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लोगों को पत्र लिख करते हैं पौधा रोपने की अपील

Author: 
वंदना वालिया बाली
Source: 
दैनिक जागरण, 07 जनवरी 2017

पर्यावरण प्रहरी के रूप में अनोखी भूमिका निभाने वाले गुरबचन सिंह अगस्त 1994 से जनवरी 1995 तक 25 हजार किलोमीटर का सफर साइकल से तय कर भारत भ्रमण कर चुके हैं। इस दौरान भी उन्होंने लोगों को पर्यावरण का सन्देश दिया। अब भी वे साइकल से ही चलते हैं। उनकी साइकल पर एक तख्ती लगी हुई है, जिस पर हर दिन एक नया सन्देश लिख देते हैं। साइकल जहाँ से भी गुजरती है, लोग इसे पढ़ते जाते हैं। जालंधर/पर्यावरण संरक्षण का यह अनूठा प्रयास पंजाब पुलिस में तैनात एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर पिछले 12 वर्ष से कर रहा है। वह स्थानीय अखबारों में हर दिन छपने वाले शोक अथवा बधाई सन्देशों से पते जुटाते हैं और उसी दिन सभी पतों पर पत्र भेज देते हैं। पत्र में शोक संवेदना अथवा शुभकामना के साथ ही एक अपील भी करते हैं। जिन्होंने परिजन कोे खोया, उनसे परिजन की याद में एक पौधा रोपने का आग्रह करते हैं और जिनका जन्मदिन है, उन्हें हर जन्मदिन पर एक पौधा रोपने के लिये प्रेरित करते हैं। पिछले 12 साल से यह काम वे हर दिन कर रहे हैं।

उत्तराखण्ड लिखेगा पानी की नई कहानी

Source: 
दैनिक जागरण, 05 जनवरी 2017

मुख्यमंत्री ने शुरू कराई अनूठी पहल, शौचालयों के फ्लश में डाली रेत से भरी बोतलें

एक समय में सूख चुकी गाड़गंगा ने सदानीरा रूप ले लिया, उससे उम्मीद जगी है कि यदि चाल-खाल की परिकल्पना पर काम किया जाये तो उत्तराखण्ड में जलक्रान्ति आ सकती है। यह प्रयास इसलिये जरूरी भी है कि प्रदेश में 200 से अधिक छोटी-बड़ी नदियाँ लगभग सूख चुकी है, या बरसाती नदी में तब्दील हो चुकी हैं। इस दिशा में शुभ संकेत भी मिल रहे हैं, क्योंकि राज्य सरकार चाल-खाल की परिकल्पना पर काम करने की तैयारी कर रही है। उत्तराखण्ड में पानी की नई कहानी लिख डालने की मजबूत शुरुआत हो चुकी है। बीते वर्ष मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक ऐसी पहल की, जिसके दम पर सूक्ष्म प्रयास से ही हर साल 14.74 लाख लीटर पानी बचाने का इन्तजाम कर लिया गया है। मुख्यमंत्री के आह्वान पर प्रदेश भर में शौचालय के फ्लश में रेत से भरी बोतल डालने की मुहिम शुरू की गई थी, जिसका असर यह हुआ कि बोतल में भरी रेत के भार के बराबर पानी हर फ्लश के बाद कम जमा होने लगा और उतना ही पानी फ्लश भी होने लगा। सरकार के ही आँकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक 2.73 लाख से अधिक बोतलें फ्लश में इस्तेमाल की जा रही हैं। नए साल पर यह उम्मीद है कि यह प्रयास और अधिक लोगों तक पहुँचेगा और जल संरक्षण को नया आयाम मिल सकेगा।

पर्यावरण बचाने को लिया जाएगा लोकगीतों का सहारा

Author: 
अमित कुमार
Source: 
राष्ट्रीय सहारा, 03 जनवरी, 2018

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा पुस्तक मेले में पर्यावरण से जुड़े विषयों पर सेमिनार का भी आयोजन किया जाएगा। इनमें पंजाब में काली नदी (व्यास की सहायक नदी) पर काम करने वाले पर्यावरणविद संत बलबीर सिंह सिचेवाल ‘पर्यावरण संरक्षण’ पर अपने विचार रखेंगे। जाने-माने पर्यावरणविद स्व. अनुपम मिश्र द्वारा पर्यावरण के क्षेत्र में किये गये काम को लेकर एक परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा। इस परिचर्चा में स्व. मिश्र की पुस्तक ‘आज भी खरे हैं तालाब’ पर भी चर्चा होगी।

