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भारत में पानी

भारत में पानीपानीप्रेमचन्द्र श्रीवास्तव / पर्यावरण संदेश


सामान्य तौर पर देखने से ऐसा लगता है कि भारत में पानी की कमी नहीं है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन 140 लीटर जल उपलब्ध है। किन्तु यह तथ्य वास्तविकता से बहुत दूर है। संयुक्त राष्ट्र विकास संघ (यूएनडीओ) की मानव विकास रिपोर्ट कुछ दूसरे ही तथ्यों को उद्घाटित करती है। रिपोर्ट जहां एक ओर चौंकाने वाली है, वहीं दूसरी ओर घोर निराशा जगाती है।



इस रिपोर्ट के अनुसार भारतीय आंकड़ा भ्रामक हैं वास्तव में जल वितरण में क्षेत्रों के बीच, विभिन्न समूहों के बीच, निर्धन और धनवान के बीच, गांवों और नगरों के लोगों के बीच काफी विषमता है।


यहां विकासशील देशों की बातें न करके यदि सम्पन्न देश ब्रिटेन की बात करें तो वहां भी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन जल की उपलब्धता मात्र 150 लीटर ही हैं। यह भारतीय आंकड़े से कुछ ही अधिक है। यही नहीं पड़ोसी बांग्लादेश की स्थिति तो और भी बद्तर है। प्रत्येक बांग्लादेशी के लिए प्रतिदिन की जल उपलब्धता मात्र 50 लीटर ही है।


भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जल की उपलब्धता पर यदि हम विहंगम दृष्टि डालें तो ज्ञात होता है कि बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां जल की उपलब्धता अत्यंत निराशाजनक है। लाखों ऐसे लोग हैं जिन्हें प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति की दर से 20 लीटर साफ पानी भी उपलब्ध नहीं है।


यदि मुम्बई नगर के सरकारी आंकड़ों पर विश्वास करें तो 90 प्रतिशत लोगों को सुरक्षित जल उपलब्ध है, किंतु मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार मुम्बई नगर की लगभग आधी आबादी गंदी बस्तियों में निवास करती है और अधिकांश आंकड़े सुचीबध्द भी नहीं हैं। इन गंदी बस्तियों के लोग पानी के लिए कुओं, टैंकरों और असुरक्षित जल-स्त्रोतों पर निर्भर हैं। गरीब लोगों को लोहे के पाइपों, रिसती हुई अथवा टूटी टोटियों या गंदी हो चली टंकियों के जल से ही काम चलाना पड़ात हैं।


इस रिपोर्ट के अनुसार 15 परिवारों को मात्र एक नल से ही काम चलाना पड़ता है और इस नल से एक दिन में मात्र दो घंटे ही जल आपूर्ति होती है।


चेन्नई में औसत जल आपूर्ति एक दिन में 68 लीटर हैं किंतु टैंकरों पर निर्भर व्यक्ति प्रतिदिन मात्र 8 लीटर जल ही प्राप्त कर पाता है। अहमदाबाद की रिपोर्ट तो और भी चौंकाने वाली है। यहां के 25 प्रतिशत निवासी 90 प्रतिशत जल का इस्तेमाल करते हैं। पानी की अनुपलब्धता की चरम स्थिति तो अधिकांश नगरों में कभी-कभार ही समस्या के रुप में खड़ी होती है। किंतु यह समस्या जल के वितरण की कुव्यवस्था के कारण अधिक होती है।


रिपोर्ट में गुजरात के जल स्वामियों की भी चर्चा की गई है। कुछ ऐसे भू-स्वामी हैं जिन्होंने जमीन में गहरे कुएं खोद रखे हैं, इससे आस-पास के गांवों के कुओं का जल सूख गया है। फिर गहरे कुओं के स्वामी आस-पास के गांवों के लोगों को अधिक मूल्य पर जल का विक्रय करते हैं।


आंध्रप्रदेश में दलित महिलाओं को उच्च जाति के लोगों के कुओं से जल की अनुमति तो मिली हुई है किंतु वे स्वयं उन कुओं से जल नहीं खींच सकती हैं। इसके लिए उन्हें दूसरों अर्थात उच्च जाति के लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है और इसके लिए लम्बे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।


