Latest

वायु प्रदूषण से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा

Source: 
दैनिक जागरण, 30 अप्रैल 2017

वायु प्रदूषण लंदन प्रेट्र - प्रदूषित वायु में पाए जाने वाले बारीक़ कण फेफड़े के जरिये रक्त में पहुँच रहे हैं। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। एक ताजे अध्ययन में इस बाबत आगाह किया गया है। प्रदूषित वायु में पाए जाने वाले नैनो पार्टिकल्स यानि बारीक़ कणों के चलते दिल सम्बन्धी बीमारियों की आशंका ज्यादा बनी रहती है। जिससे समय पूर्व मौत का खतरा हमेशा बना रहता है। हालाँकि अब भी यह रहस्य बना हुआ है कि हवा के जरिये फेफड़े में पहुँचने वाले ये नैनो कण रक्त धमनियों और दिल को कैसे प्रभावित करते हैं।

ब्रिटेन में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय और नीदरलैंड के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक हेल्थ एवं एनवायरन्मेंट के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया कि साँस के जरिये फेफड़ों में पहुँचने वाले ये नैनो पार्टिकल्स रक्त धमनियों तक पहुँच सकते हैं। वैज्ञानिकों ने दिल सम्बन्धी बीमारियों और वायु प्रदूषण के सम्बंधों को पुरजोर तरीके से सामने रखा।

मोजेक इण्डिया की कृषि पोषक तत्वों की खोज में अच्छी पहल

Author: 
सोनिया चोपड़ा

मोजेक इण्डिया ने सामाजिक दायित्व को ध्यान में रखकर अपनी मोजेक कम्पनी फाउंडेशन के जरिए कृषि क्षेत्र में विशेष शोध के लिये वर्ष 2015 में नई-नई प्रतिभाओं को नकद पुरस्कार एवं गोल्ड मेडल देकर सम्मानित करना शुरू किया है। जिसमें जाने-माने विशेषज्ञों की ज्यूरी विशेष शोध के विजेता चुनती है। वर्ष 2014-15 में पहला पुरस्कार डॉ. अमरप्रीत सिंह को, वर्ष 2015-16 में डॉ. विक्रांत भालेराव एवं 2016-17 का पुरस्कार डॉ. कृष्णेंदु रे को दिया गया है। कृषि क्षेत्र में उदासीनता का माहौल है। कोई भी व्यक्ति आज खुशी से कृषि को पेशे के रूप में नहीं अपनाना चाहता है। इस उदासीनता के पीछे कई कारण हैं, जैसे महंगी खाद, किसानों को समय पर कर्ज का न मिलना, वर्षाजल एवं सिंचाई की कमी तथा उर्वरकों का महंगा होना। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी यह घोषणा करते नहीं थकते कि उनकी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर देगी, लेकिन वे इस बात का जिक्र कभी नहीं करते कि आखिर किसानों की आय वे किस तरह दोगुनी करेंगे।

एक दशक बाद नसीब होगा हर घर को शुद्ध पेयजल


केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने 25,000 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ मार्च 2021 तक देश में लगभग 28000 प्रभावित बस्तियों को सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने की योजना शुरू की है। इस योजना में आर्सेनिक और फ्लोराइड पर राष्ट्रीय जल गुणवत्ता उपमिशन का शुभारम्भ किया गया है। केन्द्र सरकार की इस योजना में राज्य सरकारों की भी भागीदारी होगी।

नदियों की योजना भौगोलिक स्थिति के अनुकूल बने - कर्मकार

Author: 
कुमार कृष्णन

दामोदर और उसकी सहायक नदियों के अस्तित्व पर चर्चादामोदर और उसकी सहायक नदियों के अस्तित्व पर चर्चाधनबाद। पश्चिम बंगाल के जाने-माने नदी वैज्ञानिक सुप्रतीम कर्मकार ने कहा कि नदियों के सन्दर्भ में योजना वहाँ की भौगोलिक परिस्थिति को समझकर करना चाहिए। वे आज धनबाद के गाँधी सेवा सदन में छोटानागपुर किसान विकास संघ के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे। दामोदर और उनकी सहायक नदियों को बचाने को लेकर संगोष्ठी थी। उन्होंने कहा कि नदी को कैसे बचाएँ, इसके संरक्षण के लिये कोई विभाग नहीं है, जबकि भारत नदी प्रधान देश है। हमारे देश में योजना पश्चिमी देशों के नकल के तर्ज पर क्रियान्वित की जाती है। यूरोप से सिर्फ अलग नहीं बल्कि एक राज्य से दूसरे राज्य का भूमि वैशिष्ट अलग है।

