एवं प्रतिक्रिया ईमेल पर या निदेशक भूगर्भ विभाग उ0प्र0 नवां तल इंदिरा भवन अशोक मार्

उ0प्र0 भूगर्भ जल संरक्षण, सुरक्षा एवं विकास (प्रबन्ध, नियंत्रण एवं विनियमन)विधेयक 2010

Source: 
उत्तर प्रदेश सरकार
उ0प्र0 भूगर्भ जल संरक्षण, सुरक्षा एवं विकास (प्रबन्ध, नियंत्रण एवं विनियमन)विधेयक 2010 का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। यह ड्राफ्ट अधिनियम प्रदेश में भूगर्भ जल के वर्तमान परिदृश्य पर आधारित है जिसमें विभिन्न हाईड्रोजियोलाजिकल स्थितियों के अनुरूप भूजल विकास (दोहन) एवं भूगर्भ जल में गिरावट के ट्रेन्ड के अनुसार सुरक्षित, सेमी क्रिटिकल, क्रिटिकल एवं अतिदोहित श्रेणी में वर्गीकृत यूनिटस/क्षेत्र के अनुसार विभिन्न भूजल उपभोक्ताओं हेतु प्रावधान किए गए हैं।