अर्जेन्टाईना, बोलिविया और लेटिन अमेरिका के अनुभवों से पता चलता है कि गैर सरकारी संस्थानों के पास ऐसी जादुई छड़ी नहीं है जिससे कि वे समस्या का समाधान प्रस्तुत कर सकें और सभी के लिए जल वितरण की उचित व्यवस्था कर सकें । अनेक देशों में इन उद्यमों की स्थिति निराशापूर्ण हैं। रिपोर्ट यह भी सूचित करती है कि निर्धनतम व्यक्तियों तक पानी के लिए दी गई सहायता राशि उन तक नहीं पहुंच पाती हैं । उदाहरण के लिए बंगलोर में सबसे धनी 20 प्रतिशत घरों के लिए जल की आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध राशि का 30 प्रतिशत जल सहायता राशि ही मिलती है। यह रिपोर्ट संस्तुति करती है कि जल और सफाई के लिए व्यय की दी जाने वाली राशि में वृद्धि की जानी चाहिए क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च में और मृत्यु दर में कमी आयेगी जिसके फलस्वरुप लाभांश में बढ़ोतरी होगी।


इस रिपोर्ट में निष्कर्ष के रुप में यह कहा गया है कि स्वच्छ पेय जल और सफाई सभी नागरिकों के लिए मूलभूत आवश्यकता के रुप उपलब्ध होना चाहिए। भारतीय संदर्भो के देखे तो ये कुछ आंकड़ें है जिन पर गौर करने से स्थितियां और भी स्पष्ट होती हैं।


1. यह विडम्बना है कि सैन्य व्यवस्था पर होने वाला खर्च सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3प्रतिशत है जबकि जल और सफाई पर मात्र 0.5 प्रतिशत खर्च किया जाता है।


2. भारत में मात्र अतिसार (दस्त की बीमारी) से 4 लाख 50 हजार व्यक्ति प्रतिवर्ष काल के गाल में समा जाते हैं।


3. भारत में महिलाओं की एक संस्था सेवा (सेल्फ ईम्प्लायड वीमेन्स एसोसिएशन) ने शोध के पश्चात् यह पाया कि जल का संग्रह करने वाली महिला यदि अपने जल-संग्रह के समय में मात्र एक घंटे कम कर दे, तो वर्षभर में 100 डॉलर या 4500 रुपयों की अतिरिक्त आय कर सकती हैं।


4. दिल्ली, कराची और काठमाण्डू में 10 प्रतिशत से भी कम घर ऐसे हैं जिन्हें प्रतिदिन 24 घंटे जल की आपूर्ति प्राप्त होती है। वैसे आमतौर पर यहां मात्र दो या तीन घंटे प्रतिदिन ही जल उपलब्ध है।

Wasser in Indien
L'eau en Inde
水在印度
Water in India

water

Specli east u.p. very pour condition in quality with drinking water next generation very defficult pogeation safedrinkig water in rural areas please consarn gov of India and gov of u.p.state

water ki samsya ka samadhan

water ki problem adiktar bade city me hi adiktar hoti h, gawo me kam hoti h q ki gawo me popullation kam hoti h or city me popullation adhik hoti h, or adhik popullation hone ki bajah se water ki dimand bhi bad jati h or water sabhi logo ko thik se nahi milpata h, or age bhi water ki samsya badti hi najar a rahi h,city ki popullation to bad rahi h par water resouces bahi purane shemit sansathan h.

rojgar ki talash me gawo se anewale logo ko unke gawo me hi rojgar uplabadh karana hoga sath hi sath city me uplabdh subidha bhi dena hoga jogar k new avsar lane hoge or city k logo ko gawo ki tarf unka rujan karna hoga q ki gawo me paryap matra me water resouce or land uplabdh hone ki bajah se jada pareshani nahi hogi. gawo k purane borwell pond ka punaha saf safai karwakar un ko dowara use kar na chahiye.

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