समारोह में अपरिहार्य कारणों से गंगा मुक्ति आन्दोलन के प्रमुख अनिल प्रकाश उपस्थित नहीं हो पाये, लेकिन उन्होंने अपना संदेश संगोष्ठी में फोन के माध्यम से दिया। अपने सन्देश में उन्होंने कहा कि दामोदर के सवाल पर हो रहे आन्दोलन को देशव्यापी बनाए जाने की आवश्यकता है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए अशोक भारत ने कहा कि पूरे देश में पानी और नदी के सवाल पर आन्दोलन हो रहे हैं। उन्होंने घनबाद के समीप के खुदिया नदी के अस्तित्व पर गहराते संकट की चर्चा की। साथ ही दामोदर से जुड़े आन्दोलनकारियों को सुझाव दिया कि वे सूचना के अधिकार के तहत जानकारी माँगे कि 10.22 करोड़ रुपए की उस राशि का क्या हुआ जो दामोदर नदी की सफाई के लिये मिले थे।

उत्तराखण्ड वनाग्नि संकट से जूझता हिमालय

Author: 
सुशील कुमार

हिमालय सेवा संघ और एक्शन एड द्वारा नागरिक रिपोर्ट का विमोचनहिमालय सेवा संघ और एक्शन एड द्वारा नागरिक रिपोर्ट का विमोचननई दिल्ली स्थित इण्डियन वुमन प्रेस कार्प में उत्तराखण्ड वनाग्नि वर्ष 2016 एक नागरिक रिपोर्ट का विमोचन किया गया। हिमालय सेवा संघ तथा एक्शन एड इण्डिया संस्था द्वारा आयोजित इस वार्ता में उत्तराखण्ड के जंगलों में लगने वाली आग के कारण तथा निदान पर चर्चा की गई।

हिमालय सेवा संघ से जुड़े मनोज पांडे ने इस रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए उत्तराखण्ड के जंगलों में लगने वाली आग को एक सोची समझी साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बारे में गहन पड़ताल करवानी चाहिए कि उत्तराखण्ड के जंगलों में पिछले कुछ वर्षों से एक खास मौसम में कैसे आग लगती है। यह आग सिर्फ हिमालय के लोगों की चिन्ता का विषय नहीं है बल्कि इस बारे में देश के हर नागरिक को सोचना चाहिए।

यह नागरिक रिपोर्ट उत्तराखण्ड के निवासियों के साथ बातचीत पर आधारित है। इसमें आग को रोकने के लिये उनके सुझावों को भी शामिल किया गया है। नागरिक रिपोर्ट में उन कारणों की भी पड़ताल की गई है, जिन नीतियों तथा कार्यक्रमों के कारण वनवासी को अपने जल, जंगल और जमीन के सन्दर्भों से अलग किया गया है। मालूम हो कि पिछले वर्ष उत्तराखण्ड के जंगलों की आग की वजह से कई स्थानीय निवासियों के आग में झुलस जाने की वजह से मौत हो गई थी। साथ ही कई महत्त्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ तथा जंगली जीव जल कर स्वाहा हो गई थीं।

जल क्रान्ति के लिये जन भागीदारी जरूरी - उमा भारती

Author: 
सुशील कुमार

केन्द्रीय जल संसाधन एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारतीकेन्द्रीय जल संसाधन एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारतीकेन्द्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने जल क्रान्ति योजना के तहत जल की कमी की समस्या से जूझ रहे हर जिले के दो गाँवों में जल संरक्षण का मॉडल विकसित करने के लिये जन भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की दिशा में जल क्रान्ति एक महत्त्वपूर्ण अभियान है, लेकिन यह अभियान आम लोगों की भागीदारी के बिना सम्भव नहीं है।

