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विकास की आँधी, पेड़ों की आहुति

Author: 
अरविंद बिजलवान
Source: 
डाउन टू अर्थ, मई, 2018
उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह प्रश्न हमेशा उठता है कि विकास एवं पर्यावरण संरक्षण में सामंजस्य कैसे बनाया जा सकता है। यदि ध्यान दिया जाए तो विकास एवं पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ किया जा सकता है किन्तु उत्तराखण्ड जैसे हिमालयन राज्य में चल रहे निर्माण कार्यों जैसे बड़े बाँधों का निर्माण, सड़क चौड़ीकरण, ऑल वेदर रोड, भव्य भवन निर्माण और अब रेल लाइन निर्माण आदि कार्यों में विकास के नाम पर विनाश के दरवाजे खोले जा रहे हैं। ये विशालकाय निर्माण धरा को प्राकृतिक प्रकोपों के प्रति और संवेदनशील बना रहे हैं। भूमि के साथ उथल-पुथल भरा विकास आने वाले समय में भारी प्राकृतिक आपदा का कारण बन सकता है। हाल के कुछ महीनों में इसकी आहट भी महसूस की गई है। पिछले साल 28 दिसम्बर को गढ़वाल क्षेत्र में 4.8 तीव्रता का भूकम्प महसूस किया गया जिसका केन्द्र रूद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ से करीब 10 किलोमीटर दूर हिमालय की तरफ बताया गया। दिसम्बर माह में ही पर्वतीय क्षेत्र उत्तराखण्ड में यह दूसरा भूकम्प था। मैं पर्वतीय क्षेत्र जनपद टिहरी गढ़वाल, उत्तराखण्ड का रहने वाला हूँ और बचपन से भूकम्प का अनुभव करता रहा हूँ। पर्वतीय क्षेत्र के लोगों में भूकम्प की दहशत फैली रहती है। आँकड़ों पर नजर डालने पर पता चलता है कि 2017 में ही उत्तराखण्ड में 14 भूकम्प के झटके 3 से अधिक के रिक्टर स्केल पर आ चुके हैं। 3 फरवरी, 2017 को 3.5, 6 फरवरी को 5.8, पुनः 6 फरवरी को 3.6, 16 अप्रैल को 3.5, 12 जून को 3.0, 10 जुलाई को 3.8, 22 अगस्त को 4.2, 6 दिसम्बर को 5.5 एवं 28 दिसम्बर को 4.8 रिक्टर स्केल का भूकम्प उत्तराखण्ड में आया। हाल ही में मैंने ऋषिकेश से चम्बा (टिहरी गढ़वाल) नेशनल हाइवे (एनएच- 94) पर हो रहे सड़क चौड़ीकरण को देखा। ऑल वेदर रोड के अन्तर्गत रोड अत्यधिक चौड़ी (लगभग 12 मीटर) की जा रही है जिससे हजारों की संख्या में पर्यावरण रक्षी वृक्षों की कटाई की जा रही है। रोड के चौड़ीकरण हेतु वनों की इस प्रकार कटाई देख कदापि प्रतीत नहीं होता है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल रहे हैं। मैं कुछ दिन पूर्व ऋषिकेश से चम्बा जा रहा था जो जनपद टिहरी के ऋषिकेश-धरासू (एनएच-94) मार्ग पर है। मैंने देखा कि ऑल वेदर रोड के अन्तर्गत रोड का चौड़ीकरण किया जा रहा है। नागनी में वर्षों पूर्व सड़क के किनारे लगाये गये अति मनमोहक सिल्वर ओक के पेड़ों को एक साथ काट दिया गया है। यह सब चारधाम हेतु ऑल वेदर रोड चौड़ीकरण के अन्तर्गत हो रहा है। इस परियोजना के तहत 889 किमी रोड का चौड़ीकरण होना है जो उत्तराखण्ड के 8 जिलों में होगी तथा जिसकी लागत 12 हजार करोड़ रुपए है। परियोजना के अन्तर्गत रोड चौड़ीकरण में मुख्य 9 पड़ाव हैं जो विभिन्न पर्वतीय राष्ट्रीय मार्गों में आते हैं, जैसे ऋषिकेश-धरासू (एनएच-94), ऋषिकेश-रूद्रप्रयाग (एनएच-58), रूद्रप्रयाग-माना-बद्रीनाथ (एनएच-58), धरासू-गंगोत्री (एनएच-108), धरासू-यमनोत्री (एनएच-94), रूद्रप्रयाग-गौरीकुंड (एनएच-109) एवं टनकपुर-पिथौरागढ़ (एनएच-125)। ये ऋषिकेश से लेकर धरासू, रूद्रप्रयाग, गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गौरीकुंड एवं टनकपुर से पिथौरागढ़ के पड़ावों में आते हैं। इस रोड चौड़ीकरण परियोजना के अन्तर्गत 2 टनल, 15 फ्लाईओवर, 13 भूक्षरण वाले स्थानों पर एलाइनमेंट, 25 बड़े पुल, यात्रियों हेतु 18 सुविधा स्थान एवं 13 बाईपास शामिल हैं। इस परियोजना के अन्तर्गत 30,000 से अधिक वृक्षों का कटाव किया जा रहा है। मात्र ऋषिकेश- धरासू मार्ग पर ही हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं जिसका काफी भाग नरेन्द्रनगर वन प्रभाग के अन्तर्गत आता है।

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