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दूब घास के औषधीय गुण (Medicinal use of Cynodon dactylon)

Author: 
सन्तोष कुमार सिंह
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


दूब घास का औषधीय गुण हमारे जीवन में बहुत महत्त्वपूर्ण संस्कारों का एक अध्याय है। जो हमारे जीवन में बहुत सी औषधीय के रूप में प्रयोग किया जाता है। इतना ही नहीं मधुमेह रोगी के लिये भी बहुत लाभकारी प्रमाणित किया जा चुका है। अगर हम पानी के साथ ताजी दूब धुलकर उबाल कर सेवन करें तो 59 प्रतिशत ब्लड शुगर लेवल कम कर देता है।

Abstract : Medicinal activity of Cynodon dactylon (Family: Poaceae) is very useful and play an important role in our life activities. The study was undertaken to investigate the Hypoglycemic & Antidiabetic effect of single and repeat Oral administration of aqueous extract of grass resulted, significant reduction of 59% in the blood sugar level.

दूब या दुर्वा (वैज्ञानिक नाम- ‘साइनोडॉन डेक्टिलॉन’) वर्ष भर पायी जाने वाली घास है जो जमीन पर पसरते हुए या फैलते हुए बढ़ती है। हिन्दू संस्कारों एवं कर्मकाण्डों में इसका उपयोग किया जाता है तथा वर्ष में दो बार सितम्बर-अक्टूबर और फरवरी-मार्च में इसमें फूल आते हैं। महाकवि तुलसीदास ने दूब को अपनी लेखनी में इस प्रकार सम्मान दिया है- ‘‘राम दुर्वादल श्याम, पद्याक्षं पीतावाससा।’’
प्रायः जो वस्तु स्वास्थ्य के लिये हितकर सिद्ध होती थी, उसे पूर्वजों ने धर्म के साथ जोड़कर उसका महत्त्व और भी बढ़ा दिया है। दूब भी ऐसी ही वस्तु है, यह सारे देश में बहुतायत के साथ हर मौसम में उपलब्ध रहती है।

ग्रीन हाउस प्रभाव एक वैश्विक समस्या (Green House Effect : a global problem)

Author: 
निरंजनी चौरसिया
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


पृथ्वी की प्राकृतिक जलवायु निरन्तर बदलती रही है। ग्रीन हाउस प्रभाव के द्वारा पृथ्वी की सतह गर्म हो रही है। ग्रीन हाउस प्रभाव सूर्य की किरणें कुछ गैसों और वायुमण्डल में उपस्थित कुछ कणों से मिलकर होने की जटिल प्रक्रिया है। कुछ सूर्य की ऊष्मा वायुमण्डल से परावर्तित होकर बाहर चली जाती हैं। लेकिन कुछ ग्रीन हाउस गैसों के द्वारा बनाई हुई परत के कारण बाहर नहीं जाती है। अतः पृथ्वी का निम्न वायुमंडल गर्म हो जाता है। ग्रीन हाउस प्रभाव एक प्राकृतिक प्रक्रिया है तथा यह जीवन को प्रभावित करती है। ग्रीन हाउस प्रभाव के बिना पृथ्वी का औसत तापमान वर्तमान सामान्य औसत 15डिग्री से.ग्रे. के स्थान पर- 18डिग्री से.ग्रे. होगा। फिर भी वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों जैसे CO2, CH4, N2O, O3 और जलवाष्प तथा हैलोकार्बन की बढ़ी हुई मात्रा समस्या उत्पन्न करती हैं।

Abstract : The earth’s natural climate has always been and still constantly changing. Greenhouse effect is warming of the surface of the earth by a complex process involving sunlight, trace gases and particles in the atmosphere. Some of the heat energy escapes to the space but much of it is trapped by the layers of atmospheric greenhouse gases to outer space and get absorbed. Thus the earth’s lower atmosphere heats up. The greenhouse effect is a natural phenomenon and vital to life. Without the greenhouse effect the earth’s average temperature would be -180C, instead of current average temperature of 150C. However, problem arise when the atmospheric concentration of greenhouse gases such as CO2, CH4, N2O, O3 halocarbons and water vapour increases.

