आबादी तक पहुँची वनाग्नि की लपटें

Submitted by editorial on Sat, 06/09/2018 - 18:27
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Source
राष्ट्रीय सहारा, 23 मई, 2018


जंगलों की उपेक्षा के कारण लगती आगजंगलों की उपेक्षा के कारण लगती आग पौड़ी शहर के चारों तरफ के जंगल वनाग्नि की भेंट चढ़ चुके हैं, अब जंगलों से होकर आग बस्ती की ओर रुख कर गई है। मंगलवार को पौड़ी के कण्डोलिया क्षेत्र में आग डीएफओ कार्यालय के निकट स्थित घरों तक जा पहुँची। एहतियात के तौर पर केन्द्रीय विद्यालय के बच्चों की छुट्टी कर दी गई। वन विभाग व फायर सर्विस के घंटों प्रयास के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

कण्डोलिया ल्वाली वाली मोटर मार्ग पर मंगलवार सुबह से लगी आग हवा के साथ तेज होती चली गई। देखते ही देखते आग घरों तक जा पहुँची। वन विभाग और फायर सर्विस ने घंटों मशक्कत के बाद घरों तक पहुँची आग पर काबू पाया। बढ़ती आग के कारण पास में केन्द्रीय विद्यालय को खतरा देख सभी स्कूली छात्रों की छुट्टी करवाकर उन्हें घर भेज दिया गया। स्कूली छात्रों ने बताया की सुबह से ही आग का धुँआ उनकी कक्षा के अन्दर आ रहा था, जिससे कि उन्हें पढ़ने में भी समस्या हो रही थी। साथ ही बढ़ती आग से विद्यालय को भी खतरा पैदा हो गया था। इसे देखते हुये स्कूली बच्चों को सुरक्षा के लिहाज से घर भेज दिया गया।

स्थानीय लोगों में आग को लेकर खौफ का माहौल बना हुआ है। चार साल पहले भी इसी तरह से कण्डोलिया में आग फैलते हुए घरों तक जा पहुँची थी। शाम का समय होने के कारण आग पर काबू नहीं पाया गया, जिस कारण लाखों का सामान जलकर राख हो गया था। रोष व्यक्त करते हुए स्थानीय लोगों का कहना है कि कण्डोलिया के पास ही प्रभागीय वनाधिकारी सिविल एवं सोयम का कार्यालय है। उसके बाद भी विभाग द्वारा सतर्कता नहीं बरती जा रही।

मौके पर पहुँचे उप जिलाधिकारी किशन सिंह नेगी ने बताया कि वनाग्नि की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं, जिस पर काबू पाने के लिये फायर सर्विस, वन विभाग और स्थानीय लोगों की मदद ली जा रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पौड़ी जनपद में वनाग्नि से इस वर्ष अब तक 760 वृक्ष जल चुके हैं। सिविल सोयम वन क्षेत्र में 551 हेक्टेयर और आरक्षित में 343 हेक्टेयर वनभूमि अब तक आग की भेंट चढ़ चुकी है।

श्रीनगर- पिछले छह दिनों से श्रीनगर के जंगल जल रहे हैं श्रीनगर से पौड़ी जाने वाले नेशनल हाइवे के दोनों तरफ भी भीषण आग लगी हुई है। श्रीनगर चारों तरफ से आग के धुएँ से घिर गया है जिससे लोगों को साँस लेने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आसमान में धुआँ कोहरे की तरह छा गया है। इस धुएँ से चारधाम यात्रा के लिये आये यात्री भी परेशान हो रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि वे जैसे ही ऋषिकेश से ऊपर आये उन्हें हर जगह हरे-भरे जंगल जलते हुए दिखे। आग पर नियंत्रण पाने के लिये जंगलों में कहीं भी वनकर्मी या प्रशासन की कोई टीम दिखाई नहीं दे रही है।

श्रीनगर वन रेंज के रेंजर नरेन्द्र सिंह का कहना है कि उनके क्षेत्र के 75 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं और आग बुझाने के लिये कोई खास संसाधन भी उनके पास नहीं है और पूरी रेंज के लिये केवल नौ कर्मचारी ही उनके पास हैं, जिससे आग पर काबू पाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है हालांकि रेंजर नरेन्द्र सिंह का यह भी कहना है कि टीम आग बुझाने के निरन्तर प्रयास कर रही है, ऐसे में हालात को देखकर संसाधनों के अभाव में वन विभाग पर भी दोष नहीं डाला जा सकता है लेकिन यदि आग बुझाने के लिये कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं किया जाता है तो पर्यावरण की क्षति व आगजनी की घटनाओं से भी मुख नहीं मोड़ा जा सकता है।

सिमली- सिमली क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक जंगलों में लगी आग को वन विभाग बुझाने में असफल रहा है।

पिछले तीन दिनों से नंदप्रयाग रेंज के रैखाल चूलाकोट, धारडुंग्री, कोलडुंग्री, बिडोली केलापानी, सुमल्टा, मठोली, बणगाँव, केदारुखाल सिनखाल, गैरोली, सेनू, कोली, पुडियाणी के जंगलों में भारी आग लगी हुई है। आग से वन सम्पदा को भारी नुकसान तो पहुँच रहा है। साथ ही धुएँ की धुंध में समूचा क्षेत्र समा गया है। इससे पर्यावरण दूषित हो गया है। धुएँ से लोगों की आँखों में जलन हो रही है। चारों ओर जंगलों में लगी आग से तापमान बढ़ जाने से प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगे हैं और लोगों को पीने के पानी की समस्या बढ़ने लगी है। क्षेत्र के राजेन्द्र सिंह, बलवंत सिंह, गोपाल सिंह आदि ने जंगलों में लगी आग बुझाने की माँग की है।
 

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