SIMILAR TOPIC WISE

Latest

यादगार बने द्वीप

बाढ़ में उजडे़ अपने घर को देखते हुए मुस्तफा अली खानबाढ़ में उजडे़ अपने घर को देखते हुए मुस्तफा अली खानसुन्दरवन डेल्टा जो अपने शीतल जल और मनोरम वातावरण के लिए याद किया जाता था, आज वहां की धरती और पानी दोनों ही इतने अधिक गर्म हो गए हैं जितना पहले कभी नहीं हुए। द्वीपों से घिरे एक ऐसे ही अशान्त समुद्र का दर्द बयां कर रहे है मिहिर श्रीवास्तव/ सुन्दरवन डेल्टा के दक्षिण-पश्चिम में एक द्वीप है मौसिमी। इसी द्वीप की गोद में बसा है बालिहार गांव। इस गांव में रहने वाले किसान, मुस्तफा अली खान की 12 बीघा जमीन पिछले साल समुद्र में चली गई। पिछले दस सालों में ऐसा तीसरी बार हुआ है कि मुस्तफा का घर पानी की भेंट चढ़ गया। अब वह मछलियां पकड़कर अपने परिवार के आठ सदस्यों का पेट भर रहा है।

सुन्दरवन के दक्षिणी किनारों पर बसे 13 द्वीप बाढ़ के कारण समुद्री स्तर बढ़ जाने से तेजी से समुद्र में डूब रहे हैं। दो द्वीप- 1000 परिवारों की आबादी वाला लोहाचारा और बंजर सुपारिभंगा, पहले ही समुद्र में डूब रहे हैं। ऐसा चौथी बार हुआ है कि बालिहार में समुद्री जल को रोकने वाली दीवार तक ढह गई है। पांचवी बार अब बन रही है। जिन 20 परिवारों के घर पिछले साल डूब गए वे जी जान से दीवार बनाने में जुटे हैं। समुद्र के किनारों पर निर्माण कार्य के लिए सरकार भी वित्तीय सहायता दे रही है।

'' सिर्फ एक दिन लगा, पूरा समुन्दर हमारे घरों में उमड़ आया, पुराने सभी तटबन्धों को तोडकर, सभी कुछ अपने साथ बहा ले गया'' इस्लाम बेग को आज भी याद है। उसकी 8 बीघा जमीन थी जिस पर वह धान की खेती करता था इससे न केवल वह अपने परिवार का पेट भरता था बल्कि दूसरी जरूरी चीजों को भी धान के बदले में बाजार से ले आता था। उसके 14 साल के बेटे ने अपने छोटे से जीवन से बहुत से विनाशकारी बदलाव देखे हैं। उसने किनारे से करीब आधा किमी. दूर खड़ी नाव की तरफ इशारा करते हुए बताया, ''हमारे धान के खेत यहीं थे, सब खत्म हो गया।''

'' सिर्फ एक दिन लगा, पूरा समुन्दर हमारे घरों में उमड़ आया, पुराने सभी तटबन्धों को तोडकर, सभी कुछ अपने साथ बहा ले गया''

 

पिछले साल जब समुद्र ने सब कुछ निगल लिया तो लोग तीन महीनों तक एक स्थानीय हाई-स्कूल में रहे। उन्होंने सरकारी जमीनों पर, द्वीप के अन्दर ही फिर से नए घर बनाए। बाढ़ में खेत खोने वाले हाली हसन मुल्ला ने कहा, ''हमें सरकारी जमीन पर घर बनाने की इजाजत तो दी गई लेकिन मालिकाना हक नहीं दिए गए।

अपने घरों और खेतों को बार-बार लहरों की भेंट चढ़ता देखकर भी ये लोग निराश नहीं हैं। 20 वर्षीय शबीर अली खान का कहना है, '' हम ऐसा फिर से नहीं होने देंगे, अब हम कोई खतरा मोल नहीं लेंगे। इस बार हम विषेशज्ञों की मदद से मजबूत तटबंध बनाएंगे।'' अगर तटबन्ध फिर से टूट गए तब क्या होगा बेग ने कहा, '' हम फिर से द्वीप पर जाएंगे, यही सच है, हमें यहीं रहना है।''

पास ही के द्वीप-सागर में भी यही हाल है। दक्षिणी तट तेजी से नष्ट हो रहा है। गुरमारा की भी यही कहानी है। पिछले तीन दशकों में इसकी करीब आधी जमीन खत्म हो गई है यहां से कई लोग कलकत्ता चले गए हैं और रिक्शा चलाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