हल्दी : प्रकृति का अमूल्य औषधीय वरदान (Haldi : a precious medicinal boon of nature)

Author: 
पल्लवी दीक्षित
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


. हल्दी प्रकृति का एक अमूल्य औषधीय वरदान है। अपने अत्यन्त विशिष्ट गुणों के कारण हल्दी को भारत में न केवल मसाले एवं औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है, वरन धार्मिक दृष्टि से भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। विभिन्न जटिल रोगों के उपचार में हल्दी का प्रयोग किया जाता है। अभी इसके औषधीय गुणों पर और शोध व अध्ययनों की आवश्यकता है, जिससे इसके अन्य नवीन औषधीय गुणों की खोज की जा सके तथा उनका प्रयोग विभिन्न रोगों के उपचार में किया जा सके।

Abstract : Haldi is a precious medicinal boon of nature. Due to its excellent properties it has been not only used as spice but also used as medicine. It is also considered as auspicious and is an important part of Indian religious rituals. Some further evaluation needs to be carried out on turmeric in order to explore the concealed areas and their practical clinic applications which can use for the welfare of mankind.

रामराज्य और पर्यावरण (Ram-Rajya and Environment)

Author: 
महेन्द्र प्रताप सिंह
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता के उपरान्त देश में रामराज्य स्थापित करने का सपना देखा था। गांधीजी के इस विचार को गंभीरता से नहीं लिया गया। रामराज्य की अवधारणा वाल्मीकीय रामायण एवं तुलसीदास कृत रामचरितमानस में है। इस लेख में रामराज्य के पर्यावरण सम्बन्धी विशेषताओं का उल्लेख किया गया है। यह अत्यन्त आश्चर्य की बात है कि वानिकी के जिन नवीन सिद्धांतों जैसे- ‘‘प्रिन्सिपल ऑफ सस्टेंड यील्ड’’ आदि को विदेशी विद्वानों द्वारा प्रतिपादित किया गया बताया जाता है कि वे सिद्धान्त रामचरित मानव में पहले से ही मौजूद हैं। रामराज्य की अवधारणा किसी धार्मिक संकीर्णता का द्योतक नहीं है बल्कि यह जनहित कारी अवधारणा है। इस पर गंभीर मनन एवं चिंतन की आवश्यकता है।

सूर्य प्रतिमायें (Son-Statues in India in Hindi)

Author: 
अनुराधा विनायक
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


भारत की प्राचीनतम ज्ञात सभ्यता सैन्धव काल से मूर्ति पूजन के साक्ष्य प्राप्त होने लगते हैं। ऋग्वेद में सूर्य के प्राकृतिक स्वरूप की स्तुति दस सूक्तों में की गई है। सूर्य की प्रतिमाओं का निर्माण दूसरी शताब्दी ई. से होने लगा था जिनका वास्तविक विकास गुप्तकाल में देखने को मिलता है। देश के विभिन्न भागों में निर्मित 68 सूर्य मन्दिरों का उल्लेख स्कन्दपुराण में हुआ है। सूर्य प्रतिमाओं के रूप के आधार पर विभिन्न भागों में विभक्त सूर्य मूर्तियाँ उपलब्ध हुई हैं। सभी मूर्तियों की अपनी विशेषताएँ हैं।

Abstract : The evidence of icon worship is found in the ancient oldest known civilization of Indus valley. In India, prayers in nature's form of Surya in ten Suktas in Rig-Veda. Sculptures of Surya started in second century A.D. and developed significantly in Gupta Period. Skanda-Puran has mentioned about 68 Temples of Sun in different parts of country. On the basis of Architecture Sun Icon found in different parts of the country. All Icons have special significance.

