भारत का जल संसाधन

संपादक- मिथिलेश वामनकर/ विजय मित्रा
क्या आप सोचते हैं कि जो कुछ वर्तमान में है, ऐसा ही रहेगा या भविष्य कुछ पक्षों में अलग होने जा रहा है? कुछ निश्चितता के साथ यह कहा जा सकता है कि समाज जनांकिकीय परिवर्तन, जनसंख्या का भौगोलिक स्थानांतरण, प्रौद्योगिक उन्नति, पर्यावरणीय निम्नीकरण, और जल अभाव का साक्षी होगा। जल अभाव संभवत: इसकी बढ़ती हुई माँग, अति उपयोग तथा प्रदूषण के कारण घटती आपूर्ति के आधार पर सबसे बड़ी चुनौती है। जल एक चक्रीय संसाधन है

गोदावरी का उद्गम त्रयंबकेश्वर

गोदावरी का उद्गम त्रयंबकेश्वरगोदावरी का उद्गम त्रयंबकेश्वरत्रयंबकेश्वर के बाद और नासिक से पहले चक्रतीर्थ नामक एक कुंड है, यहीं से गोदावरी एक नदी के रूप में बहती नजर आती है। इसलिए बहुत से लोग चक्रतीर्थ को ही गोदावरी का प्रत्यक्ष उद्गम मानते हैं। नासिक से 35 किमी दूर त्रयंबक कस्बे में स्थित त्रयंबकेश्वर तीर्थ का महत्व दो कारणों से है, एक तो यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है और दूसरा दक्षिण की गंगा कही जाने वाली पावन नदी गोदावरी का उद्गम स्थल है। त्रयंबक में गोदावरी के तट पर बने विशाल त्रयंबकेश्वर मंदिर में पवित्र ज्योतिर्लिंग विराजमान है। अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग यहाँ गर्भगृह में केवल अर्धा ही नजर आता ह