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दूषित पानी देने वाले हैंडपम्पों को सीज करने का आदेश

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अमर उजाला, 25 मई, 2017

नई दिल्ली (ब्यूरो)। एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को सूबे के आठ जिलों में प्रदूषित पानी देने वाले हैंडपम्पों की जाँच कर उन्हें सील का आदेश दिया है। इनमें मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, बुलन्दशहर, अलीगढ़, कासगंज, फर्रुखाबाद और कन्नौज शामिल हैं।

याची का आरोप है कि ईस्ट काली नदी के बहाव क्षेत्र वाले इन जिलों में प्रदूषित भूजल की वजह से हैंडपम्पों से दूषित पानी आता है। इससे लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी दिक्कतें हो रही हैं। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने मेरठ निवासी याची रमनकांत की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया।

पीठ ने कहा कि सीपीसीबी, यूपीपीसीबी और सम्बन्धित प्राधिकरण इन जिलों में भूजल का नमूना लेकर जाँच करें और प्रदूषित पानी देने वाले हैंडपम्पों को सील करें। याची की ओर से पेश एडवोकेट राहुल खुराना ने ईस्ट काली में होने वाले औद्योगिक व घरेलू प्रदूषण को रोकने की भी माँग की थी।

मध्य प्रदेश में रेत खनन पर अभूतपूर्व फैसला


. मध्य प्रदेश सरकार ने 22 मई 2017 को अभूतपूर्व फैसला लेते हुए नर्मदा नदी से रेत खनन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस तरह का कठिन किन्तु नदी हित में सही फैसला लेने वाली यह संभवतः देश की पहली सरकार है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश सरकार ने यह कदम नर्मदा सेवा यात्रा के समापन के मात्र सात दिन के भीतर उठाया है। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि नर्मदा से रेत की निकासी में मजदूरों अथवा मशीनों का उपयोग वर्जित होगा। फैसले के दूसरे भाग में कहा है कि प्रदेश की अन्य नदियों यथा चम्बल, सिन्ध, ताप्ती इत्यादि से भी रेत खनन में मशीनों का उपयोग वर्जित होगा। फैसले के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाते हुए सरकार ने 22 मई 2017 को ही प्रदेश के सभी कलेक्टरों को खनन प्रतिबन्धों के बारे में आवश्यक निर्देश भेज दिए हैं। उल्लेखनीय है कि मानसून के सीजन को ध्यान में रख भोपाल के रेत के कारोबारियों ने पर्याप्त स्टॉक जमा कर लिया है। इस कारण भोपाल के निर्माण कार्य बन्द नहीं होंगे।

महानदी के तट पर बनी झील, किसानों के लिये वरदान

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राजस्थान पत्रिका, 16 मई, 2017

बिरकोनी के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, एसएस गौतम के अनुसार खदान में इतने जलस्रोत हैं कि एक हजार एचपी का मोटर चलाने पर भी पानी कम नहीं होगा। खदान में उच्च क्षमता का मोटरपम्प लगाकर बिरकोनी से बड़गाँव की ओर जाने वाली नहर में पानी गिराया जाए तो करीब तीन हजार एकड़ खेतों को दोनों फसलों के लिये भरपूर पानी मिल सकता है। महासमुंद। जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर महानदी के तट पर बरबसपुर और घोड़ारी गाँव के बीच एक झील बन गई है। यह बनी नहीं, बनाई गई है। फोरलेन सड़क निर्माण में कंक्रीट की पूर्ति के लिये फोरलेन कम्पनी ने इतने बड़े पैमाने पर पत्थर उत्खनन किया है कि यहाँ करीब 1300 फीट लम्बी, 200 फीट चौड़ी और करीब 150 फीट गहरी झीलनुमा विशाल खदान बन गई है। इस खदान में सैकड़ों भूगर्भीय जलस्रोतों का संगम हो रहा है। पानी का भंडार समेटे यह खदान क्षेत्र की प्यासी धरती के लिये वरदान साबित हो सकती है। कोडार सिंचाई कमांड के अन्तिम छोर में पड़ने के कारण ग्राम घोड़ारी, बरबसपुर, बड़गाँव, अछरीडीह, नयापारा तक कोडार बाँध का पानी पर्याप्त रूप से नहीं पहुँच पाता। इन गाँवों के सैकड़ों किसान खरीफ की एक मात्र फसल भी बमुश्किल ले पाते हैं। महानदी के इन तटीय गाँवों की धरती पानी के लिये हमेशा तरसती रही है। अब इन गाँवों के किसानों को एक नई उम्मीद नजर आ रही है। झीलनुमा फोरलेन कम्पनी की खदान भीषण गर्मी में भी साफ पानी से लबालब है। भीषण गर्मी में भी पानी कम नहीं हुआ है।

