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टाटा का 'स्वच्छ' पानी

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बीबीसी
टाटा एक नया 'वाटर प्यूरिफायर'टाटा एक नया 'वाटर प्यूरिफायर'ग्रामीण इलाक़ों को ध्यान में रखते हुए भारतीय कंपनी टाटा एक नया 'वाटर प्यूरिफायर' बाज़ार में लेकर आई है.

इस वाटर प्यूरिफायर का नाम 'स्वच्छ' रखा गया है. एक मीटर से भी कम ऊँचाई वाले इस फ़िल्टर की क़ीमत एक हज़ार रुपए से भी कम होगी.

उल्लेखनीय है कि भारत में स्वच्छ पानी की बड़ी समस्या है. ख़ासकर ग्रामीण इलाक़ों में साफ पीने के पानी की कमी की वजह से लाखों लोग डायरिया, हैजा और टायफ़ायड जैसी बीमारियों से पीड़ित होते हैं.

दिल्ली में भूजल होगा रिचार्ज

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दिल्ली और एनसीआर में घटते भूजल स्तर से चिंतित केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों में फिर से जान भरने के लिए एक नई कार्य योजना को मंजूरी दी है। शहरी विकास मंत्रालय के एनसीआर योजना बोर्ड ने दिल्ली और इसके आस पास के इलाकों में भूजल की स्थिति की समीक्षा और इसके स्तर में सुधार के लिए इस कार्य योजना को मंजूरी दी है।

सूत्रों के मुताबिक उन जगहों की पहचान पहले ही कर ली गई है जहां संबधित राज्य सरकारें भूमिगत जल में सुधार कर सकती हैं। इसके लिए काम भी शुरू कर दिया गया है।

एनसीआर योजना बोर्ड की हाल ही में हुई बैठक में यह मुद्दा उठा जिसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, हरियाणा के भूपिंदर सिंह हुड्डा और उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के मंत्री भी शामिल हुए थे।
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दिल्ली, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में तेजी से गिर रहा है भूजल स्तर

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स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. जल संसाधन राज्य मंत्री वींसेंट एच.पाला ने कहा है कि वैज्ञानिक पत्रिका 'नेचर' के अंक में प्रकाशित राष्ट्रीय विमान-विज्ञान एवं अंतरिक्ष प्रशासन (एनएएसए) और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, संयुक्त राज्य अमेरिका के वैज्ञानिकों के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि भारत में राजस्थान, पंजाब और हरियाणा (दिल्ली सहित) में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।

आज लोकसभा में एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि सरकार ने देश में भूमिगत जल स्तर को बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं, मसलन

  • 0 सीजीडब्ल्यूबी द्वारा देश में प्रदर्शनात्मक कृत्रिम पुनर्भरण परियोजनाओं का कार्यान्वयन।

राजभवन में जल संरक्षण के उपायों पर हुई चर्चा

जयपुर। जल के संग्रहण, संरक्षण और कुशलतम उपयोग के लिए लोगों द्वारा प्रयोग में लिए जाने वाले उपायों पर राजभवन में बुधवार, चार नवम्बर को चर्चा हुई। यह कार्यशाला राज्यपाल श्री एस.के.सिंह की परिकल्पना एवं पहल पर आयोजित हुई थी। राज्य की प्रथम महिला श्रीमती मंजू सिंह, पूर्व विधायक श्री खुशवीर सिंह, राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति डॉ. प्रताप नारायण, मैग्सेसे अवार्डी श्री राजेन्द्र सिंह, जल संसाधन के प्रमुख सचिव श्री राम लुभाया, केन्द्रीय भू-जल बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक श्री आर.पी. माथुर, जल संरक्षण क्षेत्र में सक्रिय श्री राकेश अजमेरा, समाज सेवी श्री लक्ष्मण सिंह, सेवानिवृत्त एयर कोमोडोर श्री एन.के.माथुर और प्रो.

