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भारत में जल संसाधनों की उपलब्धता, उनका उपयोग तथा प्रबंधन राजभाषा तकनीकी परिसंवाद (सेमिनार) - एक आख्या

Author: 
नवीन प्रकाश सिंह ‘‘नवीन’’
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


‘भारत में जल संसाधनों की उपलब्धता, उनका उपयोग तथा प्रबंधन’ विषयक एक दिवसीय (दिनांक: 28 सितम्बर, 2016) राजभाषा तकनीकी परिसंवाद (सेमिनार) का आयोजन ऑयल एण्ड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओ.एन.जी.सी.) बड़ौदा, गुजरात, तथा भूविज्ञान परिषद, बड़ौदा, गुजरात में आयोजित किया गया। प्रस्तुत आख्या इस एक दिवसीय परिसंवाद की सम्पूर्ण शैक्षणिक एवं तकनीकी गतिविधियों पर आधारित है।

Abstract – One day technical seminar on availability, utility and management of water resources in India was held on 28 september, 2016 at Baroda, Gujrat in joint collaboration with Oil and Natural Gas corporation Limited (O.N.G.C.) and Geological Parishad, Baroda Report embodies academic and technical activities during the seminar.

कीटों में जैविक साहचर्य (Organic companionship in Pests in Hindi)

Author: 
अशोक कुमार एवं सुधीश चन्द्र
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


प्रकृति में कई जीव-जन्तु जैविक साहचर्य स्थापित कर जीवन-यापन करते हैं। प्रायः यह युक्ति भोजन उपलब्धता व सुरक्षा हेतु की जाती है। सामाजिक व विशेष कर उपनिवेशी कीटों की प्रजातियों की जीवन शैली में विविध साहचर्य की स्थितियाँ पाई जाती हैं। विभिन्न चीटियों की प्रजातियाँ सहजीविता, पारिपोषिता, सहभोजिता, जैवभंडारण व दासता के उत्कृष्ट उदाहरण जैव साहचर्य द्वारा परिलक्षित करते हैं।

Abstract – Several living beings lead their life by establishing biological association in nature generally this arrangement is for procuring food and safety. Social and mainly colonial insects maintain different levels of biological association in their life. Several species of ants show unique examples of symbiosis, parasitism, commensalism, bio storage and slavery by establishing biological association.

विभिन्न जीवों में जैविक साहचर्य का प्राकृतिक महत्व है। बहुधा जीवधारी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से एक दूसरे से कमोवेश संबंधित रहते हैं। विभिन्न जातियों में साहचर्य की क्रमिकता में अन्तर होता है, कुछ जीवों में साहचर्य उनके जीवन की आवश्यकता बन जाती है, जिससे एक दूसरे के बिना उनका निर्वहन दुरुह हो जाता है। ऐसी स्थिति में वे प्रायः परस्पर साहचर्य का लाभ उठाते हैं। साहचर्य का प्रमुख उद्देश्य जीवन-यापन व सुगम भोजन प्राप्ति होता है। कीटों में विशेषकर सामाजिक व उपनिवेशी प्रजातियों में यथा चीटी, दीमक आदि में जैविक साहचर्य के प्रसंग अधिकाधिक हैं। इनमें साहचर्य स्थिति तथा जीवनशैली में बहुत सी विविधताएँ पायी जाती हैं। सामाजिक कीटों का एकीकृत व्यवहार निवसित श्रमिकों के मध्य परस्पर संबंध व संप्रेषण से उत्पन्न होता है तथा यह संबंध सूत्र विभिन्न सामूहिक कार्यों के सफलतापूर्वक निर्वहन में सहायक होता है। इन कीटों के जटिल उपनिवेशों में जाति प्रथा, दास प्रथा, जैवीय भंडार गृह, सहजीविता तथा परिपोषिता के विभिन्न स्वरूप प्रदर्शित होते हैं।

अन्तःगृहीय प्रदूषण - घरों के अंदर होने वाला प्रदूषण (Indoor Pollution causes and remedies in Hindi)

Author: 
कल्पना सिंह
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


वायु प्रदूषक प्रतिरक्षण हमारे घर का आन्तरिक हिस्सा बन रहे हैं यह गहन चिन्ता का विषय है। इसलिये हमें आवासीय वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिये प्रयास करने होंगे। आन्तरिक वातावरण में उपस्थित वायरस, बैक्टीरिया, परागकण, धुआँ, आर्द्रता, विभिन्न मानव जनित क्रियाओं में उत्सर्जित होने वाली गैस, रासायनिक पदार्थ स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। ये पदार्थ एलर्जी संक्रमण व कई घातक रोगों का कारण हैं। बदलती जीवन शैली में हम सुख सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान देते हैं जबकि अपने जीवन में आधे से ज्यादा समय श्वसन क्रिया में आन्तरिक वायु को प्रयोग करते हैं। प्रस्तुत लेख आन्तरिक वायु प्रदूषकों के स्वास्थ्य पर प्रभाव व नियंत्रण के उपाय पर आधारित है।