नदी का घर छोड़ गया उसका प्रहरी


पर्यावरण मंत्री तथा नर्मदा को अगाध प्रेम करने वाले अनिल माधव दवे के निधन पर श्रद्धांजलि

. 'नदी का घर' हाँ, यही नाम था भोपाल में उनके घर का भी। नदी और उनके घर ही एक नहीं थे। वे नदी की चिंता करने वाले सजग प्रहरी थे और नदी पर मँडराते संकटों के इस दौर में उनकी चिंता हमेशा बनी रही कि कैसे नदियों और जलाशयों को समाज की निगहबानी में पुनर्जीवित और पुनर्प्रतिष्ठित किया जाए। पानी के संकट और नदियों की स्थिति की आहट को उन्होंने अब से करीब बीस साल पहले ही पहचान लिया था और उस पर काम करना भी। यहाँ तक कि उन्होंने अपनी चार बिंदु की छोटी-सी वसीयत में भी अपना अंतिम संस्कार नर्मदा और तवा के संगम बांद्राभान में करने और स्मृति में महज पेड़ लगाने और नदी-जलाशयों को बचाने के काम करने की इच्छा जताई। उसमें भी कोई उनका नाम न ले, बस समाज अपना दायित्व समझकर इसे करता रहे।

प्रकृति के ये सजग प्रहरी थे अनिल माधव दवे। निधन के बाद भी नदियों और खासकर नर्मदा संरक्षण के लिये उनके काम हमें सहज ही उनकी याद दिलाते रहेंगे। सरकारों में किंग मेकर और केंद्र में पर्यावरण मंत्री होने के बावजूद उनका मन सत्ता के गलियारों में कम ही रमता था। उनका ज्यादातर वक्त नर्मदा के किनारों पर उसकी चिंता और उसके लिये हरसंभव कोशिश में बीतता था। मध्य प्रदेश के लोग और नदी किनारे का समाज जानता है कि नदियाँ कैसे उनके प्राणों में बसती थी। उन्होंने भोपाल में अपने घर का नाम ही नदी का घर रख लिया था। उनके घर की दीवारों पर भी नदी के पानी की नक्काशी है। नर्मदा समग्र, नदी महोत्सव, सिंहस्थ में वैचारिकी कुंभ और बीते दिनों नर्मदा पर राष्ट्रीय मंथन जैसे महत्त्वपूर्ण आयोजनों में उनकी भूमिका सबके सामने है।

बागमती पर तटबंध को लेकर सरकार ने बनायी कमेटी


पत्र बागमती नदी पर तटबंध बनाये जाने के खिलाफ लगातार चले आंदोलन व मीडिया में छपी खबरों को गंभीरता से लेते हुए बिहार सरकार ने आखिरकार रिव्यू कमेटी (समीक्षा समिति) बनाने की घोषणा कर दी। 27 अप्रैल को बिहार के जल संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव ने अधिसूचना जारी कर कमेटी बनाने की घोषणा की।

वायु प्रदूषण से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा

Source: 
दैनिक जागरण, 30 अप्रैल 2017

वायु प्रदूषण लंदन प्रेट्र - प्रदूषित वायु में पाए जाने वाले बारीक़ कण फेफड़े के जरिये रक्त में पहुँच रहे हैं। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। एक ताजे अध्ययन में इस बाबत आगाह किया गया है। प्रदूषित वायु में पाए जाने वाले नैनो पार्टिकल्स यानि बारीक़ कणों के चलते दिल सम्बन्धी बीमारियों की आशंका ज्यादा बनी रहती है। जिससे समय पूर्व मौत का खतरा हमेशा बना रहता है। हालाँकि अब भी यह रहस्य बना हुआ है कि हवा के जरिये फेफड़े में पहुँचने वाले ये नैनो कण रक्त धमनियों और दिल को कैसे प्रभावित करते हैं।

ब्रिटेन में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय और नीदरलैंड के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक हेल्थ एवं एनवायरन्मेंट के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया कि साँस के जरिये फेफड़ों में पहुँचने वाले ये नैनो पार्टिकल्स रक्त धमनियों तक पहुँच सकते हैं। वैज्ञानिकों ने दिल सम्बन्धी बीमारियों और वायु प्रदूषण के सम्बंधों को पुरजोर तरीके से सामने रखा।

