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जल संरक्षण हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है - संजय देशपांडे

संजय देशपांडे (सह प्रबंध निदेशक डी.एस.के. समूह)संजय देशपांडे (सह प्रबंध निदेशक डी.एस.के. समूह)
डी.एस. कुलकर्णी समूह के सह प्रबंध निदेशक श्री संजय देशपाण्डे से भारतीय पक्ष ने वर्षा जल संरक्षण को लेकर उनकी भावी योजनाओं और दृष्टि के बारे में बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश-

प्रश्न : आपको अपार्टमेंट में जल संरक्षण तंत्र लगाने की प्रेरणा कहां से मिली? यह केवल एक व्यावसायिक नीति का परिणाम है या इसमें कुछ सामाजिक सोच भी है?

उत्तर : जल संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह केवल व्यावसायिक नीति नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक जिम्मेदारी भी है। देश के अनेक भागों में पानी की बढ़ती मांग और घटती उपलब्धता एक बड़ी समस्या बन चुकी है। मैं स्वयं महाराष्ट्र के सामगांव नामक गांव का रहने वाला हूं जो एक सूखाग्रस्त गांव है। इसलिए कड़कती धूप में मीलों दूर से पानी लाने या गहरे कुएं से पानी निकालने के लिए कितना परिश्रम करना पड़ता है, यह मुझे पता है। संयोग से मुझे जल संरक्षण का तकनीकी ज्ञान है। इसलिए महाराष्ट्र के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों सहित देश के कई भागों में मैंने इसका प्रयोग किया।

प्रश्न : इस तंत्र को लगाने में कितनी लागत आती है?

उत्तर : इसका कोई सटीक उत्तर देना संभव नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कहां लगाना चाहते हैं। परिस्थितियों और क्षेत्र के अनुसार लागत अलग-अलग आती है। यह लागत इस तंत्र को लगाने के तरीके पर भी निर्भर करती है। अपार्टमेंट बनने से पहले लगाने या बनने के बाद लगाने पर भी लागत में अंतर आता है।

प्रश्न : इस तंत्र को लगाने के लिए किन बातों का ध्यान रखा जाता है?

उत्तर : अनेक बातें हैं जिनका ध्यान रखना जरूरी है। मिट्टी का प्रकार, क्षेत्र का स्तर, क्षेत्र का भू-जल स्तर, वहां होने वाली औसत वर्षा, जलवायु आदि महत्वपूर्ण पहलू हैं। साथ ही यह भी ध्यान रखना होता है कि यह तंत्र शहरी क्षेत्र में लगाया जा रहा है या ग्रामीण क्षेत्र में।

प्रश्न : एक पूरे अपार्टमेंट की बजाय किसी एक फ्लैट या घर में यह तंत्र लगाना क्या संभव है?

उत्तर : संभव तो है लेकिन लाभदायक नहीं है। एक घर द्वारा संरक्षित वर्षा जल और पूरे अपार्टमेंट द्वारा जल संरक्षण करने में अंतर तो आएगा ही। एक घर में इसे लगाने से यह न केवल महंगा पड़ेगा, बल्कि प्रतिफल भी कम ही आएगा, यानी भू-जल स्तर में नगण्य सुधार होगा। हां, इसे एक कोठी या बंगले में लगाया जा सकता है।

प्रश्न : मौसम बदलने पर इस तंत्र में क्या सावधानियां रखनी पड़ती हैं?

उत्तर : बरसात के बाद वर्षा जल संग्रह करने के पाइप और तंत्र में जमा मिट्टी की गाद को साफ करना चाहिए। जब वर्षा का पहला पानी जमा होता है तो उसमें काफी गंदगी होती है, इसलिए उसे साफ करना चाहिए। बाकी सावधानियां, जहां यह तंत्र लगाया गया है, वहां की जलवायु के अनुसार तय की जाती हैं। प्रश्न : आपकी इस योजना को आम लोगों ने किस रूप में लिया?

उत्तर : लोगों ने काफी उत्साह दिखाया है। इसके फायदों को जानने के बाद अपने यहां इस तंत्र को लगवाने के लिए लोगों में काफी उत्सुकता है।

प्रश्न : सरकार का इसमें कितना सहयोग मिला?

उत्तर : हमने व्यक्तिगत स्तर पर इस प्रयोग को किया था। लेकिन सरकार ने भी हमारे जल संरक्षण के प्रयासों की प्रशंसा की है। जल संरक्षण और वर्षा जल संरक्षण की तकनीक के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त करने के कारण मुझे पुणे नगरपालिका की पर्यावरण समिति का सदस्य भी बनाया गया है।

प्रश्न : देश में पानी के बढ़ते संकट को देखते हुए इस तंत्र को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए आपकी क्या योजनाएं हैं?

उत्तर : सर्वप्रथम तो हम अपनी सभी योजनाओं में वर्षा जल संरक्षण के तंत्र को लगाते हैं। फिर हम बड़े-बड़े आवासीय समूहों और गैर-सरकारी संगठनों के साथ-साथ आम व्यक्ति को भी इसके लिए आवश्यक जानकारी और मदद देते हैं। इसके अतिरिक्त मैं यशदा जैसे संगठनों में व्याख्यान देने भी जाता हूं, जहां भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को पर्यावरण संबंधी विषयों की जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाता है।

साभार -भारतीय पक्ष

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