कैंसर क्या है और कैसे होता है कैंसर (What is cancer and how does cancer)

Author: 
एस.सी. शुक्ल
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


कैन्सर, रोगों का एक वर्ग है जिसमें काशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के साथ ही शरीर के दूसरे अंगों में भी फैलने और विनाश करने की क्षमता होती है। अधिकतर (90-95 प्रतिशत) कैन्सर का कारण वातावरण होता है। शेष (5-10 प्रतिशत) आनुवंशिकी से निर्धारित होते हैं। ज्यादातार कैन्सर को प्रारम्भिक अवस्था में ही उसके चिन्ह एवं लक्षण या स्क्रीनिंग द्वारा पहचाना जा सकता है। चिकित्सीय परीक्षण जैसे रक्त जाँच, एक्स-रे, सी.टी. स्कैन, एण्डोस्कोपी तथा बायोप्सी प्रमुख हैं। कुछ कैन्सर की रोकथाम उसको उत्पन्न करने वाले जोखिम कारकों जैसे, तम्बाकू चबाना, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, मदिरापान, यौन सम्बन्धित रोगों आदि से बचाव करके किया जा सकता है।

Abstract : A group of diseases involving abnormal cell growth with the potential to invade or spread to other parts of the body, is known as cancer. Majority (90-95%) of cancers are due to environmental factors. Remaining (5-10%) is due to inherited factors. Most of the cancers can be recognized at early stage due to the appearance of signs and symptoms or through screening. Investigations include blood tests, X-rays, CT scans, endoscopy and biopsy. Some cancers can be prevented by avoiding risk factors as tobacco chewing, obesity, physical inactivity, alcohol intake and sexually transmitted diseases etc.

एक अर्बुद (ट्यूमर) का अर्थ है कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि जिससे एक परावर्तित (ट्रांसफॉर्मड) कोशिकाओं का समूह बन जाता है। जिसे गांठ (लम्प) कहा जाता है। इसके बनने के प्रमुख कारण होते हैं- कोशिका विभाजन को नियंत्रित करने वाली प्रक्रिया का समापन तथा उसके अन्दर उपस्थित जीन्स (आनुवंशिकता की इकाई) में किन्हीं लक्षणों के प्रति जीनी उत्परिवर्तन (जीनिक म्यूटेशन)।

प्रोटीन (Protein)

Author: 
ए.के. चतुर्वेदी
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


मानव भोजन का मुख्य अवयव प्रोटीन है। 24 अमीनो अम्ल कई तरह के प्रोटीन का निर्माण करते हैं। वनस्पति तथा जन्तु प्रोटीन के स्रोत हैं। सभी एन्जाइम (विकर) प्रोटीन हैं तथा विकर जैव-उत्प्रेरक हैं। प्रोटीन शारीरिक सौष्ठव में तथा मानव में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का कार्य करता है। आवश्यकता से अधिक प्रोटीन उच्च रक्तचाप, मोटापा, गठिया रोग, वृक्क रोग उत्पन्न करता है। शरीर में प्रोटीन की कमी से बौनापन, बाल का झड़ना, वजन में कमी, मासपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं। प्रोटीन धागे वाली, गोलाकार, साधारण तथा मिश्रित होती है।

Abstract : Protein is the constituent of human food. There are 24 amino acid which form different proteins. Source of protein is vegetables and animal. All enzymes are proteins and enzymes are bio-catalyst. Protein builds up body and increases immune power in human beings. Excess protein causes high blood pressure, obesity, arthritis, kidney disease. Lack of protein causes dwarfness, hair fall, weight loss, muscles weakness etc. proteins are fibrous, globular, simple, mixed.

