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पैरों से नियंत्रित होने वाला नल बचाएगा पानी

Author: 
रणवीर ठाकुर
Source: 
दैनिक जागरण, 10 सितम्बर 2017

बाथरूम और किचन में इस्तेमाल होने वाले साधारण नलों से पानी की बहुत बर्बादी होती है। इस समस्या का समाधान निकालने के लिये सेंसर और लेजर तकनीक से नियंत्रित होने वाले नल (टैब) बनाए जा चुके हैं, लेकिन इनकी कीमत अधिक है। हिमाचल प्रदेश स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर के एक छात्र ने इसका सस्ता और सरल समाधान निकाला है। पैरों से नियंत्रित किया जा सकने वाला यह नल (फुट टैब) न सिर्फ पानी बचाएगा बल्कि संक्रमण से भी बचाव करेगा।

अभियांत्रिकी विभाग के तृतीय वर्ष के छात्र प्रशांत वर्मा ने 2016 में इस नल पर शोध शुरू किया था। उनका कहना है कि बाथरूम में हाथ-मुँह धोने, शेव या ब्रश करते वक्त नल को बार-बार खोलना-बंद करना मुश्किल होता है। कई बार बाल्टी में पानी भरते वक्त भी नल खुला ही रह जाता है। इससे बहुत पानी बर्बाद होता है। यही नहीं, एक ही टोंटी को अलग-अलग लोगों के द्वारा छूने से संक्रमण का भी खतरा बना रहता है। यह नल जितनी जरूरत बस उतना ही पानी देगा।

ऐसे करता है काम


टोंटी की जगह इसे पंप से नियंत्रित किया जाएगा। दरअसल, टँकी से आने वाले पाइप और नल के बीच पैरों से नियंत्रित होने वाला इलैक्ट्रिक पंप जोड़ा गया है। पैडल दबाने पर पंप पानी को खींचता है। इस तरह जितने पानी की जरूरत होगी, उतनी देर पैडल दबाए रखने पर ही पानी निकलेगा। पैर हटाते ही पानी की सप्लाई बंद हो जाएगी। गंदे पानी को बाहर निकालने के लिये भी पाइप लगाया गया है, ताकि इस्तेमाल किये जा चुके पानी को गमलों या क्यारियों में पहुँचाया जा सके।

सस्ता और टिकाऊ


प्रशांत बताते हैं कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर बुनियादी काम कर लिया है, लेकिन इसमें कुछ और बदलाव किये जाने हैं। लोग इस नल को बाथरूम, हॉस्टलों या होटलों में स्थापित कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि पैर से चलने वाले इस नल की कीमत मात्र 300 रुपये है। इसे शीघ्र ही बाजार में उतारा जाएगा।

प्रधान व ग्रामीणों ने समझी जल संरक्षण व तालाबों की महत्ता

Author: 
जीतेन्द्र कुमार गुप्ता

. जिलाधिकारी उरई (जालौन) ने कदौरा ब्लॉक के ग्राम अकबरपुर इटौरा में जल संरक्षण पर कराए गए कार्यों का लोकार्पण और विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अच्छा काम करने वालों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। गाँव के ऐतिहासिक तालाब (गुरु रोपण का तालाब) जो मुगल बादशाह अकबर द्वारा बनवाया गया था व अन्य तालाबों की महत्ता समझते हुए उनके पुनरुद्धार के लिये अागे आये, वहाँ के वर्तमान प्रधान अमित द्विवेदी इतिहास। जिनके द्वारा तालाबों की सफाई, मरम्मत एवं स्वच्छता की एक मुहिम चलाई गई जिसे कुछ दिक्कतों के बाद खूब जनसमर्थन मिला।

ग्रामीणों को जागरूक कर कराया मुगलकालीन ऐतिहासिक गुरू रोपण तालाब का पुनरुद्धार, कायम की स्वच्छता की मिसाल