उमंग एप (UMANG APP)

Source: 
कुरुक्षेत्र, अगस्त 2017

उमंग (यानी यूनिफाइड मोबाइल एप्लीकेशन फॉर न्यू-एज गवर्नेंस अर्थात नए युग के शासन के लिये एकीकृत मोबाइल एप्लीकेशन) का उद्देश्य ई-गवर्नेंस को ‘मोबाइल प्रथम’ बनाना है। इसका विकास इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन द्वारा किया गया है। यह एक विकासमान मंच है, जो भारत के नागरिकों को अखिल भारतीय ई-गवर्नेंस सेवाएँ प्रदान करने के लिये तैयार किया गया है। इन सेवाओं में केन्द्रीय, राज्य, स्थानीय निकायों और सरकार की एजेंसियों की सेवाएँ शामिल हैं, जिनके लिये एप, वेब, एसएमएस और आईवीआर चैनलों के जरिए एक्सेस प्रदान की जाती है।

इस एप की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं :-

यूनिफाइड प्लेटफॉर्म : यह सभी सरकारी विभागों और उनकी सेवाओं को एकल मंच पर लाता है ताकि नागरिकों को बेहतर और आसानी से सेवाएँ प्रदान की जा सकें।

मोबाइल प्रथम कार्यनीति : यह सभी सरकारी सेवाओं को मोबाइल प्रथम कार्यनीति के साथ जोड़ता है ताकि मोबाइल रखने की प्रवृत्ति का लाभ उठाया जा सके।

डिजिटल इंडिया सेवाओं के साथ एकीकरण : यह आधार, डिजी-लॉकर और पे-जीओवी जैसी अन्य डिजिटल इंडिया सेवाओं के साथ निर्बाध एकीकरण प्रदान करता है। कोई भी ऐसी नई सेवा इस प्लेटफॉर्म के साथ स्वतः जुड़ जाएगी।

एक समान अनुभव : इसका डिजाइन यह बात ध्यान में रखकर तैयार किया गया है कि इससे नागरिकों को सभी सरकारी सेवाओं को आसानी से खोजने, डाउनलोड करने, उन तक पहुँच कायम करने और उनका उपयोग करने में आसानी रहे।

सुरक्षित और सुगम : यह सेवा पहुँच के लिये आधार और अन्य प्रमाणीकरण व्यवस्थाओं से जुड़ी है। संवेदनशील प्रोफाइल डाटा एक्रिप्टिड फ़ॉर्मेट में सेव होता है और ऐसी सूचना को कोई अवांछित व्यक्ति नहीं देख सकता।

इस एप के जरिए निम्नांकित सेवाएँ उपलब्ध हैं :

सीबीएसई : केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से जुड़े सभी विद्यार्थी अपने परीक्षा केन्द्रों का पता लगा सकते हैं और अपने परीक्षा परिणाम देख सकते हैं।

उत्तराखण्ड के स्रोतों को रीचार्ज करेगा जीएसआई

Author: 
सुमन सेमवाल
Source: 
दैनिक जागरण, 26 दिसम्बर 2017

अल्मोड़ा का बड़ा भूभाग इन दोनों लाइनों के मध्य आता है और इनके दायरे में आने वाले जलस्रोतों को ही रीचार्ज करने का निर्णय लिया गया है। जीएसआई निदेशक भूपेंद्र सिंह के अनुसार देखा जाएगा कि कहीं फॉल्ट के सक्रिय स्थिति में होने के चलते तो स्रोत नहीं सूख रहे। स्थिति स्पष्ट होने के बाद उसके मुताबिक जलस्रोतों को रीचार्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। एमओयू हस्ताक्षरित होने के बाद जीएसआई ने बोर्ड ने अल्मोड़ा के जल स्रोतों का पूरा ब्योरा माँगा है।

गंगा मैली करने वालों के खिलाफ कानून जल्द

Source: 
दैनिक जागरण, 20 दिसम्बर, 2017

केंद्रीय जल संसाधन और गंगा संरक्षण राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि नमामि गंगे परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। नदियों को निर्मल रखने के लिये हर नागरिक को आगे आना होगा। कहा कि गंगा मैली करने वालों पर अंकुश लगाने के लिये जल्द ही कानून भी बनाया जाएगा।