जीका वायरस-मानव जाति के लिये खतरा (Zika virus-threat to human race)

Author: 
डी.के. अवस्थी एवं सरिता चौहान
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


यूगांडा के जीका जंगल में पाये जाने वाले बंदरों में जीका वायरस पाया गया है। जीका तथा इबोला वायरस दोनों ही घातक हैं। जीका वायरस, एडीज मच्छर द्वारा फैलता है। जीका वायरस को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आपातकालीन जन स्वास्थ्य घोषित कर दिया है। जीका वायरस को सर्वप्रथम 1947 में पृथक किया गया था। जीका वायरस के कारण बुखार और दर्द को दूर करने के लिये एसिटामिनोफेन दवा दी जाती है। जीका वायरस से माइक्रोसेफैली रोग हो जाता है।

Abstract : Zika virus was found in monkey of Zika forest of Uganda. Zika and Ebola viruses are fatal. Zika virus is spread through Aedes mosquitoes. The World Health Organization (WHO) has declared a public health emergency for Zika virus. Zika virus was first of all isolated in 1947. Fever and pain caused by Zika virus is cured by Acetaminophane medicine. Zika virus causes microcephali disease.

जीका वायरस धीरे-धीरे पूरी दुनिया में इस प्रकार फैल रहा है कि आने वाले समय में मानव जाति का अस्तित्व खतरे में होगा। अगर इस पर रोकथाम न की गई तो गम्भीर परिणाम भुगतने होंगे। इबोला वायरस के बाद यह वायरस अपनी तबाही अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में मचा रहा है। इस बीमारी को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल माग्रेटचान ने 02 फरवरी 2016 की शुरुआत में वैश्विक आपात स्थिति घोषित कर दिया है डब्ल्यू.एच.ओ. ने अनुमान लगाया है कि अगले साल अमेरिका में जीका वायरस सम्बन्धित लगभग 50 लाख लोग प्रभावित होंगे। यह मच्छर से फैलने वाला वायरस बहुत खतरनाक है और ब्राजील, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका के साथ-साथ लगभग 25 देशों में फैल चुका है। ब्राजील में अब तक करीब 6 हजार बच्चे और युवा इस खतरनाक वायरस का शिकार हो चुके हैं।

जैव-विविधता : महत्व, क्षरण एवं संरक्षण (Bio-diversity : importance, loss and conservation)

Author: 
अरविन्द सिंह
Source: 
अनुसंधान विज्ञान शोध पत्रिका, 2016

सारांश


दुनिया में कुल कितनी प्रजातियाँ हैं यह ज्ञात से परे है, लेकिन एक अनुमान के अनुसार इनकी संख्या 30 लाख से 10 करोड़ के बीच है। विश्व में 14,35,662 प्रजातियों की पहचान की गयी है। यद्यपि बहुत सी प्रजातियों की पहचान अभी भी होना बाकी है। पहचानी गई मुख्य प्रजातियों में 7,51,000 प्रजातियाँ कीटों की, 2,48,000 पौधों की, 2,81,000 जन्तुओं की, 68,000 कवकों की, 26,000 शैवालों की, 4,800 जीवाणुओं की तथा 1,000 विषाणुओं की हैं। पारितंत्रों के क्षय के कारण लगभग 27,000 प्रजातियाँ प्रतिवर्ष विलुप्त हो रही हैं। इनमें से ज्यादातर ऊष्णकटिबंधीय छोटे जीव हैं। अगर जैव-विविधता क्षरण की वर्तमान दर कायम रही तो विश्व की एक-चौथाई प्रजातियों का अस्तित्व सन 2050 तक समाप्त हो जायेगा।

Abstract : Exactly how many species of life exists is not known to anybody. Estimate ranges from 3 million to 100 million. There are 14,35,662 identified species all over the world, however, a large number of species are still unidentified. They include 7,51,000 species of insects, 2,48,000 of flowering plants, 2,81,000 of animals, 68,000 of fungi, 26,000 of algae, 4,800 of bacteria and 1,000 of viruses. Approximately 27,000 species become extinct every year due to loss of ecosystems. Majority of them are small tropical organisms. If this trend of bio-diversity depletion continues, 25 percent of the world’s species may vanish by the year 2050.