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वर्षा के दिन लगातार कम हो रहे हैं

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भास्कर न्यूज, कुमार संभव, Sept. 18, 2009
भोपाल. राजधानी में मानसून के दौरान वर्षा के दिन लगातार कम हो रहे हैं। इस साल मानसून में अब तक 3 मिमी से अधिक बारिश वाले दिनों की कुल संख्या 31 रही है जो पिछले 20 सालों में सबसे कम है। इससे पहले 1991 में यह संख्या सबसे कम 36 दिन थी।

यही नहीं पिछले दो दशकों के बारिश के आंकड़े बताते हैं राजधानी में वर्षा वाले दिनों की औसत संख्या 1980 के पूर्व के औसत की तुलना में लगातार घट रहे हैं। सामान्यत: 3 मिमी या उससे अधिक बारिश वाले दिन को वर्षा का दिन माना जाता है।

जल की जय हो

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डा. सुभाष चन्द्र प्रमाणिक, डा. नरेन्द्र बहादुर सिंह और श्री ब्रह्म प्रकाश, भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर 208024 (उत्तर प्रदेश)
भारत में जल की बढ़ती हुई मांग और अनुपलब्धता को देखते हुए कैबिनेट कमेटी ने 2007 को जल वर्ष के रूप में अनुमोदन किया था । इस देश में पानी की उपलब्धता 4000 लाख घन मीटर है जिसमें से 2150 लाख घन मीटर पृथ्वी की निचली सतह में चला जाता है । 1150 लाख घन मीटर नदी व नालों में जल भराव के रूप में बह जाता है और 700 लाख घन मीटर भाप के रूप में नष्ट हो जाता है । हमारे देश में कुल उपलब्ध पानी से लगभग 1400 लाख हैक्टर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकती है लेकिन अब तक 570.3 लाख हैक्टर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है । विगत वर्षों में प्रति व्यक्ति पानी के उपलब्धता 5300 घन मीटर (1955) से घटाकर 1731 घन मीटर (2005) हो गई है जो भविष्य में आने वाले संकट को प्रदर्शित करती है । प्रमाणित तथ्यों से यह भी पता चलता है कि 2025 में सिंचाई के लिए पानी की मांग लगभग 730 ब
इस खबर के स्रोत का लिंक: 

http://opaals.iitk.ac.in

हिमनद पर बर्फ जमाव नहीं

पिघलते ग्लेशियरपिघलते ग्लेशियरअमेरिकी हिमनदवेत्ताओं ने दावा किया है कि गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदियों को जल की आपूर्ति करने वाले हिमालयी हिमनदों या ग्लेशियर पर अब बर्फ एकत्र नहीं हो रही है, जिससे विशाल पर्वत श्रृंखला की निचली धारा के पास रहने वाले करोड़ों लोग बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।

ऊंचाई पर स्थित हिमनदों का अध्ययन करने वाले शोधकर्ता तिब्बती पठार के दक्षिणी छोर पर 19,849 फुट ऊंचे नाइमोनानयी हिमनद से इकट्ठे किये गए तीन हिमखंडों से रेडियोधर्मी संकेत पकड़ने में नाकाम रहे । उन्होंने कहा है कि कुछ स्थानों पर हर साल कुछ महीनों तक इन नदियों में अब बहुत कम पानी रहता है।

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्डकेन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्डकेन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का गठन एक सांविधिक संगठन के रूप में जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अन्तर्गत सितम्बर, 1974 में किया गया था । इसके पश्चात केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अन्तर्गत शक्तियाँ व कार्य सौंपे गये ।

भारत में पानी

भारत में पानीपानीप्रेमचन्द्र श्रीवास्तव / पर्यावरण संदेश


सामान्य तौर पर देखने से ऐसा लगता है कि भारत में पानी की कमी नहीं है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन 140 लीटर जल उपलब्ध है। किन्तु यह तथ्य वास्तविकता से बहुत दूर है। संयुक्त राष्ट्र विकास संघ (यूएनडीओ) की मानव विकास रिपोर्ट कुछ दूसरे ही तथ्यों को उद्घाटित करती है। रिपोर्ट जहां एक ओर चौंकाने वाली है, वहीं दूसरी ओर घोर निराशा जगाती है।



इस रिपोर्ट के अनुसार भारतीय आंकड़ा भ्रामक हैं वास्तव में जल वितरण में क्षेत्रों के बीच, विभिन्न समूहों के बीच, निर्धन और धनवान के बीच, गांवों और नगरों के लोगों के बीच काफी विषमता है।

एक जल-ग्रहण क्षेत्र का मैदानी अध्ययन

पोंधे जल-ग्रहण क्षेत्र, पुरंदर तालुका, जिला पुणे, महाराष्ट्र का मैदानी अध्ययन

द्वारा रैपिड हाईड्रोलॉजिकल मेपिंग पर आधारित अध्ययन


भारत वर्ष में अनेक विशाल क्षेत्र कठोर चट्टानों से आच्छादित हैं। ये चट्टान बहुत: आग्नेय एवं कायान्तरित मूल के हैं। देश के अनेक बंजर एवं अर्ध-बंजर क्षेत्रों में जल आपूर्ति ऐसी ही चट्टानों में संग्रहित भू-जल से होती है। यह कथन विशेषकर उन विशाल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सत्य है, जो कृषि एवं घरेलू उपयोग हेतु इस प्रकार के चट्टानों में संग्रहित भू-जल का दोहन करते हैं।

फ्ल्यूरोसिस के शिकार

फ्ल्यूरोसिस दांतफ्ल्यूरोसिस दांतभारत में करीब 6.2 करोड़ लोग फ्ल्यूरोसिस से पीड़ित हैं, जिनमें से 6 करोड़ से अधिक बच्चे और युवा हैं। इससे पीड़ित युवाओं से करीब २०,००० केवल असम में हैं। अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और घने जंगलों के लिए मशहूर कर्बी एंगलांग में आबादी का दसवां हिस्सा दांत या हड्डी के फ्ल्यूरोसिस से पीड़ित हैं। नवा ठाकुरिया की रिपोर्ट।

09 जनवरी 2007/ मशहूर असमी फिल्मकार मंजू बारो कर्बी एंगलांग के जिला मुख्यालय दिफू आए हैं। वे यहां कर्बी के मशहूर लोगों पर एक डॉक्यु-फीचर फिल्म बनाने आए हैं। पटकथा कर्बी के ही लेखक बसंत दास ने लिखी है।