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पानी के मसले एक ही मंत्रालय के पास हो

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोजकेंद्रीय जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोजहर आम और खास की सबसे बड़ी जरूरत है पानी। बढ़ती आबादी व सीमित पानी को देखते हुए झगड़े भी बढ़ रहे हैं। देश में पानी राज्यों का विषय है और केंद्रीय स्तर पर भी पानी कई मंत्रालयों में बंटा है। इन हालात में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोज का आए दिन किसी न किसी नए विवाद से सामना होता रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि पानी के लिए तो एक ही मंत्रालय होना चाहिए। 'दैनिक जागरण' के विशेष संवाददाता रामनारायण श्रीवास्तव के साथ खास बातचीत में सोज ने पूरी साफगोई के साथ यह भी स्वीकार किया कि पानी के लिए जो भी मंत्रालय काम कर रहे हैं उनमें भी स

भूजल

भूजलभूजलभूजल- -इसका आकलन कैसे किया जाता है ।

भूमिगत जल/जल स्रोतों का सदुपयोग

बरसात की माप
(गांव तितवी, तालुका परोला, जिला- जलगांव, महाराष्ट्र)
उद्देश्य:
गांववालों को बारिश की वास्तविक मात्रा और एक जल वर्ष में पानी कुल उपलब्धता के बारे में जागरुक बनाना। अडगांव (यावल तालुका), तितवी (परोला तालुका) और मालशेवगा (चालीसगांव तालुका) में रेनगॉग बनाए गए और बारिश की मात्रा जानने की प्रक्रिया शुरू की गई।

भूमिगत जल/जल स्रोतों का सदुपयोग

महाराष्ट्र में पेजल भरते लोग, फोटोः विश्वनाथमहाराष्ट्र में पेयजल भरते लोग, फोटोः विश्वनाथ वर्तमान स्रोतों की रक्षा-
( गांव- पटूरदा, तालुका संग्रामपुर, जिला-बुलढ़ाना, महाराष्ट्र)
पूर्व स्थितियां:
जल के मुख्य स्रोत कुएं सूखे और उपेक्षित थे और उनमें से कुछ कूड़ेदान में तब्दील हो गए थे।
सारांश-
स्रोत कुएं कूड़ेदान बन गए थे। कुएं के आसपास गंदगी का ढ़ेर लगा हुआ था। गांववाले इन कुओं के पास गए और वहां की गंदगी देखकर चकित रह गए। गांववालों ने कुओं को साफ़ करने के लिए साथ-साथ काम किया। एक कुएं के सफ़ाई अभियान ने दो अन्य कुओं को साफ़ करने के लिए प्रेरित किया।
बदलाव की प्रकिया: