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नर्मदा समग्र

नर्मदा समग्रनर्मदा समग्रनर्मदा समग्र एक प्रयत्न है। नर्मदा नदी, एक जल स्त्रोत, एक आस्था को स्वस्थ, सुंदर और पवित्र बनाये रखने का यह एक प्रयास है। विश्व की अधिकांश संस्कृतियों का जन्म व विकास नदियों के किनारे हुआ है। भारत के ऋषियों ने पर्यावरण संतुलन के सूत्रों को ध्यान में रखकर समाज की नदियों, पहाडों, जंगलों व पशु-पक्षियों सहित पूरे संसार की ओर देखने की विशेष सह अस्तित्व की अवधारणा का विकास किया। उन्होंने पाषाण में भी जीवन देखने का मंत्र दिया। ऐसे प्रयत्नों के कारण भारत में प्रकृति को समझने व उससे व्यवहार करने की आदान-प्रदान के भाव से युक्त परम्पराओं का विकास हुआ। जिओ और जीने दो जैसी मान्यताएं विकसित हुईं। पेड-पौधे, पशु, पानी सभी पूज्य हो गए। समय के साथ चलते-चलते जब परम्पराएं बगैर समझे निबाही जाने लगीं तो वे रूढयाँ बन गईं। आंखें तो रहीं लेकिन दृष्टि बदल गई। इसने सह अस्तित्व के सिद्धान्त को बदलकर न जियेंगें न जीने देंगें जैसे विकृत सोच का विकास किया। इसी का परिणाम रहा कि नदी व पहाड, पशु व पेड सब अब मरने लगे हैं। नर्मदा जैसी प्राचीन नदी भी इस व्यवहार से नहीं बच पा रही है। उसका अस्तित्व संकट में है।

अनिल माधव दवे और उनके साथीअनिल माधव दवे और उनके साथीजंगल कट रहे हैं, नदी का जल कम हो रहा है और प्रदूषण लगातार बढ रहा है। नर्मदा से सभी को पानी चाहिए, किन्तु नर्मदा में पानी कहाँ से आता है ? वह कैसे बढाया जाय ? इस विचार का सर्वत्र अभाव है। नर्मदा समग्र एक पहल है। पहले से कार्य कर रहे व आगे कार्य करने वालों के बीच संवाद की यह कोशिश है। नर्मदा समग्र इस पुण्य सलिला के सभी पक्षों पर संयुक्त प्रयास चाहता है। यह नर्मदा के सारे आयामों को एक स्थान पर समेटने की ओर आगे भी बढना चाहता है। आप सभी से प्रार्थना है कि सपरिवार, सकुटुम्ब इस कार्य में अपनी भागीदारी निश्चित करें जिससे प्रयत्न को सहयोग मिले व मैकलसुता की सेवा भी हो सके।

PATRONS:

Amrit Lai Vegad
President, Narmada Samagra,
Noted Writer & Painter
Mob:. +91 761 -2410434, 4016867

Anupam Mishra
Noted Gandhian & Writer Gandhi Shanti Pratishthan, New Delhi
Tel.:+91 11 - 23311517 ( R ) 23235870 (O)

Anil Madhav Dave
Noted Social Activist, Writer & Thinker
Mob:. 9425004555
E-mail: Anildave_dashmi@yahoo.com

Convener

Dr. S.P. Gautam
Chairman Pollution Control Board
Former V.C. R.D. University, Jabalpur
Mob.: +91 9425154228
E-mail: it_mppc@rediffmail.com
mppc@redifFmail.com

Co-convener

Rajesh Gupta
Executive Director,
Madhya Pradesh Jan Abhiyan Parishad
Mob:. +91 9425130033
E-mail: rajesh7gupta@rediffmail.com

Pradeep S. Joshi
Freelancer, Management Guru
Mob:. +91 9893352021
E-mail: psljoshi@rediffmail.com

Shailendra Sharma
Prof, in Zoology,
Gujarati Science College, Indore
Mob.: +91 9926279974
E-mail: sksharmajD@rediffmail.com

Kranti Chaturvedi, Pankaj Shrivastava,
Sunil Chaturvedi, Santosh Shukla,

Co-odinator
201, Deendayal Parisar, E-2 Arera Colony,
Bhopal PIN - 462016 Madhya Pradesh, India
Mobile: +91 9425004533, 9425004468,9425331041

Narmada Samagr me judne hetu

Mere pass ngo h Jiske madhyam se bhi apna work karna chahta hu kripa mujhe mai ki seva air dusro ki seva jaise samajik karyo Me jodne ka kast Kare.

would like to work for maa narmada

I am a resident of nasik. Came closure to Narmada due to parikrama.Indend to do something useful for the project.would like to meet.kind regards

join sir

me narmada ji ke liye kuch karna chahta hy sir ji 

व्यक्ति गत स्तर पर पर्यावरण

व्यक्ति गत स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या किया जा सकता है?