ऋषिकेश में गंगा नदी मंगलवार को हरिद्वार के ऋषिकुल स्थित मालवीय ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री ने नमामि गंगे राष्ट्रीय गंगा स्वच्छता मिशन के तहत 918.93 करोड़ रुपये की लागत से 32 परियोजनाओं के शिलान्यास के अलावा गंगोत्री धाम में सीवेज व एसटीपी और बदरीनाथ में 0.26 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का लोकार्पण भी किया। परियोजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में गंगा और सहायक नदियों के किनारे बसे 15 शहरों को इन परियोजनाओं में शामिल किया गया है।

शादी के मौके पर नवदम्पति रोपते हैं पौधा

Author: 
सतेन्द्र डंडरियाल
Source: 
दैनिक जागरण, 19 दिसम्बर, 2017

पेशे से मोहन पाठक शिक्षक हैं। लेकिन उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी शिक्षा का हिस्सा बना लिया है। शादियों के सीजन में वह खुद लोगों के घरों में जाते हैं। उन्हें प्रेरित करते हैं और खुद भी आयोजन में शामिल होते हैं। मकसद यह है कि जिस पौधे को बेटी रोपकर पीहर के लिये प्रस्थान करे, उसे माता-पिता संतान की तरह प्यार करें और एक पौधा बड़ा होकर पेड़ बने तो यह बाकियों के लिये प्रेरणा बने।

जल पर जंग (War on water)

Source: 
प्रयुक्ति, 19 दिसम्बर, 2017

भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में ऐसे पल कम ही आते हैं जब हालात सामान्य से हों या सामान्यता की ओर हों, वर्ना हर समय तल्खी और तनाव बना ही रहता है। अब दोनों पड़ोसियों के बीच पानी को लेकर हालात गर्मा रहे हैं। आशंका तो जल युद्ध की भी जताई जा रही है। दरअसल, दोनों देश कश्मीर में अपने-अपने इलाके में कई हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजनाओं में लगे हुए हैं। खबर है कि किशनगंगा नदी पर बन रही भारतीय परियोजनाओं का पाकिस्तान विरोध कर रहा है। उसे लगता है कि भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिये पानी अपनी ओर मोड़ सकता है। वैसे कुछ समय पहले पाकिस्तान के केन्द्रीय बैंक ने एक रिपोर्ट में बताया था कि भविष्य में पानी की कमी से देश में खाद्य सुरक्षा और लम्बी अवधि, वृद्धि की राह में मुश्किलें आएँगी। इस लिहाज से देखें तो स्थितियाँ जटिल होती जा रही हैं।

पंजाब में बढ़ते प्रदूषण पर गम्भीर हुई कैप्टन सरकार

Author: 
कैलाश नाथ
Source: 
दैनिक जागरण, 19 दिसम्बर, 2017

दिल्ली में स्मॉग के कहर के बाद अब पंजाब प्रदूषण को लेकर गम्भीर नजर आ रहा है। पंजाब सरकार ने लम्बे समय बाद एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सिस्टम के सेंटर में विस्तार करने का फैसला किया है। इसके लिये जालंधर, खन्ना व पटियाला को चुना गया है। पिछले दो माह में प्रदूषण को लेकर चल रहे हो-हल्ले और पंजाब में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को देखते हुए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने राज्य के एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सिस्टम में विस्तार करने का फैसला किया है। अभी तक मंडी गोबिंदगढ़, अमृतसर और लुधियाना में ही एमबिनेट एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग स्टेशन स्थापित है। जिससे इन तीनों जगहों की सटीक जानकारी प्राप्त हो पाती है।

वायु प्रदूषण प्रदूषण को लेकर लगातार हो रहे हंगामे को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग स्टेशन की संख्या 8 करने का फैसला किया है। बोर्ड दो चरणों में पाँच स्टेशन स्थापित करने जा रहा है। पहले चरण में जहाँ जालंधर, खन्ना और पटियाला में स्टेशन स्थापित किया जाएगा। वहीं, दूसरे चरण में बठिंडा और रोपड़ में स्टेशन स्थापित किया जाएगा।

क्या होंगे फायदे : पीपीसीबी के चेयरमैन काहन सिंह पन्नू का कहना है कि वायु प्रदूषण को लेकर लोगों में जागरुकता आई है। प्रदूषण में बढ़ोत्तरी भी हुई है। प्रदूषण नियंत्रण मॉनीटरिंग स्टेशन के स्थापित होने से तीन अन्य जिलों के वायु प्रदूषण की सटीक जानकारी तुरन्त मिल सकेगी, जबकि अभी तक यह रिपोर्ट आने में देर लगती है।