भास्कर का अभियान

Submitted by admin on Mon, 02/09/2009 - 21:52
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पांच करोड़ से बचेगा झील में 30 करोड़ लीटर ज्यादा पानी


भास्कर न्यूज/ भोपाल। करीब 71 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई झील का लगभग तीन चौथाई हिस्सा मिट्टी में तब्दील हो चुका है। पानी के नाम पर सात वर्ग किलोमीटर क्षेत्र से कम झील में जो कुछ बचा है उससे भोपाल की आबादी का अगली बरसात तक प्यास बुझाने का इंतजाम नहीं हो सकता। गर्मी का मौसम दूर नहीं है, जब पानी की खपत बढ़ जाएगी और झील का पानी तेजी से सूखेगा। 31 वर्ग कि.मी. की झील पर जमी हुई मिट्टी को हटाकर एक मीटर गहरीकरण के काम को अंजाम देने के लिए 200 करोड़ की पूंजी चाहिए ताकि आधुनिक मशीनें इस काम को पूरा कर सकें। यह प्रोजेक्ट तैयार है, पर नगर निगम की सामर्थ्य से बाहर है।

भास्कर समूह देश में आज जिस स्थान पर है उस वटवृक्ष को भोपाल की मिट्टी और पानी ने ही सींचा है। समय आ गया है जब हम अपनी जड़ों को कुछ लौटा सकें। श्रमदान लोगों की भावनाएं हैं, परंतु सच यह है कि अत्याधुनिक मशीनों के बगैर अगली बारिश के पहले कुछ किया जाना जरूरी है।

भास्कर समूह ने यह प्रोजेक्ट हाथ में लिया है और वह 35-35 लाख घनफुट खुदाई के कुल तीन प्रोजेक्ट हाथ में लेकर पांच करोड़ रुपए की लागत से भोपाल के लोगों के लिए 30 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी संग्रहरण क्षमता झील में उपलब्ध कराएगा। दो अत्याधुनिक खुदाई की मशीनें और साथ में दस डंपर आगामी 90 दिनों में 35 लाख घनफुट की खुदाई करेंगे।

जिससे दस करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी संचय हो सकेगा। इस महासंकल्प का पहला चरण सोमवार सुबह 8:30 बजे प्रेमपुरा घाट से शुरू किया जा रहा है। अगले माह मशीनों के दूसरे सेट के साथ दूसरा चरण बोट क्लब पर शुरू किया जायेगा और इसी तरह तीसरा चरण भी अप्रैल तक मशीनों की व्यवस्था करके शुरू होगा। इस प्रकार कुल तीन चरणों में प्रेमपुरा घाट से शुरू करके बोट क्लब तक एक करोड़ घनफुट से अधिक की खुदाई करके 30 करोड़ लीटर पानी बड़ी झील में अतिरिक्त संचय हो सकेगा।यह सारा काम 30 जून के पहले पूरा करना होगा ताकि इस बारिश में झील की बढ़ी हुई क्षमता का लाभ मिल सके और आने वाले वर्षो में थोड़ी राहत शहर को हो सके। इस कार्य में लगभग पांच करोड़ की लागत आयेगी जिसमें एक करोड़ रुपए भास्कर समूह अपनी जिम्मेदारी के तहत दान करेगा और बाकी चार करोड़ रुपए के लिए वह भोपाल सहित देश भर के प्रमुख ट्रस्टों और सहयोगियों से बातचीत कर इस राशि को इकट्ठा करेगा। हमारे करोड़ों पाठकों के साथ आइये ईश्वर से प्रार्थना करें कि इस बार बारिश से झील को वह लबालब भर दे, हमारे और आपके श्रम के दान के रूप में।

 

रेंन वाटर हार्वेस्टिंग


झील के गहरीकरण के साथ ही हर वर्ष ईश्वर जो अमृत बरसाता है उसे बारिश के मौसम में नालियों में बहाने की बजाय हर घर को अपनी ही जमीन में उतारना भी जरूरी है। जहां एक तरफ हम झील को गहरीकरण करेंगे वहीं भास्कर समूह रेंन वाटर हार्वेटिंग के लिए एक मॉडल बनाकर पूरी जानकारी के साथ शहर के घर-घर, मोहल्ले में अगले 90 दिन तक एक अभियान चलाएगा।

साभार- भास्कर न्यूज/ भोपाल

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Comments

Submitted by प्रेम विनायक (not verified) on Sun, 09/27/2009 - 20:59

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वर्षा की कोई कमी नहीं . यदि हम जल देव का सत्कार करें.इश्वर का साक्षात् रूप ये प्रकृति है.इन्ही पञ्च तत्वों से ही ये शरीर बना है.ये शरीर तो प्रकृति है इसमें जो हे वो इश्वर ही है.इसी बात को जानने के लिए जिन्दा रहते हुए स्वयम मर जाना होता है.जिसे कर पाना कठिन नहीं यदि व्यक्ति ऐसा करने लिए संकल्प ले ले.ऐसा कर लेने पर चाँद पर नए संसार को बसा देना कठिन नहीं है.पानी का संरक्ष्ण कर पाना कठिन नहीं है. यदि आप अपने समाचार पत्र के माध्यम से प्रत्येक किसान को सन्देश दे दे कि कोई भी किसान अपने खेत से पानी ना निकलने दे तथा इसे अपने खेत में ही समाहित करने का प्रयत्न करे.इस के लिए चाहे उसे एक खेत का एक हिस्सा तालाब ही क्यों ना बनाना पड़े.यादे ऐसे हो गया तो पानी कोई कमी नहीं रहेगी.आपका अपना,प्रेम

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