पर्यावरण सुरक्षा

सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्यों में संभवत: यह सबसे मुश्किल लक्ष्य है क्योंकि यह मुद्दा इतना सरल नहीं है, जितना दिखता है। टिकाऊ पर्यावरण के बारे में जिस अवधारणा के साथ लक्ष्य सुनिश्चित किया गया है, सिर्फ उस अवधारणा के अनुकूल परिस्थितियां ही तय सीमा में तैयार हो जाए, तो उपलब्धि ही मानी जाएगी।

यद्यपि यह माना जाए कि विकास की राष्ट्रीय नीतियों एवं कार्यक्रमों के बीच समन्वय एवं उनमें व्यवस्थित रूप से एकीकरण किया जाए, पर यह संभव नहीं दिखता।

यादगार बने द्वीप

बाढ़ में उजडे़ अपने घर को देखते हुए मुस्तफा अली खानबाढ़ में उजडे़ अपने घर को देखते हुए मुस्तफा अली खानसुन्दरवन डेल्टा जो अपने शीतल जल और मनोरम वातावरण के लिए याद किया जाता था, आज वहां की धरती और पानी दोनों ही इतने अधिक गर्म हो गए हैं जितना पहले कभी नहीं हुए। द्वीपों से घिरे एक ऐसे ही अशान्त समुद्र का दर्द बयां कर रहे है मिहिर श्रीवास्तव/ सुन्दरवन डेल्टा के दक्षिण-पश्चिम में एक द्वीप है मौसिमी। इसी द्वीप की गोद में बसा है बालिहार गांव। इस गांव में रहने वाले किसान, मुस्तफा अली खान की 12 बीघा जमीन पिछले साल समुद्र में चली गई। पिछले दस सालों में ऐसा तीसरी बार हुआ है कि मुस्तफा का घर पानी की भेंट चढ़ गया। अ

जलसंरक्षण ने बदली गांव की तस्वीर

तालाबतालाबजयपुर-अजमेर राजमार्ग पर दूदू से 25 किलोमीटर की दूरी पर राजस्थान के सूखाग्रस्त इलाके का एक गांव है - लापोड़िया। यह गांव ग्रामवासियों के सामूहिक प्रयास की बदौलत आशा की किरणें बिखेर रहा है। इसने अपने वर्षों से बंजर पड़े भू-भाग को तीन तालाबों (देव सागर, फूल सागर और अन्न सागर) के निर्माण से जल-संरक्षण, भूमि-संरक्षण और गौ-संरक्षण का अनूठा प्रयोग किया है। इतना ही नहीं, ग्रामवासियों ने अपनी सामूहिक बौध्दिक और शारीरिक शक्ति को पहचाना और उसका उपयोग गांव की समस्याओं का समाधान निकालने में किया। आज गोचर का प्रसाद बांटता यह गांव दूसरे गांवों को प्रेरणा देने एवं आदर्श प्रस्तुत करने की स्थिति में आ गया है।

यमुना को जीवनदान देगा एफआरआई

यमुनायमुनादेहरादून। राजधानी दिल्ली में लगभग मृतप्राय हो गई गंगा-जमुनी तहजीब की प्रतीक यमुना नदी को भारतीय वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के वैज्ञानिक जीवनदान देंगे। एफआरआई ने यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की एक योजना दिल्ली विकास प्राधिकरण को भेजी है।

इसके तहत सबसे पहले राजघाट के निकट यमुना के पानी को जैविक तरीके से साफ किया जाएगा।

शौच को शुचिता से जोडने की मुहिम

आर्ट गैलरीआर्ट गैलरीआजाद भारत का जो सपना लोगों ने गुना-बुना था, वह पूरा न हो सका। कई आकांक्षाएं अधूरी रह गईं और कितनी पैदा होने से पहले ही खत्म हो गईं। इस बात पर बहस हो सकती है। जिसमें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से राजनैतिक पार्टियां जिम्मेदार ठहराई जाएंगी। लेकिन भारतीय समाज तमाम राजनैतिक बुराईयों के बावजूद नियमित गति से आगे बढ़ रहा है। इसकी वजह केवल एक है, वह है यहां के समाज में होने वाला सार्थक प्रयास। इसके बल पर ही आज समाज की रौनकें बची हुई हैं।

