भारत का जल संसाधन

संपादक- मिथिलेश वामनकर/ विजय मित्रा
क्या आप सोचते हैं कि जो कुछ वर्तमान में है, ऐसा ही रहेगा या भविष्य कुछ पक्षों में अलग होने जा रहा है? कुछ निश्चितता के साथ यह कहा जा सकता है कि समाज जनांकिकीय परिवर्तन, जनसंख्या का भौगोलिक स्थानांतरण, प्रौद्योगिक उन्नति, पर्यावरणीय निम्नीकरण, और जल अभाव का साक्षी होगा। जल अभाव संभवत: इसकी बढ़ती हुई माँग, अति उपयोग तथा प्रदूषण के कारण घटती आपूर्ति के आधार पर सबसे बड़ी चुनौती है। जल एक चक्रीय संसाधन है

ब्रह्मपुत्र नदी

ब्रह्मपुत्र (असमिया - ব্ৰহ্মপুত্ৰ, बांग्ला - ব্রহ্মপুত্র ) एक नदी है। यह तिब्बत, भारत तथा बांग्लादेश से होकर बहती है। प्रायः भारतीय नदियों के नाम स्त्रीलिंग में होते हैं पर ब्रह्मपुत्र एक अपवाद है। संस्कृत में ब्रह्मपुत्र का शाब्दिक अर्थ ब्रह्मा का पुत्र होता है।

नदी का उद्गम तिब्बत में कैलाश पर्वत के निकट जिमा यॉन्गजॉन्ग झील है। आरंभ में यह तिब्बत के पठारी इलाके में, यार्लुंग सांगपो नाम से, लगभग 4000 मीटर की औसत उचाई पर, 1700 किलोमीटर तक पूर्व की ओर बहती है जिसके बाद नामचा बार्वा पर्वत के पास दक्षिण-पश्चिम की दिशा में मुङकर भारत के अरूणाचल प्रदेश में घुसती है जहं इसे सियांग कहते हैं।

नदी का गीत .. ब्रह्मपुत्र के साथ साथ

ब्रह्मपुत्रब्रह्मपुत्रप्रत्यक्षा/ईटानगर/अरुणाचल प्रदेश: जैसे संगीत के नोटेशन वैसे ही नदी का गीत। सुर में बहता लचकता गाता। धरती के बदन पर धड़कता जीता, शिराओं में दौड़ता खींचता जीवन। किसी आदिम समय से पुरखों के जीवन को पोसता देखता जीना मरना बीतना, सब का बीतना। सिर्फ नदी का न बीतना। तब से अब तक ..