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पानीपत का पानी

नवभारत टाइम्स / नई दिल्ली : क्या आप सोच सकते हैं कि कोई शहर अपने नाले का पानी छोड़े और दिल्ली जैसे शहर में पीने के पानी की सप्लाई रोकनी पड़े। ताजा वाकया यह है कि पानीपत के रंगाई, चमड़ा आदि के उद्योंगो द्वारा रासायनिक प्रदूषित पानी उनके अपने नालों में भारी मात्रा जमा था, वह अचानक यमुना में छोड़ दिया गया। दिल्ली के ज्यादातर नलों में यमुना के पानी को ट्रीट करके सप्लाई किया जाता है। वजीराबाद और चंद्रावल में जल शोधक संयंत्र लगाए गए हैं, लेकिन इसकी वजह से यमुना के पानी में अमोनिया की मात्रा इतना ज्यादा हो गई कि उसे निथारा जाना असंभव हो गया और दिल्ली के एक तिहाई शहर की सप्लाई तीन दिन के लिए बंद रही।

यमुना में बढ़े आमोनिया के प्रदूषण के कारण 27 दिसम्बर सुबह भी करीब एक तिहाई दिल्ली में नलों की टोंटियां सूखी रहीं। शाम में पांच फीसदी तक सप्लाई शुरू हो पाई। उधर, हरियाणा की फैक्ट्रियों का प्रदूषण बार-बार यमुना में बहाए जाने के खिलाफ दिल्ली जल बोर्ड सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड और हरियाणा के पलूशन कंट्रोल बोर्ड से कड़ी कार्रवाई के लिए शिकायत करेगा।

सोनीपत और पानीपत की फैक्ट्रियों का प्रदूषक कचरा यमुना में बहाए जाने से दिल्ली के वजीराबाद बैराज में अमोनिया की मात्रा बढ़ कर 1.5 पीपीएम तक पहुंच गई, जबकि पीने के पानी में अमोनिया बिल्कुल नहीं होना चाहिए। अमोनिया की इतनी मात्रा बढ़ने के कारण 120 एमजीडी के वजीराबाद और 95 एमजीडी क्षमता के चंद्रावल वॉटर ट्रीटमेंट प्लांटों को पूरी तरह बंद करना पड़ा। बराज का गेट उठाकर अमोनिया युक्त सारा पानी निकाला गया। इसके बाद ही शुक्रवार सुबह से पानी का प्रॉडक्शन शुरू किया गया।

प्लांट पूरी तरह ठप होने के कारण उत्तरी दिल्ली, पुरानी दिल्ली, एनडीएमसी, दिल्ली कैंट व साउथ वेस्ट दिल्ली के इलाकों में पानी की सप्लाई करने वाले भूमिगत जलाशयों में रिजर्व रहने वाला पानी तक खत्म हो गया। लिहाजा शुक्रवार की सुबह प्लांट शुरू होने के बाद पहले भूमिगत जलाशयों में पानी भरा गया। उसके बाद शाम से पानी सप्लाई शुरू की गई। पूरा उत्पादन होने के बावजूद 27 दिसम्बर की शाम सिर्फ 50 फीसदी एरिया में ही पानी की सप्लाई की जा सकी। जल बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, 28 दिसम्बर सुबह तक सप्लाई पूरी तरह नॉर्मल हो जाएगी।

जल बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक पिछले साल नवंबर में भी ऐसे हालात पैदा हुए थे। इससे पहले भी कई बार अमोनिया बढ़ने के कारण प्लांटों को बंद करना पड़ा था। जल बोर्ड बार-बार की इन घटनाओं को रोकने के लिए सोमवार को सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड और हरियाणा पलूशन कंट्रोल बोर्ड को फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखेगा। जानकारी के मुताबिक, फैक्ट्रियों का प्रदूषण फैलाने वाला कचरा ड्रेन नंबर-8 में जाता है, लेकिन ड्रेन में काफी मात्रा में सिल्ट जमा होने के कारण यह गंदगी यमुना में बहा दी गई। ड्रेन की सिल्ट निकाल दी गई है। अब फैक्ट्रियों का कचरा ड्रेन में डाला जाना शुरू हो गया है।

साभार - नवभारत टाइम्स

rajayniti vigyan

suraj Thakur

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