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<p>&lt;p&gt;&amp;lt;p&amp;gt;Planting tree go green&amp;lt;/p&amp;gt;&lt;/p&gt;</p>

Narmada A Love Story

http://hindi.webdunia.com/literature-apnamanch/चिरकुंवारी-नर्मदा-की-अधूरी-प्रेम-कथा-1120216165_1.htm

ताप्ती पूर्णा समग्र अभियान एक प्रयास

ताप्ती पूर्णा समग्र अभियान एक प्रयास
ताप्तीचंल एवं पूर्णाचंल में दोनो पुण्य सलिलाओं के समग्र जल को संग्रहित करने एवं उसे लोगो की आस्था के अनुरूप तथा दोनो की पौराणिक पृष्ठभूमि को जन - जन तक पहुंचाने की दिशा में एक मील का पत्थर है। सूर्यपुत्री आदिगंगा कही जाने वाली पुण्य सलिला मां ताप्ती एवं चन्द्रपुत्री पूर्णा नदी, एक जल स्त्रोत, एक आस्था की प्रतिक , स्वस्थ , स्वच्छ , स्वछंद वातावरण , सुंदर और पवित्र स्थलो की सरंचना की दिशा में एक प्रयास है। इतिहास के पृष्ठो पर छपी कहानियों एवं इतिहास के अनुसार विश्व की अधिकांश संस्कृतियों का जन्म व विकास नदियों के किनारे हुआ है। ऐसे में सृष्टि के निमार्ण के साथ ही जीवन के संग जल के रूप में आई सूर्यपुत्री मां ताप्ती विश्व की उन अनमोल धरोहर में से एक है जिसका भूत -वर्तमान - भविष्य मानव सभ्यता से जुड़ा हुआ है। भारत के देव - दानव - ऋ षियों - तपस्यिों की जप एवं तप के तप से तापी और तपती बनी ताप्ती ने उन असंख्य कंठो को तृप्त किया जिसके चलते हुए तृप्ति भी कहा गया। वह सूरत में तापी , जम्मू में तावी, आंध्र में प्राणहिता , मध्य बैतूल में ताप्ती कहलाई। आज के सतपुड़ा लेकिन पौराणिक श्रंगऋषि पर्वत श्रंखला से निकली पश्चिम मुखी ताप्ती ने अपने पूरे प्रवाह एवं बहाव क्षेत्र में निराकार ऊं का निमार्ण एक नहीं कई बार किया है। वह पूर्वमुखी कहलाई तो कभी सूरजमुखी और सूर्यमुखी कही जाने लगी। सूर्यपुत्री पुण्य सलिला मां ताप्ती की ही तरह उनकी एक मात्र संगी सहेली कही जाने वाली चन्द्रपुत्री पूर्णा ने सप्तऋषियों को चकमा देने के लिए गाय का रूप धारण कर वह पोखरनी प्राचिन राजा गय की राजधानी पुष्पकरिणी से निकलने के बाद सात बार मुड - मुड कर सप्तऋषियों को चकमा देकर वह गाय के दुग्ध के रूप में नदी की धार बह कर निकल गई। भुसावल के पास दोनो पुण्य सलिलाओं ताप्ती एवं पूर्णा का मिलन हुआ। आमतौर पर ऐसा कहा जाता है कि पर्यावरण संतुलन के सूत्रों को ध्यान में रखकर समाज की नदियों, पहाडों, जंगलों व पशु-पक्षियों सहित पूरे संसार की ओर देखने की विशेष सह अस्तित्व की अवधारणा का विकास किया। उन्होंने पाषाण में भी जीवन देखने का मंत्र दिया। गंगा के धरती पर अवतरण के समय गंगा की जिद के चलते ताप्ती का महात्मय कम करने की मंशा ने आज तक ताप्ती को हमेशा नजर अदंाज किया है। गंगा को धरती पर आने से पहले अपने महत्व की चिंता सताई लेकिन अब गंगावादियों के गंगा के कारण अपनी चलती दुकान के बंद हो जाने के डर ने ताप्ती की उपेक्षा की जिसके पीछे उन्हे यह डर सताने लगा कि गंगा तो कल और आज तथा परसो भी