वर्तमान प्रधान अमित द्विवेदी जल संरक्षण के महत्त्व को समझते हुए आगे आये तथा प्रधान होने के नाते कुछ सरकारी योजनाओं की मदद लेकर व कुछ लोगों को जागरुक कर जनसमर्थन के साथ तालाबों के कायाकल्प में जुट गये। सबसे पहले उन्होंने मुगलकालीन ऐतिहासिक गुरु रोपण का तालाब की सफाई कराई व उसकी मरम्मत कराई, जिसमें नहर के माध्यम से पानी भरा गया। उनके इस काम को कुछ दिक्कतों के बाद अपार जनसमर्थन मिला। इसके बाद उन्होंने कुछ कुओं की हालत सुधरवाकर उन्हें मॉडल कुओं के रूप में बनाया है। उनके इस काम को जिले के डीएम ने भी सराहा व सम्मानित भी किया गया।

विकास कार्यों में सहयोग करने वालों को सम्मानित किया गया

पर्यावरण के मोर्चों पर गांधी जन

Author: 
कुमार कृष्णन

. भागलपुर स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान केन्द्र ने छात्र-छात्राओं को महात्मा गांधी के नजरिये से पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण मुक्ति का पाठ पढ़ाया। दस दिनों की कार्यशाला में दर्जनों गांधीजनों और विशेषज्ञों ने पर्यावरण की समस्याओं के विभिन्न पहलूओं की गहरी जानकारी दी और यह यकीन दिलाया कि मौजूदा प्रदूषण से मुक्ति के उपाय गांधी जी के दर्शन और विचारों में निहित है।

दस दिनों की कार्यशाला के समापन समारोह को संबोधित करते हुए बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डाॅ. फारूक अली ने कहा कि दुनिया भर में बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग को मानव सहित संसार की सभी प्रजातियों के लिये भयावह बताते हुए कहा कि हम अभी भी चेत नहीं रहे हैं और विनाश को करीब लाने वाले तथाकथित विकास के भ्रम में डूबे हुए हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिये जनाआंदोलन की आवश्यकता बतायी। उन्होंने गांधी के सिद्धांतों को ही मौजूदा पर्यावरण समस्याओं से मुक्ति का उपाय बताया।

समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए गांधी शांति प्रतिष्ठान केन्द्र भागलपुर के अध्यक्ष रामशरण ने कहा कि इस केन्द्र से इस तरह की कार्यशाला का आयोजन पहली बार किया गया। इसमें भाग लेने वाले छात्र, युवा और शोधार्थी निश्चित रूप से लाभान्वित हुए होंगे। उन्होंने कार्यशाला के आयोजक टीम को सलाह दी कि आने वाले समय में किसान, दलित और महिला सहित विभिन्न जनसरोकार के मुद्दे पर अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने युवाओं से कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से उनके शिक्षण का काम किया गया है। अब अपने कार्यकलापों के जरिए रचना और संघर्ष का काम करें। प्रयास भले ही छोटा हो, लेकिन ठोस हो।

नर्मदा से सरदार सरोवर तक विस्थापन का बढ़ता दर्द

Author: 
देवदत्त दुबे
Source: 
नया इंडिया, 07 अगस्त, 2017

जाहिर है कि एक तरफ से सरकार की हीलाहवाली और अब गुजरात का दबाव न केवल बाँध को खतरे के निशान पर ले जा रहा है तो दूसरी ओर विस्थापितों को पुनर्वास स्थल पर पर्याप्त सुविधाएँ न मिलने एवं अधिकतम मुआवजे का मोह पर मेधा पाटकर का साथ सरकार की मुश्किलें तो बढ़ा ही रहा है। ऐसे में एक बार विकास की परिभाषा पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं तो विस्थापितों का मौन उपवास अब चिखल्दा गाँव में चीखें मारने लगा है।