मोजेक इण्डिया की कृषि पोषक तत्वों की खोज में अच्छी पहल

Author: 
सोनिया चोपड़ा

मोजेक इण्डिया ने सामाजिक दायित्व को ध्यान में रखकर अपनी मोजेक कम्पनी फाउंडेशन के जरिए कृषि क्षेत्र में विशेष शोध के लिये वर्ष 2015 में नई-नई प्रतिभाओं को नकद पुरस्कार एवं गोल्ड मेडल देकर सम्मानित करना शुरू किया है। जिसमें जाने-माने विशेषज्ञों की ज्यूरी विशेष शोध के विजेता चुनती है। वर्ष 2014-15 में पहला पुरस्कार डॉ. अमरप्रीत सिंह को, वर्ष 2015-16 में डॉ. विक्रांत भालेराव एवं 2016-17 का पुरस्कार डॉ. कृष्णेंदु रे को दिया गया है। कृषि क्षेत्र में उदासीनता का माहौल है। कोई भी व्यक्ति आज खुशी से कृषि को पेशे के रूप में नहीं अपनाना चाहता है। इस उदासीनता के पीछे कई कारण हैं, जैसे महंगी खाद, किसानों को समय पर कर्ज का न मिलना, वर्षाजल एवं सिंचाई की कमी तथा उर्वरकों का महंगा होना। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी यह घोषणा करते नहीं थकते कि उनकी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर देगी, लेकिन वे इस बात का जिक्र कभी नहीं करते कि आखिर किसानों की आय वे किस तरह दोगुनी करेंगे।

एक दशक बाद नसीब होगा हर घर को शुद्ध पेयजल


केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने 25,000 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ मार्च 2021 तक देश में लगभग 28000 प्रभावित बस्तियों को सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने की योजना शुरू की है। इस योजना में आर्सेनिक और फ्लोराइड पर राष्ट्रीय जल गुणवत्ता उपमिशन का शुभारम्भ किया गया है। केन्द्र सरकार की इस योजना में राज्य सरकारों की भी भागीदारी होगी।

नदियों की योजना भौगोलिक स्थिति के अनुकूल बने - कर्मकार

Author: 
कुमार कृष्णन

दामोदर और उसकी सहायक नदियों के अस्तित्व पर चर्चादामोदर और उसकी सहायक नदियों के अस्तित्व पर चर्चाधनबाद। पश्चिम बंगाल के जाने-माने नदी वैज्ञानिक सुप्रतीम कर्मकार ने कहा कि नदियों के सन्दर्भ में योजना वहाँ की भौगोलिक परिस्थिति को समझकर करना चाहिए। वे आज धनबाद के गाँधी सेवा सदन में छोटानागपुर किसान विकास संघ के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे। दामोदर और उनकी सहायक नदियों को बचाने को लेकर संगोष्ठी थी। उन्होंने कहा कि नदी को कैसे बचाएँ, इसके संरक्षण के लिये कोई विभाग नहीं है, जबकि भारत नदी प्रधान देश है। हमारे देश में योजना पश्चिमी देशों के नकल के तर्ज पर क्रियान्वित की जाती है। यूरोप से सिर्फ अलग नहीं बल्कि एक राज्य से दूसरे राज्य का भूमि वैशिष्ट अलग है।

समारोह में अपरिहार्य कारणों से गंगा मुक्ति आन्दोलन के प्रमुख अनिल प्रकाश उपस्थित नहीं हो पाये, लेकिन उन्होंने अपना संदेश संगोष्ठी में फोन के माध्यम से दिया। अपने सन्देश में उन्होंने कहा कि दामोदर के सवाल पर हो रहे आन्दोलन को देशव्यापी बनाए जाने की आवश्यकता है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए अशोक भारत ने कहा कि पूरे देश में पानी और नदी के सवाल पर आन्दोलन हो रहे हैं। उन्होंने घनबाद के समीप के खुदिया नदी के अस्तित्व पर गहराते संकट की चर्चा की। साथ ही दामोदर से जुड़े आन्दोलनकारियों को सुझाव दिया कि वे सूचना के अधिकार के तहत जानकारी माँगे कि 10.22 करोड़ रुपए की उस राशि का क्या हुआ जो दामोदर नदी की सफाई के लिये मिले थे।