ताप्ती के महात्मय के सामने बौनी है। लोग गंगा को न भूल जाए इसलिए गंगा के किनारे रहने वालो ने सोची समझी साजिश के तहत गंगा को महिमा मंडित करने का ओछा प्रयास किया। जिस गंगा में सौ बार नहाने का पुण्य लाभ मां ताप्ती के नाम मात्र स्मरण से मिल जाता है उसके दर्शन या स्नान का पुण्य लाभ की कल्पना भी नहीं की जा सकती। गंगा के किनारे यदि मान भी ले कि छै ज्योतिलिंग बने हुए है लेकिन देश - दुनिया में मात्र ताप्ती के किनारे एक नहीं पूरे बारह ज्योतिलिंंग एक साथ बनवाए गए है वह भी बारहवे ज्योतिर्लिंग रामेश्वर की स्थापना के कई माह पूर्व ही बनवाए जा चुके थे। भगवान आशुतोष के बारह ज्योर्तिलिंगो के निमार्ण कार्य को भववान विश्वकर्मा ने मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम के आग्रह पर किया था। यहां पर सपत्निक बारह ज्योर्तिलिंगों की पूजा - अर्चना करने के बाद स्वंय मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम ने अपने पूर्वजो एवं पितरो का तर्पण कार्य किया था। राजा दशरथ को गया में फालगुनी नदी में श्राद्ध पर्व में तर्पण के पूर्व ही पुण्य सलिला मां ताप्ती में श्री राम - माता सीता - अनुज लक्ष्मण के द्वारा तर्पण करके श्रवण कुमार की हत्या एवं उसके माता - पिता के श्राप से मुक्ति दिलवाई गई थी। यही से राजा दशरथ स्वर्गलोक की ओर प्रस्थान हुए थे। ताप्ती - पूर्णा एक समग्र एक पहल है। ताप्ती के महत्व एवं महात्मय को जन - जन तक पहुंचाने की दिशा में ताप्तीचंल के वरिष्ठ पत्रकार , लेखक , चिंतक , विचारक रामकिशोर पंवार एवं उसके साथियों के द्वारा जनसंवाद एवं जन ससंद की यह कोशिश है। ताप्ती - पूर्णा समग्र इन द्धय पुण्य सलिलाओं के सभी पक्षों पर संयुक्त प्रयास चाहता है।। यह ताप्ती - पूर्णा,वर्धा, बेल,मोरंड, सापना,माचना,गागुंल,तवा,गंजाल, के सारे आयामों को एक स्थान पर समेटने की ओर आगे भी बढने की दिशा में एक प्रयास है जो यह चाहता है कि आप सभी सपरिवार, सकुटुम्ब इस कार्य में अपनी भागीदारी निश्चित करें जिससे प्रयत्न को सहयोग मिले व सूर्यसुता की सेवा भी हो सके।

Founder & Patrons: -
Ramkishore Pawar
President, Tapati purna Samagra,
Social Activist, Noted Writer,
Thinker, press Repoter
Mob:. +91 9993162080, 9406535572.
Tel.( R & O ) 07141- 236122 Fax No. 07141- 236122
ramkishorepawar@gmail.com
tapatimaiya@gmail.com
ramkishorepawarrondhawala@gmail.com
maatapatijagratimanch@gmail.com
ramkishore_pawar@rediffmail.com
ramkishore_pawar@yahoomail.com
ramkishore_pawar@hotmail.com

नर्मदा समग्र से जुड़ना!

मै भी नर्मदा समग्र से जुड़ना चाहता हूँ.... नर्मदा माई के लिए कुछ कार्य करना चाहता हूँ..... कृपया मागदर्शन करे.........

रोहित अग्रवाल, ग्वालियर

पेर्तुक निवास...... हंडिया, हरदा ) ०९९०७९४७३५८ brajrohit@gmail.com एंड f/brajrohitindia

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