पर्यावरण के अनुकूल हैं जैविक-शौचालय

जैविक-शौचालयजैविक-शौचालयटोक्यो/ गंदे और बदबूदार सार्वजनिक शौचालयों से निजात दिलाने के लिए जापान की एक गैर सरकारी संस्था ने ‘जैविक-शौचालय’ विकसित करने में सफलता हासिल की है। ये खास किस्म के शौचालय गंध-रहित तो हैं ही, साथ ही पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हैं। समाचार एजेंसी ‘डीपीए’ के अनुसार संस्था द्वारा विकसित किए गए जैविक-शौचालय ऐसे सूक्ष्म कीटाणुओं को सक्रिय करते हैं जो मल इत्यादि को सड़ने में मदद करते हैं।

मानव मल से बना अनोखा दरवाजा

आर्ट गैलरीआर्ट गैलरीवार्ता/ नई दिल्ली। मानव मल से बनाए गए कम से कम 21 दरवाजे लीजन आर्ट गैलरी में पिछले दिनों प्रदर्शनी के लिए रखे गए। गैर सरकारी संगठन सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विसेज ऑर्गेनाइजेशन के शोधकर्मियों के प्रयास से यह विशेष दरवाजे बनाए गए हैं।

सुलभ के शोधकर्ताओं ने मानव मल के शोधन से प्राप्त अपशिष्ट पदार्थ से दरवाजे और खिड़कियों के पल्ले तैयार किए हैं।

जहरीला हुआ पंजाब का पानी

पंजाब का पानीपंजाब का पानीजी क्राइम/जालंधर/पंजाब। कहते हैं 'जल ही जीवन है', लेकिन पंजाब में अब यही बात हम दावे के साथ नहीं कह सकते, क्योंकि पंज दरियाओं की इस धरती का पानी अब इतना जहरीला हो चुका है कि अगर अब भी हम न चेते तो यह जीवन देने की बजाय, जीवन ले लेगा। इसका कारण है पानी में बढ़ता केमिकल। मालवा के पानी में तो केमिकल पहले ही काफी मात्रा में मिल चुका है और अब दोआबा व माझा में भी पानी प्रदूषित हो चुका है।

जल प्रदूषण: निजात दिलाएगा एसएसएफ

स्लो सेंड फिल्टरस्लो सेंड फिल्टरजागरण/हरिद्वार/ उत्तराखंड। गंगा सहित देश की अन्य नदियों को मानव जनित प्रदूषण से बचाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। इस दिशा में गुरुकुल कांगड़ी विवि व आईआईटी का एक संयुक्त शोध महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। जिले में स्थित दोनों शीर्ष संस्थानों के विज्ञानियों ने स्लो सेंड फिल्टर (एसएसएफ) नामक बहुत कम खर्चीली व अधिक कारगर तकनीक विकसित की है। शोध कार्य को अंतिम रूप दिए जाने के बाद अमेरिका में आयोजित पर्यावरण विज्ञान एवं तकनीक पर आयोजित चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय कान्फ्रेंस में इसके प्रस्तुतीकरण का न्योता मिल चुका है।

गौरतलब है कि विस्तार लेती शहरी आबादी व बढ़ते औद्योगिकीकरण के चलते सिंचाई सहित अन्य कार्यो के लिए पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट की जरूरत भी बढ़ गई है, इसके लिये भारत में अपनाई जा रही प्रणाली महंगी होने के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार पानी का शोधन नहीं कर पा रही है।

इस दिशा में पिछले कुछ वर्षों से गुरुकुल कांगड़ी विवि के कुलसचिव व पर्यावरण विज्ञानी प्रो. एके चोपड़ा तथा आईआईटी रुड़की के प्रो. एए काजमी शोध कर रहे थे। अब इस शोध कार्य को लगभग अंतिम रूप देने के तुरंत बाद उन्हें 28 से 31 जुलाई तक अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित पर्यावरण विज्ञान व तकनीकी पर आयोजित इंटरनेशनल कान्फ्रेंस में इसके प्रस्तुतीकरण का न्योता मिला है।