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मेघ पाईन अभियान क्या है?

मेघ पाईन अभियान

मेघ पाईन अभियान क्या है?


यह एक प्रयास है वर्षाजल के प्रासंगिकता को पहचानने व उसके संग्रहण को व्यापक स्तर पर फैलाने का, जो उत्तर बिहार के ग्रामीण इलाकों में रह रहे लाखों लोगों को साफ व सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने में मदद देना।

मेघ पाइन अभियान का मुख्य उददेश्य


1- उत्तर बिहार के ग्रामीण लोगों के बीच वैचारिक व व्यवहारिक बदलाव लाकर स्थानीय जल प्रबंधन तकनीकों को प्रभावी तरीके से पूर्णजीवित व स्थापित करना है और
2- स्थानीय जल प्रबन्धन द्वारा पीने योग्य, अन्य घरेलू कार्यों और खेती के उपयोग के लिए बढ़ते पानी की मांग को पूरा करने हेतु प्रभावित लोगों को नये उपायों से जोड़ना व प्रेरित करना है

उत्तर बिहार एक परिचय


उत्तर बिहार में बाढ़ प्रतिवर्ष आने वाली आपदा है, जो हजारों लोगों व पशुओं पर कहर ढाती है तथा लाखों की सम्पति को भारी नुकसान पहुंचाती है। उत्तर बिहार में इस आपदा के आने का कारण सिर्फ मानवकृत अव्यवस्था है। सम्बन्धी गंभीर समस्याओं का हल नहीं निकल पाया है। भारत के मानवकृत व प्राकृतिक आपदाओं में उत्तर बिहार की बाढ़ इस श्रेणी में सबसे पुरानी समस्या होने के बावजूद जस की तस बनी हुई है।
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उत्तर बिहार: में बाढ़ का परिदृश्य


बाढ़, जो पहले समाज का एक मुख्य पहलु था, आज इन्ही तटबंधों के कारण यह बाढ़ लोगों को संसाधनों से वन्चित, भय और अनिश्चितता से रुबरु कर दिया है
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बाढ़ में पेयजल का उपाय


स्थानीय उपाय
वर्षा ऋतु के दौरान चार जिलों खगड़िया, सहरसा, सुपौल व मधुबनी में क्रमश: 1170 मिलीमीटर (मिमी), 1132 मिमी, 1344 मिमी और 1305 मिमी प्रतिवर्ष औसत बारिश होती है। हालांकि इन जिलों का संयुक्त औसत वर्षा 1250 मिमी है। और वर्षा ऋतु के समय अधिकतर बारिश अनुमानित 5- दिनों में होती है। लेकिन दुर्भाग्यवश ये वर्षा का बहुमूल्य पानी पूरी तरह से बेकार चला जाता है और असहाय ग्रामीणों को गन्दे पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
प्रतिवर्ष, औसत वर्षा और वर्षा ऋतु में बारिश होने वाले कुल दिनों को ध्यान में रखते हुए, स्थानीय वर्षाजल संग्रहण तकनीक लोगों को स्वच्छ पीने का पानी मुहैया कराने में काफी मददगार साबित हो सकता है।
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बाढ़ के समय पेयजल


बाढ़ के समय पेयजल की उपलब्धता यानी साफ पीने का पानी का उपलब्धता काफी कम हो जाती है। ऐसे में साफ पानी पाने के लिए वर्षाजल संग्रहण ही एक मात्र उपाय है। बाढ़ के समय पेयजल को पाना एक कौशल का काम हो जाता है – आइए समझें उनसे जुड़े सवाल और उनके उत्तर –
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बाढ़ के समय क्या न करें

- वर्षाजल संग्रहण प्रणाली कभी भी वृक्ष के नीचे स्थापित नहीं करें। यह हमेशा किसी खुले स्थान में होना चाहिए।
- शुरू के 5 मिनट के वर्षाजल को इकटठा नहीं करें।
- वर्षाजल युक्त गैलन को कभी भी खुला न छोड़े।
- गैलन में जमा वर्षाजल को कभी भी हाथ से न निकालें।
- अस्वच्छ व संक्रमित स्थान पर वर्षाजल संग्रहण न करें।
- पेयजल के अलावा वर्षाजल को अन्य किसी उददेश्य के लिए उपयोग न करें। क्योंकि इससे पीने के पानी की मांग बढ़ जायेगी।

सहयोग

अर्घ्यम, 840, 2 मंजिल, 5 मेन, इन्दिरा नगर, 1 स्टेज, बंगलौर - 560 038, कर्नाटक

कार्यान्यवन में सहयोग

चन्द्रशेखर, ग्राम्यशील, जेल के पीछे नया नगर, सुपौल – 852531, बिहार
फोन: 06473225739
रमेश कुमार

घोघरडीहा प्रखण्ड स्वराज्य विकास संघ, ग्राम पोस्ट जगतपुर, घोघरडीहा, मधुबनी – 847402, बिहार
फोन: 91 – 9431025373

प्रेम कुमार

समता, ग्राम पोस्ट सनहौली, खगड़िया – 851205, बिहार
फोन: 91 -9430042978

राजेन्द्र झा

कोसी सेवा सदन, आचार्य वन, महीषी, सहरसा – 85221- बिहार, फोन: 06478 -277067

मार्ग दर्शक

दिनेश कुमार मिश्रा, पटना, बिहार, फोन: 91 – 9431303360

अभियान की संकल्पना व प्रबंधन में सहयोग

एकलव्य प्रसाद, विकास कार्यकर्ता, प्राकृतिक एवं सामाजिक संसाधन प्रबंधन

ई-मेल: graminunatti@gmail.com

पूरा दस्तावेज भी संलग्न है -

மேக் பயனே அப்சியன்
Megh Pyne Abhiyan

AttachmentSize
WORKING MANUAL FINAL COPY.pdf1.26 MB

जमीनी हकीकत

इस अभियान की जमीनी हकीकत सच्चाई से कोशों दूर है. सच यह है की इस अभियान की सफलता ग्राम्यशील संस्था (स्थानीय सहयोगी ) के ऑफिस और रिपोर्ट में ही है| रिपोर्ट के पन्नों से अलग सच यह है की संस्था सचिव चंद्रशेखर झा ने वर्षा जल संग्रह के नाम पर लाखों रूपये की चंडी कटी है एवं अपने परिचितों के यहाँ दाता संस्थाओं (अरघ्यम ) को दिखने के लिए कुछ फोटो ले लिए| अगर यह अभियान इतना ही सफल है तो आज की तारीख में सुपौल जिले का एक ब्लाक सुपौल कम से कम् सरे घरों में मटका फ़िल्टर का उपयोग लोग कर रहे होते| पांच साल तक वर्षा जल संग्रह के नाम पर लुटा अब कुछ और नाम देकर लूट रहे होंगे. मूलतः ये लोग पानी के तथाकथित दलाल हैं , इनकी दलाली की अपनी दुकान है , बंगलोरे ,दिल्ली से लेकर सुपौल तक इनका नेटवर्क है| पता नहीं अरघ्यम जैसी संस्था कैसे इन दलालों पर यकीं करने लगी .

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