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समाधान हेतु उपयुक्त जल नीति

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मगध जल जमात
चूँकि जल का स्वभाव ही स्थलाकृति के अनुरूप अपना आकार बदल लेना तथा ऊपर से नीचे की ओर बहना है इसलिए उसके स्वभाव के विपरीत उसपर नियंत्रण कायम करना आंशिक तौर पर ही संभव हो पाता है। ऐसी स्थिति में वर्चस्वशाली व्यक्ति अथवा समूह जल पर इस प्रकार नियंत्रण स्थापित करते हैं कि उसका लाभ तो उन्हें मिले लेकिन नुकसान दूसरों को झेलना पड़े। उदाहरणस्वरूप जलस्रोत के समीप ऊपर की ओर रहने वाले लोग पानी की कमी के दिनों में तो उसका अधिकाधिक उपयोग खुद कर लेते हैं लेकिन बाढ़ की स्थिति में पानी नीचे छोड़ देते हैं।

मगध की जल समस्या

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मगध जल जमात
क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के अनुरूप जल व्यवस्था मगध क्षेत्र में लम्बे समय तक कायम रही। किन्तु अनेक कारकों के प्रभाववश अब यहाँ की जल-व्यवस्था काफी हद तक छिन्न-भिन्न हो गई है।

एक लाख जल निकायों की बहाली (रिपेयर, रिनोवेशन, रिस्टोरेशन वाटरबॉडीज स्कीम)

वेब/संगठन: 
india environment portal org

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 4000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत पर घरेलू समर्थन के साथ, 9 लाख हेक्टेयर के जलग्रहण क्षेत्र वाले एक लाख जल निकायों की बहाली, मरम्मत और नवीनीकरण करने की योजना को मंजूरी दे दी है। योजना के पूरा होने के बाद लगभग 4 लाख हेक्टेयर. अतिरिक्त सिंचाई क्षमता के निर्मित होने की संभावना है। योजना में ऐसा माना गया है कि राज्य आवश्यक सार्वजनिक जलनिकायों की संख्या को ध्यान में रखते हुए परियोजना तैयार करेंगे, ये जलनिकाय सरकारी जमीन पर जैसे- ग्राम पंचायत / नगर पालिकाओं / निगमों, कृषि अथवा संबंधित क्षेत्र में पंजीकृत सोसायटी/ सार्वजनिक ट्रस्ट आदि की जमीन पर होने चाहिए। निजी स्वामित्व वाले जल निकायों को वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी।

RRR योजना के मुख्य उद्देश्य हैं:

बिहार भूगर्भ जल अधिनियम

बिहार भूगर्भ जल अधिनियम का मूल ड्राफ्ट यहां संलग्न है। 29 जनवरी 2007 को पारित इस अधिनियम में भूगर्भ जल प्राधिकरण के निर्माण का प्रावधान था।

भूगर्भ जल विकास के साध ही जल प्रबंधन और नियमन की वैधानिक ताकत भी इससे भूगर्भ जल प्राधिकरण को प्राप्त होती है।

मूल ड्राफ्ट यहां संलग्न है -

उत्तरप्रदेश में जल संसाधन प्रबंधन और नियामक आयोग

फोटो साभार – twenty22फोटो साभार – twenty22पिछले माह उत्तरप्रदेश सरकार ने “जल संसाधन प्रबंधन और नियामक आयोग” संबंधी अधिनियम बना लिया है। उत्तरप्रदेश में जल संसाधनों का अंधाधुंध दोहन अब संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आ गया है। राज्यपाल टीवी राजेस्वर ने 'उत्तर प्रदेश जल प्रबंधन एवं नियामक आयोग विधेयक 2008' को मंजूरी दे दी है। इस कानून में जल संसाधनों को विनियमित करने, इसका विवेकपूर्ण उपयोग करने, कृषि कार्यो के लिए समुचित प्रयोग करने तथा भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन पर अंकुश लगाने का प्रावधान है। इन प्रावधानों का उल्लंघन करने पर एक से लेकर तीन साल तक की कैद तथा अर्थदंड का प्रावधान है।