गूगल अर्थ बनाएगा नदियों की विलुप्त सीमाओं का नक्शा

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गूगल अर्थ हजारों मील लंबी नदियों की विलुप्त सीमा को मापने में वैज्ञानिको का सहायक बनने वाला है।गूगल अर्थ हजारों मील लंबी नदियों की विलुप्त सीमा को मापने में वैज्ञानिको का सहायक बनने वाला है।गूगल अर्थ उन वैज्ञानिकों के लिये सुविधाजनक हो गया है जो नदियों की हजारों मील लंबी विलुप्त सीमा को मापने के लिये इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। यह भविष्य में कई अंतरराष्ट्रीय विवादों का निबटारा करने में मदद पहुंचायेगा।

सुरक्षा कवच को चाहिए सुरक्षा

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Ruhe Sana Hasan, Sept 13, 2009
1980 में ओज़ोन का छेद 3.27 मीलियन स्कवेयर किमी में फैला था, जो 2007 में बढ़कर 25.02 मीलियन स्कवेयर किमी हो गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर इसी तेज़ी से ओज़ोन नष्ट होती रही, तो 2054 तक धरती के आस-पास से ओज़ोन का सुरक्षा कवच समाप्त हो जाएगा..
धरती खतरे में
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आंध्रप्रदेश में जलापूर्ति की स्थिति

आंध्र प्रदेश में जीएचएमसी, विजयवाडा और विशाखापत्तनम को छोड़कर वहाँ की 121 नगर पालिकाओं और शहरी स्थानीय निकायों में से केवल 24 में लोगों को रोजाना प्रति व्यक्ति 100 लीटर से अधिक पानी मिल रहा है। पानी की आपूर्ति का आदर्श स्तर 150 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन है, इसमें 100 लीटर पीने, पाक कला, नहाने और कपड़े धोने के लिए और 50 शौचालय आदि उपयोग के लिए।

अगर हम 135-150 लीटर की रेंज लें तो इससे ऊपर सिर्फ राजामुंदरी (181), नरसारॉवपेट (140) और तिरुपति (135) में आपूर्ति हो रही है, जबकि कुड्डापाह (132) और निजामाबाद (131) इस सीमा के काफी नजदीक हैं। कुछ स्थानों पर जहां पानी की आपूर्ति कम है वे रिपल्ले, तेनाली, पिडुगुरल्ला, कांदुकर, मारकापुर और नेल्लौर हैं।

जल संरक्षण के लिए एक करोड़ पाएं

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भास्कर न्यूज March 19, 2009
जोधपुर. जल संरक्षण एवं प्रबंधन से संबंधित कार्यों तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गैर सरकारी संगठन और स्वैच्छिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी ली जाएगी। संस्थाओं को एक करोड़ रुपए तक मिल सकेंगे।

जल क्षेत्र से संबंधित गतिविधियों और परियोजनाओं में गैर सरकारी संगठनों एवं स्वैच्छिक संस्थाओं की भागीदारी के संबंध में राज्य सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार जिलों के कलेक्टर राजस्थान कम्युनिटी एंड बिजनेस एलाइंस बॉल वाटर के तहत जल संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए अपने जिलों में योजनाबद्ध ढंग से कार्य करेंगे। एनजीओ को एक करोड़ रुपए तक की परियोजनाओं की स्वीकृति शिथिलता समिति की सिफारिश पर राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी।

उज्जैन के सामने फिर जल संकट ?

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भास्कर संवाददाता , August 21, 2009
उज्जैन. जलसंकट से मुक्त हुए अभी ज्यादा समय नहीं बीता है। पानी के लिए कितनी परेशानियां उठानी पड़ी इसे नागरिक भूले नहीं होंगे। पार्षदों ने अपने मतदाताओं को तकलीफों से बचाने के लिए कितने जतन किए और प्रशासन तथा नगर निगम अधिकारियों कर्मचारियों को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, इसका अहसास भी उन्हें होगा।

फिर क्या कारण है कि उज्जैन का टैंक ‘गंभीर डेम’ में तेजी से पानी कम होने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। पानी का अपव्यय और नुकसान रोकने के प्रति विभाग सचेत नहीं हो रहा। यदि यही ढर्रा रहा तो जल्दी ही गंभीर की झोली पानी से खाली हो जाएगी और शहर एक बार फिर गर्मी आते-आते जलसंकट के मुहाने पर खड़ा होगा। शहर में प्रतिदिन जलप्रदाय किया जा रहा है।
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भास्कर