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पेयजल की गुणवत्ता हेतु डब्लूएचओ के दिशानिर्देश (तीसरा संस्करण)

गाइडलाइन्सगाइडलाइन्सविभिन्न विकसित और विकासशील देशों द्वारा पीने के पानी हेतु डब्लूएचओ के दिशानिर्देशों (पहले और दूसरे संस्करण) का उपयोग, विभिन्न प्रकार के नियमों और मानक तय करने के लिये किया जा रहा है। और अब तो बड़ी संख्या में रासायनिक खतरों को देखते हुए जल की माइक्रोबियल सुरक्षा और दिशानिर्देशों का सही पालन करना बहुत ही आवश्यक हो चला है। हाल ही में जारी डब्लूएचओ के दिशानिर्देशों के तीसरे संस्करण में तेज विकास से सम्बन्धित खतरों और उनके प्रबन्धन हेतु दूसरे संस्करण के बाद से क्या तकनीकी सुविधायें नयी जोड़ी गयी हैं, इसका भी उल्लेख किया गया है। यह संस्करण जल सम्बन्धी विभिन्न हितधारकों, राष्ट्रीय नीतिनिर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, समुदायों और स्वतन्त्र निगरानी संस्थाओं के लिये एक "सुरक्षित पेयजल डाटा का एक फ़्रेमवर्क" प्रस्तुत करता है।

उत्तर प्रदेश में भूगर्भ जल स्तर की स्थिति

प्रदेश के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में स्थपित 5795 हाइड्रोग्राफ स्टेशन (निरीक्षण कूप एवं पीजोमीटर) पर प्रत्येक वर्ष प्री एवं पोस्ट मानसून सहित कुल 6 बार जल स्तर मापन का कार्य किया जाता है। प्रदेश में विभिन्न स्थलों पर जल स्तर में सामान्यत काफी भिन्नता पायी गयी है और यह जलस्तर 2 मी० से 30 मी० अथवा अधिक गहराई पर भूतल से नीचे निरीक्षित किया जाता रहा है। केन्द्रीय और पूर्वी क्षेत्रों मे जलस्तर में काफी भिन्नता दृष्टिगोचर होती है। शारदा सहायक कैनाल कमांड क्षेत्र में जलस्तर 2 मी० से भी कम निरीक्षित किया गया है जबकि गंगा के किनारे प्राकृतिक तटबंधी वाले क्षेत्रों में जलस्तर 20 मी० गहराई पर पाया गया है। सबसे अधिक गहराई वाला जलस्तर बेतवा और यमुना नदी की घाटियों में पाया गया है जिनमें आगरा, इट

भारत का जल संसाधन

संपादक- मिथिलेश वामनकर/ विजय मित्रा
क्या आप सोचते हैं कि जो कुछ वर्तमान में है, ऐसा ही रहेगा या भविष्य कुछ पक्षों में अलग होने जा रहा है? कुछ निश्चितता के साथ यह कहा जा सकता है कि समाज जनांकिकीय परिवर्तन, जनसंख्या का भौगोलिक स्थानांतरण, प्रौद्योगिक उन्नति, पर्यावरणीय निम्नीकरण, और जल अभाव का साक्षी होगा। जल अभाव संभवत: इसकी बढ़ती हुई माँग, अति उपयोग तथा प्रदूषण के कारण घटती आपूर्ति के आधार पर सबसे बड़ी चुनौती है। जल एक चक्रीय संसाधन है

बड़े बाँधों का लेखा-जोखा रखने वाला राष्ट्रीय रजिस्टर (2009)

Source: 
केन्द्रीय जल आयोग
भारत के सभी बड़े बाँधों का रिकॉर्ड रखने वाला यह नेशनल डैम रजिस्टर, भारत में स्थित सभी 5100 बड़े बाँधों का डाटा समाये हुए है। यह रजिस्टर जनवरी 2009 तक कार्य पूर्ण हो चुके 4710 बाँधों तथा निर्माणाधीन 390 बाँधों का समस्त डाटा रखता है।

मध्यप्रदेश में पेयजल

वेब/संगठन: 
mediaforrights
Source: 
सचिन कुमार जैन
1 - इन्दौर शहर में वर्ष 2006 की गर्मियों में पानी की आपूर्ति के लिये किराये पर लिये गये टेंकरों के एवज में 2 करोड़ रूपये की राशि चुकाई गई थी। नगर निगम ने वर्ष 2007 में अपने 37 टैंकरों के अलावा 130 टैंकर किराये पर लिये थे। इस साल इतनी शिकायतें आईं कि नगर निगम प्रशासन दबाव में आ गया। इसके बावजूद जल संकट दूर नहीं हुआ और 14 मई 2007 को इन्दौर में राजनैतिक दलों और आम लोगों ने प्रशासन का उग्र विरोध किया और लोगों को पानी के बजाये लाठियां मिलीं।

2 - 2 मई 2007 को टीकमगढ़ जिले के गोटेरंगा गांव में पानी को लेकर हुये एक सशस्त्र संघर्ष में 10 लोग घायल हो गये। यह संघर्ष बन्नीलाल यादव और मनीराम यादव के बीच कुयें पर शुरू हुआ।

भारत में जल संसाधन

जल संसाधनजल संसाधनदेश में सतही और उप-सतही स्रोतों से जल की उपलब्धता का समुचित मूल्यांकन उचित आयोजना, विकास और प्रबंधन का आधार है । जल संसाधनों की आयोजना, विकास और प्रबंधन को बहु-क्षेत्रीय, बहु-विभागीय और भागीदारीपूर्ण दृष्टिकोण के साथ ही राष्ट्रीय जल नीति, 2002 के अनुसार समन्वित गुणवत्ता, संख्या और पर्यावरण संबंधी पहलुओं पर आधारित एक जलविज्ञान इकाई के आधार पर किया जाना चाहिए ।

भारत में परिवारों की सुरक्षित पेयजल तक पहुंच

.भारत के पास विश्व की समस्त भूमि का केवल 2.4 प्रतिशत भाग ही है जबकि विश्व की जनसंख्या का 16.7 प्रतिशत जनसंख्या भारत वर्ष में निवास करती है। जनसंख्या में वृद्धि होने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों पर और भार बढ़ रहा है। जनसंख्या दबाव के कारण कृषि के लिए व्यक्ति को भूमि कम उपलब्ध होगी जिससे खाद्यान्न, पेयजल की उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, लोग वांचित होते जा रहे हैं आईये देखें - भारत में परिवारों की सुरक्षित पेयजल तक पहुंच