मानव के जीवन मरण का सवाल है पर्यावरण संरक्षण

Author: 
कुमार कृष्णन

पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. एस.पी.राय ने कहा कि इस जीवमंडल में मनुष्य के साथ—साथ अन्य जीव, पौधे और जंतुओं को जीने का उतना ही अधिकार है जितना मनुष्य को है। यदि अब भी प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठाते हैं या प्राकृतिक संसाधनों का अतिदोहन बंद नहीं करते हैं तो मानव जाति का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

बिहार राज्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण मंच 2017 का उद्घाटन

Author: 
कुमार कृष्णन

वज्रपात की पूर्व जानकारी की तकनीक जल्द लाएँ, खर्च मुख्यमंत्री राहत कोष उठाएगा:- मुख्यमंत्री

बिहार बाढ़ और सुखाड़ दोनों से प्रभावित होता है। यहाँ वर्षा कम हो फिर भी राज्य से जुड़े अन्य क्षेत्रों में हो रही वर्षा से बिहार प्रभावित होता है। अगर नेपाल में भारी वर्षा हुई तो नेपाल से निकलने वाली नदियों के पानी में उफान आएगा। अगर मध्य प्रदेश एवं झारखण्ड में अधिक वर्षा हुई तो दक्षिण बिहार में बाढ़ की स्थिति बन जाएगी। अगर उत्तराखण्ड में अधिक वर्षा हुई तो गंगा के पानी में उफान आ सकता है। उन्होंने कहा कि हमें बाढ़ और सुखाड़ दोनोें से लड़ने के लिये हर वर्ष तैयार रहना पड़ता है।

छात्रों को विज्ञान से जोड़ने के लिये सीएसआईआर की नई पहल

Author: 
उमाशंकर मिश्र
Source: 
इंडिया साइंस वायर, 6 जुलाई, 2017

नई दिल्ली, 6 जुलाई (इंडिया साइंस वायर) : वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने स्‍कूली छात्रों को विज्ञान और वैज्ञानिकों के करीब लाने के लिये केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के साथ मिलकर ‘जिज्ञासा’ नामक एक नया कार्यक्रम शुरू किया है।

इस कार्यक्रम का मकसद छात्रों एवं उनके अध्‍यापकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और उनमें जिज्ञासु प्रवृत्ति को प्रोत्‍साहित करना है। इस कार्यक्रम की मदद से देश भर के 1,151 केंद्रीय विद्यालयों के 1,00,000 छात्र और लगभग 1000 शिक्षकों को सीएसआईआर की 38 प्रयोगशालाओं से प्रतिवर्ष सीधे जोड़ा जा सकेगा।

उम्‍मीद की जा रही है कि इस कार्यक्रम के अन्तर्गत राष्‍ट्रीय प्रयोगशालाओं से सीधा जुड़ाव होने से कक्षा में छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सकेगा।

‘जिज्ञासा’ को खास तरीके से डिजाइन किया गया है, ताकि छात्र एवं उनके शिक्षकों का परिचय सैद्धान्तिक अवधारणाओं से जीवन्त रूप से कराया जा सके। इस कार्यक्रम के तहत सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं में जाकर उन्‍हें विज्ञान की छोटी-छोटी परियोजनाओं में शामिल होने का मौका मिल सकेगा।

पिछले कई दशक से सीएसआईआर तकनीक एवं अन्‍वेषण के क्षेत्र में महत्त्‍वपूर्ण कार्य कर रहा है। अपनी प्‍लैटिनम जुबली वर्ष के अवसर पर सीएसआईआर ने अपनी वैज्ञानिक एवं सामाजिक जिम्‍मेदारी को बढ़ावा देने के लिये यह कार्यक्रम शुरू किया है।

CSIR labs to connect with school kids


By Sunderarajan Padmanabhan

India Science Wire, July 6, 2017

New Delhi, July 6 (India Science Wire): The Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) has joined hands with Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS) to implement a student-scientist connect programme that will extend classroom learning with a well planned research laboratory-based learning.