जादवपुर विश्वविद्यालय में ''स्कूल आफ ऑशियनोग्राफी स्टडीज'' की डायरेक्टर सुगाता हाजरा कहती हैं, '' यह एक नए प्रकार का शरणार्थी वर्ग है। मैं इन्हे आपदा ग्रसित पर्यावरणीय शरणार्थी कहती हूं। ये भूकम्प और सुनामी आदि से विस्थापित हुए लोगों से अलग हैं। क्योंकि ये लोग वापिस नहीं जा सकते, उनकी जमीनें तो हमेशा के लिए खत्म हो गई हैं। सरकार के पास शरणार्थियों के इस वर्ग के लिए कोई योजना नहीं है।''

फिलहाल, इन हजारों परिवारों को अब खुद को संभालना है। '' ऐसी चीजें जब कभी होती है तब प्राकृतिक संसाधनों पर दवाब भी बढ़ने लगता है जिससे खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है, डब्लूडबलूएफ इण्डिया के सुन्दरवन के कॉर्डिनेटर अनुराग टंडन का मानना है। '' विस्थापित लोग बड़ी मात्रा में ईंधन के लिए मैनग्रोव के पेड़ों पर निर्भर हैं। मैनग्रोव के पेड़ समुद्रतटीय इलाके में प्राकृतिक तटबंध का काम करते हैं। लेकिन इस तरह अन्धाधुंध पेड़ काटे जाने से वहां बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो रही है जिससे समस्या और ज्यादा गहरा रही है।''

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों और उससे समुद्री स्तर में आए उभार के कारण, सुंदरवन डेल्टा पर होने वाले परिवर्तन और ज्यादा बढ़ गए हैं। सुन्दरवन में प्राकृतिक चक्र के अनुसार समय-समय पर कुछ स्थान डूबते हैं और दूसरी ओर कुछ हिस्सा धरातल बन जाता है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि समुद्र स्तर में आए इस उभार ने पुरानी प्रक्रिया को भी बदल दिया है।

प्रणवेश सान्याल, जो जादवपुर विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं और डेल्टा के विशेषज्ञ हैं , कहते हैं, '80 के दशक में जब मैं सुन्दरवन टाइगर रिजर्व का फील्ड डायरेक्टर था, तब मुझे समुद्री स्तर के बढ़ने की बात पर यकीन नहीं था। लेकिन अब मुझे पता है कि ऐसा हो रहा है।''

विश्व स्तर पर समुद्री स्तर में प्रतिवर्ष औसतन 1.8 मिमी. तक वृद्धि होती है लेकिन सागर में यह वृद्धि 3.14 मिमी. तक होती है। इसके अतिरिक्त बंगाल बेसिन का निओ-टेक्टोनिक मूवमेंट पूर्व की ओर झुक रहा है, जिसके परिणामस्वरूप जब हम गांगेय डेल्टा के पूर्व में, सागर से बांग्लादेश में खुलाना द्वीप की ओर जाते हैं, वहां समुद्री स्तर में प्रतिवर्ष 10 मिमी. की वृद्धि होती है। सान्याल बताते हैं कि जिस गंगा-ब्रहमपुत्र डेल्टा का सुन्दरवन एक हिस्सा है वहां जमीनी क्षेत्र 1995 तक तेजी से बढ़ रहा था। लेकिन इसके बाद इसने दिशा बदल ली। '' 1995 से पहले, बाढ़ की वजह से जमीन के नुकसान की बजाय गाद जमा होने की दर अधिक थी, लेकिन उसके बाद से इस अनुपात में विलोम चक्रीय परिवर्तन हुआ है। परिणामस्वरूप, सुन्दरवन की प्रतिवर्ष 100 वर्ग किमी. जमीन खत्म हो रही है।

भूजल के अम्लीकरण ने और भी समस्याएं बढ़ा दी हैं। यह खारा पानी अब डायमंड हार्बर तक पहुंच गया है, दो दशक पहले यह उपरी धारा से 15 किमी. आगे था। इससे इस क्षेत्र में पेय जल और सिंचाई के लिए गंभीर समस्याएं पैदा हो गई है।

यहां की जलवायु-भिन्नता भी गौर करने लायक है, वैज्ञानिकों के अनुसार यह ग्लोबल वार्मिंग की वजह से है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि समुद्र पहले से अधिक गर्म हो गए हैं और वर्षा भी अनियमित रूप से होती है। पिछले दशक में, बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की संख्या में कमी आई है लेकिन त्रीवता में वृद्धि हो गई है।

सागर में सामाजिक कार्यकर्ता सुभालंकार गुलधर के अनुसार, '' उत्पादन उपभोग का एक हिस्सा भी नहीं है। हमारे पास धान की 28 किस्में थीं, उसमें से 11 में लवणता प्रतिरोधी क्षमता थी, अब वे सभी खत्म हो गई हैं। कारण समुद्री जल इतना दूर तक आने लगा है कि जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है।''

