नर्मदा जी नदी

हजारों साल पहले की बात है। नर्मदा जी नदी बनकर जनमीं। सोनभद्र नद बनकर जनमा। दोनों के घर पास-पास ही थे। गाँव-बस्ती एक ही थी। दोनों अमर कंट की पहाड़ियों में घुटनों के बल चलते। अठखेलियाँ करते। पहाड़ों चट्टानों का सहारा लेते रेंगते हुए चलते। एक दूसरे को देख भारी खुश होते। चिढ़ते-चिढ़ाते। हंसते-रुठते। कहीं चट्टानों से टकराते। सिसकते और रोते। कहीं वनस्पतियों के सिर पर सवार हो गुजरते। मगन हो जाते। रूकने का नाम नहीं लेते। कहीं पहाड़ियों की ऊँचाई से नीचे खोह में गिरते। खाइयाँ बनकर अपनी छटा दिखलाते। बाघ, भालू, हिरण, बारहसिंघा, गाय, बैल, भैंस आदि आते। नहाते। डुबकी लगाते। पानी पीते। अंगड़ाइयाँ लेते। इधर-उधर निहारते। उछलते-कूदते। कुलांचे भरते। शारीरिक करतब दिखलाते। नर्मदा और सोनभद्र उन्हें देखते। हँसते-खिलखिलाते। शाबाशी देते। आगे बढ़ जाते।

सोन नदी

अमरकंटक नर्मदा नदी, सौन नदी और जोहिला नदी का उदगम स्थान है। यह मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित है । यह हिंदुओं का पवित्र स्थल है।मैकाल की पहाडि़यों में स्थित अमरकंटक मध्‍य प्रदेश के अनूपपुर जिले का लोकप्रिय हिन्‍दू तीर्थस्‍थल है। समुद्र तल से 1065 मीटर ऊंचे इस स्‍थान पर ही मध्‍य भारत के विन्‍ध्‍य और सतपुड़ा की पहाडि़यों का मेल होता है। चारों ओर से टीक और महुआ के पेड़ो से घिरे अमरकंटक से ही नर्मदा और सोन नदी की उत्‍पत्ति होती है। नर्मदा नदी यहां से पश्चिम की तरफ और सोन नदी पूर्व दिशा में बहती है। यहां के खूबसूरत झरने, पवित्र तालाब, ऊंची पहाडि़यों और शांत वातावरण सैलानियों को मंत्रमुग्‍ध कर देते हैं। प्रकृति प्रेमी और धार्मिक प्रवृति के लोगों को यह स्‍थान काफी पसंद आता है। अमरकंटक का बहुत सी परंपराओं और किवदंतियों से संबंध रहा है। कहा जाता है कि भगवान शिव