भारतीय वैज्ञानिक को यूनेस्‍को पुरस्‍कार

Author: 
नवनीत कुमार गुप्ता
Source: 
इंडिया साइंस वायर, 27 जून, 2017

. नई दिल्‍ली, 27 जून (इंडिया साइंस वायर) : नैनो-विज्ञान एवं नैनो- प्रौद्योगिकी के विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए यूनेस्‍को ने भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा समेत विश्‍व के सात वैज्ञानिकों एवं संस्‍थानों को वर्ष 2017 के यूनेस्‍को मेडल से नवाजा है। यह पुरस्‍कार सोमवार को पेरिस स्थित यूनेस्‍को मुख्‍यालय में प्रदान किए गए।

प्रोफेसर आशुतोष शर्मा के शोधकार्य में ऊर्जा क्षेत्र में कार्बन आधारित नैनो-कम्पोजिट्स एवं माइक्रो नैनो-इलेक्ट्रोमैकेनिकल, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य, क्रियात्मक इंटरफेस, सॉफ्ट मैटर की माइक्रो एवं नैनो क्रियाविधि, नैनो-पैटर्निंग और नैनो-फैब्रीकेशन जैसे विषय शामिल रहे हैं।

प्रोफेसर आशुतोष शर्मा के अलावा इस वर्ष यह पुरस्‍कार नीदरलैंड्स के वैज्ञानिक प्रोफेसर थियो रेजिंग, अमेरिकी संस्‍थान कीसाइट टेक्‍नोलॉजी, जापानी कम्पनी टोयोडा गोसेई, कम्बोडिया के डॉ. हन मेनी, रूस के डॉ. व्लादिमीर बोल्शकोव और मास्को टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी को दिया गया है।

पिछले सात वर्षों से यह पुरस्‍कार ऐसे वैज्ञानिकों, प्रख्यात हस्तियों और संस्थानों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने नैनो-प्रौद्यागिकी एवं नैनो-विज्ञान के विकास में महत्‍वपूर्ण कार्य किया है। वर्ष 2010 में शुरू किए इस पुरस्‍कार से अब तक 37 व्यक्तियों एवं संस्थानों को नवाजा जा चुका है। यूनेस्‍को मेडल से सम्‍मानित कई वैज्ञानिकों को तो नोबेल पुरस्‍कार भी मिल चुका है।

जल संवर्द्धन की बात ना 100 दिनों और ना आने वाले दिनों में


उत्तराखण्ड सरकार के 100 दिन पूर्ण होने पर पुस्तिका का विमोचन करते मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावतउत्तराखण्ड सरकार के 100 दिन पूर्ण होने पर पुस्तिका का विमोचन करते मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावतसूचना एवं लोक सर्म्पक विभाग द्वारा आयोजित सरकार के सौ दिन पर एक विशाल सम्मेलन का आयोजन बीते 25 जून को राजधानी के विशाल मैदान परेड ग्राउंड में किया गया। इस सम्मेलन के पश्चात और पहले मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने क्रमशः देहरादून के टपकेश्वर, मुख्यमंत्री आवास कैंट रोड देहरादून और उधम सिंह नगर में सरकार के 100 दिन की सफलता का बखान किया है।

इस वक्तव्य में जिस तरह से मुख्यमंत्री श्री रावत ने सरकार की प्रशंसा विकास के कार्यों बावत की है वह तरीफे काबिल था। पर श्री रावत के वक्तव्य को सुनने पहुँचे किसान और पर्यावरण कार्यकर्ता इस बात से आश्चर्यचकित हो रहे थे कि जो राज्य प्राकृतिक संसाधनों के बलबूते विकास की कहानी बनाता है उस राज्य का जो विकास का मॉडल मुख्यमंत्री प्रस्तुत कर रहे हैं वह तो सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिये साबित हो रहा है। और-तो-और जिस प्रकृति प्रदत्त जल से लोग जीवित हैं उसके संरक्षण बावत सरकार के 100 दिन और भविष्य के दिनो में कुछ भी नजर नहीं आ रहा है।