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कैसे दूध चट कर जाती है बिल्ली

Author: 
डॉ टी.वी. वेंकटेश्वरन/डॉ. नवनीत गुप्त
Source: 
पर्यावरण डाइजेस्ट, 17 अगस्त 2011
दूध पीती हुई बिल्लीदूध पीती हुई बिल्लीबचपन से ही अक्सर हम कुत्ते-बिल्ली का नाम साथ ही लेते हाए हैं लेकिन इन दोंनों जीवों के रहन-सहन में काफी अंतर है। पता ही नहीं चलता कि कब बिल्ली दबे पांव आकर हमारे किचन में दूध पी जाती है। वहीं कुत्ता कुछ भी खाए, शोर मचाए बिना नहीं रहता और खाने-पीने के सामान को बिखेर देता है। बिल्ली के इसी शातिर दिमाग के कारण किसी चतुर और घाघ व्यक्ति को अक्सर हम बिल्ली की संज्ञा देते हैं। इसके विपरीत कुत्ते की संज्ञा ऐसे व्यक्ति को दी जाती है जो अस्त-व्यस्त रहता है। आपने ध्यान दिया होगा कि हम बिल्ली पर दूध की चोरी के लिए संदेह नहीं कर सकते जबकि य
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http://paryavaran-digest.blogspot.com

क्यों होती है कम या ज्यादा बरसात

Source: 
मेट्रो रंग- नई दुनिया, 28 जून 2011
बच्चों, बारिश कैसे आती है, यह जानने से पहले यह याद रखो कि हवाएं हमेशा उच्च वायुदाब से कम वायुदाब वाले इलाके की ओर चलती हैं। गर्मी के दिनों में भारत के उत्तरी मैदान और प्रायद्वीपीय पठार भीषण गर्मी से तपते हैं और यहां निम्न वायुदाब का क्षेत्र बन जाता है। इसके उलट दक्षिण में हिंद महासागर ठंडा रहता है। ऐसी भीषण गर्मी के कारण ही महासागर से नमी लेकर हवाएं भारत के दक्षिणी तट से देश में प्रवेश करती हैं।

क्या हैं हरित न्यायालय

Author: 
जनसत्ता टीम
Source: 
जनसत्ता, मई 2011
बढ़ते जलवायु संकट के दौर में अलग से पर्यावरण संबंधी कायदे-कानून बनाए गए और इनके उल्लंघन की स्थिति में सजा तय करने और विवादों का समय से निपटारा करने की जरूरत भी महसूस की गई। इस तकाजे को पूरा करने की दिशा में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बाद भारत तीसरा देश है जहां हरित न्यायाधिकरण के गठन की पहल हुई है। इसके चार खंडपीठ देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित करने की योजना पर्यावरण मंत्रालय ने घोषित की थी। लेकिन पिछले महीने मद्रास उच्च न्यायालय ने न्यायाधिकरण में सदस्यों की नियुक्ति के नियमों के सवाल पर स्थगन आदेश जारी कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने उस रोक को हटा कर हरित अदालतें गठित करने का रास्ता साफ कर दिया है। साथ ही उसने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को छह मई तक इससे संबंधित सभी नियम-कायदों

क्या है सिलिकोसिस

Author: 
राकेश कुमार मालवीय
Source: 
जनसत्ता रविवारी, 29 मई 2011
सिलिका कणों और टूटे पत्थरों की धूल की वजह से सिलिकोसिस होती है। धूल सांस के साथ फेफड़ों तक जाती है और धीरे-धीरे यह बीमारी अपने पांव जमाती है। यह खासकर पत्थर के खनन, रेत-बालू के खनन, पत्थर तोड़ने के क्रेशर, कांच-उद्योग, मिट्टी के बर्तन बनाने के उद्योग, पत्थर को काटने और रगड़ने जैसे उद्योगों के मजदूरों में पाई जाती है। इसके साथ ही स्लेट-पेंसिल बनाने वाले उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों को भी सिलिकोसिस अपनी गिरफ्त में लेती है। जहां इस तरह के काम बड़े पैमाने पर होते हैं वहां काम करने वाले मजदूरों के अलावा आसपास के रहिवासियों के भी सिलिकोसिस से प्रभावित होने का खतरा होता है।