Abstract - Indoor air pollution is a major problem in our daily life. Efficient corrective methods are urgently needed to combat the problem of indoor air quality virus has Bacteria pollen grains, smoke, humidity, chemical substance and gases released in anthropogenic activity have adverse health effects in humans. Indoor air is dominant exposure for humans, more than half of body’s intake during life time is air inhaled in the home. This article is a study based on the effect of indoor air pollutant and their control measures.

साइबर बुलीइंग

Author: 
शालिनी लाम्बा, श्वेता सिन्हा, प्रनति त्रपाठी
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


आज के समय में इंटरनेट ने सामाजिक संचार की एक अलग ही दुनिया खड़ी कर दी है और हमारा जीवन साइबर अर्थात इलेक्ट्रानिक प्रौद्योगिकी से अनछुआ नहीं है। आधुनिक इंटरनेट प्रौद्योगिकी के माध्यम से किसी को परेशान या शर्मिंदा करने, धमकी देने, या किसी व्यक्ति को निशाना बनाने को साइबर बुलीइंग कहते हैं। सेलफोन, कंप्यूटर, टैबलेट तथा सामाजिक संचार उपकरण जैसे आधुनिक प्रौद्योगिकी इस सकारात्मक विचार के साथ बनाए गए थे कि इनके माध्यम से दोस्तों और परिवार से संपर्क में रहा जा सकता था, विद्यार्थी अपने विद्यालय से जुड़कर ज्ञानवर्धन कर सकते थे। परन्तु आज के समय में अफवाहें फैलाने, सामाजिक नेटवर्किंग साइटों पर अवांछित पोस्ट, शर्मनाक तस्वीरों, वीडियो तथा वेबसाइट द्वारा इनका दुरुपयोग हो रहा है। साइबर बुलीइंग युवा स्तर पर साइबर हरासमेंट कहलाता है। साइबर बुलीइंग किसी भी समय, किसी भी रूप में और जानबूझकर या अनजाने में हो सकती है। अब समय है जब अपने लिये युवाओं को एक सख्त कदम लेने की जरूरत है तथा साइबर आचार के बारे में जागरूकता फैलाकर स्टॉप साइबर बुलीइंग की ओर कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।

आपदायें और आपदा प्रबंधन के उपाय (Preventive measures of Disasters in Hindi)

Author: 
आशुतोष त्रिपाठी
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


भूकम्प आपदा प्रबंधन जब प्रकृति में असंतुलन की स्थिति होती है, तब आपदायें आती हैं जिसके कारण विकास एवं प्रगति बाधक होती है। प्राकृतिक आपदाओं के अतिरिक्त कुछ विपत्तियाँ मानवजनित भी होती हैं। प्राकृतिक आपदायें जैसे- भूकम्प, सुनामी, भूस्खलन, ज्वालामुखी, सूखा, बाढ़, हिमखण्डों का पिघलना आदि हैं। धैर्य, विवेक, परस्पर सहयोग व प्रबंधन से ही इन आपदाओं से पार पाया जा सकता है। आपदा प्रबंधन दो प्रकार से किया जाता है आपदा से पूर्व एवं आपदा के पश्चात।

Abstract - Disasters are the result of imbalance in nature that leads to hindered development and progress. Besides natural calamities there are several manmade situations. Natural disaster are earthquake, Tsunami, Landslide, coopcration of volcanocs, draught, flood, melting of glaciers etc. Patience, intelligence, mutual cooperation and proper management are the remedial means. Disaster management is of two types-pre disaster and post disaster.

भारत में पॉली हाउस कृषि : उत्पादन एवं उपयोगिता (Essay on Polyhouse farming information in Hindi)

Author: 
ब्रजेश सिंह एवं वर्षा रानी
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश -


भारत एक कृषि प्रधान देश है। 50 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या के लिये कृषि जीविकोपार्जन का स्रोत है। जैसे-जैसे औद्योगीकरण बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कृषि उत्पादन तकनीकियों के विकास की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। ग्रीन हाउस कृषि श्रेष्ठ आधुनिक कृषि तकनीक के रूप में आई है। जिसके प्रयोग से उन जगहों पर भी फसलों का उत्पादन संभव हुआ जहाँ पहले संभव न था। ग्रीन हाउस कृषि से फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ी है।

ग्रीन हाउसग्रीन हाउस Abstract - India being an agriculture based country and more than 50% of population involved in agriculture for their livelihood. With increase in industrialization need of development in production technologies has also increased. Green house farming has emerged one of the best modern agricultural techniques to grow the copt in more areas, where it was not possible earlier. Green house farming has increased quality and production of crops.