स्थानीय किसानों का बुरा हाल है सागर के एक किसान बीजू ने बताया, '' कुछ भी निश्चित नहीं है। थोड़ा समय मैं मछली पकड़ता हूं तो थोड़ा समय मजदूरी करता हूं तो कभी मुझे भीख भी मांगनी पड़ती है।

मछली और अन्य प्रमुख खाद्यान्नों की आपूर्ति कम हो गई है। गुलधर के अनुसार कुछ भी ठीक नहीं हो रहा हैं। मछलियां भी जो समुद्र के किनारे पर ही मिल जाया करती थी अब गहरे पानी में चली गई हैं। परिणाम, गांव वालों को कुछ भी मिलता है, उसे ही पकड़ लेते हैं। '' कुछ ने तो मच्छर पकड़ने वाले लकड़ी के फ्रेम में जुड़े जाल ही बना रखे हैं जिससे वे छोटी-छोटी मछलियां पकड़ लेते हैं, इससे क्षेत्र में मछलियों की संख्या भी कम हो गई है।''

सुन्दरवन इस बात का प्रमाण है कि ग्लोबल वार्मिंग तेजी से भारतीय समुद्री तटों तक पहुंच गई है और हमारी सुरक्षा जीर्ण हो रही है।

परिवर्तन का बैरोमीटर

चक्रवातचक्रवातचक्रवात समुद्र पहले से अधिक गर्म है, वर्षा अधिक अनियमित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले दशक में बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की आवृत्ति में कमीं आई है, लेकिन उनकी त्रीवता में वृद्धि हुई है।

मानसूनमानसूनमानसून मानसून का मौसम जुलाई-अगस्त से खिसककर सितम्बर-अक्टूबर तक चला गया है। परिणाम-स्वरूप धान की फसल की रोपाई आदि की पूरी पद्धति ही उलट-पलट हो गई है।



समुद्र तलसमुद्र तलसमुद्र तल विश्व स्तर पर समुद्र तल में औसतन 1.8 मिमी. प्रतिवर्ष वृद्धि हो रही है लेकिन बंगाल बेसिन में 'निओ-टेक्टानिक मूवमेंट', जो अब पूर्व की ओर झुक रहा है, के कारण सुन्दरवन में अधिक वृद्धि हो रही है। सागर द्वीप पर यह वृद्धि 3-14 मिमी. है।



धान की फसलधान की फसलधान की फसल सुन्दरवन में धान की 28 किस्में खत्म हो गई हैं। समुद्र का पानी दूर तक जमीनों पर आ जाता है। समुद्री तल में वृद्धि के कारण जमीनों की उर्वरता खत्म हो गई है।



बाघबाघबाघ कुछ स्थानों में खारा पानी डेल्टा के अन्दर 15 किमी. तक चला गया है, इससे बाघ घनी आबादी वाले द्वीप के उत्तरी भागों में पलायन कर गए हैं परिणामत: मानव-पशु संघर्ष के खतरे बढ़ रहे हैं।



मछलियांमछलियांमछलियां मछलियां, जो कभी समुद्र के किनारे पर आसानी से मिल जाती थी, अब गहरे पानी में चली गई हैं। हताश ग्रामीण, जो कुछ भी मिलता है उसे ही पकड़ लेते हैं, यहां तक कि छोटी मछलियां भी, परिणामस्वरूप समुद्री खाद्य चक्र पर दवाब बढ़ रहा है।



पर्यावरणीय संकट से उत्पन्न

पर्यावरणीय संकट से उत्पन्न विस्थापन वाकई एक गम्भीर समस्या है किंतु इसके लिए उत्तरदायी वे ही हैं जिन्होंने पर्यावरण की ऐसी-तैसी कर रखी है । केवल मैंग्रोव की कटाई ही नहीं ...कई तरीकों से समुद्री पर्यावरण को क्षति पहुँचाई जा रही है। शासन के साथ स्वयं स्थानीय निवासियों को भी जागरूक होना होगा ।

Post new comment

The content of this field is kept private and will not be shown publicly.
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.
  • Allowed HTML tags: <a> <em> <strong> <cite> <code> <ul> <ol> <li> <dl> <dt> <dd>
  • Lines and paragraphs break automatically.

More information about formatting options

CAPTCHA
यह सवाल इस परीक्षण के लिए है कि क्या आप एक इंसान हैं या मशीनी स्वचालित स्पैम प्रस्तुतियाँ डालने वाली चीज
इस सरल गणितीय समस्या का समाधान करें. जैसे- उदाहरण 1+ 3= 4 और अपना पोस्ट करें
12 + 0 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.