मानसून की भविष्यवाणी

Author: 
प्रदीप मुखोपाध्याय ‘आलोक’
Source: 
जनसत्ता रविवारी, 1 मई 2011
हिंद महासागर और अरब सागर की तरफ से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आने वाली हवाओं को मानसून कहते हैं। ये हवाएं दक्षिण एशिया में जून से सितंबर तक लगभग चार महीनों तक सक्रिय रहती हैं। इस तरह के मानसून को दक्षिणी-पश्चिमी ग्रीष्मकालीन मानसून कहते हैं। इसके अलावा दक्षिण एशिया में दिसंबर से मार्च तक पूर्वोत्तर मानसून भी आता है।

पानी के अंदर की प्रकाशिकी

Source: 
विज्ञान प्रसार साइंस पोर्टल
उद्देश्य : लेंस के बाहर के माध्यम का उसकी फोकस दूरी पर प्रभाव देखना।

उपकरण : दो लेसर टॉर्च, एक लंबी ट्रे ;लगभग 30 सेन्टीमीटरध्द, 10 सेन्टीमीटर या उससे कम फोकस दूरी वाला एक उत्ताल लेंस।

भूमिका : किसी लेंस की फोकस दूरी, लेंस की दोनों सतहों की वक्रताओं और लेंस तथा उसके चारों ओर के माध्यम के अपवर्तनांकों पर निर्भर करती है। अत: अगर लेंस को पानी के अंदर रखा जाता है तो उसकी फोकस दूरी बढ़ जाएगी।
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http://www.vigyanprasar.gov.in

पानी को ठंडा करते हुए उबालना

Source: 
विज्ञान प्रसार साइंस पोर्टल
उद्देश्य : द्रव की सतह के ऊपर घटते दबाव के साथ क्वथनांक; बॉयलिंग प्वाइंट के घट जाने के तथ्य का प्रदर्शन।

उपकरण : एक हीटर, कसकर डाट लगने वाला एक शंक्वाकार फ्लास्क।

भूमिका : द्रव का क्वथनांक उसकी सतह के ऊपर के दबाव पर निर्भर करता है। दबाव जितना कम होगा क्वथनांक भी उतना ही कम होगा। इस तरह पानी के ऊपर की सतह के दबाव को घटाकर आप पानी को उसके सामान्य क्वथनांक से कहीं कम तापमान पर उबाल सकते हैं। इस प्रयोग में हम ठीक यही करने वाले हैं। यह बहुत रोचक है और अपने आस-पास सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है।
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http://www.vigyanprasar.gov.in

पानी पर तैरे पानी

Source: 
विज्ञान प्रसार साइंस पोर्टल
भूमिका हम तरह-तरह की घटनाएँ रसोईघर में देखते हैं । जैसे कि तेल का पानी पर तैरना व एक ही प्रकार के द्रवों का एक दूसरे में मिल जाना । पानी में थोड़ा सा दूध डालने पर दूध पूरे पानी में मिश्रित हो जाता है और पूरे पानी को सफेद कर देता है । इसी प्रकार पानी से भरे गिलास में स्याही की कुछ बूँद डालने पर वह पूरे पानी को रंगीन कर देती है । लेकिन क्या ऐसा हो सकता है कि स्याही की कुछ बूँदें पानी के सिर्फ ऊपरी तल को ही रंगीन करे ? इस प्रयोग में हम ऐसा ही कुछ करने जा रहे हैं।

आवश्यक सामग्री काँच का गिलास, लाल रंग, कॉफी हीटर ( पानी गर्म करने का यंत्र ) ।

प्रयोगविधि


1. एक गिलास में आधे से कुछ अधिक भाग तक पानी भरें ।
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कैसे चलती है हवा?

Author: 
राजीव शर्मा
Source: 
नई दुनिया, 19 अप्रैल 2011
तापमान के अलावा भौगोलिक स्थिति, पहाड़, धरती के अपने अक्ष पर घूमने आदि से भी हवा की चाल प्रभावित होती है। धरती के पश्चिम से पूर्व की तरफ घूमने के कारण पछुआ हवाएं चलती हैं।