भारत में जल की समस्या पर निबंध (Essay on water problem in India)

Author: 
राजीव कुमार सिंह
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


वर्षाजल संग्रहण पिछले कुछ दशकों से जल संकट भारत के लिये बहुत बड़ी समस्या है। इन दिनों जल संरक्षण शोधकर्ताओं के लिये मुख्य विषय है। जल संरक्षण की बहुत सी विधियाँ सफल हो रही हैं। जल संकट और जल संरक्षण से सम्बन्धित अनेक विषयों पर इस लेख में विचार किया गया है।

Abstract - Water crisis has been a huge problem for past few decades in India. Water conservation is an investigative area for researchers these days. There are many successful methods implemented so for to conserve water. Various issues related to water crisis & its conservation has been discussed briefly in this paper.

गुरुत्वीय तरंगें क्या हैं (What are Gravitational waves)

Author: 
भानु प्रताप सिंह
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


यह लेख विज्ञान के इतिहास का वर्णन न करके केवल डॉ. अल्बर्ट आइन्स्टीन द्वारा अपने सापेक्षवाद के सिद्धान्त में दिये गये गुरुत्वीय तरंगों के होने की पुष्टि कर रहा है। वर्षों के अनुसंधान के बाद वैज्ञानिकों ने यह प्रमाणित कर दिया कि बहुत भारी तारे जो ब्लैक होल भी कहे जाते हैं, एक दूसरे की कक्षा में घूमते हुए पास आकर टकराते हैं तो बहुत अधिक ऊर्जा दिक् में बिखेरते हैं। जिनसे गुरुत्वीय तरंगें भी उत्पन्न होती हैं, जो प्रकाश के वेग से चलकर हमारी पृथ्वी पर भी अनुभव की गई हैं।

Abstract : The purpose of this article is not to present a popular history of mathematical physics nor even to display for the general reader some of the result of research in the history of science, Rather the intention is to explore one important aspect of the great scientific revaluation of recent times which proves the existence of Gravitational wave, predicted by Dr. Albert Einstein about a hundred years ago in his general theory of relativity. Gravitational waves are ripples in the fabric of spacetime caused by some of the most violent and energetic processes in the universe. They are produced by catastrophic events such as colliding Black hole as well as the collapse of stellar supernova.

उच्च शिक्षा में आई.सी.टी. की भूमिका (Role of ICT in Higher Education)

Author: 
श्वेता सिन्हा, शालिनी लाम्बा
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology, ICT) एक व्यापक क्षेत्र है, जिसमें सूचना के संचार के लिये हर तरह की प्रौद्योगिकी समाहित है। यह वो प्रौद्योगिकी है जो कि सूचना के संचालन (रचना, भंडारण और उपयोग) की योग्यता रखता है तथा संचार के विभिन्न माध्यमों (रेडियो, टेलिविजन, सेलफोन, कम्प्यूटर, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, विभिन्न सेवाओं और अनुप्रयोगों) से सूचना के प्रसारण की सुविधा प्रदान करता है। कृषि, स्वास्थ्य, शासन प्रबन्ध और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में आई.सी.टी. के विकास का प्रभाव है। यह लेख उच्च शिक्षा में आई.सी.टी. की भूमि को केंद्रित कर रहा है। शैक्षिक अवसरों को विस्तृत करने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास एवं शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये आई.सी.टी. एक प्रभावशाली साधन है। सरकार आई.सी.टी. पर बहुत खर्च कर रही है। उच्च शिक्षा में बढ़ता नामांकन अनुपात तथा शिक्षा के विस्तार में प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता में आई.सी.टी. की भूमिका पर नेशनल मिशन ऑफ एजुकेशन बल देता है। आई.सी.टी. के शिक्षा में अभिग्रहण के प्रमुख कारक है- किसी भी प्रणाली का लक्ष्य, कार्यक्रम और पाठ्यक्रम, पढ़ने तथा पढ़ाने के तरीके, अधिगम सामग्री और संसाधन, संवाद, समर्थन और वितरण प्रणाली छात्र एट्यूटर्स, स्टाफ और अन्य विशेषज्ञ, प्रबंधन और मूल्यांकन। अतः आई.सी.टी. के कार्यान्वयन से उच्च शिक्षा में निश्चित ही सुधार होगा।