गंगोत्री धाम में स्नान घाटों की नहीं सुधरी हालत

Author: 
शिव सिंह थलवाल
Source: 
राष्ट्रीय सहारा, 18 अप्रैल, 2018

गंगोत्री धाम के स्नान घाट वर्ष 2012 और 2013 में आई आपदा में क्षतिग्रस्त हो गये थे। इससे पहले भी यह घाट काफी असुरक्षित रहा है। कई तीर्थयात्री यहाँ पर गंगा स्नान करते समय बहकर जान भी गँवा चुके हैं। आपदा के कारण इन घाटों की स्थिति और बदतर हो गई। गंगोत्री स्नान घाट का निर्माण नमामि गंगे परियोजना मद से होना था, लेकिन सिंचाई विभाग की ओर से घाटों के निर्माण के लिये तैयार की गई डीपीआर को स्वीकृति नहीं मिली है।

जिले में स्थित प्रसिद्ध गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट आम लोगों के दर्शनार्थ 18 अप्रैल अक्षय तृतीय के पावन पर्व पर आम लोगों के लिये खोल दिये जाएँगे। दोनों धामों के कपाट खुलने से चारधाम यात्रा का आगाज हो जायेगा, लेकिन तीर्थयात्रियों की परेशानी इस बार भी कम होती नहीं दिखाई दे रही है।

ऑलवेदर रोड का कार्य चलने से यात्रा मार्ग के कई स्थानों पर तीर्थयात्रियों को धूलभरी सड़कों से सफर करने के साथ ही बारिश होने की स्थिति में भूस्खलन का भी सामना करना पड़ सकता है। जाम जैसी स्थिति से जूझने के लिये भी तीर्थयात्रियों को तैयार रहना होगा। दोनों धामों में इस बार भी संचार सुविधा के साथ ही स्नान घाटों की जर्जर स्थिति होने से यात्रियों को अव्यवस्था के बीच गंगा स्नान करने के लिये मजबूर होना पड़ेगा।

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के प्रति देश-विदेश के लोगों की अटूट आस्था है। यही कारण है कि हर वर्ष इन धामों में लाखों की संख्या में देश-विदेश के श्रद्धालु दर्शन के लिये पहुँचते हैं। गंगोत्री धाम में इस बार जहाँ वाहन पार्किंग की समस्या का काफी हद तक निराकरण हो गया है, वहीं स्नान घाट अब भी अव्यवस्थित है और घाट दुर्घटना का न्यौता दे रहा है।

स्थिति यह है कि गंगा नदी का अधिकांश भाग मलबे से पटा हुआ और नदी का पानी घाटों से दूर बह रहा है, जिससे गंगा स्नान करना यात्रियों को खतरे से खाली नहीं हैं। गंगोत्री धाम के स्नान घाट वर्ष 2012 और 2013 में आई आपदा में क्षतिग्रस्त हो गये थे। इससे पहले भी यह घाट काफी असुरक्षित रहा है। कई तीर्थयात्री यहाँ पर गंगा स्नान करते समय बहकर जान भी गँवा चुके हैं। आपदा के कारण इन घाटों की स्थिति और बदतर हो गई।

गंगोत्री स्नान घाट का निर्माण नमामि गंगे परियोजना मद से होना था, लेकिन सिंचाई विभाग की ओर से घाटों के निर्माण के लिये तैयार की गई डीपीआर को स्वीकृति नहीं मिली है, जिससे इस बार भी यात्रियों को असुरक्षित घाटों पर जान जोखिम में डालकर स्नान करने के लिये मजबूर होना पड़ेगा। इसके साथ ही सिंचाई विभाग की ओर से गंगोत्री में स्नानघाट और धाम की सुरक्षा के लिये निर्माणाधीन दीवार एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी नहीं बन सकी है। इससे बारिश के दौरान नदी का जल-स्तर बढ़ने पर स्नानघाटों और धाम के कुछ भवनों को खतरा बना हुआ है।

बावजूद इसके शासन-प्रशासन की ओर से सुरक्षित गंगा स्नान घाट निर्माण के लिये कोई काम नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में नमामि गंगे परियोजना मद से चिन्यलीसौड़ से लेकर उत्तरकाशी तक के स्नान घाटों का निर्माण किया जा रहा है।

हालाँकि प्रशासन का कहना है कि घाटों के निर्माण के लिये स्वच्छ आईकॉन से निर्माण कराने की योजना को मूर्त रूप दिया जा रहा है। इसके लिये 1.5 करोड़ रुपये का आगणन भी तैयार कर लिया गया है, लेकिन यह कार्य कब शुरू होगा और कब पूर्ण होगा इसका कोई अता-पता नहीं है। गंगोत्री धाम के इस बार ग्रीड लाइन से जुड़ने से धाम में विद्युत समस्या का भी इस वर्ष काफी हद तक समाधान हो गया है।

पहले उरेड़ा की करीब 100 किलोवाट की परियोजना से धाम में विद्युत आपूर्ति होती रही है, जिससे ओवर लोडिंग के कारण कई बार धाम में अंधेरा रहने की बात सामने आती रही है। यही हाल यमुनोत्री धाम का भी है जहाँ यात्रा मार्गों पर सुविधाओं का टोटा है। इस धाम के यात्रा मार्ग पर ऑल वेदर रोड का कार्य होने से इस बार भूस्खलन की अधिक सम्भावना है, जिससे यात्रियों को स्थिति से निपटने के लिये तैयार रहना होगा। डीएम डॉ. आशीष चौहान का कहना है कि गंगोत्री में घाटों का निर्माण स्वच्छ आइकॉन के तहत कराया जायेगा। सिंचाई विभाग नमामि गंगे परियोजना में दोबारा डीपीआर बना रहा है।

1. यात्रियों को इस बार भी करना पडे़गा अव्यवस्था के बीच गंगा स्नान
2. संचार सुविधा का भी है अभाव
3. ऑल वेदर रोड के कार्य से यात्रा मार्ग के कुछ स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ा।
4. आज अक्षय तृतीया पर्व पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ शुरू हो जाएगी चारधाम यात्रा

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