सुश्री भारती ने जल क्रान्ति अभियान से सम्बन्धित एक संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि जल संरक्षण के महत्त्व को लोगों को समझना होगा और यह कार्य मॉडल गाँव के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है। लोग जब मॉडल गाँवों को देखेंगे तो उन्हें सीख मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में केन्द्र, राज्यों और गैर सरकारी संगठनों को मिलकर प्रयास करना होगा।

इस संगोष्ठी में देश के दूर-दराज के गाँवों से आये किसानों तथा जल संरक्षण पर कार्य कर रहे स्यंवसेवी संगठनों ने भी अपने विचार रखे। जल संरक्षण की दिशा में बेहतरीन कार्य के लिये अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले लापोड़िया गाँव के किसान लक्ष्मण सिंह ने दूसरे गाँवों के किसानों को लापोड़िया के अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने बताया कि उनके गाँव के किसानों ने आपसी सहयोग के माध्यम से गाँव में 1000 से अधिक पीपल के पेड़ लगाए हैं। जिससे उनके यहाँ बारहों महीने छाया रहती है तथा गोचर हरे-भरे रहते हैं। इसी तरह दूसरे गाँवों के किसानों तथा विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने भी जल संरक्षण और पर्यावरण की देखरेख में अपने पूरे सहयोग का भरोसा जताया।

भाजपा विधायक पटेल ने अपनी ही सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

Source: 
राजस्थान पत्रिका, 20 फरवरी, 2017

विधायक पटेल ने बताया कि यह आंदोलन किसानों का है। सत्ता पक्ष का विधायक होने के बाद भी अपने क्षेत्र के किसानों के हित में लड़ाई लड़ रहा हूँ। आन्दोलन के दूसरे चरण सभी प्रभावित 12 गाँवों के किसान पोस्ट कार्ड के जरिये प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे।

भूजल आधारित पावर प्लांट का जोरदार विरोध - जान देंगे पर जमीन नहीं

Author: 
अमरनाथ

परियोजना में 800 मेगावाट के दो संयंत्र लगाए जाएँगे। जिसमें प्रतिदिन 20 हजार टन कोयला और 16 करोड़ लीटर पानी की खपत होगी। अभी इलाके से प्रवाहित चीर नदी से 10 करोड़ लीटर पानी लेने की बात है, बाकी पानी भूगर्भ से निकाला जाएगा। पर चीर नदी बरसात को छोड़कर सूखी रहती है। अर्थात बाकी दिनों में पावर प्लांट की जरूरत का पूरा पानी भूगर्भ से निकाला जाएगा। इसका असर आसपास के भूजल भण्डार पर होगा। पहले से जलाभाव का शिकार बना इलाका जलसंकट में घिर जाएगा।

स्वच्छता पखवाड़ा लेखा-जोखा

Source: 
कुरुक्षेत्र, दिसंबर 2016

कृषि और कृषक कल्याण मंत्रालय में लगेंगे कचरा प्रबंधन संयंत्र

स्वच्छता पखवाड़ा लेखा-जोखा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशों के अनुरूप कृषि और कृषक कल्याण मंत्रालय के सभी तीन विभागों ने इस साल 16 से 31 अक्टूबर तक स्वच्छता पखवाड़ा मनाया। कृषि, सहकारिता और कृषक कल्याण विभाग, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र विभाग (डीएडीएफ) तथा कृषि अनुसंधान और शिक्षण विभाग ने कार्यालय परिसरों से बाहर निकल कर कृषि मंडियों, मछली बाजारों तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों के नजदीक के गाँवों में स्वच्छता अभियान चलाया। पखवाड़े के दौरान ऐसे कदमों पर ध्यान केन्द्रित किया गया जो इसके खत्म होने के बाद भी जारी रखे जाएँगे। केंद्रीय कृषि और कृषक कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने हाल ही में मीडिया को स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान अपने मंत्रालय की पहलकदमियों और उनके नतीजों के बारे में जानकारी दी।